# रूसी कच्चे तेल की वैश्विक खरीद में शीर्ष पर रहा भारत, सितंबर में हर दिन मंगाया 18.2 लाख बैरल क्रूड

> सितंबर महीने में भारत रूसी कच्चे तेल का दुनिया में सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा, जहां प्रतिदिन 18.2 लाख बैरल का आयात दर्ज किया गया।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-10-14 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/rusi-kachche-tela-ki-vaishvika-kharida-men-shirsha-para-raha-india-sitnbara-men-hara-dina-mngaya-18-2-lakha-bairala-kruda-47417 · **Language:** Hindi
**Tags:** कच्चा तेल, रूस भारत तेल व्यापार, रिलायंस इंडस्ट्रीज, जामनगर रिफाइनरी, वेनेजुएला तेल, ऊर्जा सुरक्षा, क्रूड ऑयल आयात

अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी प्रतिबंधों और टैरिफ की चेतावनियों के बीच भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने रूस से कच्चे तेल का भारी आयात जारी रखा है। सितंबर के दौरान भारत वैश्विक स्तर पर रूसी क्रूड का सबसे बड़ा खरीदार दर्ज किया गया। हालांकि, साल के मध्य में देखे गए रिकॉर्ड उच्चस्तर की तुलना में हाल के महीनों में कुल उठान में नरमी आई है। जहाजों के ट्रैकिंग डेटा और शिपमेंट विश्लेषण के अनुसार, चीन की ओर से बढ़ती मांग और रूस में तेल की सीमित उपलब्धता के कारण इस आयात की रफ्तार में कुछ बदलाव देखने को मिला है।

## सितंबर में भारत और चीन के आयात का अंतर
सितंबर में भारत ने रूस से औसतन लगभग 18.2 लाख बैरल कच्चा तेल प्रतिदिन आयात किया। इसी अवधि के दौरान चीन का रूसी क्रूड आयात लगभग 14.9 लाख बैरल प्रतिदिन दर्ज किया गया। इससे पहले जून के महीने में भारत ने रूस से रोजाना 26 लाख बैरल और जुलाई में 25.7 लाख बैरल कच्चे तेल का भारी आयात किया था। जुलाई के इस शिखर स्तर से तुलना करें तो सितंबर तक आते-आते दैनिक आवक में करीब 29 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वहीं अगस्त में भारत ने रूस से रोजाना 20.2 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा था।

## आयात में कमी के पीछे भू-राजनीति के अलावा आपूर्ति कारक
विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि हाल के महीनों में आई इस गिरावट को केवल अमेरिकी टैरिफ या प्रतिबंधों के दबाव के तौर पर नहीं देखा जा सकता। इस बदलाव में रूसी तेल की सीमित उपलब्धता और चीनी कंपनियों की तरफ से बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने प्रमुख भूमिका निभाई है। बाजार के जानकारों के मुताबिक चीन की रिफाइनरियों ने हाल ही में रूस से अपनी खरीद को रफ्तार दी है। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि चीन को ईरान से मिलने वाले कच्चे तेल की आपूर्ति में कमी आई है, जिससे उसने रूसी बाजारों का रुख तेज कर दिया। मौजूदा समुद्री शिपमेंट के आंकड़ों के आधार पर यह अनुमान है कि अक्टूबर में भी भारत का रूसी कच्चे तेल का दैनिक आयात 18 से 19 लाख बैरल के दायरे में ही स्थिर रहेगा।

## वेनेजुएला से भी कच्चे तेल का विकल्प तलाश रहा भारत
अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने के प्रयास के तहत भारत ने इस साल वेनेजुएला से भी कच्चे तेल का आयात बढ़ाया है। पिछले कई वर्षों तक वेनेजुएला से भारत का तेल आयात लगभग नगण्य रहा था, लेकिन इस साल अप्रैल के बाद से आपूर्ति में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके बावजूद वेनेजुएला के कच्चे तेल का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय खरीदार अब भी अमेरिका ही बना हुआ है।

अगस्त के दौरान वेनेजुएला ने भारत को प्रतिदिन करीब 2.5 लाख बैरल कच्चे तेल का निर्यात किया, जो सितंबर में बढ़कर लगभग 2.57 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया। इसी समान समयावधि में अमेरिका को वेनेजुएला से होने वाला तेल निर्यात क्रमशः 4.52 लाख बैरल प्रतिदिन और 5.63 लाख बैरल प्रतिदिन दर्ज किया गया था।

## जामनगर रिफाइनरी की तकनीकी क्षमता और भूमिका
भारत में वेनेजुएला से आने वाले कच्चे तेल की प्रमुख खरीदार रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी बनी हुई है। रिफाइनरी के बुनियादी ढांचे और अत्याधुनिक शोधन क्षमता को देखते हुए यह उम्मीद जताई जा रही है कि वह आगे भी इसकी प्रमुख आयातक बनी रहेगी। दरअसल, वेनेजुएला का कच्चा तेल भारी और अत्यधिक भारी ग्रेड की श्रेणी में आता है, जिसका शोधन तकनीकी रूप से काफी जटिल होता है। भारत की अधिकांश साधारण रिफाइनरियां इस भारी ग्रेड के तेल को प्रोसेस करने के लिए उपयुक्त नहीं हैं, जिसके कारण जामनगर जैसी उन्नत सुविधाएं ही इसका प्रभावी इस्तेमाल कर पाती हैं।

## इसका आप पर असर
भारत की निरंतर तेल खरीद सीधे तौर पर घरेलू ईंधन की कीमतों और राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा को स्थिर रखने में मदद करती है।

- **ईंधन की कीमतें:** रूस से रियायती दरों पर कच्चे तेल का लगातार आयात भारत के आयात बिल को नियंत्रित रखने में सहायक है। इससे पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में अचानक भारी उछाल आने का जोखिम कम रहता है।
- **आपूर्ति स्थिरता:** भारतीय रिफाइनरियों द्वारा रूस के साथ-साथ वेनेजुएला से तेल मंगाने से आपूर्ति के स्रोतों में विविधता बनी रहती है। किसी एक देश पर निर्भरता न होने से वैश्विक संकट के समय भी देश में ईंधन की किल्लत नहीं होती।
- **मुद्रा विनिमय और अर्थव्यवस्था:** भारी मात्रा में ऊर्जा का प्रबंधन घरेलू रिफाइनिंग क्षेत्र के मुनाफे को मजबूत करता है। इससे भारत के चालू खाता घाटे और रुपये की स्थिरता को अप्रत्यक्ष सहारा मिलता है।
- **उपभोक्ताओं पर प्रभाव:** स्थिर थोक ईंधन लागत से माल ढुलाई और सार्वजनिक परिवहन के खर्च नियंत्रित रहते हैं। आम नागरिकों के लिए यह रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की महंगाई को थामने में मदद करता है।

## ऐसा क्यों हुआ
सितंबर में भारत के रूसी तेल आयात में पहले के चरम स्तर से कमी आने के पीछे कूटनीतिक दबाव के बजाय वैश्विक बाजार की प्रतिस्पर्धा और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी सीमाएं मुख्य कारण रहीं।

- **रूस में सीमित आपूर्ति:** रूस में उत्पादन स्तर और निर्यात योग्य क्रूड की मात्रा में कमी देखी गई। इस सीमित उपलब्धता के कारण एशियाई बाजारों के लिए अतिरिक्त अधिशेष सीमित रह गया।
- **चीन से बढ़ती मांग:** ईरान से आपूर्ति घटने के चलते चीनी रिफाइनरियों ने रूसी तेल की खरीद तेजी से बढ़ाई। इसके कारण उपलब्ध कार्गो के लिए दोनों बड़े एशियाई खरीदारों के बीच सीधी प्रतिस्पर्धा बन गई।
- **वेनेजुएला से अतिरिक्त विकल्प:** भारतीय रिफाइनरियों ने अपने क्रूड बास्केट में विविधता लाने के लिए वेनेजुएला से भी आपूर्ति बहाल की। विशेष रूप से भारी क्रूड को प्रोसेस करने वाली रिफाइनरियों को वैकल्पिक स्रोत उपलब्ध हुए।

## सवाल-जवाब

### 1. सितंबर में भारत ने रूस से कितना कच्चा तेल आयात किया?
भारत ने सितंबर में रूस से औसतन लगभग 18.2 लाख बैरल कच्चा तेल प्रतिदिन आयात किया।

### 2. सितंबर में रूसी तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार कौन सा देश था?
चीन लगभग 14.9 लाख बैरल प्रतिदिन के आयात के साथ दूसरा सबसे बड़ा खरीदार रहा।

### 3. जुलाई के शिखर स्तर की तुलना में सितंबर में कितनी गिरावट आई?
जुलाई के 25.7 लाख बैरल प्रतिदिन के स्तर से सितंबर में करीब 29 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

### 4. अक्टूबर के लिए भारत के रूसी तेल आयात का क्या अनुमान है?
मौजूदा शिपमेंट डेटा के अनुसार अक्टूबर में आयात प्रतिदिन 18 से 19 लाख बैरल के बीच रहने का अनुमान है।

### 5. वेनेजुएला के कच्चे तेल की मुख्य खरीदार भारत की कौन सी रिफाइनरी है?
रिलायंस इंडस्ट्रीज की जामनगर रिफाइनरी वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल की प्रमुख खरीदार है।

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