# सर्राफा बाजार में लुढ़के कीमती धातुओं के दाम, पांचवें दिन भी कमजोर पड़ा सोना और चांदी में आई तेज गिरावट

> दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने की कीमतें लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में गिरकर ₹1,52,400 प्रति 10 ग्राम पर आ गईं, जबकि चांदी ₹5,000 टूटकर ₹2.37 लाख प्रति किलोग्राम पर बंद हुई।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-09-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/sarrapha-bajara-men-lurhake-kimati-dhatuon-ke-dama-panchaven-dina-bhi-kamajora-para-gold-aura-silver-men-ai-teja-giravata-38295 · **Language:** Hindi
**Tags:** सोना, चांदी, सर्राफा बाजार, सोने का भाव, चांदी का भाव, कमोडिटी, दिल्ली सर्राफा

घरेलू सर्राफा बाजार में कीमती धातुओं के दामों में नरमी का दौर लगातार बना हुआ है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के हाजिर बाजार में लगातार पांचवें कारोबारी सत्र के दौरान सोने की कीमतों में कमजोरी दर्ज की गई। बीते पांच कारोबारी दिनों के भीतर 10 ग्राम सोने के भाव में लगभग ₹3,600 तक की कमी आ चुकी है। ताजा सत्र में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना ₹1,600 की गिरावट के साथ ₹1,52,400 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बंद हुआ। इसके साथ ही पिछले दो कारोबारी दिनों तक स्थिर रहने के बाद चांदी के भाव में भी तेज बिकवाली देखने को मिली है।

## दिल्ली सर्राफा में सोने की चाल
राष्ट्रीय राजधानी के हाजिर कारोबार में 99.9 फीसदी शुद्धता वाले सोने की कीमत में ₹1,600 की कमी आई, जिससे इसका भाव घटकर ₹1,52,400 प्रति 10 ग्राम रह गया। इससे पिछले कारोबारी सत्र में यह ₹1.54 लाख प्रति 10 ग्राम पर टिका हुआ था। यदि पिछले पांच कारोबारी सत्रों के रुझान को देखें, तो पांच दिन पहले सोने का भाव करीब ₹1.56 लाख प्रति 10 ग्राम दर्ज किया गया था। इस अवधि में कुल मिलाकर पीली धातु करीब ₹3,600 सस्ती हुई है। बाजार के जानकारों और कारोबारियों के अनुसार, रिकॉर्ड स्तरों पर लगातार चल रही मुनाफावसूली और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेतों ने कीमतों पर यह दबाव बनाया हुआ है।

## चांदी की कीमतों में ₹5,000 की तेज गिरावट
सोने के साथ-साथ चांदी में भी जोरदार बिकवाली दर्ज की गई है। पिछले दो कारोबारी सत्रों से स्थिर चल रही चांदी ₹5,000 प्रति किलोग्राम फिसल गई। इस तेज गिरावट के बाद चांदी का भाव गिरकर ₹2.37 लाख प्रति किलोग्राम पर आ गया, जबकि इससे पिछले कारोबारी सत्र में यह ₹2.42 लाख प्रति किलोग्राम के भाव पर बंद हुआ था। बाजार विश्लेषकों का स्पष्ट करना है कि चांदी में सोने के मुकाबले उतार-चढ़ाव काफी अधिक देखा जाता है। इसके अलावा औद्योगिक उपयोग से सीधे जुड़े होने की वजह से वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और उत्पादन के रुझानों का सीधा असर चांदी की मांग और कीमतों पर पड़ता है।

## मजबूत डॉलर और बॉन्ड यील्ड का असर
कमजोर अंतरराष्ट्रीय संकेतों और घरेलू स्तर पर खरीदारी की धीमी रफ्तार के बीच यह गिरावट सामने आई है। विदेशी बाजारों में अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई तेजी ने भी सोने और चांदी दोनों पर दबाव बढ़ाया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना लगभग 1 फीसदी फिसलकर 4,253.61 डॉलर प्रति औंस के भाव पर पहुंच गया। वहीं दूसरी ओर विदेशी बाजार में चांदी 1.4 फीसदी की गिरावट के साथ 63.56 डॉलर प्रति औंस पर दर्ज की गई।

## कच्चे तेल में उछाल से बढ़ी चिंताएं
ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी सर्राफा बाजार के लिए नई अनिश्चितता पैदा कर रही हैं। पश्चिम एशिया में आपूर्ति बाधाओं को लेकर बनी चिंताओं के कारण ब्रेंट क्रूड उछलकर लगभग 106 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के महंगे होने से दुनिया भर में महंगाई की दर बढ़ने की आशंका पैदा होती है, जिससे विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में कटौती करने की गुंजाइश सीमित हो जाती है।

## इसका आप पर असर
सर्राफा बाजार में सोने और चांदी के दामों में आई यह गिरावट आभूषण खरीदारों और खुदरा निवेशकों के खर्च को सीधे प्रभावित करती है।

- **खरीदारों के लिए:** सोने और चांदी के जेवर खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों को पिछले पांच दिनों के मुकाबले कम कीमत चुकानी होगी। 10 ग्राम सोने पर सीधे ₹3,600 की बचत हो रही है, जिससे आगामी पारिवारिक खरीदारी का बजट हल्का हो सकता है।
- **मौजूदा निवेशकों के लिए:** ऊंचे स्तरों पर कीमती धातुओं में निवेश करने वालों के पोर्टफोलियो पर तात्कालिक असर पड़ सकता है। मुनाफावसूली के इस दौर में नए निवेशक कीमतों के स्थिर होने तक सतर्क रुख अपना सकते हैं।
- **औद्योगिक उपयोग:** चांदी के दामों में ₹5,000 प्रति किलोग्राम की गिरावट से इलेक्ट्रॉनिक्स और विनिर्माण क्षेत्र को कच्चा माल सस्ता मिलेगा। इससे संबंधित औद्योगिक उत्पादों की इनपुट लागत में फौरी राहत मिल सकती है।
- **आगामी महंगाई का असर:** कच्चा तेल 106 डॉलर प्रति बैरल पहुंचने से घरेलू बाजार में परिवहन और रोजमर्रा की चीजों पर महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। इसके चलते केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती टलने की संभावना बन सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संकेतकों, मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव और घरेलू स्तर पर कमजोर मांग के मिले-जुले असर से हुई है।

- **मुनाफावसूली का दौर:** हाल के महीनों में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद दोनों धातुओं में निवेशकों ने बड़े पैमाने पर मुनाफा निकालना शुरू किया। घरेलू बाजार में पांच दिनों में सोने का भाव ₹1.56 लाख से गिरकर ₹1,52,400 प्रति 10 ग्राम पर आ गया।
- **डॉलर और यील्ड में मजबूती:** अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़त दर्ज होने से सर्राफा पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया। विदेशी हाजिर बाजार में सोना गिरकर 4,253.61 डॉलर और चांदी 63.56 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।
- **कच्चे तेल से उपजी चिंताएं:** पश्चिम एशिया में आपूर्ति संकट के चलते ब्रेंट क्रूड 106 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। महंगे तेल से मुद्रास्फीति बढ़ने और केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना घटने के डर ने भी जोखिम से जुड़ी धातुओं को प्रभावित किया।

## सवाल-जवाब

### 1. दिल्ली के बाजार में 10 ग्राम सोने का ताजा भाव क्या है?
दिल्ली के सर्राफा बाजार में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना ₹1,600 टूटकर ₹1,52,400 प्रति 10 ग्राम पर आ गया है।

### 2. बीते पांच कारोबारी सत्रों में सोने की कीमतों में कुल कितनी गिरावट आई है?
पांच कारोबारी सत्र पहले ₹1.56 लाख के स्तर से गिरकर सोना लगभग ₹3,600 प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो चुका है।

### 3. चांदी की कीमत घटकर किस स्तर पर पहुंच गई है?
चांदी के भाव में ₹5,000 की तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे इसका भाव ₹2.37 लाख प्रति किलोग्राम रह गया।

### 4. अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड और सिल्वर के दाम क्या रहे?
वैश्विक बाजार में हाजिर सोना लगभग 1 फीसदी गिरकर 4,253.61 डॉलर प्रति औंस और चांदी 1.4 फीसदी टूटकर 63.56 डॉलर प्रति औंस पर आ गई।

### 5. कच्चे तेल की कीमतों का बुलियन बाजार पर क्या प्रभाव पड़ रहा है?
ब्रेंट क्रूड के 106 डॉलर प्रति बैरल पहुंचने से दुनिया भर में महंगाई बढ़ने और ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश कम होने की चिंता बढ़ी है।

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