# रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर 8.1 प्रतिशत उछला, मजबूत रिफाइनिंग मार्जिन से मार्केट कैप 17 लाख करोड़ के पार

> सितंबर तिमाही में ऑयल टू केमिकल कारोबार से हुई बंपर कमाई और रिकॉर्ड रिफाइनिंग मार्जिन के दम पर रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में तीन साल की सबसे बड़ी इंट्राडे बढ़त दर्ज की गई।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-11-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/reliance-industries-ka-sheyara-8-1-pratishata-uchhala-majabuta-riphaininga-marjina-se-marketa-kaipa-17-lakha-karora-ke-para-54969 · **Language:** Hindi
**Tags:** रिलायंस इंडस्ट्रीज, रिलायंस शेयर, रिफाइनिंग मार्जिन, कच्चा तेल, शेयर बाजार, गोल्डमैन सैक्स

घरेलू शेयर बाजार में सोमवार 2 नवंबर 2026 को रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली, जिसके चलते कंपनी का शेयर इंट्राडे कारोबार के दौरान करीब 8.1 प्रतिशत उछलकर 1,259 रुपये के स्तर पर पहुंच गया। पिछले तीन वर्षों से अधिक समय में किसी एक कारोबारी दिन के भीतर शेयर में आई यह सबसे बड़ी तेजी दर्ज की गई है। शेयरों में इस जोरदार तेजी की बदौलत कंपनी का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन भी 17 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक आंकड़े के पार निकल गया। हाल ही में जियो प्लेटफॉर्म की शानदार लॉन्चिंग के साथ साथ चालू वित्त वर्ष की सितंबर तिमाही में रिफाइनरी और केमिकल कारोबार में दर्ज की गई जबरदस्त कमाई ने निवेशकों और बाजार विश्लेषकों का भरोसा कई गुना बढ़ा दिया है।

## रिफाइनिंग मार्जिन का खेल और तेल कारोबार की गणित
कच्चा तेल सीधे तौर पर वाहनों, कल-कारखानों या मशीनों में ईंधन के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता। इसे आधुनिक और विशाल रिफाइनरियों में जटिल रासायनिक प्रक्रियाओं के जरिए परिष्कृत किया जाता है, जिसके बाद पेट्रोल, डीजल, एविशन टर्बाइन फ्यूल और अन्य रासायनिक उत्पाद तैयार होते हैं। किसी भी रिफाइनिंग कंपनी की वास्तविक कमाई इस मूल गणित पर टिकी होती है कि उसने अंतरराष्ट्रीय बाजार से किस भाव पर कच्चा तेल खरीदा और उसे प्रोसेस करके तैयार किए गए अंतिम पेट्रोलियम उत्पादों को किस कीमत पर बेचा। जब तैयार उत्पादों की बाजार कीमत और कच्चे तेल की लागत के बीच का अंतर बढ़ता है, तो कंपनी की मुनाफा क्षमता में सीधा उछाल आता है। ऊर्जा और कमोडिटी बाजार की भाषा में इसी अंतर को रिफाइनिंग मार्जिन या क्रैक स्प्रेड कहा जाता है।

सितंबर में समाप्त हुई तिमाही के दौरान वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में कई तरह के उतार-चढ़ाव देखने को मिले। दुनिया के कई प्रमुख उपभोक्ता बाजारों में परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति काफी सीमित बनी रही। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने मिलकर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित किया। इन विषम परिस्थितियों का सीधा और बड़ा लाभ रिलायंस के रिफाइनिंग परिचालन को मिला, जिससे कंपनी अपने मार्जिन को रिकॉर्ड स्तर पर ले जाने में पूरी तरह सफल रही।

## ऑयल टू केमिकल डिवीजन ने रचा नया वित्तीय इतिहास
रिलायंस के ऑयल टू केमिकल यानी O2C सेगमेंट ने सितंबर तिमाही के दौरान अपने इतिहास का सबसे दमदार वित्तीय प्रदर्शन दर्ज कराया है। इस विशेष कारोबारी इकाई के तहत कंपनी कच्चे तेल को परिष्कृत करके उच्च गुणवत्ता वाले ईंधन, पॉलिमर और विभिन्न औद्योगिक केमिकल तैयार करती है। आंकड़ों के अनुसार, कंपनी के O2C कारोबार से मिलने वाला कुल रेवेन्यू सालाना आधार पर 44.2 प्रतिशत बढ़कर 2.32 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। वहीं दूसरी ओर, परिचालन मुनाफे यानी ब्याज, टैक्स और मूल्यह्रास से पहले की कमाई (EBITDA) में 67.9 प्रतिशत का भारी उछाल दर्ज किया गया, जिससे यह आंकड़ा रिकॉर्ड 25,203 करोड़ रुपये के ऐतिहासिक स्तर पर जा पहुंचा।

कंपनी के परिचालन लाभ की क्षमता को दर्शाने वाला EBITDA मार्जिन भी सालाना आधार पर 1.6 प्रतिशत अंक सुधरकर 10.9 प्रतिशत दर्ज किया गया। मार्जिन में हुई यह बढ़ोतरी यह स्पष्ट दर्शाती है कि कंपनी ने न केवल बिक्री बढ़ाई बल्कि अपने परिचालन खर्चों पर नियंत्रण रखते हुए प्रति बैरल तेल से कहीं ज्यादा शुद्ध कमाई हासिल की। इस अवधि में विशेष रूप से परिवहन क्षेत्र में प्रयुक्त होने वाले ईंधनों के रिफाइनिंग मार्जिन पिछले वर्ष की समान तिमाही की तुलना में 3 से 3.7 गुना तक बढ़ गए, जो तिमाही के दौरान ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तरों को छूने में कामयाब रहे।

## तीसरी तिमाही में भी गति बरकरार रहने की ठोस उम्मीदें
सितंबर तिमाही में अप्रत्याशित वित्तीय सफलता हासिल करने के बाद अब बाजार का पूरा ध्यान अक्टूबर से दिसंबर की तीसरी तिमाही पर टिका है। चोला सिक्योरिटीज के धर्मेश कांत के मुताबिक, वैश्विक ऊर्जा बाजार में जिन सहायक परिस्थितियों ने दूसरी तिमाही के नतीजों को मजबूती दी थी, उनका असर चालू तीसरी तिमाही में भी बना रह सकता है। उन्होंने नतीजों को बेहद मजबूत करार देते हुए शेयर में किसी भी तरह की गिरावट आने पर खरीदारी करने की सिफारिश की है। दुनिया भर में रिफाइनिंग क्षमता की तंग आपूर्ति और ईंधन की मजबूत मांग से जुड़ा बुनियादी संतुलन अब भी रिफाइनिंग क्षेत्र के बेहद अनुकूल बना हुआ है।

वैश्विक वित्तीय फर्म नोमुरा ने भी रिलायंस के प्रदर्शन का गहराई से विश्लेषण करते हुए कंपनी के सितंबर तिमाही के आंकड़ों को उम्मीद से काफी बेहतर माना है। नोमुरा के अनुसार, कंपनी का समेकित EBITDA पिछली तिमाही के मुकाबले 19 प्रतिशत बढ़ा, जो उनके अपने पूर्व अनुमानों से 9 प्रतिशत अधिक रहा। वित्तीय फर्म ने स्पष्ट किया कि इस अप्रत्याशित प्रदर्शन में मुख्य योगदान O2C डिवीजन की अप्रत्याशित मजबूती का ही रहा है।

## शिपिंग भाड़े में बढ़ोतरी की चुनौती और रियायती कच्चे तेल की ढाल
रिफाइनिंग कारोबार में शानदार कमाई के बावजूद भविष्य के लिहाज से कुछ चुनौतियां भी सामने खड़ी हैं। तेल उत्पादक देशों से भारत तक भारी मात्रा में कच्चा तेल लाने के लिए महासागरों में चलने वाले बहुत बड़े कच्चे तेल वाहक जहाजों यानी वीएलसीसी का उपयोग किया जाता है। हाल के हफ्तों में अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर जहाजों के संचालन खर्च और भाड़े में तेजी आई है, जिससे तेल आयात करने की लागत पर दबाव पड़ना स्वाभाविक है।

वैश्विक निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स का आकलन है कि तीसरी तिमाही के दौरान वीएलसीसी जहाजों की माल ढुलाई लागत में आने वाली वृद्धि रिलायंस के रिफाइनिंग मार्जिन पर कुछ समय के लिए दबाव डाल सकती है। हालांकि, रिलायंस के पास इस संभावित नुकसान की भरपाई करने के लिए एक मजबूत परिचालन रणनीति मौजूद है। कंपनी भारी और खट्टे कच्चे तेल को प्रोसेस करने की उन्नत तकनीकी क्षमता रखती है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपेक्षाकृत रियायती और सस्ती कीमतों पर उपलब्ध रहता है। इस सस्ते कच्चे तेल का अधिक उपयोग करके रिलायंस बढ़ते समुद्री माल ढुलाई खर्च के प्रभाव को काफी हद तक निष्प्रभावी कर सकती है।

## पेट्रोकेमिकल पोर्टफोलियो और पॉलिएस्टर चेन से मिला बड़ा सहारा
रिलायंस की यह वित्तीय छलांग केवल पेट्रोल और डीजल की बिक्री तक ही सीमित नहीं रही है, बल्कि पेट्रोकेमिकल डिवीजन ने भी इस बढ़त को मजबूत आधार दिया है। कंपनी के पॉलिएस्टर कारोबार का मार्जिन सुधरकर तीन साल के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गया। इस सुधार के पीछे पॉलिएस्टर उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख मध्यवर्ती घटकों पैराक्साइलीन (PX) और प्यूरिफाइड टेरेफ्थेलिक एसिड (PTA) के स्प्रेड में दर्ज की गई जबरदस्त तेजी मुख्य कारण रही। आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान पैराक्साइलीन के स्प्रेड में 15 प्रतिशत और पीटीए के स्प्रेड में 52 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे पॉलिएस्टर वैल्यू चेन से मिलने वाले मुनाफे में भारी इजाफा हुआ।

## ब्रोकरेज फर्मों का सकारात्मक नजरिया और नए मूल्य लक्ष्य
मजबूत नतीजों और भविष्य की अनुकूल संभावनाओं को देखते हुए प्रमुख वैश्विक ब्रोकरेज कंपनियों ने रिलायंस इंडस्ट्रीज पर अपने सकारात्मक दृष्टिकोण को जारी रखा है। गोल्डमैन सैक्स ने शेयर पर अपनी खरीदारी की सिफारिश को बरकरार रखते हुए 1,840 रुपये का मूल्य लक्ष्य तय किया है। वहीं नोमुरा ने भी स्टॉक पर अपनी खरीदारी की रेटिंग बनाए रखी है और प्रति शेयर 1,560 रुपये का लक्ष्य दिया है। सोमवार को शेयर में दर्ज 8.1 प्रतिशत का उछाल निवेशकों की मजबूत धारणा को दर्शाता है, हालांकि विश्लेषकों का यह भी मानना है कि ब्रोकरेज के दिए गए आंकड़े बाजार अनुमान होते हैं और वास्तविक कारोबार व्यापक आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

## इसका आप पर असर
रिलायंस के शेयरों में आई भारी तेजी और रिफाइनरी मुनाफे में उछाल का सीधा असर खुदरा शेयर निवेशकों और ऊर्जा बाजार पर देखने को मिलेगा।

- **खुदरा निवेशकों पर असर:** रिलायंस के शेयरों में 8.1 प्रतिशत की छलांग से निवेशकों के पोर्टफोलियो वैल्यू में जोरदार बढ़त हुई है। यदि आपके पास कंपनी के शेयर हैं तो ब्रोकरेज फर्मों ने 1,560 रुपये से 1,840 रुपये तक के टारगेट के साथ शेयर में गिरावट पर बने रहने की सलाह दी है।
- **घरेलू ईंधन बाजार:** रिफाइनिंग मार्जिन में रिकॉर्ड वृद्धि दर्शाती है कि पेट्रोलियम उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय मांग मजबूत बनी हुई है। इससे फिलहाल घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल के खुदरा दामों में किसी त्वरित कटौती की संभावना सीमित हो सकती है।
- **इंडेक्स और म्यूचुअल फंड:** 17 लाख करोड़ रुपये से अधिक मार्केट कैप होने के कारण निफ्टी और सेंसेक्स में रिलायंस की हिस्सेदारी काफी बड़ी है। इसके शेयरों में आई तेजी से उन सभी निवेशकों को लाभ मिलेगा जिन्होंने इंडेक्स फंड या लार्ज कैप म्यूचुअल फंड में निवेश किया है।
- **पेट्रोकेमिकल उत्पाद:** पॉलिएस्टर और पीटीए के स्प्रेड बढ़ने से डाउनस्ट्रीम टेक्सटाइल और पैकेजिंग उद्योगों के लिए कच्चे माल की लागत संरचना में बदलाव आ सकता है। विनिर्माताओं को अपनी खरीद रणनीति और मार्जिन योजना पर नजर बनाए रखनी होगी।

## ऐसा क्यों हुआ
रिलायंस इंडस्ट्रीज के मुनाफे और शेयर भाव में आए इस भारी उछाल के पीछे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की कमी, रिकॉर्ड क्रैक स्प्रेड और मजबूत पेट्रोकेमिकल प्रदर्शन का प्रमुख योगदान रहा है।

- **वैश्विक पेट्रोलियम आपूर्ति में कमी:** सितंबर तिमाही के दौरान प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों में रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता सीमित थी। भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल के ऊंचे भावों ने आपूर्ति श्रृंखला को बाधित किया, जिससे रिफाइनिंग मार्जिन 3 से 3.7 गुना तक बढ़ गए।
- **O2C कारोबार का रिकॉर्ड प्रदर्शन:** कंपनी के ऑयल टू केमिकल डिवीजन का रेवेन्यू 44.2 प्रतिशत बढ़कर 2.32 लाख करोड़ रुपये और EBITDA 67.9 प्रतिशत बढ़कर 25,203 करोड़ रुपये पहुंच गया। इस असाधारण परिचालन मुनाफे ने बाजार में कंपनी के वित्तीय नतीजों को लेकर जबरदस्त उत्साह पैदा किया।
- **पेट्रोकेमिकल और पॉलिएस्टर रिकवरी:** सिर्फ परिवहन ईंधन ही नहीं, बल्कि पैराक्साइलीन स्प्रेड में 15 प्रतिशत और पीटीए स्प्रेड में 52 प्रतिशत की बढ़ोतरी ने पॉलिएस्टर मार्जिन को तीन साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया। इसने कंपनी के समग्र लाभ को विविधता और मजबूती प्रदान की।
- **सस्ते कच्चे तेल की प्रोसेसिंग क्षमता:** जहाजों के ऊंचे भाड़े की चुनौती के बावजूद रिलायंस अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छूट पर मिलने वाले भारी कच्चे तेल को प्रोसेस करने में सक्षम है। इस सामरिक क्षमता ने लॉजिस्टिक्स लागत के असर को सीमित रखते हुए रिफाइनिंग मार्जिन को सुरक्षित रखा।

## सवाल-जवाब

### 1. सोमवार को रिलायंस के शेयर में कितनी तेजी आई?
सोमवार 2 नवंबर 2026 को रिलायंस का शेयर करीब 8.1 प्रतिशत उछलकर 1,259 रुपये के स्तर तक पहुंच गया, जो तीन साल से अधिक समय की सबसे बड़ी इंट्राडे बढ़त है।

### 2. रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैप कितना हो गया है?
शेयरों में आई इस तेजी के चलते रिलायंस इंडस्ट्रीज का कुल मार्केट कैप 17 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक आंकड़े के पार पहुंच गया।

### 3. सितंबर तिमाही में रिलायंस के O2C कारोबार का प्रदर्शन कैसा रहा?
O2C कारोबार का रेवेन्यू 44.2 प्रतिशत बढ़कर 2.32 लाख करोड़ रुपये और EBITDA 67.9 प्रतिशत बढ़कर 25,203 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

### 4. रिफाइनिंग मार्जिन या क्रैक स्प्रेड क्या होता है?
कच्चे तेल को खरीदने की लागत और उससे तैयार होने वाले पेट्रोल-डीजल जैसे उत्पादों की बिक्री कीमत के बीच के अंतर को रिफाइनिंग मार्जिन या क्रैक कहा जाता है।

### 5. तीसरी तिमाही में कंपनी के सामने क्या मुख्य चुनौती हो सकती है?
बहुत बड़े कच्चा तेल वाहक जहाजों (वीएलसीसी) के भाड़े में वृद्धि से मार्जिन पर कुछ दबाव आ सकता है, हालांकि सस्ता कच्चा तेल इस दबाव को कम कर सकता है।

### 6. प्रमुख ब्रोकरेज फर्मों ने रिलायंस के शेयर पर क्या टारगेट दिए हैं?
गोल्डमैन सैक्स ने खरीदारी की सलाह के साथ 1,840 रुपये का टारगेट दिया है, जबकि नोमुरा ने भी खरीदारी रेटिंग बरकरार रखते हुए 1,560 रुपये का लक्ष्य रखा है।

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