# श्री सत्य साई के बुनकर नागराजू की कला, तिरुपति मंदिर के लिए बनते हैं खास रेशमी वस्त्र

> आंध्र प्रदेश के कुशल हैंडलूम बुनकर नागराजू चार पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा को आगे बढ़ाते हुए तिरुपति के भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी के लिए विशेष वस्त्र, रेशमी शादी के कार्ड और महंगे सिल्क उत्पाद तैयार कर रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-07-27 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/sri-sathya-sai-ke-bunkar-nagraju-ki-kala-tirupati-mandir-ke-liye-bante-hain-khas-resham-vastra-11086 · **Language:** Hindi
**Tags:** हैंडलूम बुनकर, नागराजू, श्री सत्य साई, तिरुपति बालाजी, सिल्क साड़ी, रेशमी शादी कार्ड

हैंडलूम की पारंपरिक कला को आज के दौर में एक नए मुकाम पर ले जाने वाले कारीगरों में आंध्र प्रदेश के श्री सत्य साई जिले से ताल्लुक रखने वाले नागराजू का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। अपनी उत्कृष्ट कारीगरी के बल पर उन्होंने देश भर में अपनी एक अलग पहचान बनाई है, जहां उनकी कार्यशाला में तैयार होने वाली चीजें अपनी बारीकी और शाही अंदाज के लिए जानी जाती हैं। उनके हुनर का दायरा केवल सामान्य परिधानों तक सीमित नहीं है, बल्कि वे धार्मिक आस्था के केंद्रों से लेकर विशिष्ट आयोजनों तक के लिए नायाब वस्तुएं बुनते हैं।

बुनाई का यह हुनर नागराजू को विरासत में मिला है, क्योंकि उनका परिवार पिछले चार दशकों से नहीं बल्कि चार पीढ़ियों से इस पारंपरिक कला को सहेजता आ रहा है। वे खुद आधिकारिक तौर पर वर्ष 2004 में इस पेशे से जुड़े थे और बीते 22 वर्षों से लगातार रेशमी धागों पर अपनी कला के जरिए नए आयाम गढ़ रहे हैं। उनके काम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे ग्राहकों की कल्पना और उनकी पसंद के डिजाइन को बिल्कुल सटीक रूप से रेशम के कपड़े पर उतार देते हैं, जिसे देखने वाले दंग रह जाते हैं।

अपनी इस कला को बड़े पैमाने पर आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने अपने केंद्र पर कुल 20 हैंडलूम स्थापित किए हैं। इन करघों पर लगभग 20 कुशल बुनकर दिन-रात मेहनत करते हैं और हर उत्पाद को पूरी तल्लीनता से तैयार करते हैं। आंध्र प्रदेश के अलावा उनके पास पड़ोसी राज्यों जैसे तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु से भी भारी मात्रा में ऑर्डर आते हैं, जो उनकी साड़ियों और अन्य उत्पादों की लोकप्रियता को साफ दर्शाते हैं।

नागराजू के सबसे चर्चित और अनोखे उत्पादों में रेशमी कपड़े पर तैयार किए जाने वाले शाही विवाह निमंत्रण पत्र शामिल हैं। इस तरह के एक शादी के कार्ड को मुकम्मल करने में करीब तीन घंटे का वक्त लगता है और इसकी कीमत 2,000 रुपये तय की गई है। इन निमंत्रण पत्रों की शाही और पारंपरिक शैली विशेष तौर पर बड़े घरानों और प्रतिष्ठित आयोजनों के बीच काफी पसंद की जा रही है, जो शादियों में एक अलग ही शान जोड़ती है।

इसके अलावा, वे ग्राहकों की व्यक्तिगत पसंद और मांग के अनुसार विशेष डिजाइनर रेशमी साड़ियां भी बनाते हैं। बाजार में उनकी सामान्य सिल्क साड़ियों की शुरुआती कीमत 10,000 रुपये है, जबकि खास ऑर्डर पर तैयार की जाने वाली महंगी और भारी साड़ियों के दाम 30,000 रुपये से शुरू होकर सीधे 2 लाख रुपये तक पहुंच जाते हैं। साड़ियों को बुनने में लगने वाला समय उनके डिजाइन पर निर्भर करता है, जहां सामान्य पैटर्न वाली साड़ी चार से पांच दिन में तैयार हो जाती है, वहीं देवी-देवताओं के चित्रों या जटिल डिजाइनों से सजी साड़ियों को पूरा होने में कम से कम दो सप्ताह का समय लग जाता है।

साड़ियों और कार्ड के अलावा उनकी कार्यशाला में रेशमी वस्त्रों पर देवी-देवताओं की बेहद आकर्षक तस्वीरें भी उकेरी जाती हैं। इन तस्वीरों को फ्रेम करवाकर उपहार के रूप में बेचा जाता है, और एक फ्रेम की कीमत लगभग 1,000 रुपये होती है। धार्मिक उत्सवों और आयोजनों के दौरान इन कलाकृतियों की मांग बाजार में हमेशा बनी रहती है।

उनकी कला का सबसे गौरवशाली पहलू यह है कि उन्हें तिरुमला तिरुपति देवस्थानम के लिए भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी के विशेष रेशमी वस्त्र तैयार करने का सौभाग्य प्राप्त है। हर साल भगवान के लिए लगभग 60 धोती और 60 उत्तरीयम की आवश्यकता होती है, जिनमें से ठीक आधी मात्रा नागराजू की कार्यशाला में ही बुनी जाती है। परंपरा के अनुसार, तिरुमला मंदिर में हर शुक्रवार को अभिषेक अनुष्ठान के बाद भगवान के वस्त्र बदले जाते हैं। इन पवित्र उतारे गए वस्त्रों को देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री के साथ-साथ तिरुमला तिरुपति देवस्थानम के सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों जैसी चुनिंदा गणमान्य हस्तियों को विशेष सम्मान के रूप में भेंट किया जाता है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** पारंपरिक हथकरघा उद्योग और देश के कुशल बुनकरों की कला को बढ़ावा मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और स्वदेशी उत्पादों की मांग बढ़ती है।

**श्री सत्य साई जिले में:** स्थानीय कारीगरों और हैंडलूम बुनकरों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं तथा पारंपरिक कला को संरक्षण मिलता है।

## सवाल-जवाब

### 1. बुनकर नागराजू किस जिले के रहने वाले हैं?
नागराजू आंध्र प्रदेश के श्री सत्य साई जिले के रहने वाले हैं।

### 2. नागराजू के रेशमी शादी के कार्ड की कीमत और समय क्या है?
एक शाही रेशमी शादी के निमंत्रण पत्र को तैयार करने में करीब तीन घंटे लगते हैं और इसकी कीमत 2,000 रुपये है।

### 3. विशेष डिजाइनर सिल्क साड़ियों की कीमत कितनी होती है?
विशेष ऑर्डर पर बनने वाली साड़ियों की कीमत 30,000 रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक हो सकती है।

### 4. तिरुमला मंदिर के लिए कौन से वस्त्र तैयार किए जाते हैं?
तिरुमला तिरुपति देवस्थानम के भगवान श्री वेंकटेश्वर स्वामी के लिए विशेष रेशमी धोती और उत्तरीयम तैयार किए जाते हैं।

## प्रेरणा और सबक
**चार पीढ़ियों की विरासत:** अपने पारिवारिक हुनर और पैतृक पेशे को पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ाना सफलता की नींव रखता है।

**ग्राहकों की पसंद पर फोकस:** बाजार की मांग और ग्राहकों के अनुकूल कस्टमाइज्ड उत्पाद तैयार करके कारोबार को बड़ा बनाया जा सकता है।

**कड़ी मेहनत और धैर्य:** किसी जटिल कलाकृति या प्रीमियम उत्पाद को तैयार करने में समय और संयम दोनों की आवश्यकता होती है।

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