# दक्षिण मध्य रेलवे ने मुकुटबन-गढ़चंदूर रेल प्रोजेक्ट को दी हरी झंडी, 493 करोड़ होंगे खर्च

> महाराष्ट्र के यवतमाल और चंद्रपुर जिलों के औद्योगिक हब को जोड़ने के लिए 38.21 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन बिछाई जाएगी। इस प्रोजेक्ट से क्षेत्र में कोयला और सीमेंट ढुलाई सुगम होने के साथ दैनिक यात्रियों को मेमू ट्रेनों की सुविधा भी मिलेगी।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-09-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/south-central-railway-ne-mukutban-gadhchandur-rela-projekta-ko-di-hari-jhndi-493-karora-honge-kharcha-36019 · **Language:** Hindi
**Tags:** भारतीय रेलवे, दक्षिण मध्य रेलवे, मुकुटबन, गढ़चंदूर, यवतमाल, चंद्रपुर, रेलवे प्रोजेक्ट

महाराष्ट्र के औद्योगिक और खनन क्षेत्रों को तेज कनेक्टिविटी देने के उद्देश्य से एक अहम रेल परियोजना को प्रशासनिक स्तर पर हरी झंडी मिल गई है। दक्षिण मध्य रेलवे जोन के अंतर्गत मुकुटबन (आदिलाबाद) से गढ़चंदूर के बीच 38.21 किलोमीटर लंबी बिल्कुल नई रेल लाइन के निर्माण को स्वीकृति प्रदान की गई है। इस पूरे बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट पर कुल 493 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान तय किया गया है। यवतमाल जिले में स्थित मुकुटबन और चंद्रपुर जिले के गढ़चंदूर क्षेत्र देश के नक्शे पर बड़े खनन और औद्योगिक केंद्र के रूप में जाने जाते हैं। यह क्षेत्र कई बड़े सीमेंट कारखानों, वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की कोयला खदानों और प्रचुर चूना पत्थर खदानों का केंद्र है, जिन्हें अब सीधी और आधुनिक रेल सेवा मिलने जा रही है।

## औद्योगिक गलियारे में माल ढुलाई को मिलेगी नई रफ्तार
इस नई लाइन के तैयार होने से न केवल यात्रा की कुल दूरी घटेगी, बल्कि ढुलाई में लगने वाले समय और लॉजिस्टिक्स लागत में भी बड़ी कमी दर्ज होगी। वर्तमान में वर्धा-मानिकगढ़ रेल सेक्शन पर अत्यधिक दबाव रहता है, जिसे यह वैकल्पिक गलियारा काफी हद तक संतुलित करेगा। डीपीआर के मुताबिक, लाइन के चालू होने पर सालाना 6.08 मीट्रिक टन माल ढुलाई इस रूट से संभालने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके जरिए कोयला और कोक, सीमेंट, स्पंज आयरन, मैटल स्क्रैप, लोहा और इस्पात, उर्वरक एवं खाद्यान्न जैसी आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई तेजी से की जा सकेगी। इसके साथ ही औद्योगिक गतिविधियों के अलावा स्थानीय आवागमन को ध्यान में रखते हुए रोजाना दोनों तरफ 2-2 मेमू ट्रेनें चलाने की योजना भी प्रोजेक्ट में शामिल है।

## माजरी-नांदेड़ मार्ग से जुड़ेगा सीधा संपर्क
यह नई रेल कड़ी कोयला और सीमेंट क्लस्टर को माजरी-नांदेड़ रूट से सीधा जोड़ देगी। इस सीधे संपर्क के चलते महाराष्ट्र के जालना, परभनी और छत्रपति संभाजीनगर के अलावा कर्नाटक के विभिन्न शहरों के लिए सीमेंट, कोयला और आरएमएसपी ढुलाई के ट्रांजिट समय में उल्लेखनीय कटौती होगी। उद्योगों को कच्चा माल प्राप्त करने और तैयार उत्पाद बाजार तक पहुंचाने में लगने वाला समय घटने से स्थानीय उद्योगों की कार्यकुशलता काफी बढ़ेगी।

## बल्हारशाह-नागपुर रूट पर घटेगा दबाव
क्षेत्र का बल्हारशाह-नागपुर रूट हाई-डेंसिटी नेटवर्क में गिना जाता है, जहां ट्रेनों की आवाजाही लगातार बहुत अधिक रहती है। मुकुटबन-गढ़चंदूर के बीच बनने वाला यह बाईपास मार्ग इस अत्यधिक व्यस्त रूट पर भार कम करने में मददगार साबित होगा। इसके साथ ही यवतमाल और चंद्रपुर जिलों के जो इलाके अब तक रेल नेटवर्क से कटे हुए या कम जुड़े थे, वहां भी परिवहन संपर्क मजबूत होगा।

## क्षेत्रीय विकास और भविष्य की क्षमता विस्तार
इस रेल परियोजना के जरिए न केवल माल ढुलाई बल्कि यात्री परिवहन की बढ़ती जरूरतों के लिए एक अतिरिक्त रेल कॉरिडोर उपलब्ध होगा। यह विकास यवतमाल और चंद्रपुर क्षेत्र में नए आर्थिक अवसरों का सृजन करेगा और स्थानीय उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिकने के लिए जरूरी लॉजिस्टिक्स सपोर्ट मुहैया कराएगा। लाइन चालू होने के बाद क्षेत्रीय रेलवे नेटवर्क का अधिक प्रभावी इस्तेमाल सुनिश्चित हो सकेगा।

## इसका आप पर असर
इस नई रेल लाइन के बनने से यवतमाल और चंद्रपुर के स्थानीय नागरिकों और उद्योगों को सीधा लॉजिस्टिक्स और यात्रा लाभ मिलेगा।

- **भारत में:** राष्ट्रीय स्तर पर सीमेंट, इस्पात और कोयले जैसी जरूरी निर्माण सामग्री की सप्लाई चेन तेज होगी। इससे विभिन्न राज्यों में बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए कच्चे माल की ढुलाई का समय घटेगा।
- **महाराष्ट्र में:** यवतमाल और चंद्रपुर के खनन इलाकों को माजरी-नांदेड़ लाइन से सीधा जुड़ाव मिलेगा। रोजाना दोनों ओर से चलने वाली 2-2 मेमू ट्रेनों के शुरू होने से स्थानीय दैनिक यात्रियों और श्रमिकों को सुरक्षित व किफायती सफर का विकल्प मिलेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
महाराष्ट्र के औद्योगिक और खनन बेल्ट में माल ढुलाई की भारी मांग और मौजूदा लाइनों पर अत्यधिक दबाव के चलते इस रेल परियोजना को मंजूरी दी गई है।

- **भीड़भाड़ कम करने की जरूरत:** वर्तमान में वर्धा-मानिकगढ़ और बल्हारशाह-नागपुर हाई-डेंसिटी सेक्शन पर मालगाड़ियों और यात्री ट्रेनों का भारी दबाव रहता है। एक समानांतर और छोटे मार्ग के अभाव में माल ढुलाई में समय और खर्च अधिक लग रहा था।
- **औद्योगिक क्लस्टर की मांग:** यवतमाल के मुकुटबन और चंद्रपुर के गढ़चंदूर में कई बड़े सीमेंट प्लांट, वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की खदानें और लाइमस्टोन क्वेरी मौजूद हैं। इन उद्योगों को कच्चा माल लाने और माल बाहर भेजने के लिए एक सीधे रेल संपर्क की सख्त आवश्यकता थी।
- **आर्थिक गलियारों का विस्तार:** महाराष्ट्र के जालना, परभनी, छत्रपति संभाजीनगर और पड़ोसी राज्य कर्नाटक तक कोयला व सीमेंट सीधे पहुंचाने के लिए माजरी-नांदेड़ मार्ग से सीधा जुड़ाव बनाना रणनीतिक रूप से जरूरी था।

## सवाल-जवाब

### 1. मुकुटबन-गढ़चंदूर नई रेल लाइन की कुल लंबाई कितनी है?
इस स्वीकृत नई रेल लाइन की कुल लंबाई 38.21 किलोमीटर है।

### 2. इस रेल प्रोजेक्ट पर कुल कितनी लागत आएगी?
इस परियोजना के निर्माण पर 493 करोड़ रुपये की लागत आएगी।

### 3. यह प्रोजेक्ट किन जिलों को आपस में जोड़ेगा?
यह रेल लाइन यवतमाल जिले के मुकुटबन और चंद्रपुर जिले के गढ़चंदूर को जोड़ेगी।

### 4. इस मार्ग पर यात्री सेवाओं के लिए क्या प्रावधान है?
डीपीआर के अनुसार, इस मार्ग पर रोजाना दोनों दिशाओं में 2-2 मेमू ट्रेनें चलाई जाएंगी।

### 5. इस नई लाइन से सालाना कितनी माल ढुलाई की उम्मीद है?
इस रेल लाइन से सालाना 6.08 मीट्रिक टन माल ढुलाई संभालने की उम्मीद जताई गई है।

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