# रिजर्व बैंक ने बैंकों के मार्केट रिस्क नियमों को किया सख्त, पूंजी बचाने के लिए कैटेगरी बदलने पर लगाई रोक

> भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों के लिए मार्केट रिस्क और पूंजी प्रावधानों से जुड़े नए दिशानिर्देश जारी किए हैं, जो 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी होंगे। नए नियमों के तहत बैंक पूंजी बचाने के मकसद से ट्रेडिंग और बैंकिंग बुक के बीच संपत्तियों की मनमानी री-क्लासिफिकेशन नहीं कर सकेंगे।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-09-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/rbi-ne-bainkon-ke-marketa-riska-niyamon-ko-kiya-sakhta-punji-bachane-ke-lie-kaitegari-badalane-para-lagai-roka-35947 · **Language:** Hindi
**Tags:** भारतीय रिजर्व बैंक, कमर्शियल बैंक, मार्केट रिस्क, बासेल III, बैंकिंग नियम, डेट म्यूचुअल फंड, कैपिटल रिक्वायरमेंट्स

भारतीय रिजर्व बैंक ने वाणिज्यिक बैंकों की वित्तीय स्थिति को अधिक सुदृढ़ और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने मार्केट रिस्क और पूंजी अनिवार्यताओं से संबंधित मौजूदा नियमों को कड़ा कर दिया है। अब बैंक पूंजी बचाने या अपनी देनदारियों को कम दिखाने के लिए किसी भी वित्तीय इंस्ट्रूमेंट को ट्रेडिंग बुक से बैंकिंग बुक या बैंकिंग बुक से ट्रेडिंग बुक में मनमाने ढंग से स्थानांतरित नहीं कर पाएंगे। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य वित्तीय जोखिमों का सटीक आकलन करना और बैंकिंग व्यवस्था में किसी भी प्रकार की कृत्रिम हेराफेरी को पूरी तरह खत्म करना है।

## ट्रेडिंग और बैंकिंग बुक की री-क्लासिफिकेशन पर कड़ा अंकुश
केंद्रीय बैंक द्वारा सोमवार को जारी नए निर्देशों के अनुसार, बैंक अब केवल अपनी पूंजी आवश्यकता घटाने के इरादे से संपत्तियों का वर्गीकरण नहीं बदल सकेंगे। सामान्य वित्तीय प्रक्रियाओं में बैंक अक्सर अलग-अलग पोर्टफोलियो के तहत कम पूंजी प्रावधान का लाभ लेने के लिए सिक्योरिटीज की श्रेणियों में अदला-बदली करते थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद बैंकों को अपने जोखिम की वास्तविक स्थिति को स्पष्ट रूप से दर्शाना होगा। इससे विनियामकों और निवेशकों के समक्ष बैंकों के बही-खातों की एक निष्पक्ष और पारदर्शी तस्वीर प्रस्तुत होगी, जिससे जोखिम प्रबंधन काफी मजबूत बनेगा।

## 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी होंगे नए प्रावधान
रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि ये कड़े नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू किए जाएंगे। नियमों के क्रियान्वयन के लिए लगभग ढाई साल का समय दिया गया है ताकि बैंकिंग संस्थान अपनी आंतरिक प्रणालियों और जोखिम प्रबंधन तंत्र को पूरी तरह से नए मानकों के अनुरूप ढाल सकें। यह नया ढांचा देश के सभी वाणिज्यिक बैंकों पर लागू होगा। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने परिचालन की प्रकृति को देखते हुए स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक और लोकल एरिया बैंक को इन नियमों के दायरे से बाहर रखा है।

## मार्केट रिस्क के आकलन के लिए सिंपलीफाइड स्टैंडर्ड अप्रोच
मार्केट रिस्क के सटीक मूल्यांकन के लिए बैंकों को अब सिंपलीफाइड स्टैंडर्ड अप्रोच (एसएसए) का पालन करना अनिवार्य होगा। इस पद्धति के माध्यम से ही वित्तीय संस्थान यह गणना करेंगे कि उनके कुल बाजार जोखिम के अनुपात में कितनी पूंजी सुरक्षित रखी जानी चाहिए। इन निर्देशों का एक बड़ा उद्देश्य घरेलू बैंकिंग नियमों को बासेल III के संशोधित वैश्विक मानकों के साथ सुसंगत बनाना है। केंद्रीय बैंक के अनुसार, नियमों की रूपरेखा इस प्रकार तैयार की गई है जिससे जटिलताएं घटें और बैंकों को नए ढांचे में बदलाव करने में सहूलियत मिले।

## ब्याज दर जोखिम और डेट म्यूचुअल फंड पर सख्त निगरानी
नए दिशानिर्देशों के तहत रिजर्व बैंक ने ब्याज दर के जोखिम से जुड़ी विशेष रिस्क टेबल में भी संशोधन किए हैं। इन तालिकाओं को बैंकिंग पर्यवेक्षण पर बेसल समिति यानी बीसीबीएस के अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढाला गया है, जिससे ब्याज दरों में आने वाले उतार-चढ़ाव का प्रभाव स्पष्ट दिख सके। इसके साथ ही, ट्रेडिंग बुक में रखे गए डेट म्यूचुअल फंड और ईटीएफ के लिए भी मूल्यांकन नियम बदले गए हैं। अब बैंक केवल फंड के बाहरी ढांचे के आधार पर पूंजी तय नहीं करेंगे, बल्कि उस म्यूचुअल फंड या ईटीएफ के भीतर मौजूद अंतर्निहित संपत्तियों के वास्तविक बाजार जोखिम को ध्यान में रखकर पूंजी का निर्धारण करेंगे।

## इसका आप पर असर
रिजर्व बैंक द्वारा बैंकों के पूंजी और जोखिम नियमों को कड़ा करने से पूरे वित्तीय क्षेत्र की स्थिरता बढ़ेगी और जमाकर्ताओं का पैसा अधिक सुरक्षित होगा।

- **जमाकर्ताओं की सुरक्षा:** बैंकों के बही-खातों में जोखिम की सही जानकारी दर्ज होने से बैंकों की वित्तीय मजबूती बढ़ेगी। इससे जमाकर्ताओं की जमा पूंजी और अधिक सुरक्षित होगी और बैंक किसी अचानक बाजार झटके से बच सकेंगे।
- **ऋण और निवेश पर प्रभाव:** बैंकों को अपने निवेश और पोर्टफोलियो पर अधिक पूंजी अलग रखनी पड़ सकती है। इसके चलते बैंक जोखिम भरे निवेशों से बचेंगे और अपनी उधारी रणनीतियों को अधिक अनुशासित बनाएंगे।
- **पारदर्शिता में सुधार:** बैंकों द्वारा बैलेंस शीट में हेरफेर करने की गुंजाइश खत्म हो जाएगी। निवेशकों और आम खाताधारकों को बैंकों की वास्तविक सेहत और जोखिम का स्पष्ट पता चल सकेगा।
- **लागू होने की समयसीमा:** यह बदलाव 1 अप्रैल 2027 से लागू होगा। आम ग्राहकों की दैनिक बैंकिंग सेवाओं या ब्याज दरों पर तत्काल कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
भारतीय रिजर्व बैंक ने यह कदम बैंकों द्वारा पूंजी नियमों से बचने के लिए अपनाए जाने वाले रास्तों को बंद करने और घरेलू नियमों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढालने के लिए उठाया है।

- **पूंजी आवश्यकताओं की हेराफेरी रोकना:** कई बार बैंक आवश्यक पूंजी प्रावधानों को कम दिखाने के लिए संपत्तियों को ट्रेडिंग और बैंकिंग बुक के बीच स्थानांतरित करते थे। केंद्रीय बैंक ने इस प्रक्रिया पर रोक लगाकर बही-खातों में पारदर्शिता लाने के लिए यह निर्देश दिया है।
- **वैश्विक मानकों से तालमेल:** घरेलू बैंकिंग नियमों को बासेल समिति (बीसीबीएस) और संशोधित बासेल III फ्रेमवर्क के अनुरूप बनाना आवश्यक था। इस कदम से भारतीय बैंक अंतरराष्ट्रीय जोखिम मानकों पर खरे उतर सकेंगे।
- **बाजार जोखिम का सटीक मूल्यांकन:** ट्रेडिंग बुक में मौजूद डेट म्यूचुअल फंड, ईटीएफ और ब्याज दर संवेदनशीलता से जुड़े वास्तविक जोखिमों की सटीक पहचान करना आवश्यक हो गया था। इसी वजह से सरलीकृत मानक दृष्टिकोण (एसएसए) को अनिवार्य किया गया है।

## सवाल-जवाब

### 1. आरबीआई ने बैंकों के लिए किन नियमों में बदलाव किया है?
रिजर्व बैंक ने बैंकों के मार्केट रिस्क और पूंजी अनिवार्यताओं से जुड़े नियमों को कड़ा किया है ताकि बैंक पूंजी कम दिखाने के लिए इंस्ट्रूमेंट्स की कैटेगरी न बदल सकें।

### 2. यह नया नियम कब से लागू होगा?
यह नया नियम 1 अप्रैल 2027 से प्रभावी होगा ताकि बैंकों को इसकी तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

### 3. किन बैंकों को इन नियमों से छूट दी गई है?
स्मॉल फाइनेंस बैंक, पेमेंट बैंक और लोकल एरिया बैंक को इन नए निर्देशों के दायरे से बाहर रखा गया है।

### 4. मार्केट रिस्क के मूल्यांकन के लिए बैंकों को कौन सा तरीका अपनाना होगा?
बैंकों को मार्केट रिस्क का आकलन करने और पूंजी तय करने के लिए सिंपलीफाइड स्टैंडर्ड अप्रोच (एसएसए) अपनाना होगा।

### 5. डेट म्यूचुअल फंड और ईटीएफ पर क्या नया नियम है?
ट्रेडिंग बुक में रखे डेट म्यूचुअल फंड और ईटीएफ के लिए बैंक अब सिर्फ फंड नहीं बल्कि उसमें शामिल अंतर्निहित निवेश के वास्तविक जोखिम के आधार पर पूंजी तय करेंगे।

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