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  "type": "article",
  "title": "श्रीगंगानगर में पानी का भारी संकट, धान की रोपाई रुकी और फसलों पर मंडराया बंजर होने का खतरा",
  "summary": "राजस्थान के 'अन्न का कटोरा' कहे जाने वाले श्रीगंगानगर में सूखे और जल संकट के कारण धान की रोपाई ठप हो गई है। प्रदूषित पानी की आपूर्ति ने स्थिति को और भी बदतर बना दिया है, जिससे किसान अब सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं।",
  "content": "राजस्थान के कृषि प्रधान जिलों में प्रमुख स्थान रखने वाला श्रीगंगानगर, जिसे अक्सर 'अन्न का कटोरा' कहा जाता है, इस समय जल संकट की एक भयावह स्थिति से जूझ रहा है। मानसून के कमजोर रुख और घग्गर नदी में जल स्तर में आई भारी गिरावट ने पूरे क्षेत्र में कृषि गतिविधियों को लगभग रोक दिया है। इस संकट की मार का सबसे बड़ा असर खरीफ सीजन की प्रमुख फसल धान पर दिखाई दे रहा है, जिसने किसानों की नींद उड़ा दी है।\n\nधान की रोपाई ठप\nबुवाई का महत्वपूर्ण समय हाथ से निकला जा रहा है। किसानों ने काफी निवेश करके धान की पौध तैयार कर ली थी, लेकिन सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी न होने के कारण खेतों में रोपाई का कार्य पूरी तरह रुक गया है। किसान अपनी आंखों के सामने अपनी मेहनत से तैयार की गई पौध को मुरझाते हुए देखने को मजबूर हैं। पानी के अभाव में धान की फसल का भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है, जिससे बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान का डर सता रहा है।\n\nप्रदूषित पानी का खतरा\nसंकट के समय किसानों के घावों पर नमक तब छिड़का गया, जब रंगमहल स्केप में सेम नाले का खारा और अत्यधिक प्रदूषित पानी छोड़ दिया गया। आक्रोशित किसानों द्वारा जब इस पानी की प्रयोगशाला में जांच करवाई गई, तो परिणाम चौंकाने वाले थे। जांच में यह पानी खेती के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त और घातक पाया गया। किसानों का स्पष्ट मानना है कि यदि इस जहरीले पानी का उपयोग सिंचाई के लिए किया गया, तो श्रीगंगानगर की उपजाऊ जमीन आने वाले समय के लिए बंजर हो जाएगी। यह स्थिति कृषि पारिस्थितिकी तंत्र के लिए विनाशकारी सिद्ध हो सकती है।\n\nकिसानों का दोमुंहा संघर्ष\nजिले के किसान इस संकट में दो वर्गों में बंट गए हैं। संपन्न किसान, जिनके पास निजी ट्यूबवेल की सुविधा उपलब्ध है, वे भारी लागत चुकाकर अपनी फसल बचाने का प्रयास कर रहे हैं। दूसरी ओर, सीमांत और गरीब किसानों की स्थिति बेहद दयनीय है। उनके पास वैकल्पिक संसाधनों का अभाव है और वे पूरी तरह से सरकारी नहरों में स्वच्छ पानी छोड़े जाने या अच्छी बारिश की उम्मीद में टकटकी लगाए बैठे हैं।\n\nप्रशासन के समक्ष रखी गई मांग\nहालात की गंभीरता को भांपते हुए स्थानीय संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। किसानों ने प्रशासन के समक्ष कुछ प्रमुख मांगें रखी हैं: खेतों को बचाने के लिए नहरों में अविलंब स्वच्छ सिंचाई जल की आपूर्ति की जाए और रंगमहल स्केप में प्रदूषित पानी छोड़ने के जिम्मेदार अधिकारियों व तत्वों के विरुद्ध कड़ी और निष्पक्ष जांच की जाए। यदि प्रशासन ने समय रहते उचित कदम नहीं उठाए, तो यह क्षेत्र भीषण खाद्यान्न संकट और आर्थिक मंदी की चपेट में आ सकता है, जो पूरे राज्य के लिए चिंता का विषय होगा।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: धान उत्पादन में कमी होने पर देश भर में चावल की कीमतों में अस्थिरता आ सकती है।\n\nश्रीगंगानगर में: स्थानीय किसानों को फसल के नुकसान और जमीन के बंजर होने के कारण भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. श्रीगंगानगर में धान की रोपाई क्यों रुकी है?\nमानसून की कमी और घग्गर नदी में पानी के स्तर में गिरावट के कारण सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध नहीं है, जिससे रोपाई का काम रुक गया है।\n\n2. प्रदूषित पानी का किसानों की जमीन पर क्या असर पड़ सकता है?\nकिसानों का आरोप है कि सेम नाले का खारा और प्रदूषित पानी जमीन को हमेशा के लिए बंजर बना सकता है, जो कृषि के लिए बहुत हानिकारक है।\n\n3. किसान प्रशासन से क्या मांग कर रहे हैं?\nकिसान नहरों के जरिए स्वच्छ सिंचाई जल की आपूर्ति सुनिश्चित करने और प्रदूषित पानी छोड़ने के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।\n\n4. क्या सभी किसान इस संकट से समान रूप से प्रभावित हैं?\nनहीं, संपन्न किसान जिनके पास निजी ट्यूबवेल हैं, वे किसी तरह खेती कर पा रहे हैं, लेकिन गरीब और सीमांत किसान पूरी तरह बेबस हैं।",
  "url": "https://trendkia.com/business/shrignganagara-men-pani-ka-bhari-snkata-dhana-ki-ropai-ruki-aura-phasalon-para-mndaraya-bnjara-hone-ka-khatara-5710",
  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-07-08",
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    "श्रीगंगानगर",
    "जल संकट",
    "धान की खेती",
    "राजस्थान",
    "खरीफ सीजन",
    "कृषि समस्या"
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  "site": "TrendKia"
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