# रांची के किसान सूरज की अनोखी पहल, सिर्फ 1 एकड़ खेत से ढाई महीने में 1 लाख रुपये की कमाई

> झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले सूरज अपनी 1 एकड़ जमीन पर 15 किस्म की सब्जियां उगाकर लाखों की कमाई कर रहे हैं। वे जैविक खाद और उन्नत खेती के तरीकों का इस्तेमाल करके कम समय में शानदार मुनाफा कमा रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-07-11 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/ranchi-ke-kisana-suraj-ki-anokhi-pahala-sirpha-1-ekara-kheta-se-dhai-mahine-men-1-lakha-rupaye-ki-kamai-6767 · **Language:** Hindi
**Tags:** रांची खेती, जैविक खेती, सब्जी उत्पादन, सूरज किसान, सफल खेती, झारखंड न्यूज

झारखंड के रांची शहर के निवासी सूरज खेती के एक नए और सफल प्रयोग की मिसाल बने हैं। उन्होंने अपनी 1 एकड़ की छोटी सी जमीन को एक समृद्ध उपवन में बदल दिया है, जहां वे एक साथ 15 अलग-अलग तरह की सब्जियां उगाते हैं। सूरज का मानना है कि बाजार में अपनी साख बनाने के लिए विविधता का होना बहुत जरूरी है, क्योंकि ग्राहक हमेशा ऐसी जगह को चुनते हैं जहां उन्हें एक ही स्थान पर हर तरह की सब्जी मिल जाए।

## खेती की तैयारी का वैज्ञानिक तरीका
सूरज के अनुसार, खेती में सफलता की शुरुआत फसल से काफी पहले हो जाती है। वे मानसून की फसलों की योजना भीषण गर्मी के दौरान ही बना लेते हैं। इस दौरान गोबर की खाद को पूरी तरह सुखाने की प्रक्रिया पर वे सबसे अधिक जोर देते हैं। वे बताते हैं कि सूखी हुई गोबर की खाद में पोषक तत्वों की मात्रा काफी अधिक होती है और यह पौधों के लिए रामबाण का काम करती है। वहीं, अगर गीली गोबर की खाद का प्रयोग किया जाए, तो फसल में कीड़े लगने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, जिससे पूरी मेहनत खराब हो सकती है।

## मिट्टी की उर्वरता पर विशेष ध्यान
फसल की बंपर पैदावार पाने के लिए मिट्टी का उपजाऊ होना सबसे महत्वपूर्ण है। मानसून शुरू होने से ठीक एक महीने पहले सूरज खेत की मिट्टी को तैयार करते हैं। इस प्रक्रिया में वे गोमूत्र, जामुन के सिरके और पूरी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद के मिश्रण का उपयोग करते हैं। खेत की दो-तीन बार गहरी जुताई करने के बाद उसे धूप में खुला छोड़ दिया जाता है, जिससे हानिकारक जीवाणु नष्ट हो जाते हैं और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार आता है।

## 15 तरह की सब्जियों की खेती
सूरज ने अपनी 1 एकड़ जमीन को 15 हिस्सों में विभाजित किया है, ताकि हर भाग में एक विशिष्ट सब्जी उगाई जा सके। इस विविधता में टमाटर, धनिया पत्ता, पुदीना, तरोई (नेनुआ), खीरा, झिंगी, बरबटी, करेला, भिंडी और मिर्च जैसी महत्वपूर्ण सब्जियां शामिल हैं। वे कहते हैं कि केवल एक या दो प्रकार की सब्जियों पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए विविधता ही बाजार में उनकी सफलता की कुंजी है।

## कीट नियंत्रण और आर्थिक लाभ
फसल को बीमारियों से बचाने के लिए सूरज नीम का उपयोग करते हैं। वे हर 15 दिन में पौधों की जड़ों में नीम का पानी डालते हैं और जहां कीड़ों का प्रकोप ज्यादा दिखता है, वहां नीम के तेल का स्प्रे करते हैं। उनके इस कुशल प्रबंधन का ही नतीजा है कि महज ढाई महीने के मानसून काल में उन्हें 1 लाख रुपये से अधिक की आमदनी हो जाती है, जो साबित करता है कि सही नियोजन के साथ खेती एक बहुत ही मुनाफे वाला काम है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** यह मॉडल साबित करता है कि वैज्ञानिक तरीके और जैविक खाद के प्रयोग से छोटी जोत वाली जमीन से भी बेहतर मुनाफा कमाया जा सकता है।

**रांची में:** स्थानीय किसान अपनी पारंपरिक खेती में विविधता लाकर और कीट नियंत्रण के लिए नीम जैसे सस्ते साधनों का उपयोग करके अपनी आय बढ़ा सकते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. सूरज 1 एकड़ खेत से कितनी कमाई कर लेते हैं?
सूरज मानसून के ढाई महीने के सीजन में ही 1 लाख रुपये से अधिक की कमाई कर लेते हैं।

### 2. वे खेत में कौन-कौन सी सब्जियां उगाते हैं?
वे टमाटर, धनिया, पुदीना, तरोई, खीरा, झिंगी, बरबटी, करेला, भिंडी और मिर्च सहित कुल 15 तरह की सब्जियां उगाते हैं।

### 3. कीड़ों से बचने के लिए वे क्या उपाय करते हैं?
सूरज कीड़ों के प्रकोप को कम करने के लिए हर 15 दिन में जड़ों में नीम का पानी देते हैं और नीम के तेल का स्प्रे करते हैं।

### 4. खेत की मिट्टी तैयार करने का उनका तरीका क्या है?
वे गोमूत्र, जामुन के सिरके और पूरी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद को मिलाकर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं और खेत की अच्छी तरह जुताई करते हैं।

## प्रेरणा और सबक
- **विविधता का महत्व:** केवल एक फसल पर निर्भर रहने के बजाय 15 तरह की सब्जियां उगाना बाजार में मांग को पूरा करता है और जोखिम कम करता है।
- **मिट्टी की तैयारी:** मानसून आने से पहले मिट्टी को गोमूत्र और गोबर की खाद से रिचार्ज करना पैदावार में सुधार का सबसे प्रभावी तरीका है।
- **लागत कम करना:** महंगे कीटनाशकों की जगह नीम के पानी और तेल का इस्तेमाल न केवल सुरक्षित है, बल्कि खेती की लागत को भी काफी हद तक कम करता है।
- **नियोजन:** गर्मी के मौसम में ही मानसून की तैयारी शुरू कर देना फसल को समय पर और सही तरीके से उगाने के लिए जरूरी है।

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