# रसोई के बजट पर पड़ा असर, प्याज-तेल की महंगाई से बढ़ी घर की थाली की लागत

> अगस्त में शाकाहारी थाली की लागत बढ़कर 29.5 रुपये और नॉन-वेज थाली की कीमत 57.5 रुपये पहुंच गई, क्योंकि प्याज, खाद्य तेल और एलपीजी महंगे हुए, हालांकि आलू-टमाटर सस्ते होने से कुछ राहत मिली।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-09-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/rasoi-ke-bajata-para-para-asara-pyaja-tela-ki-mahngai-se-barhi-ghara-ki-thali-ki-lagata-29570 · **Language:** Hindi
**Tags:** थाली की कीमत, प्याज के दाम, खाद्य महंगाई, एलपीजी कीमत, क्रिसिल रिपोर्ट, नॉन-वेज थाली

देश में घर पर बनने वाले खाने पर भी अब महंगाई का असर साफ दिखने लगा है। अगस्त में प्याज, खाना पकाने का तेल और रसोई गैस महंगे होने से घरेलू भोजन की लागत में मामूली इजाफा हुआ, हालांकि आलू और टमाटर के दाम गिरने से यह बढ़ोतरी ज्यादा बड़ी नहीं दिखी। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की रिसर्च शाखा क्रिसिल इंटेलिजेंस हर महीने अपनी 'रोटी राइस रेट' रिपोर्ट में इसी तरह के आंकड़े जारी करती है, ताकि पता चल सके कि रसोई का खर्च किस दिशा में बढ़ या घट रहा है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त में एक शाकाहारी थाली बनाने की औसत लागत बढ़कर 29.5 रुपये पर पहुंच गई। यह जुलाई के मुकाबले 1 फीसदी ज्यादा है और पिछले साल अगस्त की तुलना में भी 1 फीसदी की बढ़ोतरी दिखाता है। रिपोर्ट के मुताबिक इसकी बड़ी वजह प्याज, खाद्य तेल, चावल और एलपीजी रहे, क्योंकि इन चारों के दाम पिछले साल के मुकाबले ऊंचे बने रहे और इनका सीधा असर रोजाना के खाने की लागत पर पड़ा।

## प्याज ने सबसे ज्यादा जेब ढीली की
सारी चीजों में सबसे तेज उछाल प्याज में देखने को मिला। एक साल पहले अगस्त में प्याज का भाव करीब 28 रुपये किलो था, जो इस साल अगस्त में बढ़कर 40 रुपये किलो तक पहुंच गया, यानी सालभर में करीब 43 फीसदी की तेजी। सिर्फ सालाना नहीं, महीने के हिसाब से भी प्याज जुलाई के मुकाबले 17 फीसदी महंगा हुआ। इसकी वजह मार्च-अप्रैल में महाराष्ट्र में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि बताई गई, जिसने फसल को नुकसान पहुंचाया और बाद के महीनों में सप्लाई कम कर दी।

## तेल और गैस ने भी बढ़ाया बोझ
रसोई की बाकी जरूरी चीजों ने भी दबाव बढ़ाया। खाद्य तेल की कीमत पिछले साल के मुकाबले 11 फीसदी और एलपीजी सिलेंडर की कीमत 10 फीसदी ज्यादा रही, जबकि चावल भी महंगा बिका, जिसका असर थाली की कुल लागत पर पड़ा। हालांकि पूरा महीना महंगाई भरा नहीं रहा। अगस्त में आलू के दाम 12 फीसदी और टमाटर के दाम पूरे 28 फीसदी तक गिरे, जिससे सब्जियों में आई इस राहत ने बढ़ोतरी को उतना बड़ा नहीं होने दिया, जितनी वह हो सकती थी।

अगर पूरी तस्वीर देखें तो शाकाहारी थाली की लागत में सिर्फ 1 फीसदी की बढ़ोतरी भले ही मामूली लगे, लेकिन इसके पीछे प्याज, तेल, चावल और गैस में आई तेज महंगाई और आलू-टमाटर में मिली राहत के बीच एक बड़ी खींचतान चल रही है। यही वजह है कि किराने का बिल हमेशा महंगाई के बड़े आंकड़ों की सीधी लाइन में नहीं चलता, क्योंकि प्याज जैसी चीजें एक फसल सीजन से दूसरे तक तेजी से ऊपर-नीचे हो सकती हैं।

## नॉन-वेज थाली पहुंची 57.5 रुपये पर
अगस्त में नॉन-वेज थाली की लागत 57.5 रुपये रही, जो पिछले साल के इसी महीने से 5 फीसदी ज्यादा है। इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह ब्रॉयलर चिकन का भाव रहा, जो सालाना आधार पर करीब 10 फीसदी बढ़ गया। लेकिन जुलाई से तुलना करें तो नॉन-वेज थाली की लागत असल में 1 फीसदी घट गई, क्योंकि श्रावण महीने में मांस की मांग परंपरागत रूप से कम रहती है और इसी दौरान ब्रॉयलर के दाम में 4 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई।

## इसका आप पर असर
इसका सीधा असर हर घर के रोजाना के किराने और रसोई गैस के खर्च पर पड़ेगा, क्योंकि जिन चीजों के दाम बढ़े हैं उन्हें रोज के खाने से हटाना मुश्किल है।

- **किराने का बिल ऊंचा बना रहेगा:** प्याज, खाद्य तेल, चावल और एलपीजी पिछले साल से महंगे हैं, इसलिए घर में खाना बनाने वाले परिवारों का मासिक खर्च फिलहाल थोड़ा ज्यादा ही रहने की उम्मीद है।
- **प्याज सबसे बड़ा झटका:** 28 रुपये किलो से बढ़कर 40 रुपये किलो होने से, महीने में 3-4 किलो प्याज खरीदने वाला परिवार करीब 36-48 रुपये ज्यादा खर्च कर रहा है।
- **एलपीजी का खर्च बढ़ा:** गैस सिलेंडर के दाम में सालाना 10 फीसदी की बढ़ोतरी का मतलब है कि रोज खाना पकाने का ईंधन अब बजट में पहले से बड़ी जगह ले रहा है।
- **नॉन-वेज खाना भी महंगा:** ब्रॉयलर चिकन की वजह से नॉन-वेज थाली की लागत सालाना 5 फीसदी बढ़ी है, यानी मांसाहारी परिवारों पर शाकाहारी परिवारों से ज्यादा असर पड़ा है।
- **सस्ती सब्जियों से थोड़ी राहत:** आलू 12 फीसदी और टमाटर 28 फीसदी सस्ता होने से परिवार हफ्ते के खाने में इनका इस्तेमाल बढ़ाकर प्याज और तेल की महंगाई को कुछ हद तक संतुलित कर सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
थाली की लागत बढ़ने के पीछे कोई एक बड़ी वजह नहीं, बल्कि कुछ खास चीजों में आई तेज महंगाई है, जिसमें मौसम की भूमिका सबसे अहम रही।

- **प्याज की फसल पर मौसम की मार:** मार्च-अप्रैल में महाराष्ट्र में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने खड़ी फसल को नुकसान पहुंचाया और आगे के महीनों में सप्लाई घटा दी, यही वजह है कि प्याज सालाना आधार पर 43 फीसदी तक महंगा हुआ।
- **पहले से ऊंची बनी अन्य कीमतें:** खाद्य तेल, चावल और एलपीजी के दाम अगस्त से पहले ही पिछले साल के मुकाबले ऊंचे चल रहे थे, इसलिए इन सबका मिला-जुला असर शाकाहारी थाली को महंगा बनाए रखने की वजह बना।
- **श्रावण में मांस की मांग घटना:** श्रावण महीने में मांसाहार परंपरागत रूप से कम होता है, इसी वजह से ब्रॉयलर चिकन के दाम में 4 फीसदी की गिरावट आई और नॉन-वेज थाली जुलाई के मुकाबले सस्ती हो गई।
- **सब्जियों से मिली आंशिक राहत:** आलू और टमाटर के दाम में आई तेज गिरावट ने उल्टी दिशा में काम किया और शाकाहारी थाली की कुल लागत को और ज्यादा बढ़ने से रोक दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. अगस्त में शाकाहारी थाली की कीमत कितनी रही?
29.5 रुपये, जो जुलाई और पिछले साल अगस्त दोनों से 1 फीसदी ज्यादा है।

### 2. नॉन-वेज थाली की लागत कितनी रही?
अगस्त में यह 57.5 रुपये रही, जो पिछले साल से 5 फीसदी ज्यादा है, हालांकि जुलाई से यह 1 फीसदी सस्ती हुई।

### 3. प्याज के दाम इतने क्यों बढ़े?
मार्च-अप्रैल में महाराष्ट्र में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसल को नुकसान पहुंचा, जिससे सप्लाई घटी और प्याज सालाना 43 फीसदी महंगा हो गया।

### 4. क्या सभी चीजें महंगी हुईं?
नहीं, आलू 12 फीसदी और टमाटर 28 फीसदी सस्ते हुए, जिससे थाली की कुल लागत में बढ़ोतरी सीमित रही।

### 5. यह आंकड़े किसने जारी किए?
रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की रिसर्च शाखा क्रिसिल इंटेलिजेंस ने अपनी 'रोटी राइस रेट' रिपोर्ट में यह आंकड़े दिए हैं।

### 6. नॉन-वेज थाली जुलाई से सस्ती क्यों हुई?
श्रावण महीने में मांस की मांग कम होने से ब्रॉयलर चिकन के दाम में 4 फीसदी की गिरावट आई, जिससे नॉन-वेज थाली की लागत घट गई।

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