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  "type": "article",
  "title": "विदेशी निवेशकों के लिए सेबी ने आसान किए नियम, बढ़ाई केवाईसी रिव्यू की समयसीमा",
  "summary": "भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी के बीच सेबी ने बड़ी राहत देते हुए केवाईसी नियमों में ढील दी है। कैटेगरी 1 और 2 के एफपीआई के लिए रिव्यू अवधि बढ़ाई गई है और रजिस्ट्रेशन के समय अतिरिक्त पुष्टि की शर्त हटा दी गई है।",
  "content": "भारतीय शेयर बाजार में बीते कुछ समय से विदेशी संस्थागत निवेशकों की जबरदस्त बिकवाली देखने को मिल रही थी। घरेलू बाजार से लाखों करोड़ रुपये की निकासी के चलते प्रमुख सूचकांक लगातार दबाव में थे और लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। बाजार नियामक सेबी के कई सख्त नियमों के कारण भी विदेशी निवेशक असहज महसूस कर रहे थे और अपने निवेश को अधिक आसान तथा सुरक्षित बाजारों की तरफ ले जा रहे थे। इस स्थिति को देखते हुए भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी सेबी ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिए नियमों को काफी सरल बना दिया है।\n\nकेवाईसी समीक्षा की अवधि में बड़ा बदलाव\nविदेशी निवेशकों की लंबे समय से यह शिकायत थी कि उन्हें बेहद कम अंतराल पर बार-बार केवाईसी की जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। सेबी ने इस परेशानी का समाधान निकालते हुए केवाईसी रिव्यू की समयसीमा को काफी आगे बढ़ा दिया है। इससे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को बार-बार दस्तावेजों की जांच कराने की भागदौड़ से मुक्ति मिलेगी और उनका संचालन आसान होगा।\n\nनियामक के नए फैसले के तहत कैटेगरी 1 के विदेशी निवेशकों के लिए जो केवाईसी रिव्यू पहले हर 1 साल में कराना जरूरी होता था, उसकी मियाद अब बढ़ाकर हर 2 साल कर दी गई है। वहीं कैटेगरी 2 के निवेशकों को सबसे बड़ा फायदा मिला है। पहले इस वर्ग के निवेशकों को हर 3 साल में यह प्रक्रिया दोहरानी पड़ती थी, जिसे अब सीधे बढ़ाकर हर 8 साल कर दिया गया है। हालांकि, स्वागत-एफआई श्रेणी के निवेशकों के लिए नियमों में कोई फेरबदल नहीं हुआ है और उनके लिए यह अवधि पूर्ववत 10 साल ही बनी रहेगी।\n\nकंप्लायंस के मोर्चे पर भी हटाई गई एक और बाध्यता\nकेवाईसी समयसीमा बढ़ाने के साथ ही सेबी ने अनुपालन से जुड़ा एक और अहम बोझ विदेशी निवेशकों के सिर से उतार दिया है। अब तक विदेशी निवेशकों को अपना रजिस्ट्रेशन जारी रखने के दौरान पहले सौंपी गई जानकारियों में बदलाव न होने को लेकर अलग से कन्फर्मेशन देना पड़ता था। नियामक ने इस अनिवार्य शर्त को अब पूरी तरह समाप्त कर दिया है।\n\nइस नियम के हटने से विदेशी निवेशकों के समय और वित्तीय संसाधनों की भारी बचत होगी। पहले निवेशकों को एक ही तरह की सूचना की दोबारा पुष्टि करने के लिए जटिल कानूनी और कागजी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था, जिससे उनका काफी वक्त बर्बाद होता था। इन सुधारों से उम्मीद की जा रही है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा फिर लौटेगा और भारतीय इक्विटी बाजार में पूंजी प्रवाह में सुधार देखने को मिलेगा।\n\nइसका आप पर असर\nसेबी के इस फैसले से विदेशी पूंजी प्रवाह आसान होगा और घरेलू शेयर बाजार को संस्थागत समर्थन मिलेगा।\n\n• बाजार स्थिरता: विदेशी निवेशकों के लिए कागजी प्रक्रियाएं आसान होने से बिकवाली का दबाव कम होने की उम्मीद है। संस्थागत निवेश लौटने पर घरेलू इक्विटी सूचकांकों में उतार-चढ़ाव घट सकता है।\n• वैश्विक प्रतिस्पर्धा: भारत की वित्तीय व्यवस्था अन्य उभरते बाजारों के मुकाबले विदेशी फंड्स के लिए अधिक आकर्षक बनेगी। इससे लंबी अवधि के निवेश को आकर्षित करने में मदद मिलेगी।\n• लागत और समय की बचत: विदेशी पोर्टफोलियो प्रबंधकों को अब कानूनी प्रक्रियाओं पर कम खर्च करना पड़ेगा। बचा हुआ संसाधन वे भारतीय परिसंपत्तियों में निवेश विस्तार पर लगा सकेंगे।\n• घरेलू निवेशकों का भरोसा: बड़े विदेशी फंड्स की संभावित वापसी से खुदरा निवेशकों का बाजार धारणा पर विश्वास बढ़ेगा। इससे म्यूचुअल फंड और व्यक्तिगत शेयर पोर्टफोलियो को सहारा मिल सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nभारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों के भारी पैमाने पर पूंजी निकालने और बार-बार होने वाले जटिल अनुपालनों की शिकायतों के चलते सेबी ने यह कदम उठाया है।\n\n• बिकवाली का दबाव: विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा लगातार लाखों करोड़ रुपये की निकासी से प्रमुख सूचकांक गहरे दबाव में आ गए थे। बाजार में स्थिरता लाने के लिए नियमों को अनुकूल बनाना आवश्यक हो गया था।\n• जटिल केवाईसी प्रक्रिया: विदेशी फंड्स को बहुत कम समय सीमा में बार-बार दस्तावेजों का नवीनीकरण कराना पड़ता था। इस प्रशासनिक उलझन के कारण कई निवेशक पूंजी को अन्य बाजारों में ले जा रहे थे।\n• अनावश्यक कानूनी शर्तें: रजिस्ट्रेशन जारी रखने के लिए पुरानी जानकारियों पर बार-बार अलग से पुष्टि मांगने का नियम केवल प्रक्रिया को लंबा खींचता था। इस गैर-जरूरी व्यवस्था को हटाना ही तार्किक समाधान था।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सेबी ने कैटेगरी 1 के विदेशी निवेशकों के लिए केवाईसी रिव्यू अवधि में क्या बदलाव किया है?\nकैटेगरी 1 के निवेशकों के लिए केवाईसी रिव्यू की अनिवार्यता पहले हर 1 साल में थी, जिसे अब बढ़ाकर हर 2 साल कर दिया गया है।\n\n2. कैटेगरी 2 के एफपीआई को नई व्यवस्था में कितनी राहत मिली है?\nकैटेगरी 2 के निवेशकों को पहले हर 3 साल में केवाईसी प्रक्रिया पूरी करनी होती थी, लेकिन अब इसे सीधे हर 8 साल कर दिया गया है।\n\n3. क्या स्वागत-एफआई श्रेणी के नियमों में भी कोई संशोधन हुआ है?\nनहीं, स्वागत-एफआई श्रेणी के लिए नियमों में कोई बदलाव नहीं हुआ है और उनकी समीक्षा अवधि पहले की तरह 10 साल ही रहेगी।\n\n4. रजिस्ट्रेशन को लेकर कौन सी पुरानी शर्त खत्म की गई है?\nअब विदेशी निवेशकों को अपना रजिस्ट्रेशन जारी रखने के दौरान पहले दी गई जानकारियों में बदलाव न होने का अलग से कन्फर्मेशन देने की आवश्यकता नहीं होगी।",
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  "publishedAt": "2026-10-30",
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    "विदेशी निवेशक",
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