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  "type": "article",
  "title": "रांची के पवन पटियाला ने हाथों से जूतियां बनाकर बनाई खास पहचान, देश भर में मांग",
  "summary": "रांची के कारीगर पवन पटियाला बिना किसी मशीन या फैक्ट्री के पूरी तरह हाथों से खूबसूरत और पारंपरिक जूतियां तैयार करते हैं, जिन्हें देश भर में जबरदस्त पसंद किया जाता है।",
  "content": "झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाले पवन पटियाला आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। उनके पूर्वज पटियाला से ताल्लुक रखते थे और पीढ़ियों से यही पारंपरिक काम करते आ रहे हैं। पढ़ाई-लिखाई में मन न लगने के कारण उन्होंने बहुत कम उम्र में ही अपने घर के बुजुर्गों को यह हुनर तराशते हुए देखा और पुश्तैनी कारोबार को आगे बढ़ाने की ठान ली।\n\nशुरुआती दौर में उनके परिवार का यह काम बहुत बड़े पैमाने पर नहीं फैला हुआ था, लेकिन पवन ने इसमें नए प्रयोग किए। उन्होंने समय के साथ कई नए डिजाइन बाजार में उतारना शुरू किए। आज उनके पास हर मौके और जरूरत के हिसाब से वैरायटी मौजूद है। उनके कलेक्शन में महारानी डिजाइन और कट वर्क से लेकर सादी ऑफिस जाने वाली और कैजुअल जूतियां तक शामिल हैं, जो हर वर्ग के ग्राहकों को खूब भाती हैं।\n\nइन जूतियों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें तैयार करने में किसी भी प्रकार की मशीन या फैक्ट्री का सहारा नहीं लिया जाता है। सोल से लेकर फ्लैट और ऊपरी हिस्से पर उकेरे जाने वाले मोर, फूल और जरी के बेहद बारीक तथा खूबसूरत काम पूरी तरह से कारीगरों के हाथों से किए जाते हैं। इस कलाकारी के चलते हर जोड़ी को एक बिल्कुल असली और पारंपरिक लुक मिलता है। उनके इस हुनर और मेहनत का ही नतीजा है कि आज उनके पास बीस हजार से अधिक वफादार ग्राहक हैं, जो उन्हें प्यार से जूती किंग के नाम से संबोधित करते हैं।\n\nदेश के कोने-कोने में पहुंच\nपवन के मुताबिक उनके कारीगर जिस मेहनत से जूतियां बनाते हैं, वैसी नक्काशी और फिनिशिंग का दूसरा जोड़ा मिलना बेहद मुश्किल काम है। वे अपने कारोबार को बढ़ावा देने के लिए देश भर में लगने वाले सरकारी और निजी मेलों में बढ़-चढ़कर स्टॉल लगाते हैं। यही वजह है कि उनके ग्राहक कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक फैले हुए हैं। जब महिला खरीदार उनके स्टॉल पर पहुंचती हैं, तो वे उनकी जरूरत और पहनावे जैसे कि जींस, सलवार सूट या फिर लहंगे के हिसाब से सही जूती का चुनाव करने में पूरी मदद करते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. पवन पटियाला मुख्य रूप से क्या काम करते हैं?\nपवन पटियाला पूरी तरह से हाथ से बनाई जाने वाली पारंपरिक और डिजाइनर जूतियां तैयार करने का काम करते हैं।\n\n2. पवन की जूतियां कहां बनाई जाती हैं और इनमें क्या खास है?\nये जूतियां रांची में पूरी तरह हाथों से बनाई जाती हैं और इनमें किसी भी मशीन का इस्तेमाल नहीं होता है, साथ ही इन पर जरी और फूलों का खूबसूरत काम होता है।\n\n3. पवन के ग्राहकों का दायरा कितना बड़ा है?\nउनके पास 20,000 से अधिक ग्राहक हैं और उनके स्टॉल कन्याकुमारी से लेकर कश्मीर तक देश भर के मेलों में लगते हैं।\n\n4. लोग पवन को किस नाम से बुलाते हैं?\nलोग उनके बेहतरीन काम और जूतियों की जबरदस्त मांग के कारण उन्हें प्यार से जूती किंग बुलाते हैं।\n\nप्रेरणा और सबक\nपारंपरिक हुनर को पहचान दें: पवन ने अपनी पुश्तैनी कला को बिना मशीनों के जिंदा रखा और उसे ही अपनी ताकत बनाया।\n\nविविधता और नवाचार अपनाएं: ग्राहकों की पसंद के अनुसार नए डिजाइन और वैरायटी पेश करके व्यवसाय को बढ़ाया जा सकता है।\n\nमेहनत और लगन से मुकाम हासिल करें: बिना बड़े संसाधनों के भी ग्राहक का भरोसा जीतकर देश भर में अपनी पहचान बनाई जा सकती है।",
  "url": "https://trendkia.com/business/ranchi-ke-pawan-patiala-ne-hathon-se-jutiyan-banakar-banai-khas-pehchan-desh-bhar-mein-mang-21488",
  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-08-25",
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    "रांची",
    "पवन पटियाला",
    "जूती किंग",
    "हस्तशिल्प",
    "पारंपरिक जूती",
    "झारखंड"
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  "site": "TrendKia"
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