सोने पर आरबीआई के दांव ने रंग दिखाया, महज दो बरस में 11 लाख करोड़ के पार पहुंचा भंडार का मूल्य रिजर्व बैंक के गोल्ड रिजर्व का कुल मूल्य बढ़कर करीब 115.8 अरब डॉलर यानी 11 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया है, जो दो साल में दोगुना है और विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी अब 17 फीसदी तक पहुंच गई है। साल 2022 में जब रूस और यूक्रेन के बीच जंग छिड़ी, भारत ने उसी वक्त भांप लिया था कि दुनिया के फॉरेक्स रिजर्व का पूरा गणित बदलने वाला है। इसी सोच के साथ देश के केंद्रीय बैंक आरबीआई ने अपनी रणनीति बदली और 2022 के बाद से लगातार सोने की खरीद तेज कर दी। आरबीआई समेत कई देशों के केंद्रीय बैंकों के इस रुझान का नतीजा यह हुआ कि ग्लोबल मार्केट में सोने के भाव आसमान पर पहुंच गए। लेकिन आज इसी बदली रणनीति का फायदा साफ नजर आ रहा है। वजन के लिहाज से भारत का गोल्ड रिजर्व भले ही दुनिया के कई देशों से पीछे दिखे, मगर मूल्य के हिसाब से पिछले दो साल में ही यह दोगुना हो चुका है। क्या कहते हैं ताजा आंकड़े रिजर्व बैंक की ओर से जारी हालिया आंकड़ों के मुताबिक, आरबीआई के गोल्ड रिजर्व का कुल मूल्य अब करीब 115.8 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इसे भारतीय मुद्रा में देखें तो यह रकम 11 लाख करोड़ रुपये से भी ऊपर बैठती है। खास बात यह है कि यह कीमत 2022 में आरबीआई के गोल्ड रिजर्व की कुल कीमत के मुकाबले ठीक दोगुनी हो गई है। रिजर्व बैंक के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी फिलहाल करीब 17 फीसदी है, जबकि छह महीने पहले तक यही आंकड़ा 12 फीसदी के आसपास था। यह तेज बदलाव ग्लोबल मार्केट में सोने की चढ़ती कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव के बीच बदली हुई रणनीति की देन है। दो साल पहले कितनी थी कीमत सोने के भाव ने इस दौरान जो छलांग लगाई है, वही इस पूरे बदलाव की असली कहानी कहती है। ग्लोबल मार्केट में 2024 के दौरान सोना करीब 2000 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था, जो 2026 में बढ़कर 4000 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गया। कीमतों में आया यह उछाल बताता है कि रिजर्व बैंक का भंडार मूल्य के मामले में कितनी तेजी से ऊपर जा रहा है। रिजर्व बैंक अपने खजाने में डॉलर, पाउंड और यूरो जैसी दूसरी विदेशी संपत्तियों की हिस्सेदारी भी बढ़ा रहा है, लेकिन उसने सबसे बड़ा दांव सोने पर ही लगाया है। इसकी वजह भी साफ है, क्योंकि 2022 में रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से भू-राजनीतिक हालात लगातार अस्थिर बने हुए हैं और ऐसे माहौल में सोना सबसे सुरक्षित सहारा माना जाता है। पोलैंड सबसे आगे भारत ही नहीं, दुनिया की कई उभरती अर्थव्यवस्थाएं सोना खरीदने की होड़ में शामिल हैं। ग्लोबल मार्केट में भाव भले ही आसमान छू रहे हों, फिर भी रिजर्व बैंक अपने खजाने में सोने की हिस्सेदारी बढ़ाता जा रहा है। भारत के अलावा कुछ यूरोपीय देशों ने भी 2022 के बाद सोने की खरीद तेज कर दी थी और इस मामले में सबसे ऊपर नाम पोलैंड का आता है। पोलैंड ने कोविड-19 महामारी के बाद अपने रिजर्व में 128.6 टन सोना जोड़ा और 2020 की पहली तिमाही में इसे बढ़ाकर 228.5 टन कर दिया। इसके बाद दो-तीन साल तक खरीदारी सुस्त रही, लेकिन 2022 से एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली। इस यूरोपीय देश ने 2023 की पहली तिमाही में अपना भंडार 228.7 टन तक पहुंचाया, जो 2026 की पहली तिमाही में बढ़कर 581.6 टन हो गया। यानी महज तीन साल के भीतर पोलैंड ने 253 टन सोना खरीद डाला। चीन भी पीछे नहीं एशियाई देशों में भारत के बाद सोना खरीदने के मामले में सबसे आगे चीन का नाम है। चीन ने 2020 से 2022 के बीच अपना कुल गोल्ड रिजर्व 1948 टन तक पहुंचा दिया था। इसके बाद 2023 की पहली तिमाही में यह भंडार 2068 टन रहा, जो 2026 की पहली तिमाही में बढ़कर 2323 टन हो गया। इसका मतलब है कि तीन साल के भीतर चीन ने भी 245 टन सोना अपने खजाने में जोड़ लिया। छोटे से देश चेक गणराज्य ने तो इस मामले में लगभग रिकॉर्ड ही बना दिया। इस देश में 2023 के दौरान सोने का कुल भंडार 13.5 टन था, जो 2026 की पहली तिमाही में बढ़कर 76.6 टन तक पहुंच गया। यानी सिर्फ तीन साल में चेक गणराज्य ने अपने सोने के भंडार को करीब छह गुना बढ़ा लिया। 10 साल में भारत ने कितना सोना जोड़ा चीन और दूसरे देशों की खरीदारी की रफ्तार के आगे भारत की चाल थोड़ी धीमी जरूर दिखती है, लेकिन आंकड़े इसकी लगातार बढ़त की गवाही देते हैं। रिजर्व बैंक के पास 2015 की पहली तिमाही में कुल सोने का भंडार 557.8 टन था, जो 2026 की पहली तिमाही तक बढ़कर 880.5 टन हो गया। इसका मतलब यह हुआ कि 11 साल में ही आरबीआई ने अपने गोल्ड रिजर्व में 58 फीसदी की बढ़ोतरी कर डाली और इस दौरान करीब 323 टन सोना खरीदा। साल दर साल देखें तो आरबीआई का सोने का भंडार 2019 की पहली तिमाही में 612.6 टन, 2020 की पहली तिमाही में 653 टन, 2021 की पहली तिमाही में 695.3 टन, 2022 में 760.4 टन और 2023 में करीब 794.6 टन के आसपास रहा। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का कहना है कि आने वाले वक्त में भी आरबीआई सोने की खरीदारी जारी रखेगा, यानी भारत का यह भंडार आगे और मजबूत होने की उम्मीद है। इसका आप पर असर • भारत में: देश का गोल्ड रिजर्व मूल्य के लिहाज से दोगुना होने से रुपये और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलती है, जिससे वैश्विक झटकों के बीच अर्थव्यवस्था ज्यादा सुरक्षित रहती है। • निवेशकों के लिए: केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी और भाव का 2000 से 4000 डॉलर प्रति औंस पार पहुंचना बताता है कि सोना अब भी एक मजबूत सुरक्षित निवेश बना हुआ है। सवाल-जवाब 1. आरबीआई के गोल्ड रिजर्व की कुल कीमत अब कितनी है? रिजर्व बैंक के गोल्ड रिजर्व का कुल मूल्य करीब 115.8 अरब डॉलर, यानी 11 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा हो गया है। 2. दो साल में सोने के भंडार का मूल्य कितना बढ़ा? यह मूल्य 2022 के मुकाबले दोगुना हो गया है, जबकि विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी छह महीने पहले के 12 फीसदी से बढ़कर करीब 17 फीसदी हो गई है। 3. इस दौरान सोने का भाव कितना बढ़ा? ग्लोबल मार्केट में 2024 में सोना करीब 2000 डॉलर प्रति औंस था, जो 2026 में बढ़कर 4000 डॉलर प्रति औंस के पार निकल गया। 4. सोना खरीदने में कौन सा देश सबसे आगे है? यूरोप में पोलैंड सबसे आगे है, जिसने तीन साल में 253 टन सोना खरीदा, वहीं एशिया में भारत के बाद चीन ने तीन साल में 245 टन सोना जोड़ा। 5. पिछले 11 साल में आरबीआई ने कितना सोना खरीदा? आरबीआई का भंडार 2015 की पहली तिमाही में 557.8 टन था, जो 2026 की पहली तिमाही में 880.5 टन हो गया, यानी 58 फीसदी की बढ़ोतरी और करीब 323 टन की खरीद। 6. आरबीआई ने सोने पर सबसे बड़ा दांव क्यों लगाया? 2022 में रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध शुरू होने के बाद भू-राजनीतिक हालात अस्थिर रहे, और ऐसे माहौल में सोना सबसे सुरक्षित सहारा माना जाता है। 7. क्या आगे भी आरबीआई सोना खरीदता रहेगा? वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, आने वाले समय में भी आरबीआई सोने की खरीदारी जारी रखेगा। https://trendkia.com/business/sone-para-rbi-ke-danva-ne-rnga-dikhaya-mahaja-do-barasa-men-11-lakha-karora-ke-para-pahuncha-bhndara-ka-mulya-5474 TrendKia — Har trend, sabse pehle.