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  "type": "article",
  "title": "सितंबर में जीएसटी संग्रह 14.7 प्रतिशत उछलकर 2.03 लाख करोड़ रुपये के पार",
  "summary": "घरेलू खपत और आयात राजस्व में जोरदार तेजी के दम पर सितंबर में सकल जीएसटी संग्रह 2.03 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा। रिफंड घटाने के बाद शुद्ध संग्रह 18.1 प्रतिशत बढ़कर 1.76 लाख करोड़ रुपये दर्ज हुआ।",
  "content": "सितंबर के महीने में केंद्र और राज्य सरकारों के खजाने में माल एवं सेवा कर यानी जीएसटी के रूप में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस दौरान कुल सकल जीएसटी संग्रह सालाना आधार पर 14.7 प्रतिशत की जोरदार बढ़त के साथ 2.03 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के आंकड़े पर पहुंच गया। इस शानदार उछाल की सबसे बड़ी वजह घरेलू बाजार में मजबूत खपत और विदेशों से होने वाले आयात से मिलने वाले राजस्व में आई तेज वृद्धि रही है। हालांकि, इसी अवधि के दौरान व्यापारियों और निर्यातकों को जारी होने वाले जीएसटी रिफंड में 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो घटकर 27,001 करोड़ रुपये रहा। यदि कुल संग्रह में से इस रिफंड की राशि को अलग कर दिया जाए, तो सितंबर में शुद्ध जीएसटी राजस्व 18.1 प्रतिशत की शानदार छलांग लगाकर 1.76 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा दर्ज किया गया।\n\nचालू वित्त वर्ष में तीसरी बार दो लाख करोड़ का आंकड़ा पार\nआंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण बताता है कि देश के भीतर होने वाली घरेलू आर्थिक गतिविधियों से प्राप्त सकल कर संग्रह में 10.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जो बढ़कर करीब 1.38 लाख करोड़ रुपये हो गया। वहीं दूसरी ओर, विदेशी सामानों के आयात से प्राप्त होने वाले कर राजस्व में 26 प्रतिशत का भारी उछाल आया और यह 65,525 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। मौजूदा वित्तीय वर्ष के भीतर यह तीसरा ऐसा मौका है जब देश का मासिक सकल कर संग्रह 2,00,000 करोड़ रुपये की ऐतिहासिक सीमा के ऊपर निकला है। इससे पूर्व अप्रैल के महीने में कर संग्रह लगभग 2.43 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर रहा था, जबकि जुलाई में यह आंकड़ा 2.11 लाख करोड़ रुपये से अधिक दर्ज किया गया था।\n\nपहली छमाही में कुल राजस्व 12.46 लाख करोड़ रुपये\nचालू वित्त वर्ष की पूरी पहली छमाही यानी अप्रैल से सितंबर तक के छह महीनों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो कुल सकल कर संग्रह 11.6 प्रतिशत की बढ़त के साथ 12.46 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है। इसी छह महीने की अवधि के दौरान कुल शुद्ध कर संग्रह भी 10.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए 10.66 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के स्तर पर पहुंच गया है। ईवाई इंडिया के टैक्स पार्टनर सौरभ अग्रवाल ने इस आंकड़े पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कुल कर संग्रह का 2 लाख करोड़ रुपये के अहम स्तर को लांघना और इसमें लगभग 15 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि यह स्पष्ट दर्शाती है कि दुनिया भर में जारी आर्थिक दबावों के बीच भी भारतीय घरेलू मांग बेहद मजबूत बनी हुई है।\n\nप्रमुख राज्यों और पूर्वोत्तर में कर संग्रह की तेज रफ्तार\nराज्यों के स्तर पर बात करें तो देश के कई प्रमुख औद्योगिक और उपभोक्ता राज्यों में राजस्व संग्रह की रफ्तार काफी तेज रही है। उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात और कर्नाटक जैसे बड़े राज्यों में कर संग्रह में 16 से 18 प्रतिशत तक की जबर्दस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बड़े राज्यों के साथ-साथ पूर्वोत्तर भारत के असम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में भी राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। जानकारों के अनुसार यह रुझान देश के हर कोने में संतुलित और व्यापक आर्थिक सुधार का संकेत देता है।\n\nविनिर्माण में मजबूती और रिफंड पर विशेषज्ञों की राय\nकर विशेषज्ञों ने इस पूरे परिदृश्य पर अपनी राय साझा की है। टैक्स कनेक्ट एडवाइजरी सर्विसेज एलएलपी के पार्टनर विवेक जालान ने बताया, \"जीएसटी कलेक्शन में दर्ज बढ़ोतरी विनिर्माण और खपत की मजबूती को दर्शाती है।\" हालांकि, उन्होंने रिफंड में दर्ज हुई कमी पर ध्यान दिलाते हुए कहा कि रिफंड में आई यह गिरावट इस ओर इशारा करती है कि संबंधित विभाग संभवतः व्यापारियों के भुगतानों को रोक रहा है। उन्होंने जोर दिया कि व्यापार जगत में तरलता और नकदी का नियमित प्रवाह बनाए रखने के लिए इस प्रक्रिया पर करीबी नजर रखी जानी चाहिए।\n\nइसका आप पर असर\nसरकारी खजाने में कर संग्रह का लगातार दो लाख करोड़ रुपये से ऊपर बने रहना देश की राजकोषीय मजबूती और विकास योजनाओं के लिए सकारात्मक संकेत है।\n\n• आम उपभोक्ताओं के लिए: कर संग्रह में तेजी इस बात का प्रमाण है कि बाजार में वस्तुओं और सेवाओं की मांग स्थिर बनी हुई है। इसका मतलब है कि निकट भविष्य में सरकार पर अप्रत्यक्ष करों की दरें बढ़ाने का दबाव नहीं रहेगा।\n• कारोबारियों और सूक्ष्म उद्यमियों के लिए: रिफंड में 3 प्रतिशत की गिरावट से कई छोटे व्यवसायों की कार्यशील पूंजी अटक सकती है। व्यापारियों को अपने कर दावों और इनपुट टैक्स क्रेडिट दस्तावेजों की जांच समय रहते पूरी रखनी चाहिए ताकि नकदी का संकट न आए।\n• सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर: सरकार के पास राजस्व बढ़ने से सड़क, रेलवे और कल्याणकारी योजनाओं के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन उपलब्ध रहेंगे। विकास कार्यों में तेजी आने से व्यापक स्तर पर रोजगार और आर्थिक अवसरों का विस्तार होता है।\n• राज्यों के बजटीय आवंटन पर: उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक और पूर्वोत्तर राज्यों में संग्रह बढ़ने से राज्य सरकारों को अपना बजट घाटा नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। इससे स्थानीय स्तर पर विकास परियोजनाओं के लिए धन की कमी नहीं होगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nसितंबर में कर संग्रह का 2.03 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंचना घरेलू मांग में निरंतर तेजी और विदेशी सामानों के आयात से मिलने वाले भारी सीमा शुल्क व एकीकृत कर का सीधा परिणाम है।\n\n• घरेलू खपत और विनिर्माण में उछाल: देश के आंतरिक बाजारों में व्यावसायिक लेन-देन और उत्पादन गतिविधियों में 10.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई। उपभोक्ताओं द्वारा की जा रही निरंतर खरीदारी ने स्थानीय कर आधार को मजबूती प्रदान की।\n• आयात राजस्व में 26 प्रतिशत की तेजी: अंतरराष्ट्रीय स्तर से देश में आने वाली वस्तुओं के आयात पर लगने वाले करों में भारी वृद्धि दर्ज की गई। इसने अकेले 65,525 करोड़ रुपये का योगदान देकर कुल संग्रह को ऊंचाई पर पहुंचाया।\n• त्योहारी सीजन से पहले इन्वेंटरी निर्माण: विनिर्माता और खुदरा कारोबारी आगामी त्योहारी महीनों की मांग पूरी करने के लिए सितंबर में पहले से माल तैयार और स्टॉक कर रहे थे। इस अग्रिम आपूर्ति श्रृंखला गतिविधि से कर चालान और लेन-देन में स्वतः वृद्धि हुई।\n• रिफंड वितरण में गिरावट: कर प्राधिकारियों द्वारा सितंबर महीने में रिफंड की निकासी 3 प्रतिशत कम रहने से शुद्ध राजस्व में 18.1 प्रतिशत का असाधारण उछाल दर्ज हुआ।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सितंबर महीने में कुल कितना सकल जीएसटी संग्रह हुआ?\nसितंबर में कुल सकल जीएसटी संग्रह 14.7 प्रतिशत बढ़कर 2.03 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा।\n\n2. रिफंड घटाने के बाद शुद्ध जीएसटी संग्रह कितना रहा?\nरिफंड घटाने के बाद सितंबर में शुद्ध जीएसटी संग्रह 18.1 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1.76 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा दर्ज किया गया।\n\n3. चालू वित्त वर्ष में कर संग्रह ने कब-कब दो लाख करोड़ रुपये का स्तर पार किया है?\nचालू वित्त वर्ष में अप्रैल में 2.43 लाख करोड़ रुपये, जुलाई में 2.11 लाख करोड़ रुपये और अब सितंबर में 2.03 लाख करोड़ रुपये का संग्रह दर्ज हुआ है।\n\n4. घरेलू गतिविधियों और आयात से अलग-अलग कितना कर मिला?\nघरेलू गतिविधियों से करीब 1.38 लाख करोड़ रुपये और आयात से 26 प्रतिशत की बढ़त के साथ 65,525 करोड़ रुपये का कर राजस्व प्राप्त हुआ।\n\n5. वित्त वर्ष की पहली छमाही में कुल कितना कर संग्रह हो चुका है?\nअप्रैल से सितंबर की पहली छमाही में सकल जीएसटी संग्रह 11.6 प्रतिशत बढ़कर 12.46 लाख करोड़ रुपये और शुद्ध संग्रह 10.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।\n\n6. किन राज्यों में जीएसटी संग्रह में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई?\nउत्तर प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात और कर्नाटक में 16 से 18 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि असम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड में भी शानदार बढ़ोतरी रही।",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-10-01",
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