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  "type": "article",
  "title": "सोने के रिकॉर्ड दाम से चमकी चांदी, बीआईएस देश भर में बढ़ाएगा हॉलमार्किंग और लैब क्षमता",
  "summary": "सोने की कीमतें 1,54,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंचने के बाद उपभोक्ता चांदी के गहनों का रुख कर रहे हैं। इस मांग को देखते हुए भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) अगले दो वर्षों में रेफरल और एसे लैब नेटवर्क का बड़े पैमाने पर विस्तार करने जा रहा है।",
  "content": "कीमती धातुओं के बाजार में सोने के भाव रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के कारण भारतीय आभूषण बाजार में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। महंगे होते सोने के विकल्प के रूप में खरीदार अब चांदी के आभूषणों की ओर रुख कर रहे हैं। चांदी की इस अप्रत्याशित मांग को पूरा करने और बाजार में बिकने वाले गहनों की शुद्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने अपनी गुणवत्ता जांच क्षमताओं में भारी बढ़ोतरी करने की योजना बनाई है। इसके तहत आगामी दो वर्षों में देश के कोने-कोने में रेफरल और एसे प्रयोगशालाओं के नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा, जिससे आभूषणों की जांच प्रक्रिया को अधिक तेज और सुलभ बनाया जा सके।\n\nसिल्वर ज्वैलरी में बढ़ी ग्राहकों की दिलचस्पी\nसर्राफा बाजार में हाल के दिनों में सोने की कीमतों में अभूतपूर्व तेजी दर्ज की गई है। दिल्ली के प्रमुख सर्राफा बाजार में शुक्रवार को सोने का भाव बढ़कर 1,54,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के उच्च स्तर पर बंद हुआ। इतनी ऊंची कीमतों के चलते आम उपभोक्ताओं और खरीदारों के लिए सोने के आभूषण खरीदना काफी खर्चीला साबित हो रहा है। इसके परिणामस्वरूप, बड़ी संख्या में लोग चांदी के आभूषणों को तरजीह देने लगे हैं। चांदी के आभूषण न केवल बजट के अनुकूल हैं, बल्कि आधुनिक डिजाइनों की उपलब्धता के कारण भी ये युवाओं और परिवारों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। मांग में आई इस एकाएक तेजी ने गुणवत्ता मानकों की निगरानी करने वाली राष्ट्रीय संस्था बीआईएस को भी अपनी आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए प्रेरित किया है।\n\nबीआईएस की दो-वर्षीय प्रयोगशाला विस्तार योजना\nचांदी के आभूषणों की बढ़ती खपत के मद्देनजर बीआईएस की उप-महानिदेशक (लैब) निशात एस. हक ने बताया कि संगठन ने अपनी मौजूदा तैयारियों और क्षमताओं का व्यापक मूल्यांकन पूरा कर लिया है। उनके अनुसार, बीआईएस वर्तमान में बड़े पैमाने पर जांच और परीक्षण करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी लगभग दो साल तक संस्थान अपनी मौजूदा प्रयोगशाला सुविधाओं के बल पर बाजार की बढ़ी हुई जरूरतों को आसानी से संभाल सकता है। हालांकि, भविष्य की दीर्घकालिक चुनौतियों और लगातार बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए, बीआईएस ने अगले दो वर्षों के भीतर देशभर में नई रेफरल और एसे लैब्स स्थापित करने तथा पुरानी लैब्स की क्षमता में वृद्धि करने का निर्णय लिया है।\n\nहॉलमार्किंग और HUID का तेजी से बढ़ता दायरा\nभारत में चांदी के आभूषणों के लिए हॉलमार्किंग व्यवस्था वर्ष 2005 से ही स्वैच्छिक रूप से लागू है। हालांकि, गुणवत्ता मानकों को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए सितंबर 2025 से हॉलमार्क वाले चांदी के गहनों पर हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन (HUID) नंबर जारी करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इस विशिष्ट पहचान संख्या के जरिए कोई भी उपभोक्ता आसानी से अपने खरीदे गए आभूषण की शुद्धता की पुष्टि कर सकता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस कदम का सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान केवल 32 लाख चांदी के आभूषण हॉलमार्क किए गए थे, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा जबरदस्त उछाल के साथ 59 लाख तक पहुंच गया है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि लोग अब प्रमाणित शुद्धता वाले गहने खरीदने को प्राथमिकता दे रहे हैं।\n\nप्रयोगशाला नेटवर्क और इन-हाउस निगरानी तंत्र\nवर्तमान समय में पूरे भारत में बीआईएस द्वारा मान्यता प्राप्त लगभग 230 रेफरल और एसे प्रयोगशालाएं कार्यरत हैं, जो चांदी के आभूषणों के परीक्षण का काम संभाल रही हैं। निगरानी व्यवस्था पर रोशनी डालते हुए निशात एस. हक ने बताया कि बाजार की निगरानी के तहत हॉलमार्क वाले सोने के आभूषणों की जो भी जांच की जाती है, वह बीआईएस अपनी खुद की इन-हाउस प्रयोगशालाओं में ही संपन्न करता है। इस प्रक्रिया की गोपनीयता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए यह काम किसी बाहरी प्राइवेट लैब को नहीं सौंपा जाता। बीआईएस ने इस उद्देश्य के लिए अपनी प्रयोगशालाओं के भीतर ही विशेष रेफरल और एसे सुविधाएं विकसित की हैं।\n\nसंस्थान के कुल ढांचागत विकास की बात करें तो पिछले एक दशक में बीआईएस के नेटवर्क में भारी विस्तार हुआ है। पिछले साल संगठन ने विभिन्न क्षेत्रों के करीब 2.70 लाख उत्पाद नमूनों का सफल परीक्षण किया था। वर्तमान में बीआईएस के पास देशभर में अपनी 10 स्वदेशी प्रयोगशालाएं हैं। इसके अलावा, मान्यता प्राप्त निजी और सूचीबद्ध सरकारी लैब्स का एक व्यापक ढांचा भी इसके साथ जुड़ा हुआ है। वर्ष 2014 में बीआईएस के साथ केवल 147 मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाएं और 24 सूचीबद्ध सरकारी लैब ही जुड़ी थीं। वर्तमान में यह संख्या बढ़कर क्रमशः 440 मान्यता प्राप्त लैब्स और 350 सूचीबद्ध सरकारी लैब्स तक पहुंच चुकी है, जो देश में मानक परीक्षण के तेजी से बढ़ते नेटवर्क को दर्शाती है।\n\nगुणवत्ता मानकों में एआई और रोबोटिक्स का समावेश\nभारतीय मानक ब्यूरो ने अब तक विभिन्न औद्योगिक और उपभोक्ता वस्तुओं के लिए लगभग 23,000 मानक तय किए हैं, जिनमें से करीब 700 मानकों का पालन करना अनिवार्य बनाया गया है। परीक्षण की गति को तेज करने, इंसानी गलतियों की गुंजाइश खत्म करने और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए बीआईएस अब आधुनिक तकनीक का सहारा ले रहा है। संगठन कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स जैसी तकनीकों का प्रयोग बढ़ा रहा है। अधिकारी के अनुसार, चालू वर्ष में सीमेंट गुणवत्ता परीक्षण के लिए 'पिक एंड प्लेस' रोबोटिक यूनिट का प्रायोगिक परीक्षण किया जा रहा है। इस पायलट प्रोजेक्ट के सफल नतीजों के आधार पर ही आने वाले समय में अन्य सामग्री परीक्षण प्रयोगशालाओं में भी इस रोबोटिक सुविधा का विस्तार किया जाएगा।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: सोने की ऊंची कीमतों के कारण अब चांदी के हॉलमार्क वाले गहने खरीदना ग्राहकों के लिए अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद होगा।\n\nउपभोक्ताओं के लिए: बीआईएस द्वारा HUID व्यवस्था लागू करने और लैब्स बढ़ाने से खरीदार अपने गहनों की शुद्धता की ऑनलाइन जांच आसानी से कर पाएंगे।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. चांदी के आभूषणों की मांग अचानक क्यों बढ़ रही है?\nदिल्ली सर्राफा बाजार में सोने का भाव 1,54,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया है, जिससे लोग बजट के अनुकूल विकल्प के रूप में चांदी के आभूषणों को तरजीह दे रहे हैं।\n\n2. चांदी की जांच क्षमता बढ़ाने के लिए बीआईएस क्या कदम उठा रहा है?\nभारतीय मानक ब्यूरो अगले दो वर्षों के दौरान देशभर में अपनी रेफरल और एसे प्रयोगशालाओं के नेटवर्क का विस्तार कर रहा है।\n\n3. वित्त वर्ष 2025-26 में कितने चांदी के आभूषणों की हॉलमार्किंग हुई?\nवित्त वर्ष 2025-26 में 59 लाख चांदी के आभूषणों को हॉलमार्क किया गया, जो पिछले वित्त वर्ष में केवल 32 लाख था।\n\n4. चांदी के गहनों पर HUID नंबर कब से लागू किया गया है?\nचांदी के हॉलमार्क वाले आभूषणों पर सितंबर 2025 से HUID (हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन) नंबर दिया जा रहा है।\n\n5. गुणवत्ता जांच में तकनीक सुधारने के लिए बीआईएस क्या कर रहा है?\nबीआईएस जांच की गति और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एआई, मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स का इस्तेमाल कर रहा है, जिसमें सीमेंट टेस्टिंग के लिए रोबोटिक यूनिट का ट्रायल शामिल है।",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-08-09",
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