# कर्ज माफी पर सरकार का बड़ा बयान, जानिए संसद में क्या हुआ

> संसद में कृषि ऋण माफी को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल देशव्यापी कर्ज माफी की कोई योजना नहीं है, लेकिन संकट में फंसे किसानों के लिए राहत के अन्य विकल्प मौजूद हैं।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-07-28 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/sarakara-ka-karja-maphi-para-bara-bayana-11234 · **Language:** Hindi
**Tags:** कर्ज माफी, कृषि ऋण, पंकज चौधरी, लोकसभा, किसान कर्ज, भारतीय रिजर्व बैंक, तमिलनाडु कृषि लोन

छोटे किसानों के कर्ज को लेकर सरकार ने संसद में अपनी स्थिति साफ कर दी है। तमिलनाडु के विलुप्पुरम से विपक्षी सांसद डॉ. डी. रवि कुमार ने लोकसभा में कृषि लोन माफी के मुद्दे पर केंद्र सरकार से कई तीखे सवाल किए थे। उन्होंने यह मांग उठाई थी कि नेशनलाइज्ड बैंकों से कर्ज लेने वाले किसानों के बकाए को माफ करने पर गंभीरता से विचार किया जाए। सांसद ने यह भी सवाल उठाया कि जब तमिलनाडु समेत देश के कई अन्य राज्यों की सरकारों ने सहकारी बैंकों के जरिए किसानों के फसल लोन माफ कर दिए हैं, तो पब्लिक सेक्टर के बैंकों द्वारा दिए गए कृषि लोन पर वैसी ही राहत क्यों नहीं दी जा रही है। इन तमाम सवालों के जवाब में सरकार की तरफ से किसानों के कर्ज को लेकर एक विस्तृत अपडेट सामने आया है।

## क्या देश भर के किसानों को कर्ज से मिलेगी राहत
संसद में दिए गए आधिकारिक जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र सरकार के पास फिलहाल छोटे और सीमांत किसानों का कर्ज एकमुश्त माफ करने का कोई भी प्लान विचाराधीन नहीं है। इसका सीधा मतलब यह है कि अभी पूरे देश के स्तर पर किसानों के लिए किसी भी तरह की सामूहिक कर्ज माफी का फैसला नहीं लिया गया है। हालांकि सरकार ने यह भी साफ किया है कि जिन किसानों या अन्य कर्जधारकों को अपना लोन चुकाने में गंभीर वित्तीय परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, उनके लिए राहत के दरवाजे पूरी तरह से बंद नहीं किए गए हैं। संकट में फंसे कर्जदारों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI के नियमों के तहत सहायता के अन्य रास्ते खुले हुए हैं।

## संकटग्रस्त किसानों के लिए राहत के नियम
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद को अवगत कराया कि भारतीय रिजर्व बैंक ने ऐसे तमाम मामलों के लिए विशेष दिशा-निर्देश और नियम तय किए हुए हैं। इन स्थापित नियमों के दायरे में रहते हुए बैंक और तमाम वित्तीय संस्थान जरूरत पड़ने पर कर्ज की मूल शर्तों में बदलाव कर सकते हैं, किस्तों का रिस्ट्रक्चर कर सकते हैं या फिर अन्य जरूरी वित्तीय राहत मुहैया करा सकते हैं। सरकार का मुख्य रुख यह है कि थोक में कर्ज माफ करने की बजाय जरूरतमंद किसानों को स्थापित नियमों के तहत व्यावहारिक राहत दी जाए और उनकी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं।

## किन राज्यों के किसानों पर है सबसे ज्यादा कर्ज
देश के विभिन्न राज्यों में कृषि ऋण के आंकड़े काफी चौंकाने वाले हैं। आंकड़ों के मुताबिक, देश में कृषि लोन का सबसे बड़ा बकाया तमिलनाडु राज्य में दर्ज किया गया है, जहां के किसानों के सिर पर लगभग 3.45 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम कर्ज है। इसके बाद दूसरे नंबर पर आंध्र प्रदेश है जहां किसानों पर 2.69 लाख करोड़ रुपये का बकाया है। इस सूची में उत्तर प्रदेश 1.39 लाख करोड़ रुपये के साथ तीसरे स्थान पर है, जबकि कर्नाटक में कृषि ऋण का यह आंकड़ा 1.35 लाख करोड़ रुपये और महाराष्ट्र में 1.33 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।

इसके अलावा देश के बाकी प्रमुख राज्यों की स्थिति भी कम चिंताजनक नहीं है। तेलंगाना में कृषि ऋण का कुल बकाया 1.15 लाख करोड़ रुपये है, केरल के किसानों पर 91,141 करोड़ रुपये का कर्ज है, राजस्थान में यह राशि 88,599 करोड़ रुपये दर्ज की गई है, मध्य प्रदेश में 79,354 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया है और गुजरात में किसानों पर 74,177 करोड़ रुपये का कृषि ऋण बाकी है। ये तमाम आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि देश के लगभग सभी बड़े कृषि प्रधान राज्यों में किसानों के ऊपर कर्ज का वित्तीय बोझ अभी भी बहुत ऊंचे स्तर पर बना हुआ है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** देश भर के किसानों को तत्काल थोक कर्ज माफी का लाभ नहीं मिलेगा, लेकिन जिन्हें भुगतान में दिक्कत है वे बैंक के माध्यम से लोन रिस्ट्रक्चरिंग का विकल्प चुन सकते हैं।

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