स्मार्टफोन पीएलआई से सरकारी खजाने में आए 3.25 लाख करोड़ रुपये, इंसेंटिव पर खर्च हुए सिर्फ 19 हजार करोड़ मोबाइल फोन विनिर्माण के लिए दी गई 19,000 करोड़ रुपये की पीएलआई के एवज में सरकार को 3.25 लाख करोड़ रुपये का टैक्स मिला है। इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में अब 25 लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है। भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को गति देने के लिए शुरू की गई प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना ने सरकारी खजाने को उम्मीद से कहीं अधिक राजस्व दिया है। लगभग पांच वर्ष पूर्व शुरू की गई इस पहल के तहत केंद्र सरकार ने मोबाइल फोन उद्योग को प्रोत्साहन राशि के रूप में 19,000 करोड़ रुपये बांटे थे, जिसके बदले सरकारी खजाने में टैक्स के तौर पर कुल 3.25 लाख करोड़ रुपये जमा हुए हैं। टैक्स कलेक्शन और रोजगार के आधिकारिक आंकड़े केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस वित्तीय सफलता का पूरा ब्योरा साझा किया। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 19,000 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन के बदले योजना के लाभार्थियों से 25,000 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष कर (डायरेक्ट टैक्स) हासिल हुआ है। वहीं, माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के रूप में सरकार को 3 लाख करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि मिली है। राजस्व के अतिरिक्त इस योजना ने देश में रोजगार के व्यापक अवसर भी तैयार किए हैं। अश्विनी वैष्णव के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र वर्तमान में 25 लाख लोगों को आजीविका प्रदान कर रहा है। इसमें से अकेले मोबाइल फोन निर्माण क्षेत्र में 12 लाख कर्मचारी सीधे तौर पर काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि निरंतर प्रयासों से रोजगार के इस आंकड़े को भविष्य में और भी काफी ऊपर ले जाया जा सकता है। सब्सिडी की आलोचना पर सामने आए ठोस तथ्य केंद्रीय मंत्री का यह स्पष्टीकरण सोशल मीडिया पर प्रसारित उस वीडियो के प्रत्युत्तर में सामने आया, जिसमें भारत द्वारा करदाताओं के पैसे से सब्सिडी देकर इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण को बढ़ावा देने के मॉडल की आलोचना की गई थी। उस वीडियो में तर्क दिया गया था कि सब्सिडी वाले इन मोबाइल फोनों के निर्यात से देश को जितना लाभ हो रहा है, उससे कहीं अधिक विदेशी मुद्रा कलपुर्जों के आयात में खर्च हो रही है। इस नकारात्मक दावे का खंडन करते हुए केंद्रीय मंत्री ने वास्तविक वित्तीय और औद्योगिक प्रगति के आंकड़े सामने रखे। 10 वर्षों में बदला विनिर्माण और निर्यात का परिदृश्य मार्च में जारी आधिकारिक आंकड़ों से भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स परिदृश्य में आए बुनियादी बदलाव का पता चलता है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने दो लाख करोड़ रुपये मूल्य के मोबाइल फोन का निर्यात दर्ज किया। सबसे उल्लेखनीय परिवर्तन घरेलू निर्भरता में देखने को मिला है। लगभग 10 वर्ष पहले देश की कुल घरेलू मांग का 75 फीसदी हिस्सा आयात के जरिए पूरा होता था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में घटकर घरेलू मांग का महज 0.02 फीसदी रह गया है। उत्पादन के स्तर पर भी भारी उछाल आया है। वर्ष 2014-15 में जहां कुल इलेक्ट्रॉनिक सामान का उत्पादन करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये था, वहीं वित्त वर्ष 2024-25 में यह छह गुना बढ़कर लगभग 11.3 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इसी समयावधि में मोबाइल फोन का उत्पादन लगभग 0.18 लाख करोड़ रुपये से उछलकर करीब 5.5 लाख करोड़ रुपये तक जा पहुंचा। निर्यात के मोर्चे पर भी दशक भर में आठ गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो 0.38 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में करीब 3.3 लाख करोड़ रुपये हो गया। अक्टूबर 2028 तक स्वदेशी स्मार्टफोन ब्रांड का लक्ष्य घरेलू विनिर्माण को और अधिक सशक्त बनाने के इरादे से सरकार ने अब 62,500 करोड़ रुपये के कुल आवंटन वाली मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (एमपीएमएस) शुरू की है। इस नई नीति का मुख्य लक्ष्य पूरी तरह से भारतीय स्मार्टफोन तैयार करना है, जिनकी डिजाइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग दोनों भारत की सीमा के भीतर ही होगी। अश्विनी वैष्णव ने इस स्वदेशी स्मार्टफोन ब्रांड के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अक्टूबर 2028 की समयसीमा तय की है। इस व्यापक योजना का मकसद वैश्विक बाजार में मौजूद ऐपल, सैमसंग और प्रमुख चीनी कंपनियों के उपकरणों को तकनीकी तथा व्यापारिक स्तर पर सीधी चुनौती देना है। इसका आप पर असर स्मार्टफोन उत्पादन के स्थानीयकरण से देश में तकनीक की कीमतों और रोजगार के नए रास्ते खुले हैं। • भारतीय खरीदारों पर प्रभाव: देश में बिकने वाले लगभग 99.98 फीसदी मोबाइल अब भारत में ही बनते हैं, जिससे आयात निर्भरता खत्म हुई है। स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर असेंबली होने के कारण डिवाइस की कीमतों में स्थिरता बनी रहती है। • तकनीकी रोजगार के अवसर: इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल विनिर्माण क्षेत्र में वर्तमान में 25 लाख से अधिक लोग काम कर रहे हैं। यदि विनिर्माण का यह दायरा बढ़ता है, तो तकनीकी असेंबली और हार्डवेयर डिजाइन में लाखों नई नौकरियां जुड़ेंगी। • सरकारी राजस्व का विस्तार: 19,000 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन के बदले 3.25 लाख करोड़ रुपये का टैक्स राजस्व मिला है। इस अतिरिक्त बजटीय आय का उपयोग देश में अन्य बुनियादी ढांचा और सार्वजनिक विकास कार्यों में किया जा सकेगा। • भविष्य के घरेलू उत्पाद: सरकार ने 62,500 करोड़ रुपये की नई योजना के तहत अक्टूबर 2028 तक विशुद्ध भारतीय स्मार्टफोन पेश करने का लक्ष्य रखा है। आने वाले वर्षों में उपभोक्ताओं को वैश्विक ब्रांड्स के मुकाबले पूरी तरह घरेलू स्मार्टफोन विकल्प मिलेंगे। ऐसा क्यों हुआ केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने यह विस्तृत विवरण सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही उन भ्रांतियों के जवाब में जारी किया, जिनमें विनिर्माण सब्सिडी को गैर-फायदेमंद बताया गया था। • सब्सिडी पर उठी आलोचना: सोशल मीडिया पर एक वायरल वीडियो में आरोप लगाया गया था कि निर्यात लाभ से अधिक पैसा आयातित पुर्जों पर बर्बाद हो रहा है। सरकार ने यह सिद्ध करने के लिए आंकड़े जारी किए कि इंसेंटिव की तुलना में टैक्स वसूली कई गुना अधिक रही है। • आयात पर निर्भरता समाप्त करने की नीति: एक दशक पूर्व भारत अपनी मोबाइल जरूरतों का 75 फीसदी आयात करता था, जिससे भारी विदेशी मुद्रा बाहर जाती थी। पीएलआई योजना लाकर घरेलू असेंबली को बढ़ावा देना और विदेशी मुद्रा की बचत करना प्राथमिक आवश्यकता थी। • घरेलू डिजाइन और बौद्धिक संपदा का अभाव: मौजूदा सफलता असेंबली आधारित रही है, इसलिए सरकार ने 62,500 करोड़ रुपये की नई योजना पेश की। इसका उद्देश्य भारत में केवल फोन जोड़ने के बजाय अक्टूबर 2028 तक पूरी तरह से देश में डिजाइन किए गए स्मार्टफोन विकसित करना है। सवाल-जवाब 1. सरकार ने मोबाइल पीएलआई योजना पर कितना खर्च किया और कितना टैक्स मिला? सरकार ने 19,000 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी, जिसके बदले 25,000 करोड़ रुपये प्रत्यक्ष कर और 3 लाख करोड़ रुपये जीएसटी मिलाकर कुल 3.25 लाख करोड़ रुपये टैक्स मिला। 2. भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और मोबाइल विनिर्माण से कितने लोगों को रोजगार मिला है? इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में कुल 25 लाख लोगों को रोजगार मिला है, जिसमें अकेले मोबाइल फोन विनिर्माण क्षेत्र में 12 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं। 3. पिछले 10 वर्षों में भारत में मोबाइल फोन के आयात में क्या बदलाव आया है? दस वर्ष पूर्व मोबाइल फोन का आयात घरेलू मांग का 75 फीसदी था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में घटकर महज 0.02 फीसदी रह गया है। 4. वित्त वर्ष 2024-25 में भारत से कितने मूल्य के मोबाइल फोन का निर्यात हुआ? आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने दो लाख करोड़ रुपये मूल्य के मोबाइल फोन का निर्यात किया। 5. घरेलू स्मार्टफोन ब्रांड्स के लिए सरकार की नई योजना क्या है? सरकार ने 62,500 करोड़ रुपये की एमपीएमएस योजना शुरू की है, जिसका लक्ष्य अक्टूबर 2028 तक भारत में डिजाइन और निर्मित स्मार्टफोन पेश करना है। https://trendkia.com/business/smartphone-pli-se-sarakari-khajane-men-ae-3-25-lakha-karora-rupaye-insentiva-para-kharcha-hue-sirpha-19-hajara-karora-52473 TrendKia — Har trend, sabse pehle.