शिवपुरी के किसानों के लिए मुनाफे का सौदा बनी टमाटर की 5 चुनिंदा किस्में मध्य प्रदेश का शिवपुरी जिला टमाटर की उन्नत किस्मों की बदौलत उत्पादन में नई मिसाल कायम कर रहा है। उद्यानिकी विभाग की सलाह और सही किस्मों के चुनाव से स्थानीय किसान अब पहले से कहीं अधिक मुनाफा कमा रहे हैं। मध्य प्रदेश का शिवपुरी जिला अब टमाटर की खेती के लिए एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर कर सामने आ रहा है। यहाँ की मिट्टी की उर्वरता और अनुकूल मौसमी परिस्थितियाँ इसे बागवानी के लिए आदर्श बनाती हैं। जिले में बड़ी तादाद में किसान उन्नत किस्मों को अपनाकर न केवल पैदावार बढ़ा रहे हैं, बल्कि अपनी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि कर रहे हैं। उद्यानिकी विभाग का स्पष्ट मानना है कि यदि वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों का पालन किया जाए और सही किस्मों का चुनाव हो, तो किसान लंबे अंतराल तक अपनी फसल से लाभ प्राप्त कर सकते हैं। उत्पादन का चक्र और बाजार में उपलब्धता उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक निर्मल कुमार गोयल के अनुसार, शिवपुरी में टमाटर की खेती का चक्र जुलाई महीने की शुरुआत से आरंभ हो जाता है। एक बार रोपाई होने के बाद, फसल काफी लंबे समय तक फल देती रहती है। यह निरंतरता मार्च और अप्रैल के महीनों तक बनी रहती है, जिससे बाजार में स्थानीय टमाटर की पर्याप्त आवक सुनिश्चित होती है। उत्पादन के इस विस्तृत समय काल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसान अपनी उपज को बाजार की स्थितियों के अनुसार अलग-अलग चरणों में बेचकर अधिक लाभ उठा पाते हैं। किसानों द्वारा अपनाई जा रही प्रमुख उन्नत किस्में कृषि विशेषज्ञों और विभाग ने शिवपुरी की जलवायु के लिए पांच विशिष्ट टमाटर किस्मों को बेहद प्रभावी माना है, जिन्हें किसान बड़े पैमाने पर चुन रहे हैं • अभिलाष: यह किस्म अपने मजबूत पौधों और गहरे लाल रंग के कारण पहचानी जाती है, साथ ही इसमें बीमारियों से लड़ने की गजब की क्षमता है। • साहू: इस किस्म के फल काफी सख्त और टिकाऊ होते हैं, जिसके चलते इन्हें लंबी दूरी तक आसानी से ट्रांसपोर्ट किया जा सकता है। • परी: यह एक हाइब्रिड किस्म है, जो बहुत तेजी से तैयार होती है, जिससे किसानों को बाजार की मांग के अनुरूप जल्दी उत्पादन मिल जाता है। • नामधारी-585: इसके फल एक समान आकार के होते हैं, जो बाजार में बिकने और ग्राहकों को आकर्षित करने में बहुत सहज रहते हैं। • नामधारी-4266: मौसम के उतार-चढ़ाव को झेलने की अद्भुत क्षमता और निरंतर पैदावार देने के कारण यह किस्म किसानों की पसंदीदा बनी हुई है। परिवहन और व्यापार की सुविधा विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इन उन्नत किस्मों के टमाटर न केवल देखने में चमकदार होते हैं, बल्कि इनकी बनावट भी काफी मजबूत होती है। परिवहन के दौरान इनके खराब होने या पिचकने की संभावना बहुत कम हो जाती है। यही कारण है कि शिवपुरी के टमाटर अब केवल राज्य की मंडियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अन्य राज्यों के बाजारों में भी बड़ी मांग के साथ पहुँच रहे हैं। जैसे-जैसे इन किस्मों की उपयोगिता साबित हो रही है, जिले में इनका रकबा हर साल बढ़ता जा रहा है, जिससे खेती एक अत्यंत लाभदायक व्यवसाय बनती जा रही है। इसका आप पर असर भारत में: उन्नत किस्मों के चुनाव से टमाटर उत्पादक किसान अपनी आय में इजाफा कर सकते हैं और बाजार में लंबी अवधि तक टिके रह सकते हैं। शिवपुरी में: स्थानीय किसान इन किस्मों के इस्तेमाल से परिवहन के दौरान होने वाले नुकसान को कम कर बाहरी राज्यों के बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ा रहे हैं। सवाल-जवाब 1. शिवपुरी में टमाटर की खेती कब शुरू होती है? शिवपुरी में टमाटर की रोपाई मुख्य रूप से जुलाई के महीने से शुरू की जाती है। 2. टमाटर की किन किस्मों को अधिक टिकाऊ माना गया है? साहू किस्म को विशेष रूप से इसके सख्त और टिकाऊ फलों के लिए जाना जाता है, जो लंबी दूरी के परिवहन के लिए बहुत उपयुक्त हैं। 3. नामधारी-4266 किस्म की मुख्य विशेषता क्या है? यह किस्म बदलते मौसम को सहन करने और स्थिर उत्पादन देने की क्षमता के लिए किसानों की पसंदीदा बनी हुई है। 4. क्या शिवपुरी के टमाटर अन्य राज्यों में भेजे जाते हैं? जी हाँ, इन उन्नत किस्मों के टमाटर मजबूत और टिकाऊ होते हैं, इसलिए उन्हें आसानी से प्रदेश के बाहर अन्य राज्यों की मंडियों में भेजा जाता है। https://trendkia.com/business/shivpuri-ke-kisan-tomato-farming-varieties-6411 TrendKia — Har trend, sabse pehle.