सोलर ड्रायर तकनीक से मसालों और फूलों को सुखाना हुआ आसान, राजस्थान में 40 प्रतिशत सब्सिडी दे रही सरकार मानसून के दौरान फसलों, मसालों और फूलों को सुखाने के लिए सोलर ड्रायर सिस्टम किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहा है। राजस्थान सरकार इस तकनीक को बढ़ावा देने के लिए 40 प्रतिशत तक की सब्सिडी दे रही है। मानसून के मौसम में कृषि उपज, विशेष रूप से मसालों, औषधीय पौधों और फूलों को सुखाना किसानों के लिए एक बेहद कठिन और चुनौती भरा कार्य साबित होता है। बारिश, आंधी, तूफान और बादलों की उपस्थिति के कारण फसलों को बाहर खुले मैदान में सुखाना लगभग असंभव हो जाता है। इसके विपरीत, जब अत्यधिक तेज धूप होती है, तो मसालों और फूलों की पत्तियों का प्राकृतिक रंग फीका पड़ जाता है तथा उनकी सुगंध नष्ट हो जाती है। इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान के रूप में सोलर ड्रायर सिस्टम किसानों के लिए एक बहुत ही लाभकारी और आधुनिक विकल्प बनकर सामने आया है। प्राकृतिक तकनीक से संचालित यह प्रणाली सूरज की किरणों से उत्पन्न गर्मी का उपयोग करके फसलों, फलों, सब्जियों, मसालों और फूलों की नाजुक पत्तियों को पूरी तरह सुरक्षित और स्वच्छ तरीके से सुखाने में मदद करती है। पारंपरिक रूप से खुले में सुखाने की तुलना में सोलर ड्रायर तकनीक कृषि उत्पादों के प्राकृतिक रंग, स्वाद, सुगंध और सभी आवश्यक पोषक तत्वों को लंबे समय तक बरकरार रखती है। इसके परिणाम स्वरूप उत्पादों में नमी समाप्त हो जाती है, जिससे उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ जाती है और किसानों को अपनी उपज का लंबे समय तक भंडारण करने और बाजार में बेहतर दाम हासिल करने का अवसर मिलता है। सोलर ड्रायर के तकनीकी लाभ और उत्पादों की गुणवत्ता सुरक्षा पारंपरिक रूप से खुले आसमान के नीचे धूप में फसल सुखाने से उत्पादों को भारी नुकसान पहुंचता है। खुले में रखे मसाले और फूल धूल-मिट्टी, अचानक आने वाली बारिश, हानिकारक कीड़े-मकोड़ों, फफूंद और पक्षियों के संपर्क में आकर खराब हो जाते हैं। सोलर ड्रायर प्रणाली एक बंद और सुरक्षित ढांचा प्रदान करती है जो इन सभी बाहरी खतरों से कृषि उपज की पूरी सुरक्षा करती है। जब फसलों से नमी पूरी तरह समाप्त हो जाती है, तो खाद्य पदार्थों के सड़ने या खराब होने की संभावना खत्म हो जाती है, जिससे उन्हें कई महीनों तक आसानी से स्टोर करके रखा जा सकता है। इसके साथ ही, यह प्रणाली किसानों को अपनी बची हुई या बाजार में कम कीमत पर बिकने वाली अतिरिक्त सब्जियों को डिहाइड्रेट करके यानी सुखाकर मूल्य-वर्धित उत्पादों में बदलने का अवसर देती है। इस तकनीक के उपयोग से किसान अपनी उपज को सुखाकर बाजार में तीन से पांच गुना तक अधिक मूल्य पर बेच सकते हैं और अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं। राष्ट्रीय बागवानी मिशन और सब्सिडी के प्रावधान कृषि विभाग के उद्यान विभाग के निदेशक डॉक्टर शंकर सिंह राठौड़ ने इस आधुनिक तकनीक के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत सोलर ड्रायर सिस्टम अपने आप में एक अनूठी और क्रांतिकारी तकनीक है। इस प्रणाली के अंतर्गत सुकाई जाने वाली किसी भी फसल में गुणवत्ता के नुकसान की कोई आशंका नहीं रहती है। खुले में सुखाए जाने वाले मसालों, मिर्च और फूलों की प्राकृतिक गुणवत्ता काफी हद तक खत्म हो जाती है, जबकि सोलर ड्रायर तकनीक से फसलों की गुणवत्ता और बाजार मूल्य दोनों में सुधार होता है। मिर्च को सुखाकर लाल मिर्च पाउडर बनाना हो या फिर गुलाब की पत्तियों को सुखाकर गुलकंद और अन्य सुगंधित उत्पाद तैयार करना हो, यह प्रणाली हर प्रकार की फसल के लिए बेहद उपयोगी है। राजस्थान सरकार इस तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए किसानों को विशेष प्रोत्साहन और अनुदान प्रदान कर रही है। योजना के अनुसार, 70 किलोवाट क्षमता वाले सोलर ड्रायर सिस्टम पर, जिसकी इकाई लागत 1 लाख रुपये है, सरकार 40 प्रतिशत की सब्सिडी दे रही है। इसके अलावा, 100 किलोवाट क्षमता वाले सोलर ड्रायर सिस्टम पर, जिसकी इकाई लागत साढ़े 3 लाख रुपये है, पर भी 40 प्रतिशत का भारी अनुदान दिया जा रहा है। ग्रीनहाउस तकनीक और सोलर एग्जॉस्ट फैन की कार्यप्रणाली सोलर ड्रायर की कार्यप्रणाली पूरी तरह से हरित ऊर्जा, ग्रीनहाउस सिद्धांत और सोलर कलेक्टर तकनीक पर आधारित है। जब सूरज की रोशनी इस पारदर्शी ड्रायर के ढांचे पर पड़ती है, तो इसके अंदर का तापमान नियंत्रित रूप से बढ़ने लगता है, जिससे फसलों के अंदर मौजूद नमी धीरे-धीरे वाष्पित होने लगती है। इस प्रणाली में सोलर पैनल से संचालित एग्जॉस्ट फैन लगाए जाते हैं। यह एग्जॉस्ट फैन ड्रायर के भीतर पैदा होने वाली गर्म हवा और वाष्पीकृत नमी को लगातार बाहर खींचकर निकाल देते हैं। इस सतत प्रक्रिया के कारण ड्रायर के अंदर ताजी और सूखी हवा का प्रवाह बना रहता है, जिससे कृषि उत्पाद बहुत कम समय में, समान रूप से और पूरी तरह से स्वच्छ वातावरण में सूख जाते हैं। इस तरह बिना किसी अतिरिक्त बिजली खर्च के किसान अपने उत्पादों को उच्च गुणवत्ता के साथ सुखा सकते हैं। इसका आप पर असर सोलर ड्रायर तकनीक अपनाने से किसानों को फसल सुखाने की लागत कम करने और अपनी उपज का बेहतर बाजार मूल्य प्राप्त करने में मदद मिलती है। • भारत में: यह तकनीक मानसून के मौसम में कृषि उपज के नुकसान को कम करती है। सुखाए गए मूल्य-वर्धित उत्पादों को बेचकर किसान 3 से 5 गुना अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। • राजस्थान में: राज्य सरकार 70 किलोवाट और 100 किलोवाट के सोलर ड्रायर सिस्टम पर 40 प्रतिशत की सब्सिडी दे रही है। किसान राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना के तहत 1 लाख या साढ़े 3 लाख रुपये की यूनिट लागत पर इस अनुदान का लाभ उठा सकते हैं। सवाल-जवाब 1. सोलर ड्रायर सिस्टम क्या है? यह एक ऐसी ग्रीनहाउस तकनीक है जो सूरज की गर्मी और सोलर एग्जॉस्ट फैन का उपयोग करके फसलों, मसालों और फूलों को स्वच्छ वातावरण में सुखाती है। 2. खुले में सुखाने की तुलना में सोलर ड्रायर के क्या लाभ हैं? यह उत्पादों को धूल, बारिश और कीड़ों से बचाता है, प्राकृतिक रंग और स्वाद बनाए रखता है तथा नमी खत्म करके शेल्फ लाइफ बढ़ाता है। 3. राजस्थान सरकार सोलर ड्रायर पर कितनी सब्सिडी दे रही है? राज्य सरकार राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत 70 किलोवाट और 100 किलोवाट क्षमता वाले सोलर ड्रायर सिस्टम पर 40 प्रतिशत की सब्सिडी दे रही है। 4. सोलर ड्रायर सिस्टम की यूनिट लागत कितनी है? 70 किलोवाट सिस्टम की यूनिट लागत 1 लाख रुपये है, जबकि 100 किलोवाट सिस्टम की यूनिट लागत साढ़े 3 लाख रुपये निर्धारित है। 5. किसान सुखाए गए उत्पादों से अपनी आय कैसे बढ़ा सकते हैं? किसान अपनी अतिरिक्त सब्जियों और फसलों को डिहाइड्रेट करके मूल्य-वर्धित उत्पादों में बदलकर 3 से 5 गुना अधिक दाम प्राप्त कर सकते हैं। https://trendkia.com/business/solara-drayara-takanika-se-masalon-aura-phulon-ko-sukhana-hua-asana-rajasthan-men-40-pratishata-sabsidi-de-rahi-sarakara-26503 TrendKia — Har trend, sabse pehle.