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  "title": "आरबीआई की इस मास्टरस्ट्रोक स्कीम से खजाने में आए इतने डॉलर, आंकड़े देख पड़ोसी देश भी हैरान",
  "summary": "भारतीय रिजर्व बैंक की विशेष डॉलर-रुपए फोरेक्स स्वैप सुविधा के तहत देश के विदेशी मुद्रा भंडार में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वित्त मंत्रालय के अनुसार इस योजना के जरिए रिकॉर्ड 73 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जुटाई गई है।",
  "content": "भारतीय रिजर्व बैंक की एक खास मौद्रिक योजना ने देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती देने में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। वित्त मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, इस कदम से देश के आर्थिक मोर्चे पर एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। इस योजना के जरिए भारत के खजाने में भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा आई है, जिसका आंकड़ा पड़ोसी देश पाकिस्तान के कुल विदेशी मुद्रा भंडार से कई गुना ज्यादा है। आर्थिक विश्लेषकों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान के पास फिलहाल 22.51 अरब डॉलर का रिजर्व है, जबकि इस विशेष योजना के तहत भारत में 21 अगस्त तक ही 73 अरब डॉलर से ज्यादा की विदेशी मुद्रा जमा हो चुकी है, जो पाकिस्तान की तुलना में लगभग साढ़े तीन गुना अधिक है। दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान के पास आज जितना विदेशी रिजर्व है, उससे कहीं अधिक मुद्रा भारत के पास आज से 13 साल पहले यानी 2013 में ही मौजूद थी। इस पूरी सफलता के पीछे भारतीय रिजर्व बैंक की एक खास स्कीम और प्रवासी भारतीयों का मजबूत भरोसा है।\n\nक्या है USD-INR फोरेक्स स्वैप सुविधा\nयह पूरी उपलब्धि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा शुरू की गई यूएसडी-इनआर फोरेक्स स्वैप सुविधा के कारण संभव हुई है। यह भारतीय रिजर्व बैंक का एक विशेष मौद्रिक नीति उपाय है, जिसका मुख्य उद्देश्य बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के जरिए विदेशी मुद्रा को देश में आकर्षित करना और मुद्रा जोखिम को कम करना है। इस व्यवस्था के तहत डॉलर और रुपए की अदला-बदली की जाती है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग प्रणाली में डॉलर को वैश्विक मानक माना जाता है। इस योजना को भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 8 जून 2026 को शुरू किया गया था। इसे एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट, विदेशी मुद्रा में विदेशी कर्ज और बाहरी कमर्शियल कर्ज जैसी श्रेणियों के लिए लाया गया था ताकि घरेलू फॉरेक्स तरलता को मजबूती मिल सके और विदेशी पूंजी आसानी से भारतीय बैंकों तक पहुंच सके।\n\nप्रवासी भारतीयों का जबरदस्त योगदान और रिकॉर्ड कमाई\nइस योजना को लेकर प्रवासी भारतीयों की तरफ से अभूतपूर्व प्रतिक्रिया देखने को मिली है। 21 अगस्त 2026 तक देश में कुल 73 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जमा हो चुकी है, जिसमें अकेले एफसीएनआर (बी) डिपॉजिट के माध्यम से 65.40 अरब डॉलर आए हैं। यह आंकड़े साफ तौर पर दर्शाते हैं कि प्रवासी भारतीयों ने भारतीय बैंकिंग प्रणाली पर कितना गहरा भरोसा जताया है और देश की विकास यात्रा में अपनी आर्थिक व भावनात्मक भागीदारी को एक बार फिर साबित कर दिखाया है। उन्होंने उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से अपनी गाढ़ी कमाई को इस योजना में निवेश किया। खास बात यह है कि 11 सप्ताह से भी कम समय में 73 अरब डॉलर के मुकाम तक पहुंचने और अभी अवधि समाप्त होने में एक हफ्ता बाकी रहने के साथ ही, यह भारत द्वारा विदेशी मुद्रा जुटाने का अब तक का सबसे बड़ा और सबसे तेज अभियान बन गया है।\n\n2013 के पुराने आंकड़ों को पीछे छोड़ा\nइस बार की सफलता ने साल 2013 में चलाई गई भारतीय रिजर्व बैंक की इसी तरह की एफसीएनआर (बी) स्वैप स्कीम के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। साल 2013 में लगभग तीन महीने के समय में करीब 26 अरब डॉलर जुटाए गए थे, जिसकी तुलना में इस बार का पैमाना और रफ्तार कई गुना ज्यादा तेज और प्रभावशाली रही है।\n\nसमय से पहले ही बंद हुई योजना और मजबूत हुआ बाहरी बफर\nवित्त मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी है कि इस योजना को लेकर लोगों का उत्साह इतना जबरदस्त था कि भारतीय रिजर्व बैंक को एफसीएनआर (बी) विंडो को बंद करने की मूल तारीख 30 सितंबर से पहले ही बदलकर 31 अगस्त 2026 करनी पड़ी। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि इस योजना का तयशुदा लक्ष्य समय सीमा से काफी पहले ही पूरा हो चुका था। इस पूरी प्रक्रिया के माध्यम से भारत ने न्यूनतम लागत पर अपने बाहरी आर्थिक बफर को बेहद मजबूत कर लिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर देश की वित्तीय स्थिति और अधिक सुरक्षित हो गई है।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: देश के मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार से वैश्विक मोर्चे पर रुपए की स्थिति सुरक्षित होगी और आयात संबंधी भुगतान आसान होंगे।\n• आम नागरिकों पर: मजबूत आर्थिक बफर से देश की वित्तीय स्थिरता बढ़ती है, जिससे महंगाई नियंत्रण और मुद्रा के स्थायित्व में अप्रत्यक्ष मदद मिलती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. USD-INR फोरेक्स स्वैप सुविधा क्या है?\nयह भारतीय रिजर्व बैंक की एक विशेष मौद्रिक नीति योजना है जिसके तहत बैंकों के माध्यम से विदेशी मुद्रा को देश में आकर्षित किया जाता है।\n\n2. इस योजना को कब शुरू किया गया था?\nभारतीय रिजर्व बैंक ने इस यूएसडी-इनआर फॉरेक्स स्वैप सुविधा को 8 जून 2026 को शुरू किया था।\n\n3. इस योजना के तहत कुल कितना विदेशी मुद्रा भंडार जुटाया गया है?\nवित्त मंत्रालय के अनुसार इस योजना के जरिए 21 अगस्त तक कुल 73 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जमा हुई है।\n\n4. इस योजना को समय से पहले क्यों बंद किया गया?\nयोजना को लेकर जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली और इसका निर्धारित लक्ष्य समय सीमा से पहले ही पूरा हो गया, इसलिए इसे 31 अगस्त 2026 को बंद कर दिया गया।",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-08-25",
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    "भारतीय रिजर्व बैंक",
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