सितंबर में बोई पालक कुछ ही हफ्तों में देगी बंपर पैदावार, बुवाई शुरू करने से पहले समझ लें ये जरूरी टिप्स सितंबर में सही तरीके से पालक की बुवाई करने पर किसान कम लागत में कुछ ही हफ्तों में पहली कटाई कर सकते हैं, बशर्ते जलभराव से बचाव और बीज-सिंचाई का सही ध्यान रखा जाए। सितंबर का महीना शुरू होते ही हरी सब्जियां लगाने वाले किसान खेतों की तैयारी में जुट जाते हैं और इस मौसम में पालक एक ऐसी फसल है जो कम समय में तैयार होकर अच्छी कमाई करा सकती है। पालक की खेती के लिए न तो बड़े रकबे की जरूरत होती है और न ही भारी भरकम लागत की, इसलिए छोटे और सीमांत किसान भी इसे आसानी से अपना सकते हैं। बाजार में पालक की मांग साल भर बनी रहती है, ऐसे में सही समय पर और सही तरीके से बुवाई करने पर कुछ ही हफ्तों में पहली कटाई शुरू हो सकती है। सितंबर में क्यों की जाती है पालक की बुवाई रायबरेली जिले के राजकीय कृषि केंद्र शिवगढ़ के प्रभारी अधिकारी शिव शंकर वर्मा (बीएससी एग्रीकल्चर, डॉ राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, फैजाबाद) के मुताबिक सितंबर की शुरुआत से लेकर महीने के आखिर तक पालक की बुवाई की जा सकती है। इस दौरान बारिश धीरे-धीरे कम होने लगती है और तापमान में भी गिरावट आती है, जिससे पालक की बढ़वार के लिए अनुकूल माहौल बन जाता है। हालांकि अगर खेत में पानी भरा हुआ है तो तुरंत बुवाई करने से बचना चाहिए, क्योंकि पालक के लिए वही जमीन सही मानी जाती है जहां से पानी आसानी से निकल जाए। शिव शंकर वर्मा बताते हैं कि सितंबर में पालक बोते समय सबसे जरूरी बात यही है कि खेत में जलभराव बिल्कुल न होने पाए। खेत की तैयारी और मिट्टी कैसी हो पालक की अच्छी फसल के लिए भुरभुरी और उपजाऊ मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। खेत की पहले अच्छी तरह जुताई करके उसे समतल कर लेना चाहिए। इसके बाद खेत में सड़ी हुई गोबर की खाद या कंपोस्ट मिलाई जाए तो मिट्टी की उर्वरता काफी बढ़ जाती है। इसके बाद खेत में बड़े हिस्से की बजाय छोटी-छोटी क्यारियां या बेड बनाना बेहतर रहता है, क्योंकि इससे सिंचाई करना और अतिरिक्त पानी बाहर निकालना दोनों ही आसान हो जाते हैं। बीज और बुवाई का सही तरीका अच्छी और स्वस्थ फसल के लिए हमेशा प्रमाणित किस्म के बीज का ही इस्तेमाल करना चाहिए। बुवाई से पहले बीज को साफ करके जरूरत के मुताबिक उपचारित कर लेना फायदेमंद रहता है। ध्यान रहे कि बीज को बहुत गहराई में न डाला जाए, हल्की नमी वाली मिट्टी में बीज डालकर ऊपर से मिट्टी की बेहद पतली परत बिछा देनी चाहिए। शिव शंकर वर्मा के अनुसार लाइन में बुवाई करने से बाद में निराई-गुड़ाई और सिंचाई करना आसान हो जाता है। साथ ही पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखी जाए तो उन्हें हवा और धूप भी पर्याप्त मात्रा में मिल पाती है, जिससे पौधों का विकास बेहतर होता है। सिंचाई में बरतें सावधानी बुवाई के तुरंत बाद पहली सिंचाई हमेशा हल्की ही करनी चाहिए। पालक की जड़ें ज्यादा गहराई तक नहीं जातीं, इसलिए खेत में नमी लगातार बनी रहनी जरूरी है। लेकिन जरूरत से ज्यादा पानी देने पर खेत में जलभराव हो सकता है, जिससे जड़ें सड़ने लगती हैं और दूसरी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। बारिश हो जाने पर सिंचाई करने से पहले खेत की नमी जरूर जांच लेनी चाहिए, ताकि गलती से अतिरिक्त पानी न भर जाए। खरपतवार और कीट पर रखें नजर पालक की शुरुआती अवस्था में खरपतवार बहुत तेजी से उगते हैं, इसलिए समय-समय पर खेत की निराई करते रहना चाहिए। खरपतवार पौधों के हिस्से का पोषण और नमी दोनों खींच लेते हैं, जिससे पालक की बढ़वार पर सीधा असर पड़ता है। अगर पत्तियों पर किसी कीट या बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो खुद से कोई भी दवा डालने के बजाय कृषि विशेषज्ञ की सलाह पर ही उचित जैविक या अनुमोदित दवा का इस्तेमाल करना चाहिए। पहली कटाई कैसे करें सही तरीके से बुवाई करने पर पालक की पहली कटाई बुवाई के कुछ ही सप्ताह बाद शुरू हो सकती है। शिव शंकर वर्मा की सलाह है कि पहली कटाई में पौधे को जड़ से उखाड़ने के बजाय सिर्फ ऊपर से पत्तियां काटी जाएं। ऐसा करने पर पौधा दोबारा नई पत्तियां निकाल देता है, जिससे एक ही बुवाई से किसान को कई बार हरी पत्तियों की कटाई करने का मौका मिल जाता है और कमाई का जरिया भी लंबे समय तक बना रहता है। इसका आप पर असर यह जानकारी सीधे तौर पर उन किसानों और घर में सब्जी उगाने वाले लोगों के काम की है जो सितंबर में कम लागत में जल्दी कमाई देने वाली फसल तलाश रहे हैं। • कम लागत में शुरुआत: पालक की खेती के लिए बड़े खेत या भारी निवेश की जरूरत नहीं होती। छोटे और सीमांत किसान भी थोड़ी सी जमीन में इसे उगाकर अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं। • जल्दी मिलेगा मुनाफा: सही तरीके से बुवाई करने पर बुवाई के कुछ ही हफ्तों बाद पहली कटाई शुरू हो जाती है। इससे किसानों को दूसरी फसलों के मुकाबले जल्दी नकदी मिल सकती है। • बुवाई का सही समय चुनना जरूरी: सितंबर की शुरुआत से अंत तक बुवाई की जा सकती है, लेकिन खेत में पानी भरा होने पर तुरंत बुवाई करने से बचना चाहिए। गलत समय पर बुवाई करने से फसल खराब हो सकती है और नुकसान झेलना पड़ सकता है। • जलभराव से नुकसान का खतरा: ज्यादा पानी देने या खेत में पानी जमा रहने से जड़ें सड़ सकती हैं। किसानों को सिंचाई से पहले हमेशा खेत की नमी जांचनी चाहिए ताकि फसल बर्बाद न हो। • बार-बार कटाई से ज्यादा कमाई: पहली कटाई में पौधे को उखाड़ने के बजाय सिर्फ पत्तियां काटने से एक ही बुवाई में कई बार कटाई की जा सकती है, जिससे किसान की कुल आमदनी बढ़ सकती है। सवाल-जवाब 1. सितंबर में पालक की बुवाई कब तक की जा सकती है? महीने की शुरुआत से लेकर सितंबर के आखिर तक पालक की बुवाई की जा सकती है। 2. पालक की खेती के लिए कैसी मिट्टी बेहतर मानी जाती है? भुरभुरी और उपजाऊ मिट्टी, जिसमें गोबर की खाद या कंपोस्ट मिली हो, पालक के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है। 3. बुवाई से पहले सबसे ज्यादा किस बात का ध्यान रखना चाहिए? खेत में जलभराव न हो, यह सुनिश्चित करना सबसे जरूरी है, क्योंकि पालक की जड़ें ज्यादा पानी में सड़ सकती हैं। 4. पालक की पहली सिंचाई कैसी होनी चाहिए? बुवाई के बाद पहली सिंचाई हल्की करनी चाहिए और उसके बाद खेत में लगातार हल्की नमी बनाए रखनी चाहिए। 5. पालक की पहली कटाई कब और कैसे करनी चाहिए? बुवाई के कुछ ही हफ्तों बाद पहली कटाई की जा सकती है, और पौधे को उखाड़ने के बजाय सिर्फ ऊपर से पत्तियां काटनी चाहिए। 6. यह सलाह किसने दी है? यह जानकारी रायबरेली जिले के राजकीय कृषि केंद्र शिवगढ़ के प्रभारी अधिकारी शिव शंकर वर्मा ने दी है। https://trendkia.com/business/sitnbara-men-boi-palaka-kuchha-hi-haphton-men-degi-bnpara-paidavara-buvai-shuru-karane-se-pahale-samajha-len-ye-jaruri-tipsa-28362 TrendKia — Har trend, sabse pehle.