# सरकारी तेल कंपनियों को तगड़ा झटका: कच्चे तेल की कीमतों ने निकाला हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम का दिवाला

> लगातार मुनाफे में रहने वाली देश की प्रमुख तेल कंपनियां एचपीसीएल और बीपीसीएल अप्रैल-जून तिमाही में भारी घाटे में पहुंच गई हैं। मध्य पूर्व में तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में आए भारी उछाल और खुदरा ईंधन के दाम स्थिर रहने से कंपनियों को हजारों करोड़ का नुकसान हुआ है।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-07-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/sarakari-tela-knpaniyon-ko-tagara-jhataka-kachche-tela-ki-kimaton-ne-nikala-hindustan-petroleum-aura-bharat-petroleum-ka-divala-9979 · **Language:** Hindi
**Tags:** हिंदुस्तान पेट्रोलियम, भारत पेट्रोलियम, कच्चा तेल, तिमाही नतीजे, पेट्रोल डीजल की कीमतें, शेयर बाजार

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही ने भारत की प्रमुख सरकारी तेल विपणन कंपनियों, हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल) और भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल) के निवेशकों को एक बड़ा झटका दिया है। मध्य पूर्व में जारी तनाव और घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतों में लंबे समय तक कोई बदलाव न होने के कारण दोनों कंपनियों की वित्तीय स्थिति बुरी तरह चरमरा गई है। जो कंपनियां पिछले साल इसी अवधि में हजारों करोड़ रुपये का मुनाफा कमा रही थीं, वे अब अप्रैल-जून तिमाही में भारी घाटे में डूब गई हैं। इन नतीजों से साफ हो गया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा और गंभीर असर इन कंपनियों की बैलेंस शीट पर पड़ता है।

## मध्य पूर्व का संकट और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

इस भारी वित्तीय नुकसान की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जुड़ी है। मध्य पूर्व में बढ़े संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र में उथल-पुथल मचा दी, जिसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 50 फीसदी से ज्यादा का भारी उछाल दर्ज किया गया। कच्चे तेल की बढ़ती लागत ने इन कंपनियों के मार्जिन पर सीधा प्रहार किया। इस भारी वृद्धि के बावजूद, सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों को स्थिर रखा। करीब ढाई महीने तक देश भर के पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया। हालांकि, इस लंबी अवधि के बाद कीमतों में कुछ बढ़ोतरी की गई, लेकिन यह मामूली वृद्धि कच्चे तेल की बढ़ी हुई लागत की भरपाई करने के लिए किसी भी तरह से पर्याप्त नहीं थी। इसी का नतीजा है कि इन कंपनियों को भारी वित्तीय बोझ उठाना पड़ा।

## एचपीसीएल को लगा सबसे बड़ा झटका

अगर हम हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल) के आंकड़ों पर नजर डालें, तो नुकसान की गंभीरता का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। अप्रैल-जून 2026 तिमाही में एचपीसीएल ने 12,265 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड नेट लॉस (शुद्ध घाटा) दर्ज किया है। यह आंकड़ा इसलिए भी चौंकाने वाला है क्योंकि पिछले साल ठीक इसी तिमाही में कंपनी ने 4,111 करोड़ रुपये का शानदार मुनाफा कमाया था। दिलचस्प बात यह है कि कंपनी का राजस्व घटा नहीं, बल्कि बढ़ा है। इस तिमाही में एचपीसीएल का परिचालन राजस्व 21 फीसदी की छलांग लगाकर 1.45 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। लेकिन, कच्चे तेल की बढ़ती लागत और स्थिर खुदरा कीमतों के कारण यह बढ़ा हुआ राजस्व मुनाफे में नहीं बदल सका और कंपनी की सारी कमाई खत्म हो गई। इसके अलावा, एलपीजी सिलेंडर की बिक्री ने भी कंपनी को गहरा घाटा दिया है। अकेले इस तिमाही में एचपीसीएल ने एलपीजी अंडर-रिकवरी के तौर पर 3,607 करोड़ रुपये का नुकसान झेला है।

## बीपीसीएल के मुनाफे का सिलसिला टूटा

भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल) की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। कंपनी के लिए यह तिमाही इसलिए भी निराशाजनक रही क्योंकि इसने मुनाफे के एक लंबे सिलसिले को तोड़ दिया है। लगातार 15 तिमाहियों तक फायदे में रहने के बाद, बीपीसीएल को इस तिमाही में 3,962 करोड़ रुपये का भारी शुद्ध घाटा उठाना पड़ा है। पिछले साल इसी अवधि में कंपनी 6,123 करोड़ रुपये के मजबूत मुनाफे में थी। एचपीसीएल की तरह ही बीपीसीएल के कुल राजस्व में भी बढ़ोतरी देखी गई, जो बढ़कर 1.59 लाख करोड़ रुपये हो गया। लेकिन पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर हुए भारी नुकसान ने इस पूरे राजस्व को निगल लिया। एलपीजी बिक्री के मोर्चे पर बीपीसीएल को भी बड़ा झटका लगा, जहां कंपनी ने 3,485 करोड़ रुपये की एलपीजी अंडर-रिकवरी दर्ज की है।

## रिफाइनिंग में मुनाफा, लेकिन मार्केटिंग में डूबी कमाई

इन कंपनियों के कामकाज के तरीके ने एक अजीब स्थिति पैदा कर दी। कच्चे तेल को पेट्रोल-डीजल में बदलने वाले रिफाइनिंग व्यवसाय ने वास्तव में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया। उदाहरण के लिए, एचपीसीएल का ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (प्रति बैरल कच्चे तेल को रिफाइन करने पर होने वाला मुनाफा) बढ़कर 23.80 डॉलर प्रति बैरल के शानदार स्तर पर पहुंच गया। सामान्य परिस्थितियों में, इतने बेहतरीन रिफाइनिंग मार्जिन से कंपनियों को बंपर मुनाफा होता। लेकिन ये कंपनियां ईंधन बेचती भी हैं, और पेट्रोल, डीजल व एलपीजी की खुदरा बिक्री पर उन्हें जो भारी नुकसान उठाना पड़ा, उसने रिफाइनिंग से होने वाले सारे मुनाफे को पूरी तरह से धो डाला।

## भविष्य के निवेश और ईंधन सप्लाई पर जोर

इस भारी वित्तीय दबाव और चुनौतीपूर्ण हालात के बावजूद, दोनों सरकारी तेल कंपनियों के प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने देश की ऊर्जा सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया है। एचपीसीएल और बीपीसीएल दोनों का कहना है कि इतने भारी घाटे के बाद भी उन्होंने पूरे देश में ईंधन की सप्लाई को बिल्कुल भी बाधित नहीं होने दिया। इसके साथ ही, भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए कंपनियों ने अपने निवेश को भी जारी रखा है। दोनों कंपनियां अपनी रिफाइनिंग क्षमता को बढ़ाने, नई परियोजनाओं को पूरा करने और अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में लगातार पूंजी निवेश कर रही हैं।

## इसका आप पर असर
- **निवेशकों के लिए:** भारी मुनाफे से अचानक हजारों करोड़ के नुकसान में जाने की खबर सरकारी तेल कंपनियों के शेयरों के लिए एक नकारात्मक (बेयरिश) संकेत है।
- **आम उपभोक्ताओं के लिए:** अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम स्थिर नहीं हुए, तो कंपनियों के इस भारी घाटे की भरपाई के लिए भविष्य में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी की जा सकती है।

## सवाल-जवाब

### 1. हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम को इतना भारी नुकसान क्यों हुआ?
मध्य पूर्व संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतों में 50% से अधिक का उछाल आया, जबकि लगभग ढाई महीने तक पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के खुदरा दाम स्थिर रखे गए, जिससे कंपनियों को हजारों करोड़ का नुकसान हुआ।

### 2. अप्रैल-जून 2026 तिमाही में एचपीसीएल (HPCL) का शुद्ध घाटा कितना रहा?
इस तिमाही में एचपीसीएल ने 12,265 करोड़ रुपये का कंसोलिडेटेड शुद्ध घाटा (नेट लॉस) दर्ज किया है।

### 3. बीपीसीएल (BPCL) को इस तिमाही में कुल कितना घाटा हुआ?
लगातार 15 तिमाहियों के मुनाफे के बाद, बीपीसीएल को इस तिमाही में 3,962 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ है।

### 4. क्या इन कंपनियों को रिफाइनिंग से कोई मुनाफा हुआ था?
हाँ, कंपनियों को रिफाइनिंग व्यवसाय से अच्छी कमाई हुई, जहाँ एचपीसीएल का ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन 23.80 डॉलर प्रति बैरल रहा, लेकिन पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर हुए भारी नुकसान ने इस पूरे मुनाफे को खत्म कर दिया।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._