रांची की रिद्धिमा का फूड स्टॉल आइडिया, दुर्गा पूजा से शुरू कर महीनेभर में कमा लिए एक लाख रुपये से ज्यादा रांची की रिद्धिमा ने दुर्गा पूजा के दौरान कुल्हड़ पिज्जा और रोल्स का फूड स्टॉल शुरू किया था, जिससे उन्हें पहले ही महीने में ₹1 लाख से अधिक का मुनाफा हुआ। अब वह दीवाली के मौके पर लगने वाली प्रदर्शनियों में भी अपने इस कारोबार को आगे बढ़ा रही हैं। त्योहारी सीजन में नए कारोबार की शुरुआत करने वाली रांची की युवा उद्यमी रिद्धिमा ने अपनी पारिवारिक रेसिपी के दम पर शानदार सफलता हासिल की है। उन्होंने दुर्गा पूजा के पावन अवसर पर खान-पान का एक स्टॉल लगाकर अपने कारोबारी सफर का आगाज किया था। इस फूड स्टॉल में कुल्हड़ पिज्जा, पॉकेट पिज्जा, रोल्स और नाचोज चाट जैसे लजीज आइटम बेचे गए। रांची के जिला स्कूल परिसर में लगाए गए इस स्टॉल को ग्राहकों की तरफ से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली, जिससे शुरुआती दिनों में ही उम्मीद से कहीं बेहतर कारोबार देखने को मिला। दादी और मां की रेसिपी बनी कामयाबी का आधार इस पूरे कारोबार की नींव घर के ही पुराने और पारंपरिक जायकों पर टिकी हुई है। रिद्धिमा का कहना है कि उनके द्वारा परोसे जाने वाले कुल्हड़ पिज्जा को बनाने में एकदम ताजी सब्जियों का इस्तेमाल किया जाता है, जिसकी रेसिपी उनकी मां की है। इसके अलावा, स्टॉल पर मिलने वाले रोल्स उनकी दादी की खास रेसिपी के हिसाब से तैयार किए जाते हैं। घर के इन शानदार व्यंजनों को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने शुद्धता और गुणवत्ता पर पूरा जोर दिया, जिसका सीधा फायदा उन्हें ग्राहकों के रूप में मिला। दुर्गा पूजा में हुआ पूरा निवेश वसूल व्यापार की शुरुआत में रिद्धिमा ने करीब ₹1 लाख की रकम का निवेश किया था। दुर्गा पूजा के दौरान हुई बंपर बिक्री ने न सिर्फ उनके इस पूरे निवेश को एक झटके में वसूल कर लिया, बल्कि उन्हें बंपर मुनाफा भी कराया। इतनी जबरदस्त कमाई और ग्राहकों से मिले सकारात्मक रुझान ने उनका हौसला काफी बढ़ा दिया। शुरुआती चरण में ही इस तरह की आर्थिक सफलता मिलना किसी भी नए कारोबारी के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित हुआ। दीवाली के मौके पर प्रदर्शनियों में मिल रहा भारी रिस्पांस त्योहारों के इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए रिद्धिमा अब दीवाली के मौके पर भी अपने आइटम्स के साथ मैदान में उतर चुकी हैं। रांची में इस समय लगातार एक के बाद एक कई प्रदर्शनियों का आयोजन हो रहा है, जिसका वे पूरा फायदा उठा रही हैं। इन एग्जीबिशन में स्टॉल लगाने से उन्हें सीधे तौर पर यह समझने में मदद मिल रही है कि ग्राहकों को क्या पसंद आ रहा है और किस चीज में सुधार की गुंजाइश है। स्थाई दुकान खोलने की दिशा में बढ़ रहे कदम लगातार मिल रहे शानदार फीडबैक को देखते हुए अब इस बिजनेस को एक स्थाई रूप देने की योजना पर काम चल रहा है। प्रदर्शनियों से मिलने वाले रिस्पांस के आधार पर ही वे यह तय करेंगी कि अपना परमानेंट आउटलेट कब और किस जगह पर खोला जाना चाहिए। हालांकि यह कारोबार अभी अपने बिल्कुल शुरुआती दौर में है और इसकी शुरुआत इसी दुर्गा पूजा के साथ हुई थी, लेकिन जिस तरह का रुझान सामने आ रहा है, उससे भविष्य की संभावनाएं काफी मजबूत नजर आ रही हैं। इसका आप पर असर यह खबर उन लोगों के लिए बेहद प्रेरणादायक और उपयोगी है जो कम पूंजी के साथ खान-पान का नया कारोबार शुरू करना चाहते हैं। • रांची में: स्थानीय निवासियों और युवाओं को दीवाली के दौरान शहर में लगने वाली प्रदर्शनियों में नए और पारंपरिक फूड आइटम्स का लुत्फ उठाने का मौका मिल रहा है। स्थानीय स्तर पर छोटे कारोबारियों को ऐसे आयोजनों से अपने उत्पादों की लोकप्रियता जांचने का बेहतरीन मंच मिलता है। • भारत में: त्योहारी सीजन के दौरान देश भर में मौसमी खान-पान के कारोबार से अच्छी खासी कमाई की जा सकती है। घर की पारंपरिक रेसिपी और शुद्धता के दम पर कोई भी व्यक्ति कम निवेश के साथ अपने छोटे उद्यम की मजबूत नींव रख सकता है। ऐसा क्यों हुआ इस कारोबार की सफलता के पीछे त्योहारी सीजन का सही समय पर चुनाव और घर की प्रामाणिक रेसिपी का इस्तेमाल मुख्य वजह रहे। • त्योहारी मांग: दुर्गा पूजा और दीवाली जैसे बड़े त्योहारों के दौरान मेलों और प्रदर्शनियों में लोगों की भारी भीड़ उमड़ती है, जिससे खान-पान के स्टॉल की बिक्री कई गुना बढ़ जाती है। • पारंपरिक स्वाद: मां और दादी की पुरानी रेसिपी के इस्तेमाल से ग्राहकों को एक अलग और शुद्ध स्वाद मिला, जिसने बाजार में इस नए ब्रांड के प्रति भरोसा पैदा किया। • कम शुरुआती निवेश: महज एक लाख रुपये के शुरुआती पूंजी निवेश से काम शुरू करने के कारण जोखिम कम रहा और पहले ही सीजन में पूरी लागत वसूल हो गई। सवाल-जवाब 1. रिद्धिमा ने अपना फूड बिजनेस कब शुरू किया था? उन्होंने इस कारोबार की शुरुआत दुर्गा पूजा के दौरान की थी। 2. इस बिजनेस में कितना शुरुआती निवेश किया गया था? इस फूड स्टॉल को शुरू करने के लिए लगभग एक लाख रुपये का निवेश किया गया था। 3. स्टॉल पर मुख्य रूप से कौन-कौन से खाद्य पदार्थ बेचे जा रहे थे? स्टॉल पर कुल्हड़ पिज्जा, पॉकेट पिज्जा, रोल्स और नाचोज चाट बेचे जा रहे थे। 4. यह स्टॉल रांची में कहाँ लगाया गया था? दुर्गा पूजा के दौरान यह स्टॉल रांची के जिला स्कूल में लगाया गया था। 5. रिद्धिमा दीवाली के समय कारोबार को कैसे आगे बढ़ा रही हैं? वह दीवाली के मौके पर रांची में लग रही बैक-टू-बैक प्रदर्शनियों में अपने स्टॉल लगा रही हैं। प्रेरणा और सबक रिद्धिमा की यह छोटी सी कारोबारी यात्रा कई खास सबक सिखाती है: • पारंपरिक ज्ञान का उपयोग: घर की पुरानी और प्रामाणिक रेसिपी को आधुनिक खान-पान के साथ जोड़कर एक नया उत्पाद तैयार किया जा सकता है। • त्योहारी सीजन का लाभ: दुर्गा पूजा और दीवाली जैसे अवसरों पर छोटे स्टॉल या प्रदर्शनियों के जरिए कारोबार की सफल शुरुआत की जा सकती है। • गुणवत्ता से समझौता न करें: ताजी सामग्री और शुद्धता का विशेष ध्यान रखने से ग्राहकों का भरोसा और बेहतर रिस्पांस जल्दी मिलता है। • कम निवेश से शुरुआत: बड़े पैमाने पर पूंजी लगाने के बजाय सीमित बजट से शुरुआत करके बाजार के रुझान को परखा जा सकता है। https://trendkia.com/business/ranchi-ki-ridhima-ka-food-stall-idea-durga-puja-se-shuru-kar-mahinebhar-mein-kama-liye-ek-laakh-rupaye-se-jyada-57647 TrendKia — Har trend, sabse pehle.