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  "type": "article",
  "title": "श्री रेणुका शुगर्स समेत रिफाइनरी कंपनियां घरेलू बाजार में बढ़ाएंगी चीनी की आपूर्ति, त्योहारों पर घटेंगी कीमतें",
  "summary": "त्योहारों से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए रिफाइनरी कंपनियां घरेलू बाजार में 2.5 लाख टन सफेद चीनी जारी करेंगी। सरकारी पहलों के चलते मिल स्तर पर शक्कर के दाम घटकर 43-44 रुपये प्रति किलो पर आ गए हैं।",
  "content": "देश में पिछले एक माह के दौरान चीनी की आसमान छूती कीमतों से परेशान आम उपभोक्ताओं को आगामी त्योहारी सीजन में बड़ी राहत मिलने जा रही है। बाजार में मिठास की कमी और बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण पाने के लिए केंद्र सरकार की त्वरित पहलों का सकारात्मक परिणाम धरातल पर दिखने लगा है। घरेलू चीनी रिफाइनरी इकाइयों ने त्योहारों की शुरुआत से ठीक पहले 2.5 लाख टन परिष्कृत चीनी बाजार में उतारने का निर्णय लिया है। इस अतिरिक्त स्टॉक की उपलब्धता से खुदरा दुकानों पर चीनी के दाम जल्द घटने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं। इसके अलावा केंद्र ने आगामी गन्ने के पेराई सत्र को समय से पहले शुरू कराने का भी पूरा खाका तैयार कर लिया है, ताकि आपूर्ति श्रृंखला में कोई बाधा न आए। हालांकि, आम तौर पर इस्तेमाल होने वाली रिफाइंड चीनी तथा मिल से प्राप्त शक्कर के बीच तकनीकी और गुणवत्ता के स्तर पर कई बुनियादी अंतर होते हैं।\n\n \n\nत्योहारों से पूर्व बाजार में पहुंचेगी 2.5 लाख टन अतिरिक्त सफेद शक्कर\n आगामी रक्षाबंधन, गणेश चतुर्थी, दिवाली और छठ जैसे प्रमुख त्योहारों के दौरान देश में चीनी की मांग चरम पर पहुंच जाती है। मांग और आपूर्ति के इसी अंतर को पाटने के लिए चीनी रिफाइनरी कंपनियों ने स्थानीय बाजार में लगभग 2.5 लाख टन ALS (अग्रिम लाइसेंस योजना) चीनी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा है। श्री रेणुका शुगर्स के एमडी व सीईओ सुशील कुमार ने इस संबंध में बताया कि देश के भीतर 2.5 लाख टन ALS शक्कर उपलब्ध कराने की पेशकश की गई है। उनके अनुसार, इस फैसले से आने वाले त्योहारी महीनों में आम जनता को चीनी की बढ़ती कीमतों से निश्चित रूप से निजात मिलेगी।\n\n गौरतलब है कि भारतीय बाजार में श्री रेणुका शुगर्स सहित कुल दो ऐसी प्रमुख रिफाइनरियां संचालित हैं, जो ALS योजना के अंतर्गत विदेशी बाजारों से कच्ची चीनी का आयात करती हैं। इसके बाद वे अपने संयंत्रों में इसकी प्रोसेसिंग कर शुद्ध चीनी तैयार करती हैं और फिर उसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात कर देती हैं। यह चीनी देश की पारंपरिक मिलों में गन्ने की पेराई से सीधी नहीं बनती, बल्कि बाहर से आयातित कच्ची शक्कर को ही परिष्कृत करके उपभोग योग्य बनाया जाता है। बढ़ती कीमतों को देखते हुए सरकार ने पिछले महीने एक विशेष निर्देश जारी कर इन रिफाइनरियों को आयातित स्टॉक को देश के ही बाजारों में जारी करने के निर्देश दिए थे।\n\n \n\nसरकारी नीतियों का असर: मिल गेट पर घटे दाम और आयात नियम\n प्रशासनिक फैसलों और आपूर्ति बढ़ाने के उपायों का असर चीनी के थोक एवं मिल स्तर के दामों पर साफ दिखाई देने लगा है। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, मिल गेट पर चीनी की मौजूदा कीमत घटकर लगभग 43-44 रुपये प्रति किलोग्राम के दायरे में आ गई है। यह कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार से मंगाई जाने वाली कच्ची चीनी की अनुमानित लैंडिंग लागत (लगभग ₹50 प्रति किलो) की तुलना में काफी कम है। इससे यह स्पष्ट होता है कि स्थानीय स्तर पर कीमतें नियंत्रित हो रही हैं।\n\n दामों को काबू में रखने के वास्ते सरकार ने बहुस्तरीय रणनीति अपनाई है। इसके तहत घरेलू बाजार में पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु बिना किसी सीमा शुल्क के 10 लाख टन चीनी आयात की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, कालाबाजारी और कृत्रिम किल्लत रोकने के मकसद से बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं, डीलरों और थोक व्यापारियों के लिए स्टॉक रखने की सख्त सीमा निर्धारित की गई है। इससे पूर्व केंद्र सरकार ने स्थानीय जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए देश से चीनी के बाहरी निर्यात को भी प्रतिबंधित कर दिया था।\n\n \n\nरिफाइंड चीनी और मिल शक्कर: उत्पादन प्रक्रिया और शुद्धता का फर्क\n व्यावहारिक रूप से रिफाइंड चीनी और मिल से तैयार शक्कर दोनों का ही मुख्य स्रोत गन्ना या चुकंदर होता है, लेकिन दोनों के अंतिम उत्पाद में काफी अंतर देखने को मिलता है। बाजार में मिलने वाली एकदम सफेद और चमकदार चीनी दरअसल रिफाइंड चीनी ही होती है। इसके विपरीत, गन्ने की सीधी पेराई के बाद चीनी मिलों में बनने वाली साधारण शक्कर का रंग हल्का मटमैला या पीलापन लिए होता है। इसमें प्राकृतिक रूप से कुछ हल्की अशुद्धियां और शीरे का असर मौजूद रहता है।\n\n रिफाइनिंग प्रक्रिया के दौरान चीनी से इन तमाम अशुद्धियों को आधुनिक तकनीकों की मदद से पूरी तरह बाहर निकाल दिया जाता है। इसके बाद जो अंतिम उत्पाद प्राप्त होता है, वह सौ फीसदी शुद्ध, क्रिस्टल जैसा पारदर्शी और सीधी खपत के लिए पूरी तरह उपयुक्त होता है। देश में कुछ ऐसी रिफाइनरी कंपनियां काम कर रही हैं जो स्वयं गन्ने की खेती या पेराई मिलें नहीं चलाती हैं। ये इकाइयां केवल बाहरी स्रोतों से कच्ची अशुद्ध चीनी का आयात करती हैं और उसे रिफाइन करके प्रीमियम गुणवत्ता के साथ बाजार में बेचती हैं। अतिरिक्त प्रोसेसिंग और ऊर्जा खपत के कारण रिफाइंड चीनी की लागत साधारण मिल शक्कर से थोड़ी अधिक होती है।\n\nइसका आप पर असर\nयह फैसला त्योहारों के दौरान घरेलू बजट पर चीनी की बढ़ती कीमतों के बोझ को कम करेगा।\n\n• भारत भर में उपभोक्ताओं के लिए: खुदरा बाजार में चीनी के दाम स्थिर होंगे और उनमें गिरावट आएगी। त्योहारों के मौसम में मिठाइयां और पकवान बनाना आम परिवारों के लिए अधिक किफ़ायती हो जाएगा।\n\n• मिठाई और बेकरी कारोबारियों के लिए: थोक बाजार में शक्कर की आसान उपलब्धता से कच्ची सामग्री की लागत नियंत्रित रहेगी। इससे छोटे और बड़े हलवाइयों को त्योहारी सीजन में अपनी उत्पादन लागत सीमित रखने में मदद मिलेगी।\n\n• खुदरा एवं थोक व्यापारियों के लिए: बाजार में पर्याप्त सप्लाई रहने से कृत्रिम किल्लत या स्टॉक की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। व्यापारी तय स्टॉक सीमाओं के भीतर रहकर सुचारू रूप से व्यापार जारी रख सकेंगे।\n\n• बाजार में मूल्य स्थिरता: 2.5 लाख टन अतिरिक्त सप्लाई से सट्टेबाजी और कालाबाजारी पर रोक लगेगी। इसके परिणामस्वरूप आने वाले महीनों में चीनी की खुदरा दरें आम जनता की पहुंच के भीतर बनी रहेंगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nदेश में पिछले एक महीने के दौरान चीनी की कीमतों में अचानक तेजी दर्ज की गई थी। त्योहारी सीजन से ठीक पहले बढ़ती महंगाई को रोकने और घरेलू आपूर्ति को मजबूत करने के लिए सरकार ने यह रणनीतिक कदम उठाया है।\n\n• मांग और आपूर्ति का असंतुलन: आगामी त्योहारों के दौरान देश भर में चीनी की खपत में रिकॉर्ड बढ़ोतरी होती है। समय रहते सप्लाई न बढ़ाने पर बाजार में कमी होने और कीमतें और अधिक उछलने की आशंका थी।\n\n• निर्यात स्टॉक का घरेलू डाइवर्जन: एएलएस रिफाइनरियां आमतौर पर विदेशी कच्ची चीनी को प्रोसेस करके वापस निर्यात करती हैं। सरकार ने विशेष आदेश देकर इस स्टॉक को घरेलू बाजार में उतारने के लिए निर्देशित किया।\n\n• व्यापक प्रशासनिक नियंत्रण: चीनी की ऊंची कीमतों पर लगाम लगाने के लिए 10 लाख टन शुल्क-मुक्त आयात और स्टॉक सीमा जैसे कड़े कदम उठाए गए। इन संयुक्त फैसलों से मिल गेट पर कीमतें घटकर ₹43-44 प्रति किलो पर आ गई हैं।\n\n• पेराई सत्र की अगेती शुरुआत: नई फसल से चीनी का उत्पादन सुचारू रखने के लिए सरकार पेराई सत्र जल्द शुरू कर रही है। इससे बाजार में आगे भी सप्लाई की निरंतरता बनी रहेगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. त्योहारों से पहले बाजार में कितनी अतिरिक्त चीनी उपलब्ध कराई जाएगी?\nचीनी रिफाइनरी कंपनियां त्योहारी सीजन से ठीक पहले घरेलू बाजार में करीब 2.5 लाख टन सफेद रिफाइंड चीनी की आपूर्ति करेंगी।\n\n2. रिफाइंड चीनी और साधारण मिल शक्कर में क्या मुख्य अंतर होता है?\nरिफाइंड चीनी पूरी तरह शुद्ध, सफेद और चमकदार होती है जिसमें अशुद्धियां नहीं होतीं। वहीं मिल शक्कर का रंग हल्का मटमैला होता है और उसमें मामूली अशुद्धियां रहती हैं।\n\n3. वर्तमान में चीनी के मिल गेट दाम क्या चल रहे हैं?\nसरकारी उपायों के बाद मिल गेट पर चीनी की कीमत घटकर लगभग 43-44 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई है।\n\n4. कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार ने कौन से मुख्य कदम उठाए हैं?\nसरकार ने चीनी निर्यात पर रोक लगाई है, 10 लाख टन शुल्क-मुक्त आयात की मंजूरी दी है, थोक विक्रेताओं पर स्टॉक सीमा लागू की है और एएलएस चीनी को घरेलू बाजार में बेचने का आदेश दिया है।\n\n5. एएलएस (ALS) चीनी क्या होती है?\nएएलएस यानी एडवांस लाइसेंस स्कीम के तहत रिफाइनरियां विदेशों से कच्ची चीनी आयात कर रिफाइन करती हैं, जिसे सरकार ने इस बार घरेलू बाजार में बेचने का निर्देश दिया है।",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-09-09",
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