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  "type": "article",
  "title": "कानपुर को मिली बड़ी सौगात, 150 करोड़ की लागत से बना सरैंया रेलवे ओवरब्रिज जनता को समर्पित",
  "summary": "कानपुर में छह साल के लंबे इंतजार के बाद 1.13 किलोमीटर लंबे सरैंया रेलवे ओवरब्रिज पर वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई है। 150 करोड़ रुपये की लागत से बने इस चार लेन पुल से शहर में जाम की समस्या से बड़ी राहत मिलेगी।",
  "content": "कानपुर के निवासियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है क्योंकि लंबे समय से प्रतीक्षित सरैंया रेलवे ओवरब्रिज को यातायात के लिए खोल दिया गया है। इस आधुनिक परियोजना के शुरू होने से शहरवासियों को रोजाना लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम से बड़ी निजात मिलने की पूरी उम्मीद है।\n\n150 करोड़ की लागत से हुआ तैयार\nइस महत्वपूर्ण पुल के निर्माण पर कुल 150 करोड़ रुपये की लागत आई है। गंगा बैराज की तरफ से आने वाले वाहन अब इस ओवरब्रिज का इस्तेमाल करके सीधे कानपुर शहर के भीतर प्रवेश कर सकेंगे। इससे उन्नाव, रायबरेली और लखनऊ जैसे पड़ोसी शहरों से कानपुर आने-जाने वाले यात्रियों का सफर काफी सुगम और समय बचाने वाला हो गया है। सबसे बड़ा फायदा यह है कि रेलवे क्रॉसिंग बंद होने की स्थिति में अब चालकों को घंटों तक ट्रैफिक में फंसे रहने की मजबूरी का सामना नहीं करना पड़ेगा।\n\nगंगा बैराज से आजाद मार्ग तक का मार्ग\nयह नया आरओबी गंगा बैराज और शुक्लागंज मार्ग पर स्थित रेलवे क्रॉसिंग के ऊपर से गुजरता है। इस पुल की शुरुआत सरैंया गांव की तरफ से होती है और यह रेलवे लाइन को पार करते हुए मरहला चौराहे से आगे बढ़ते हुए आजाद मार्ग की तरफ नीचे उतरता है। इस व्यवस्था के लागू होने से शुक्लागंज और आजाद मार्ग की ओर से आने वाले तमाम वाहन बिना किसी रुकावट के रेलवे क्रॉसिंग को बायपास करते हुए सीधे गंगा बैराज की तरफ पहुंच सकेंगे।\n\nचार लेन और आधुनिक डिजाइन\nयातायात को सुचारू रूप से चलाने के लिए इस ओवरब्रिज को चार लेन का विस्तृत रूप दिया गया है। इस पूरे पुल की कुल लंबाई करीब 1.13 किलोमीटर मापी गई है। पुल के दोनों किनारों पर साढ़े सात चौड़ी सड़क का निर्माण किया गया है ताकि गाड़ियां बिना किसी बाधा के निकल सकें। चूंकि इस रास्ते पर कुल पांच मोड़ बनाए गए हैं, इसलिए सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वाहन चालकों को 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति सीमा में ही वाहन चलाने की सख्त सलाह दी गई है।\n\nयोजना से लेकर निर्माण तक का सफर\nइस बड़े प्रोजेक्ट की रूपरेखा साल 2016 में ही तैयार कर ली गई थी। उस वक्त शुरुआती योजना के तहत पुल की लंबाई 785 मीटर तय की गई थी और इसकी अनुमानित लागत करीब 78 करोड़ रुपये तय की गई थी। इसके बाद साल 2020 में इस परियोजना को औपचारिक मंजूरी मिली और जमीनी स्तर पर निर्माण कार्य शुरू हुआ। हालांकि बाद में बढ़ती जरूरतों और लागत के चलते बजट बढ़कर 150 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।\n\nडिजाइन में बदलाव और देरी के कारण\nइस प्रोजेक्ट को मूल रूप से जून 2023 तक पूरा किए जाने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन बाद में इलाके में बढ़ते ट्रैफिक के दबाव को भांपते हुए अधिकारियों ने पुल की मूल डिजाइन में संशोधन करने का बड़ा फैसला लिया। पहले इस पुल को मरहला चौराहे पर ही उतारने की योजना बनाई गई थी, लेकिन वहां संभावित ट्रैफिक जाम को देखते हुए पुल के छोर को चौराहे से करीब 350 मीटर आगे बढ़ाकर आजाद मार्ग की तरफ सिफ्ट कर दिया गया। इस बदलाव की वजह से पुल की कुल लंबाई बढ़कर लगभग 1129 मीटर तक पहुंच गई। डिजाइन में बार-बार बदलाव, बजट संबंधी स्वीकृतियों और निर्माण एजेंसियों से जुड़ी दिक्कतों के कारण काम में वक्त लगा। सितंबर 2024 में संशोधित कार्ययोजना के तहत निर्माण में फिर तेजी लाई गई और अप्रैल 2025 में बचे हुए काम को पूरा करने की जिम्मेदारी एक अन्य निर्माण एजेंसी को सौंपी गई।\n\nफाटक बंद होने की पुरानी समस्या से मुक्ति\nसरैंया रेलवे क्रॉसिंग पर ट्रैफिक की समस्या बहुत पुरानी और गंभीर रही है। कानपुर और लखनऊ के व्यस्त रेलमार्ग पर लगातार ट्रेनों की आवाजाही होने के कारण इस रेलवे फाटक को दिनभर में औसतन 80 बार बंद करना पड़ता था। एक बार फाटक गिरने पर वाहनों को लगभग 10 से 15 मिनट तक इंतजार करना पड़ता था, जिसके चलते क्रॉसिंग के दोनों तरफ गाड़ियों की लंबी कतारें लग जाती थीं। कई बार तो स्थिति ऐसी बनती थी कि वाहन चालकों को आधे-आधे घंटे तक जाम की जंजीरों में बंधे रहना पड़ता था। अब इस नए ओवरब्रिज के शुरू हो जाने से उस रास्ते पर वाहनों का दबाव काफी हद तक कम हो गया है।\n\nजाजमऊ पुल की मरम्मत को मिलेगी गति\nभारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के निदेशक पंकज यादव ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सरैंया आरओबी के शुरू होने से व्यस्त जाजमऊ गंगा पुल पर वाहनों का अतिरिक्त लोड काफी कम हो जाएगा। अब तक लखनऊ और कानपुर के बीच आवागमन करने वाले अधिकांश भारी और हल्के वाहन जाजमऊ पुल का ही इस्तेमाल करते थे। अब वैकल्पिक मार्ग मिलने से जाजमऊ पुल पर दबाव घटेगा और उसकी जरूरी मरम्मत का काम भी तेजी से पूरा कराया जा सकेगा।\n\nरोडवेज बसों के संचालन की तैयारी\nप्रशासन की तरफ से लखनऊ और रायबरेली रूट पर चलने वाली रोडवेज बसों का संचालन भी आगामी दीपावली के पर्व के ठीक बाद इसी नए रास्ते से सुनिश्चित करने की पूरी तैयारी की जा रही है। रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक महेश कुमार के अनुसार इस बाबत जिला प्रशासन के तमाम जिम्मेदार अधिकारियों के साथ आवश्यक बातचीत पूरी हो चुकी है, जिससे आने वाले समय में यात्रियों को और अधिक बेहतर परिवहन सुविधाएं मिल सकेंगी।\n\nइसका आप पर असर\nसरैंया रेलवे ओवरब्रिज के शुरू होने से कानपुर और आसपास के शहरों के बीच सफर करने वाले लाखों लोगों को रोजाना लगने वाले लंबे जाम से सीधी राहत मिलेगी।\n\n• यात्रा का समय: रेलवे क्रॉसिंग बंद होने पर लगने वाला 10 से 30 मिनट का इंतजार अब पूरी तरह खत्म हो गया है, जिससे रोजाना आवागमन करने वालों का कीमती समय बचेगा।\n• स्थानीय यातायात: कानपुर और शुक्लागंज तथा आजाद मार्ग के बीच का सफर करने वाले वाहन चालकों को अब जाम का सामना नहीं करना पड़ेगा।\n• पड़ोसी शहर: उन्नाव, रायबरेली और लखनऊ से कानपुर आने-जाने वाले यात्रियों और रोडवेज बसों का मार्ग सुगम हो जाएगा।\n• जाजमऊ पुल: इस नए मार्ग के खुलने से जाजमऊ गंगा पुल पर वाहनों का अत्यधिक दबाव घटेगा, जिससे उसकी मरम्मत का काम तेजी से हो सकेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nसरैंया रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण और इसके पूरा होने में आई देरी के पीछे कई तकनीकी और प्रशासनिक कारण जिम्मेदार रहे हैं। परियोजना को समय पर पूरा करने में डिजाइन में किए गए बदलाव और बजट की स्वीकृतियों का असर पड़ा।\n\n• ट्रेन का दबाव: कानपुर-लखनऊ रेलमार्ग पर भारी संख्या में ट्रेनों की आवाजाही के कारण फाटक दिनभर में लगभग 80 बार बंद होता था, जिससे भयंकर जाम लगता था।\n• डिज़ाइन में बदलाव: बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए पुल को मरहला चौराहे से आगे बढ़ाकर आजाद मार्ग तक ले जाने का फैसला हुआ, जिससे लंबाई बढ़ गई।\n• प्रशासनिक अड़चनें: बजट मंजूरियों, एजेंसियों के बदलाव और निर्माण से जुड़ी अन्य व्यावहारिक दिक्कतों के चलते काम की समयसीमा प्रभावित हुई।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सरैंया रेलवे ओवरब्रिज की कुल लंबाई कितनी है?\nसरैंया रेलवे ओवरब्रिज की कुल लंबाई करीब 1.13 किलोमीटर यानी 1129 मीटर है।\n\n2. इस ओवरब्रिज के निर्माण में कुल कितनी लागत आई है?\nइस पुल के निर्माण पर कुल 150 करोड़ रुपये की लागत आई है।\n\n3. इस पुल के निर्माण की योजना कब बनाई गई थी?\nसरैंया ओवरब्रिज बनाने की योजना साल 2016 में तैयार की गई थी और वर्ष 2020 में इसका निर्माण शुरू हुआ था।\n\n4. इस पुल के शुरू होने से किस रेलवे क्रॉसिंग पर राहत मिलेगी?\nइस पुल के शुरू होने से सरैंया रेलवे क्रॉसिंग पर लगने वाले जाम से मुक्ति मिलेगी जहां दिनभर में फाटक करीब 80 बार बंद होता था।\n\n5. पुल पर वाहन चलाने के लिए क्या गति सीमा तय की गई है?\nपुल पर पांच मोड़ होने के कारण वाहन चालकों को 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से वाहन चलाने की सलाह दी गई है।",
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  "publishedAt": "2026-11-06",
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