रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ से चुकाएगी 3 अरब डॉलर का कर्ज, आकाश अंबानी ने 10 करोड़ घरों तक ब्रॉडबैंड पहुंचाने का रोडमैप रखा सामने जियो प्लेटफॉर्म्स प्रस्तावित 37,000 करोड़ रुपये से बड़े आईपीओ की पूंजी से पूरी तरह कर्ज मुक्त होने की तैयारी में है। कंपनी का लक्ष्य वित्त वर्ष 2030-31 तक 1.4 ट्रिलियन डॉलर की भारतीय डिजिटल अर्थव्यवस्था में अपनी पकड़ मजबूत करना है। भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से विस्तार ले रही है और वित्त वर्ष 2030-31 तक इसके 1.4 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े तक पहुंचने का अनुमान है। इस विशाल बाजार में अपनी हिस्सेदारी और मौजूदगी को सुदृढ़ करने के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल तथा दूरसंचार शाखा, जियो प्लेटफॉर्म्स ने एक व्यापक वित्तीय एवं परिचालन योजना तैयार की है। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश अंबानी ने स्पष्ट किया है कि भविष्य की वृद्धि के लिए बाहरी उधारी पर निर्भर रहने के बजाय आंतरिक नकदी प्रवाह और परिचालन आय को मुख्य आधार बनाया जाएगा। आईपीओ की पूंजी से कर्ज मुक्त होने की रूपरेखा जियो प्लेटफॉर्म्स पर इस समय लगभग 3 अरब डॉलर का शुद्ध कर्ज बकाया है। कंपनी का विचार 37,000 करोड़ रुपये से अधिक आकार का प्रस्तावित आईपीओ लाने का है। आकाश अंबानी के अनुसार, इस सार्वजनिक निर्गम से एकत्रित होने वाली संपूर्ण राशि का इस्तेमाल देनदारियों को समाप्त करने के लिए किया जाएगा, जिससे कंपनी पूरी तरह नेट डेट-फ्री बन सकेगी। ऋण समाप्त होने के उपरांत कंपनी को वित्तीय स्वतंत्रता मिलेगी और वह अपने विस्तार कार्यों के लिए नए कर्ज लेने के दबाव से मुक्त रहेगी। इस कदम से भविष्य की सभी कारोबारी पहलों का वित्तपोषण कंपनी के अपने संचालन से उत्पन्न होने वाले मुनाफे से ही संभव हो सकेगा। मुनाफा मार्जिन और नकदी प्रवाह की स्थिति कंपनी की वित्तीय कार्यप्रणाली पर रोशनी डालते हुए आकाश अंबानी ने जानकारी दी कि जियो का लगभग 30 प्रतिशत राजस्व फ्री कैश फ्लो में परिवर्तित हो जाता है। इस सरप्लस पूंजी का उपयोग ग्राहकों के लिए आधुनिक तकनीकी सुविधाएं तैयार करने और नेटवर्क क्षमता को विस्तार देने में किया जाएगा। पिछले तीन वर्षों की अवधि में कंपनी के वित्तीय अनुशासन का असर दिखा है, जहां इसका EBITDA मार्जिन 50 प्रतिशत से बढ़कर 53 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच चुका है। प्रबंधन का मानना है कि उन्नत तकनीकों के इस्तेमाल और नए डिजिटल उत्पादों के आने से लाभप्रदता में और सुधार होगा। मोबाइल नेटवर्क, होम ब्रॉडबैंड, एंटरप्राइज समाधान और डिजिटल ऐप्लिकेशंस जैसे विविध स्रोत आने वाले दिनों में आय को रफ्तार देंगे। टैरिफ वृद्धि और सेवाओं का मूल्य संवर्धन दूरसंचार सेवाओं की दरों में बढ़ोतरी को लेकर प्रबंधन ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है। आकाश अंबानी ने स्पष्ट किया कि कंपनी के पास कीमतें बढ़ाने का विकल्प मौजूद है, परंतु जियो की पहली प्राथमिकता ग्राहकों को अधिक से अधिक उपयोगी सेवाएं प्रदान करना है। मोबाइल डेटा की दरों में मनमाना इजाफा करने के बजाय कंपनी अपनी डिजिटल सेवाओं की गुणवत्ता और दायरा बढ़ाकर राजस्व में इजाफा करने पर जोर दे रही है, जिससे ग्राहकों को उनके खर्च के बदले बेहतर अनुभव प्राप्त हो सके। ब्रॉडबैंड विस्तार और वैश्विक अवसर होम ब्रॉडबैंड श्रेणी में जियो ने अपनी पहुंच को कई गुना बढ़ाने की रणनीति बनाई है। कंपनी की UBR तकनीक ने संभावित ब्रॉडबैंड बाजार को 4 करोड़ घरों से बढ़ाकर सीधे 10 करोड़ घरों तक पहुंचा दिया है। इस वायरलेस तकनीक की सहायता से किसी भी उपभोक्ता द्वारा मांग किए जाने के 48 घंटे के भीतर ब्रॉडबैंड कनेक्शन सक्रिय किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, जियो अपनी घरेलू सीमाओं से बाहर निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पैर पसारने की दिशा में काम कर रही है। इसके तहत विदेशी दूरसंचार कंपनियों के साथ साझेदारी स्थापित की जाएगी, जिससे भारतीय धरती पर विकसित अत्याधुनिक तकनीकों को वैश्विक मंच पर उतारा जा सके। इसका आप पर असर जियो की इस वित्तीय और विस्तार योजना का सीधा असर देश के इंटरनेट उपभोक्ताओं और शेयर बाजार के निवेशकों पर पड़ेगा। • ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी: देश के 10 करोड़ घरों तक ब्रॉडबैंड पहुंचने की क्षमता विकसित होने से सुदूर इलाकों में भी तेज इंटरनेट पहुंचेगा। आवेदन करने के 48 घंटे के भीतर बिना तार बिछाए वायरलेस ब्रॉडबैंड कनेक्शन शुरू हो सकेगा। • टैरिफ और मोबाइल बिल: कंपनी डेटा के दाम अचानक बढ़ाने के बजाय सेवाओं का मूल्य बढ़ाने पर ध्यान दे रही है। इसका मतलब है कि मोबाइल उपयोगकर्ताओं को तुरंत भारी टैरिफ बढ़ोतरी का सामना नहीं करना पड़ेगा। • शेयर बाजार और निवेशक: प्रस्तावित 37,000 करोड़ रुपये से बड़ा आईपीओ भारतीय प्राथमिक बाजार में बड़ा अवसर लाएगा। कंपनी के कर्ज मुक्त होने से लंबी अवधि के शेयरधारकों को मजबूत बैलेंस शीट का लाभ मिल सकता है। • वैश्विक स्तर पर भारतीय तकनीक: विदेशी कंपनियों के साथ साझेदारी से भारतीय डिजिटल समाधान अंतरराष्ट्रीय बाजारों में पहुंचेंगे। इससे देश के टेक इकोसिस्टम में नए रोजगार और कारोबारी अवसर पैदा होंगे। ऐसा क्यों हुआ जियो प्लेटफॉर्म्स द्वारा आईपीओ और विस्तार की यह योजना भारतीय अर्थव्यवस्था के डिजिटलीकरण और कंपनी की वित्तीय देनदारियों को समाप्त करने के उद्देश्य से बनाई गई है। • कर्ज खत्म करने का लक्ष्य: कंपनी पर वर्तमान में लगभग 3 अरब डॉलर का शुद्ध ऋण मौजूद है। 37,000 करोड़ रुपये से अधिक के आईपीओ से प्राप्त धन का उपयोग इस पूरे कर्ज को चुकाकर कंपनी को पूर्णतः ऋण-मुक्त बनाने के लिए किया जा रहा है। • डिजिटल अर्थव्यवस्था की विशाल संभावना: वित्त वर्ष 2030-31 तक भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था 1.4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इस बढ़ते बाजार में शीर्ष स्थान बनाए रखने के लिए कंपनी को व्यापक पूंजी और मजबूत बुनियादी ढांचे की आवश्यकता है। • वित्तीय आत्मनिर्भरता की नीति: कंपनी अपने 30 प्रतिशत फ्री कैश फ्लो और 53 प्रतिशत EBITDA मार्जिन के सहारे काम करना चाहती है। बाहरी उधारी लेने के बजाय अपने ही मुनाफे से भविष्य के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की रणनीति तय की गई है। सवाल-जवाब 1. जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रस्तावित आईपीओ का अनुमानित आकार क्या है? जियो प्लेटफॉर्म्स का प्रस्तावित आईपीओ 37,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का हो सकता है। 2. आईपीओ से मिलने वाले पैसे का कंपनी क्या करेगी? कंपनी इस रकम का पूरा इस्तेमाल अपने 3 अरब डॉलर के नेट कर्ज को चुकाने और खुद को कर्ज-मुक्त बनाने के लिए करेगी। 3. जियो का होम ब्रॉडबैंड लक्ष्य क्या है? UBR तकनीक के जरिए कंपनी ने अपने होम ब्रॉडबैंड के दायरे को 4 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ घरों तक पहुंचाने की योजना बनाई है। 4. मांग करने पर नया ब्रॉडबैंड कनेक्शन कितने समय में मिल सकता है? आकाश अंबानी के अनुसार, यूबीआर तकनीक की मदद से ग्राहक की मांग के 48 घंटे के भीतर वायरलेस ब्रॉडबैंड कनेक्शन दिया जा सकता है। 5. पिछले तीन वर्षों में कंपनी के EBITDA मार्जिन में क्या बदलाव आया? पिछले तीन सालों में जियो का EBITDA मार्जिन 50 प्रतिशत से बढ़कर 53 प्रतिशत पर पहुंच गया है। https://trendkia.com/business/reliance-jio-platforms-aipio-se-chukaegi-3-araba-dolara-ka-karja-akash-ambani-ne-10-karora-gharon-taka-brodabainda-pahunchane-ka-r-48360 TrendKia — Har trend, sabse pehle.