# लाल किले से पीएम नरेंद्र मोदी का बड़ा लक्ष्य, अगले 10 सालों में फॉर्च्यून 500 लिस्ट में शामिल होंगी 50 भारतीय कंपनियां

> स्वतंत्रता दिवस के भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगले एक दशक के भीतर फॉर्च्यून 500 सूची में 50 भारतीय कंपनियों को जगह दिलाने का महत्वाकांक्षी रोडमैप प्रस्तुत किया है। वर्तमान में वैश्विक 500 सबसे कमाऊ कंपनियों की तालिका में भारत की केवल 9 कंपनियां ही स्थान बना पाई हैं।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-08-15 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/red-fort-se-pm-narendra-modi-ka-bara-lakshya-agale-10-salon-men-fortune-500-lista-men-shamila-hongi-50-bharatiya-knpaniyan-16958 · **Language:** Hindi
**Tags:** फॉर्च्यून 500, नरेंद्र मोदी, भारतीय कंपनियां, रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारतीय अर्थव्यवस्था, बैंकिंग सेक्टर, कॉरपोरेट ग्रोथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शनिवार को लाल किले की प्राचीर से देश के आर्थिक विकास के संदर्भ में एक बड़ा विजन सामने रखा। अपने संबोधन में उन्होंने भारतीय कॉरपोरेट जगत के सामने अगले 10 वर्षों के भीतर फॉर्च्यून 500 की वैश्विक सूची में 50 स्वदेशी कंपनियों को पहुंचाने का राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किया। आजादी के 80 साल पूरे होने के इस मोड़ पर प्रधानमंत्री की इस घोषणा के बाद से ही देश भर में भारत के कॉरपोरेट सामर्थ्य, वैश्विक स्थिति और दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों का पैमाना तय करने वाली इस प्रतिष्ठित तालिका को लेकर व्यापक विश्लेषण शुरू हो गया है।

## फॉर्च्यून ग्लोबल 500 का स्वरूप और भारत की वर्तमान उपस्थिति
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित बिजनेस पत्रिका फॉर्च्यून हर साल कुल राजस्व यानी रेवेन्यू के आधार पर विश्व की शीर्ष 500 कंपनियों की तालिका तैयार करती है। इस सूची में शीर्ष स्थान पाना दुनिया भर के कॉरपोरेट घरानों के लिए एक बड़ा मानक माना जाता है। ऐतिहासिक रूप से इस सूची में अमेरिकी और चीनी कंपनियों का दबदबा रहा है। जुलाई 2025 में जारी की गई नवीनतम फॉर्च्यून ग्लोबल 500 रैंकिंग में भारत की कुल 9 कंपनियों को जगह मिली है। इन 9 कंपनियों में से 5 सरकारी क्षेत्र यानी पीएसयू की हैं, जबकि 4 निजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनियां हैं।

स्वदेशी कंपनियों में दिग्गज उद्योगपति मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज 88वें स्थान पर रहकर भारत की शीर्ष कंपनी बनी हुई है। इसके बाद सार्वजनिक क्षेत्र की जीवन बीमा कंपनी एलआईसी 95वें पायदान पर मौजूद है, जबकि इंडियन ऑयल 127वें स्थान पर काबिज है। इन तीनों शीर्ष कंपनियों के अलावा भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई, ओएनजीसी, एचडीएफसी बैंक, टाटा मोटर्स, बीपीसीएल और आईसीआईसीआई बैंक भी इस वैश्विक सूची में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।

## 43.1 ट्रिलियन डॉलर का वैश्विक रेवेन्यू और भारत के लिए 5 गुना विस्तार की चुनौती
फॉर्च्यून 500 में जगह बनाने वाली दुनिया की तमाम 500 कंपनियों के वित्तीय आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले साल इन कंपनियों ने कुल मिलाकर 43.1 ट्रिलियन डॉलर का भारी-भरकम राजस्व अर्जित किया था। इस अंतरराष्ट्रीय तालिका में अमेरिका की दिग्गज ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अमेज़न दुनिया की नंबर एक कंपनी के रूप में शीर्ष पर बनी हुई है। भारत के पास फिलहाल इस सूची में केवल 9 कंपनियां दर्ज हैं, इसलिए अगले 10 वर्षों में इस आंकड़े को 50 तक ले जाने का मतलब है कि भारतीय कॉरपोरेट जगत को 5 गुना से भी अधिक की ग्रोथ हासिल करनी होगी। इसके लिए घरेलू उद्योगों को लगातार मजबूत रणनीतिक विस्तार, नवाचार और रेवेन्यू बढ़ोतरी की जरूरत होगी।

## वैश्विक बैंकिंग क्षेत्र में भारत को शीर्ष पर स्थापित करने की रणनीति
कॉरपोरेट घरानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने के साथ-साथ प्रधानमंत्री ने दुनिया के सबसे बड़े वित्तीय संस्थानों की कतार में भारतीय बैंकों को शामिल कराने का भी संकल्प जताया है। वैश्विक बैंकिंग सेक्टर में वर्तमान प्रतिस्पर्धा की स्थिति का अंदाजा एसएंडपी ग्लोबल मार्केट द्वारा अप्रैल 2026 में जारी की गई रिपोर्ट से लगाया जा सकता है। इस रैंकिंग के अनुसार चीन का इंडस्ट्रियल एंड कॉमर्शियल बैंक ऑफ चाइना 7.65 ट्रिलियन डॉलर की कुल संपत्ति के साथ दुनिया का सबसे बड़ा बैंक बना हुआ है। केवल इतना ही नहीं, वैश्विक रैंकिंग में शुरुआती चारों स्थानों पर चीन के ही बैंकों का कब्जा है, जिनमें एग्रीकल्चर बैंक ऑफ चाइना दूसरे, चाइना कंस्ट्रक्शन बैंक तीसरे और बैंक ऑफ चाइना चौथे स्थान पर आते हैं।

## दुनिया के प्रमुख देशों की कॉरपोरेट उपस्थिति
वैश्विक कॉरपोरेट परिदृश्य में विभिन्न देशों की हिस्सेदारी का विश्लेषण करें तो अमेरिका 141 कंपनियों के साथ फॉर्च्यून 500 में सबसे आगे खड़ा है। चीन 122 कंपनियों के साथ दूसरे स्थान पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है। इसके बाद एशियाई देश जापान की 40 कंपनियां, जर्मनी की 28 कंपनियां और फ्रांस की 24 कंपनियां इस सूची का हिस्सा हैं। वहीं ब्रिटेन की 21, कनाडा की 14, दक्षिण कोरिया की 13 और स्विट्जरलैंड की 12 कंपनियां अंतरराष्ट्रीय राजस्व की इस दौड़ में अपनी जगह बनाए हुए हैं। इन विकसित अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले भारत केवल 9 कंपनियों के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज करा पाया है, जिसे अब अगले एक दशक में 50 कंपनियों तक पहुंचाने की विशाल योजना बनाई गई है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** कॉरपोरेट क्षेत्र के तेजी से विस्तार से देश भर में नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

**निवेशकों और उद्योगों के लिए:** वैश्विक पटल पर स्वदेशी कंपनियों का दबदबा बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार और बैंकिंग तंत्र में विदेशी पूंजी निवेश आकर्षित होगा।

## सवाल-जवाब

### 1. पीएम मोदी ने फॉर्च्यून 500 लिस्ट को लेकर क्या लक्ष्य रखा है?
पीएम मोदी ने अगले 10 वर्षों में फॉर्च्यून 500 सूची में भारतीय कंपनियों की संख्या बढ़ाकर 50 करने का लक्ष्य रखा है।

### 2. वर्तमान में फॉर्च्यून Global 500 सूची में कितनी भारतीय कंपनियां शामिल हैं?
जुलाई 2025 की सूची के अनुसार, केवल 9 भारतीय कंपनियां फॉर्च्यून Global 500 में जगह बना पाई हैं, जिनमें 5 सरकारी और 4 निजी कंपनियां हैं।

### 3. फॉर्च्यून Global 500 सूची में सबसे शीर्ष भारतीय कंपनी कौन सी है?
रिलायंस इंडस्ट्रीज 88वें स्थान के साथ भारतीय कंपनियों में शीर्ष पर है, जिसके बाद एलआईसी 95वें और इंडियन ऑयल 127वें स्थान पर है।

### 4. फॉर्च्यून 500 सूची में शामिल कंपनियों का कुल वैश्विक राजस्व कितना रहा?
फॉर्च्यून 500 में शामिल दुनिया की सभी कंपनियों ने पिछले साल कुल 43.1 ट्रिलियन डॉलर का राजस्व हासिल किया, जिसमें अमेज़न शीर्ष पर रही।

### 5. फॉर्च्यून 500 सूची में सबसे अधिक कंपनियां किस देश की हैं?
अमेरिका की सबसे ज्यादा 141 कंपनियां इस सूची में शामिल हैं, जिसके बाद चीन 122 कंपनियों के साथ दूसरे स्थान पर है।

### 6. दुनिया के शीर्ष बैंकों की सूची में किस देश का दबदबा है?
एसएंडपी ग्लोबल मार्केट की अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक शीर्ष चार पायदानों पर चीन के बैंकों का कब्जा है, जिसमें इंडस्ट्रियल एंड कॉमर्शियल बैंक ऑफ चाइना $7.65 ट्रिलियन एसेट के साथ पहले स्थान पर है।

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