दक्षिण कोरिया ने डिजिटल वॉन का दायरा बढ़ाया, 5 लाख यूजर्स और नए प्रोग्रामेबल फीचर्स के साथ शुरू होगा अगला चरण बैंक ऑफ कोरिया अपने डिजिटल करेंसी पायलट प्रोजेक्ट का बड़े पैमाने पर विस्तार कर रहा है, जिसमें वास्तविक सरकारी फंड और उन्नत सुरक्षा फीचर्स शामिल किए जाएंगे। दक्षिण कोरिया अपनी वित्तीय प्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा कदम उठाने जा रहा है। देश का केंद्रीय बैंक, बैंक ऑफ कोरिया, अपने सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी यानी CBDC पायलट प्रोजेक्ट का दायरा बड़े पैमाने पर बढ़ा रहा है। पिछले साल आयोजित किए गए तीन महीने के शुरुआती परीक्षण में यह बात सामने आई थी कि डिजिटल वॉलेट खोलने वाले 81,000 नागरिकों में से केवल 42 प्रतिशत ने ही इस डिजिटल मुद्रा के जरिए कोई वास्तविक लेनदेन किया था। यूजर जुड़ाव और सक्रियता की इसी कमी को दूर करने के लिए सितंबर से इस प्रोजेक्ट के एक नए और बड़े चरण की शुरुआत होने जा रही है। इस नए चरण में न केवल नौ प्रमुख वाणिज्यिक बैंकों को शामिल किया जा रहा है, बल्कि लगभग 5 लाख यूजर्स को वास्तविक सरकारी फंड के साथ इस डिजिटल प्रणाली का उपयोग करने का अवसर भी मिलेगा। कमर्शलाइजेशन यानी व्यावसायीकरण की ओर बढ़ते कदम केंद्रीय बैंक ने सोमवार को अपने महत्वाकांक्षी डिजिटल करेंसी प्रोजेक्ट, जिसे 'प्रोजेक्ट हानगांग' नाम दिया गया है, के दूसरे चरण के विस्तार की आधिकारिक घोषणा की। यह प्रोजेक्ट ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित डिजिटल वॉन के व्यावहारिक इस्तेमाल का परीक्षण करता है, जो वहां की पारंपरिक कागजी मुद्रा का ही डिजिटल रूप है। बैंक ऑफ कोरिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस दूसरे चरण के जरिए देश में डिजिटल मुद्रा के व्यावसायिक उपयोग की मजबूत आधारशिला रखी जाएगी। पिछले चरणों के विपरीत, इस बार असली सरकारी धन को इस प्रणाली में शामिल किया जा रहा है ताकि यह जांचा जा सके कि यह तकनीक वास्तविक बाजार और दैनिक अर्थव्यवस्था में कितनी सुरक्षित और प्रभावी साबित होती है। पहले चरण के परिणाम और बुनियादी ढांचे पर खर्च प्रोजेक्ट का पहला चरण अप्रैल से जून 2025 के बीच आयोजित किया गया था। इस चरण का मुख्य उद्देश्य तकनीकी प्रणाली की बुनियादी जांच करना था। इसमें सात वाणिज्यिक बैंकों और लगभग 12,000 स्थानीय व्यापारियों ने हिस्सा लिया था, जिसके दौरान कुल 114,880 डिजिटल लेनदेन दर्ज किए गए। इस प्रारंभिक चरण के लिए तकनीकी और डिजिटल बुनियादी ढांचा तैयार करने में भाग लेने वाले बैंकों ने सामूहिक रूप से लगभग 30 से 35 बिलियन वॉन का भारी-भरकम निवेश किया था। हालांकि, बुनियादी ढांचे पर इतने बड़े खर्च के बावजूद केवल 42 प्रतिशत वॉलेट धारकों द्वारा ही सक्रिय रूप से लेनदेन करने से यह बात साफ हो गई कि लोगों को डिजिटल वॉलेट अपनाने के लिए प्रेरित करना आसान है, लेकिन उनका नियमित उपयोग सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है। सुरक्षा और सुविधा के नए फीचर्स उपभोक्ताओं की रुचि बनाए रखने और डिजिटल मुद्रा के दैनिक उपयोग को आसान बनाने के लिए दूसरे चरण में कई नए और व्यावहारिक फीचर्स जोड़े जा रहे हैं जो सामान्य बैंकिंग जैसी सुविधाएं देंगे। नए डिजिटल वॉलेट में अब बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट ऑथेंटिकेशन की सुविधा होगी, जिससे सुरक्षा काफी मजबूत होगी। इसके अलावा, दो लोगों के बीच सीधे वॉलेट-टू-वॉलेट ट्रांसफर (P2P ट्रांसफर), ऑटोमैटिक बैलेंस टॉप-अप की सुविधा भी मिलेगी। ऑटोमैटिक टॉप-अप के तहत यदि आपके डिजिटल वॉलेट में बैलेंस कम होता है, तो आपके लिंक किए गए बैंक खाते से पैसे अपने आप डिजिटल डिपॉजिट टोकन में बदल जाएंगे। इसके अतिरिक्त, इस प्रणाली में समय-समय पर होने वाले ऑटो-पेमेंट, टैक्स के लिए डिजिटल कैश रिसीट जनरेट करने और डिजिटल वॉलेट में जमा राशि पर ब्याज भुगतान की सुविधा भी दी जाएगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस परीक्षण में पहली बार सरकारी सब्सिडी के वितरण के लिए प्रोग्रामेबल टोकन का उपयोग किया जाएगा। होलसेल और रिटेल का मिला-जुला ढांचा बैंक ऑफ कोरिया की डिजिटल करेंसी का बुनियादी ढांचा काफी अनोखा है। केंद्रीय बैंक सीधे तौर पर आम नागरिकों के लिए रिटेल डिजिटल करेंसी जारी नहीं करता है। इसके बजाय, वह एक 'होलसेल CBDC' जारी करता है, जिसका उपयोग केवल वित्तीय संस्थान आपस में लेनदेन के निपटारे के लिए करते हैं। इसके बाद व्यावसायिक बैंक इस होलसेल ढांचे के आधार पर 'डिपॉज़िट टोकन' जारी करते हैं। ये टोकन बैंक खातों में जमा साधारण पैसों का ही ब्लॉकचेन आधारित रूप होते हैं। आम ग्राहक और दुकानदार इन्हीं डिपॉजिट टोकन का उपयोग दैनिक खरीद-बिक्री के लिए करते हैं। डिजिटल करेंसी प्लानिंग टीम के प्रमुख किम डोंग-सेओप ने इस मॉडल को सरकारी CBDC और प्राइवेट स्टेबलकॉइन के बीच का एक मध्यम मार्ग बताया है। भविष्य में इस ढांचे की मदद से आम नागरिकों को सरकारी लाभ और भत्ते सीधे उनके डिजिटल वॉलेट में मिल सकेंगे, जिससे वाउचर या कागजी चेक का झंझट खत्म हो जाएगा। वहीं, छोटे व्यापारियों को क्रेडिट कार्ड नेटवर्क द्वारा वसूले जाने वाले भारी-भरकम ट्रांजैक्शन शुल्क से भी राहत मिल सकती है। प्रोग्रामेबल मनी और प्राइवेसी से जुड़ी चिंताएं प्रोग्रामेबल मनी यानी ऐसी डिजिटल करेंसी जिसमें खर्च करने के नियम पहले से तय किए जा सकते हैं, ने प्राइवेसी और मानवाधिकार संगठनों के बीच एक नई बहस को जन्म दे दिया है। दूसरे चरण में सरकार सब्सिडी के रूप में दिए जाने वाले पैसों में यह शर्त लगा सकती है कि उन्हें केवल चुनिंदा दुकानों, विशिष्ट उत्पादों या एक निश्चित समय सीमा के भीतर ही खर्च किया जा सकेगा। जहां एक ओर नीति निर्माता इसे धोखाधड़ी रोकने और सरकारी ऑडिट को आसान बनाने का एक बेहतरीन जरिया मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इसके आलोचकों का कहना है कि यह नागरिकों की वित्तीय स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। इस तकनीक के जरिए सरकार बिना किसी अदालती आदेश के किसी का भी वॉलेट फ्रीज कर सकती है या यह तय कर सकती है कि लोग अपना पैसा कहां खर्च करें। चीन में डिजिटल युआन के इस्तेमाल के दौरान भी ऐसी ही शर्तें देखी गई थीं, जहां बीजिंग ने अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए कुछ सब्सिडी भुगतानों पर एक्सपायरी डेट लगा थी। लॉफेयर के शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि इस तरह की तकनीक वैश्विक स्तर पर सरकारी वित्तीय निगरानी का एक खतरनाक उदाहरण पेश कर सकती है। बैंकिंग गठबंधन का विस्तार और कानूनी बदलाव इस वृहद पायलट प्रोजेक्ट को सफल बनाने के लिए अब नौ बैंक एक साथ आ गए हैं। पहले चरण के सात बैंकों, जिनमें केबी कूकमिन, शिनहान, हाना बैंक, वोरी, नोंगह्युप, इंडस्ट्रियल बैंक ऑफ कोरिया और बीएनके बुसान शामिल थे, के साथ अब ग्योंगनाम बैंक और आईएम बैंक भी जुड़ गए हैं। यह परीक्षण किसी निश्चित समय सीमा के बजाय अनिश्चित काल तक जारी रहेगा। इस परियोजना को देश में मजबूत राजनीतिक समर्थन हासिल है। अप्रैल 2026 में पदभार संभालने के बाद बैंक ऑफ कोरिया के गवर्नर शिन ह्यून-सोंग ने 'प्रोजेक्ट हानगांग' को अपनी पहली नीतिगत प्राथमिकताओं में शामिल किया था। इसी बीच, हाना बैंक वॉन से जुड़े एक प्राइवेट स्टेबलकॉइन के लिए प्रणाली तैयार कर रहा है, जो डिजिटल एसेट्स को लेकर सियोल में जारी विधायी बहसों के बीच 1:1 के अनुपात पर काम करेगा। इसके साथ ही, देश का वित्त मंत्रालय भी अपने 76 साल पुराने राष्ट्रीय संपत्ति कानून में संशोधन कर क्रिप्टोकरेंसी को राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में वर्गीकृत करने की योजना बना रहा है। अमेरिका में CBDC पर लगा कड़ा प्रतिबंध जहां दक्षिण कोरिया डिजिटल वॉन को तेजी से आगे बढ़ा रहा है, वहीं अमेरिका ने इसके ठीक विपरीत रुख अपनाया है। अमेरिका में '21स्ट सेंचुरी रोड टू हाउसिंग एक्ट' के तहत किसी भी प्रकार की रिटेल CBDC जारी करने पर चार साल का कड़ा कानूनी प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह कानून 11 जुलाई को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर के बिना ही लागू हो गया, क्योंकि उन्होंने मतदान संबंधी अन्य कानूनों पर असहमति के चलते इस विधेयक पर हस्ताक्षर नहीं किए थे और संविधान की 10 दिनों की समय सीमा समाप्त हो गई थी। इसके चलते यह डिजिटल मुद्रा विरोधी कानून अमेरिका में प्रभावी हो गया। इसका आप पर असर डिजिटल पेमेंट और सुरक्षा: प्रोग्रामेबल टोकन और ऑटोमैटिक टॉप-अप जैसी उन्नत तकनीक से डिजिटल लेनदेन और भी सुलभ और सुरक्षित हो जाएंगे, लेकिन प्राइवेसी को लेकर यूजर्स को अधिक सतर्क रहना होगा। छोटे व्यापारियों के लिए: इस प्रणाली के सफल होने से क्रेडिट कार्ड कंपनियों के भारी-भरकम ट्रांजैक्शन फीस से छुटकारा मिल सकता है, जिससे सीधे तौर पर छोटे और मध्यम व्यवसायों के मुनाफे में सुधार होगा। सवाल-जवाब 1. दक्षिण कोरिया का प्रोजेक्ट हानगांग क्या है? प्रोजेक्ट हानगांग दक्षिण कोरिया के केंद्रीय बैंक (बैंक ऑफ कोरिया) द्वारा संचालित एक डिजिटल करेंसी (CBDC) परीक्षण कार्यक्रम है, जो वहां की राष्ट्रीय मुद्रा वॉन का एक ब्लॉकचेन-आधारित डिजिटल रूप है। 2. इस पायलट प्रोजेक्ट के दूसरे चरण में कुल कितने लोग शामिल होंगे? इस प्रोजेक्ट के दूसरे चरण में लगभग 5,00,000 लोग भाग लेंगे, जो वास्तविक सरकारी फंड का उपयोग करके इस डिजिटल मुद्रा का व्यावहारिक परीक्षण करेंगे। 3. दूसरे चरण में कौन से नए फीचर्स जोड़े जा रहे हैं? इस चरण में बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट ऑथेंटिकेशन, वॉलेट-टू-वॉलेट ट्रांसफर, बैंक खातों से ऑटो-टॉप-अप, आवर्ती भुगतान (ऑटो-पेमेंट), डिजिटल कैश रिसीट और जमा राशि पर ब्याज भुगतान जैसी सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं। 4. प्रोग्रामेबल मनी को लेकर क्या चिंताएं हैं? आलोचकों और मानवाधिकार समूहों का मानना है कि प्रोग्रामेबल मनी से सरकार को नागरिकों के खर्च करने के तरीकों पर पूर्ण नियंत्रण मिल सकता है, जिससे वे प्राइवेसी और बुनियादी वित्तीय स्वतंत्रता खो सकते हैं। 5. क्या अमेरिका भी दक्षिण कोरिया की तरह अपनी डिजिटल करेंसी बना रहा है? नहीं, अमेरिका ने इसके विपरीत रुख अपनाते हुए '21स्ट सेंचुरी रोड टू हाउसिंग एक्ट' के तहत रिटेल CBDC जारी करने पर चार साल का कड़ा कानूनी प्रतिबंध लगा दिया है। https://trendkia.com/business/south-korea-ne-dijitala-won-ka-dayara-barhaya-5-lakha-yujarsa-aura-nae-programebala-phicharsa-ke-satha-shuru-hoga-agala-charana-9855 TrendKia — Har trend, sabse pehle.