# संन्यास के 13 साल बाद भी बढ़ा सचिन तेंदुलकर का दबदबा, 1208 करोड़ रुपये पहुंची ब्रांड वैल्यू

> क्रिकेट से संन्यास लेने के 13 साल बाद भी सचिन तेंदुलकर की ब्रांड वैल्यू बढ़कर 12.59 करोड़ डॉलर (करीब 1208 करोड़ रुपये) हो गई है, जिससे वह देश के चौथे सबसे मूल्यवान सेलिब्रिटी बन गए हैं।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-09-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/snnyasa-ke-13-sala-bada-bhi-barha-sachin-tendulkar-ka-dabadaba-1208-karora-rupaye-pahunchi-branda-vailyu-30190 · **Language:** Hindi
**Tags:** सचिन तेंदुलकर, ब्रांड वैल्यू, क्रॉल रिपोर्ट, भारतीय क्रिकेट, सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लिए हुए 13 साल से भी अधिक समय बीत चुका है, लेकिन भारतीय क्रिकेट के दिग्गज सचिन तेंदुलकर की लोकप्रियता और बाजार में उनकी साख लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक साल 2025 में उनकी ब्रांड वैल्यू में 12.2 प्रतिशत की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके साथ ही उनकी कुल ब्रांड कीमत बढ़कर 12.59 करोड़ डॉलर यानी लगभग 1,208 करोड़ रुपये हो गई है। वित्तीय मूल्यांकन करने वाली संस्था क्रॉल के ताजा अध्ययन के अनुसार, इस जबर्दस्त उछाल की बदौलत वह देश के सबसे मूल्यवान सेलिब्रिटीज की सूची में पांचवें स्थान से छलांग लगाकर चौथे नंबर पर पहुंच गए हैं।

## शीर्ष 10 सूची में शामिल अकेले सेवानिवृत्त एथलीट
सचिन तेंदुलकर का क्रिकेट करियर 24 वर्षों तक चला था, जिसमें उन्होंने अनगिनत रिकॉर्ड बनाए। खेल को अलविदा कहे एक दशक से ज्यादा वक्त बीतने के बावजूद उनका व्यावसायिक आकर्षण बना हुआ है। बॉलीवुड कलाकारों और सक्रिय खिलाड़ियों के दबदबे वाली शीर्ष 10 सबसे मूल्यवान सेलिब्रिटीज की सूची में सचिन अकेले ऐसे पूर्व खिलाड़ी हैं जो अब प्रतिस्पर्धी खेल नहीं खेलते हैं। सोशल मीडिया पर भी उनकी सक्रियता और प्रभाव मजबूत बना हुआ है, जहाँ उनका दायरा लगभग 12.5 करोड़ यूजर्स तक फैल चुका है। पिछले एक साल के दौरान उनके ब्रांड एंडोर्समेंट सौदों में 20 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है और वर्तमान में वह 25 अलग-अलग कंपनियों के ब्रांड एम्बेसडर के रूप में जुड़े हुए हैं।

## चकाचौंध से ज्यादा उपभोक्ताओं के भरोसे पर टिकी साख
क्रॉल के वैल्यूएशन और एडवाइजरी सर्विसेज के प्रबंध निदेशक उमाकांत पाणिग्रही के अनुसार, ढाई दशक लंबे करियर के बाद भी सचिन की व्यावसायिक साख अटूट बनी हुई है। उमाकांत पाणिग्रही ने बताया, **"सचिन की अटूट विश्वसनीयता ने ही उन्हें आज भी विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख कंपनियों का पसंदीदा चेहरा बना रखा है।"** उनका ब्रांड पोर्टफोलियो किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि, टायर्स, फिनटेक, ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर प्रॉडक्ट्स जैसे विविध क्षेत्रों में फैला हुआ है।

ब्रांड विशेषज्ञों का मानना है कि सचिन को अन्य सेलिब्रिटीज से अलग बनाने वाली सबसे बड़ी वजह आम लोगों का उन पर बना अटूट विश्वास है। कंपनियां ऐसे चेहरों को प्राथमिकता देती हैं जिन पर ग्राहक आंख मूंदकर भरोसा कर सकें। हाल ही में कृषि क्षेत्र की प्रमुख कंपनी एसएमएल ने सचिन तेंदुलकर को अपना ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त किया है। यह कंपनी देशभर में 18,000 डीलरों के विशाल नेटवर्क के माध्यम से लाखों किसानों तक अपने उत्पाद पहुंचाती है, जिससे ग्रामीण भारत में भी सचिन की पहुंच का प्रमाण मिलता है।

## दीर्घकालिक साझेदारियां और वैश्विक पहचान
सचिन तेंदुलकर का कॉर्पोरेट जगत के साथ रिश्ता बेहद मजबूत और लंबे समय तक चलने वाला रहा है। इसका एक प्रमुख उदाहरण अपोलो टायर्स के साथ उनका अनुबंध है, जिसके वह पिछले 8 वर्षों से ब्रांड एम्बेसडर हैं। अपोलो टायर्स के ग्लोबल ब्रांड स्ट्रैटेजी प्रमुख रेम्यो डी-क्रूज ने इस साझेदारी पर बात करते हुए कहा, **"हमें वैश्विक बाजार में अपनी पहचान मजबूत करने के लिए एक ऐसे चेहरे की जरूरत थी जिस पर दुनिया भर के लोग भरोसा करते हों।"** उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सचिन को किसी स्टंट करने वाले फैंसी ड्राइवर के बजाय एक जिम्मेदार और भरोसेमंद वाहन मालिक के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो आम जनता से सीधे जुड़ता है।

सचिन से जुड़े प्रमुख कॉर्पोरेट नामों की सूची काफी लंबी है। वर्तमान में वह ल्यूमिनस, लिवप्योर, अपोलो टायर्स, जिलेट, डीपी वर्ल्ड, बैंक ऑफ बड़ौदा, चितले बंधु, तनिष्क, डॉ अग्रवाल, हाफले, ऑर्गेनिक इंडिया, राजहंस रियल्टी, रेडिट, एसएमएल और टेक्नो पेंट्स जैसी प्रमुख कंपनियों के विज्ञापनों का चेहरा हैं। इनमें से कई कंपनियों के साथ उनका अनुबंध वर्षों पुराना है।

## नया बिजनेस मॉडल: स्टार्टअप्स में निवेश और ब्रांड प्रमोशन
केवल पारंपरिक कंपनियों के विज्ञापन करने तक सीमित रहने के बजाय, सचिन ने अपनी ब्रांड उपस्थिति को नए जमाने के स्टार्टअप्स के साथ भी जोड़ा है। उन्होंने कई उभरती कंपनियों में रणनीतिक निवेशक के रूप में पूंजी लगाई है। प्रयुक्त कारों के प्लैटफॉर्म स्पिनी के अलावा उन्होंने क्रिस्ट और शुगर.फिट जैसे हेल्थ और फिटनेस स्टार्टअप्स में पैसा लगाया है। इन कंपनियों में उन्होंने न केवल वित्तीय निवेश किया है, बल्कि उनके ब्रांड एंडोर्समेंट की जिम्मेदारी भी संभाली है।

इसके अतिरिक्त, सचिन ने व्यापार के शुरुआती चरणों में ही कई अन्य उपक्रमों में हिस्सेदारी हासिल की है। उन्होंने टेनएक्सयू में इक्विटी पार्टनरशिप बनाई है और इंडियन स्ट्रीट प्रीमियर लीग (ISPL) में भी बड़ी हिस्सेदारी रखी है। साथ ही उन्होंने एसआरटी10 ग्लोबल अकादमी में भी शुरुआती दौर में निवेश किया था। ये सभी निवेश सीधे व्यक्तिगत नाम से करने के स्थान पर सहयोगी संस्थाओं और रणनीतिक साझेदारियों के माध्यम से संचालित किए गए हैं, जो उनके दूरदर्शी व्यावसायिक दृष्टिकोण को दर्शाता है।

## इसका आप पर असर
सचिन तेंदुलकर की ब्रांड वैल्यू में यह बढ़ोतरी दिखाती है कि भारतीय बाजार में लंबे समय से बना भरोसा और साख किसी भी तरह के तात्कालिक ग्लैमर से ज्यादा टिकाऊ होती है।

- **उपभोक्ताओं के लिए:** सचिन तेंदुलकर जिन ब्रांड्स का विज्ञापन करते हैं, उनमें विश्वसनीयता और गुणवत्ता को प्राथमिकता दी जाती है। इससे उपभोक्ताओं को रोजमर्रा के उत्पादों और वित्तीय सेवाओं का चयन करते समय भरोसा मिलता है।
- **स्टार्टअप्स और निवेशकों के लिए:** सचिन का स्पिनी और शुगर.फिट जैसे नए दौर के स्टार्टअप्स में निवेश यह दर्शाता है कि दिग्गज हस्तियां केवल विज्ञापन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे कंपनियों की दीर्घकालिक वृद्धि में भागीदार बन रही हैं।
- **खेल जगत और एथलीटों के लिए:** यह साबित करता है कि मैदान से संन्यास लेने के बाद भी खिलाड़ी अपनी साख और सही पोर्टफोलियो प्रबंधन के दम पर कई दशकों तक ब्रांड वैल्यू बनाए रख सकते हैं।
- **कॉर्पोरेट और ब्रांड्स के लिए:** कंपनियां अब केवल सोशल मीडिया ट्रेंड्स के बजाय टिकाऊ सार्वजनिक छवि वाले चेहरों पर दांव लगा रही हैं, जो कृषि से लेकर ऑटोमोबाइल तक हर वर्ग से जुड़ सके।

## ऐसा क्यों हुआ
सचिन तेंदुलकर की ब्रांड वैल्यू 13 साल के संन्यास के बाद भी लगातार बढ़ रही है क्योंकि उनकी छवि चकाचौंध के बजाय उपभोक्ताओं के विश्वास और निष्ठा पर आधारित है।

- **सार्वजनिक विश्वास और साख:** 24 साल के लंबे और बेदाग क्रिकेट करियर ने सचिन को भारत के सबसे विश्वसनीय चेहरों में से एक बनाया है, जिससे ब्रांड्स को ग्राहकों का भरोसा हासिल करने में आसानी होती है।
- **व्यापक सोशल मीडिया पहुंच:** 12.5 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ताओं तक उनकी डिजिटल पहुंच के कारण वह नई पीढ़ी के दर्शकों और उपभोक्ताओं से सीधे जुड़े रहते हैं।
- **विविध ब्रांड पोर्टफोलियो:** कृषि, टायर्स, फिनटेक, और ऑटोमोबाइल जैसे 25 अलग-अलग क्षेत्रों के ब्रांड्स के साथ दीर्घकालिक संबंधों ने उनकी बाजार उपस्थिति को मजबूत बनाए रखा है।
- **स्मार्ट स्टार्टअप निवेश:** केवल विज्ञापन करने के बजाय नए दौर की उभरती कंपनियों में रणनीतिक इक्विटी साझेदारियां बनाने से उनकी व्यावसायिक वैल्यू में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

## सवाल-जवाब

### 1. 2025 में सचिन तेंदुलकर की ब्रांड वैल्यू कितनी हो गई है?
साल 2025 में सचिन तेंदुलकर की ब्रांड वैल्यू 12.2 प्रतिशत बढ़कर 12.59 करोड़ डॉलर (लगभग 1,208 करोड़ रुपये) हो गई है।

### 2. भारत के सबसे मूल्यवान सेलिब्रिटीज की सूची में सचिन किस स्थान पर हैं?
सचिन तेंदुलकर पांचवें स्थान से छलांग लगाकर अब भारत के चौथे सबसे मूल्यवान सेलिब्रिटी बन गए हैं।

### 3. सचिन तेंदुलकर कितने ब्रांड्स का एंडोर्समेंट करते हैं?
वर्तमान में सचिन तेंदुलकर 25 कंपनियों के ब्रांड्स से जुड़े हुए हैं और उनके एंडोर्समेंट में एक साल में 20 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।

### 4. सचिन तेंदुलकर ने किन प्रमुख स्टार्टअप्स में निवेश किया है?
सचिन ने स्पिनी, क्रिस्ट, शुगर.फिट, टेनएक्सयू, इंडियन स्ट्रीट प्रीमियर लीग (ISPL) और एसआरटी10 ग्लोबल अकादमी में निवेश किया हुआ है।

### 5. अपोलो टायर्स के साथ सचिन का अनुबंध कितने समय से चल रहा है?
सचिन तेंदुलकर पिछले 8 वर्षों से अपोलो टायर्स के ब्रांड एम्बेसडर के रूप में काम कर रहे हैं।

### 6. सोशल मीडिया पर सचिन तेंदुलकर की कुल पहुंच कितनी है?
विभिन्न डिजिटल प्लैटफॉर्म्स पर सचिन तेंदुलकर की सोशल मीडिया पहुंच लगभग 12.5 करोड़ यूजर्स तक है।

## प्रेरणा और सबक
सचिन तेंदुलकर की मैदान के बाहर व्यावसायिक सफलता यह सिखाती है कि अनुशासन, ईमानदारी और निरंतरता से बनाई गई छवि जीवन भर सम्मान और अवसर दिलाती है।

- **भरोसा ही सबसे बड़ी संपत्ति है:** अपनी साख और मूल्यों से कभी समझौता न करना लंबी अवधि में सबसे ज्यादा व्यावसायिक और व्यक्तिगत लाभ देता है।
- **समय के साथ बदलाव:** केवल पारंपरिक विज्ञापनों तक सीमित न रहकर नए दौर के स्टार्टअप्स में निवेश करना दिखाता है कि नए मौकों को अपनाना कितना जरूरी है।
- **दीर्घकालिक सोच:** किसी भी क्षेत्र में तुरंत मिलने वाली सफलता के बजाय स्थायी और दीर्घकालिक साझेदारियों पर ध्यान देना चाहिए।
- **अपनी पहुंच का सही इस्तेमाल:** समाज और बाजार में बने प्रभाव का उपयोग विश्वसनीय और उपयोगी पहलों को आगे बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए।

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