# शीतलहर में बकरियों की सेहत का ऐसे रखें ख्याल, अपनाएं खान-पान और सुरक्षा के ये जरूरी उपाय

> सर्दियों के मौसम में बकरियों को खतरनाक बीमारियों से बचाने के लिए उनके खान-पान और रहने की जगह में विशेष बदलाव करने की सलाह दी गई है।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-10-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/shitalahara-men-bakariyon-ki-sehata-ka-aise-rakhen-khyala-apanaen-khana-pana-aura-suraksha-ke-ye-jaruri-upaya-50675 · **Language:** Hindi
**Tags:** बकरी पालन, सर्दियों में देखभाल, पशुपालन, बिहार कृषि, बकरी का खानपान

सर्दियों का मौसम दस्तक दे चुका है और तापमान में गिरावट के साथ ही इंसानों की तरह पशु-पक्षियों के जीवनचक्र में भी कई प्रकार के बदलाव आने शुरू हो जाते हैं। जिस प्रकार मनुष्य इस ठंडे मौसम में अपनी जीवनशैली और खान-पान में बदलाव करते हैं, ठीक उसी तरह पालतू पशुओं की देखभाल के तौर-तरीकों में भी सावधानी बरतना बेहद जरूरी हो जाता है। बिहार राज्य के ग्रामीण अंचल में बकरी पालन आजीविका चलाने का एक बहुत बड़ा और अहम जरिया माना जाता है। प्रदेश के अनगिनत ग्रामीण परिवार बकरियों को पालकर अपने घर-परिवार का खर्च आसानी से चलाते हैं। यही वजह है कि मौसम में होने वाले बदलावों के साथ ही बकरी पालकों को पशुओं के आहार पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। ठंड के इस मौसम में बकरियों को बर्फीली हवाओं और ठंडक से महफूज रखना बहुत आवश्यक होता है, क्योंकि इस अवधि में कई ऐसी गंभीर बीमारियां पनपती हैं जो बकरियों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं। जहानाबाद की जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ. प्रतिभा कुमारी ने इस विषय पर बेहद विस्तृत और महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं ताकि पशुपालकों को सही मार्गदर्शन मिल सके।

## सर्दियों के दिनों में बकरियों का आहार
डॉ. प्रतिभा कुमारी का कहना है कि इंसानों की तरह ही पशुओं का जीवन भी प्रकृति के बदलावों से प्रभावित होता है। जिस प्रकार लोग बदलते मौसम के अनुसार अपने शरीर की रक्षा करते हैं और खान-पान में जरूरी फेरबदल लाते हैं, उसी प्रकार पशुओं के आहार में भी बदलाव होना अनिवार्य है। खासतौर पर बकरी पालन से जुड़े लोगों के लिए सर्दियों का यह मौसम काफी चुनौतियां लेकर आता है। इस स्थिति से निपटने का सबसे बेहतरीन और कारगर उपाय उनके शरीर को पर्याप्त पोषक तत्वों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। जब पशु के शरीर के भीतर मजबूत इम्यून सिस्टम और भरपूर पोषण बना रहता है, तो वह किसी भी मौसमी बीमारी से आसानी से मुकाबला कर सकता है। ठंड के दिनों में बकरियों को कई प्रकार की खतरनाक और घातक बीमारियां अपनी चपेट में ले लेती हैं, जिनसे बचाव के लिए कुछ खास और जरूरी सावधानियां बरतनी बहुत जरूरी हो जाती हैं।

## चना, गुड़ और बेसन का विशेष महत्व
विशेषज्ञ ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि ठंड के मौसम के दौरान बकरियों को दिए जाने वाले हरे चारे की मात्रा में कुछ कमी कर देनी चाहिए। इसके विपरीत, उन्हें सूखा चारा और भरपूर पोषक तत्वों से युक्त खाद्य सामग्री मुहैया करानी चाहिए। बकरियों को चने, गुड़, बेसन और भूसे का मिश्रण खिलाने से उनके शरीर में दूध की मात्रा में बढ़ोतरी होती है, और यह खुराक मांस उत्पादन के लिहाज से भी काफी ज्यादा फायदेमंद साबित होती है। इस तरह का जरूरी और पौष्टिक आहार देने से बकरियों का शारीरिक विकास बहुत अच्छी गति से होता है। इसके अलावा, सर्दियों के इन दिनों में सुबह के वक्त बकरियों को बहुत जल्दी घर से बाहर नहीं निकालना चाहिए और शाम ढलने से पहले या सूर्यास्त होने से पहले उन्हें वापस सुरक्षित बाड़े या घर के अंदर ले आना बेहद जरूरी होता है।

## रहने के स्थान पर सुरक्षा के प्रबंध
आवास की व्यवस्था के संबंध में बताया गया है कि ठंड के मौसम में बकरियों के रहने के स्थान की खिड़कियों को जूट की बोरियों से अच्छी तरह ढक देना चाहिए। ऐसा करने से बाहर से आने वाली सर्द और ठिठुरन भरी हवाएं बकरियों के रहने वाले आश्रय स्थल के अंदर प्रवेश नहीं कर पाती हैं। इसके साथ ही जब आप बकरियों को हरा चारा खिलाते हैं, तो इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए कि हर तीन से चार महीने के अंतराल पर पशुओं की डीवार्मिंग यानी पेट के कीड़े मारने की दवा जरूर दी जाए। इन सभी छोटी-छोटी सावधानियों को अपनाकर ग्रामीण इलाकों के पालक अपनी बकरियों को सर्दियों की घातक बीमारियों से सुरक्षित रख सकते हैं और बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं।

## इसका आप पर असर
यह जानकारी ग्रामीण इलाकों के पशुपालकों और किसानों के लिए सीधे तौर पर आर्थिक सुरक्षा और पशुओं की जीवन रक्षा से जुड़ी है।

- **ग्रामीण अर्थव्यवस्था:** **बिहार में:** ग्रामीण स्तर पर बकरी पालन से जुड़े परिवारों को सर्दियों में पशुओं की मौत से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाव में मदद मिलेगी।
- **पशु स्वास्थ्य:** **सावधानी और खान-पान:** सही पोषक तत्व मिलने से बकरियों का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा और दूध तथा मांस का उत्पादन भी प्रभावित नहीं होगा।
- **दैनिक प्रबंधन:** **सुरक्षा उपाय:** सुबह देर से बाहर निकालने और बाड़े को बोरी से ढकने से पशुओं को निमोनिया और सर्दी से बचाया जा सकेगा।
- **नियमित देखभाल:** **डीवार्मिंग:** हर तीन-चार महीने पर डीवार्मिंग करने से बकरियों का पाचन तंत्र ठीक रहता है और बीमारियां दूर रहती हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
बकरियों में सर्दियों के दौरान होने वाली बीमारियां और उनके खान-पान में बदलाव की जरूरत मौसमी तापमान में गिरावट के कारण होती है।

- **शारीरिक प्रभाव:** **तापमान में गिरावट:** ठंड बढ़ने से पशुओं का इम्यून सिस्टम कमजोर हो सकता है, जिससे वे आसानी से घातक बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं।
- **पोषण की जरूरत:** **ऊर्जा की खपत:** ठंड में शरीर को गर्म रखने के लिए अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है, जिसे सूखा चारा, चना और गुड़ पूरा करते हैं।
- **पर्याकीय जोखिम:** **सर्द हवाएं:** खुली खिड़कियों और हवा के सीधे संपर्क से बकरियों को ठंड लग जाती है, जिसे रोकने के लिए जूट की बोरी का उपयोग किया जाता है।

## सवाल-जवाब

### 1. सर्दियों में बकरियों को किस प्रकार का चारा देना चाहिए?
सर्दियों में हरे चारे की मात्रा कम करके सूखा चारा और पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ देने चाहिए।

### 2. बकरियों के लिए चना, गुड़ और बेसन क्यों फायदेमंद है?
इन्हें खिलाने से बकरियों में दूध की मात्रा बढ़ती है, शारीरिक विकास अच्छा होता है और यह मांस के लिए भी फायदेमंद है।

### 3. ठंड के मौसम में बकरियों के बाड़े में क्या उपाय करना चाहिए?
ठंडी हवाओं को रोकने के लिए खिड़कियों को जूट की बोरी से ढक देना चाहिए।

### 4. बकरियों की डीवार्मिंग कितने समय पर करनी चाहिए?
हरा चारा खिलाने के दौरान हर तीन-चार महीने पर बकरियों की डीवार्मिंग जरूर करनी चाहिए।

### 5. सर्दियों में बकरियों को बाहर कब निकालना चाहिए?
सुबह के वक्त उन्हें जल्दी बाहर नहीं निकालना चाहिए और सूर्यास्त से पहले घर वापस ले आना चाहिए।

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