# स्टॉकल पर भारतीय निवेशकों के अमेरिकी शेयर बिके, चीनी कंपनी के स्टॉक में गए 100 करोड़ रुपये

> बेंगलुरु की फिनटेक कंपनी स्टॉकल के करीब 30 भारतीय निवेशकों के खातों में कथित तौर पर बिना अनुमति के बड़े अमेरिकी टेक शेयर बिक गए और चीनी कंपनी झिबाओ टेक्नोलॉजी के शेयर खरीद लिए गए, जिससे भारी वित्तीय नुकसान हुआ।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-11-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/stockal-para-bharatiya-niveshakon-ke-ameriki-sheyara-bike-chini-knpani-ke-stoka-men-gae-100-karora-rupaye-55965 · **Language:** Hindi
**Tags:** स्टॉकल, ड्राइववेल्थ, अमेरिकी शेयर, झिबाओ टेक्नोलॉजी, फिनटेक फ्रॉड, साइबर सुरक्षा, सेबी, शेयर बाजार

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सीधे निवेश करने वाले भारतीय रिटेल निवेशकों के सामने एक अप्रत्याशित वित्तीय संकट खड़ा हो गया है। कई खाताधारकों ने पाया कि उनके निवेश खातों में लंबे समय से सुरक्षित रखे गए नामी कंपनियों के शेयर उनकी जानकारी या सहमति के बिना पूरी तरह खाली कर दिए गए। पोर्टफोलियो में शामिल दिग्गज बहुराष्ट्रीय कंपनियों की होल्डिंग्स को अचानक बेचकर एक गुमनाम चीनी फर्म के स्टॉक में सारा पैसा झोंक दिया गया।

 

## अचानक बदले पोर्टफोलियो और करोड़ों का नुकसान

यह घटनाक्रम बेंगलुरु में मुख्यालय वाली वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनी स्टॉकल सिक्योरिटीज के प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने वाले खाताधारकों से जुड़ा है। तकरीबन 30 भारतीय निवेशकों ने गंभीर शिकायत दर्ज कराई है कि 15 अक्टूबर को उनके विदेशी ट्रेडिंग खातों में अवैध रूप से खरीद और बिक्री के बड़े सौदे किए गए। इन खातों में रखे एप्पल, एनवीडिया, अमेज़न, टेस्ला, अल्फाबेट और एएमडी जैसी शीर्ष तकनीकी कंपनियों के शेयर बेच डाले गए। इसके तुरंत बाद, उस पूरी पूंजी का इस्तेमाल अमेरिकी शेयर बाजार नैस्डैक पर सूचीबद्ध झिबाओ टेक्नोलॉजी इंक (टिकर: ZBAO) के लाखों शेयर खरीदने में किया गया। प्रभावित निवेशकों का अनुमान है कि इस अनधिकृत फेरबदल के कारण उनका कुल नुकसान 100 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।

 

## स्टॉकल की कार्यप्रणाली और विदेशी निवेश का ढांचा

घरेलू निवेशकों के लिए विदेशी बाजारों, विशेषकर वॉल स्ट्रीट में सीधे हिस्सेदारी खरीदना तकनीकी रूप से जटिल प्रक्रिया रही है। स्टॉकल जैसी फिनटेक कंपनियां इसी प्रक्रिया को सरल बनाती हैं और भारतीय नागरिकों को विदेशी शेयर, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड और अन्य अंतरराष्ट्रीय संपत्तियों में धन लगाने का जरिया मुहैया कराती हैं। इस सुविधा के चलते किसी भी निवेशक को अमेरिका जाकर बैंक खाता खुलवाने या वहां के स्थानीय ब्रोकर के कार्यालय जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उपयोगकर्ता भारत में बैठकर ही मोबाइल एप्लिकेशन या वेब पोर्टल के माध्यम से धनराशि जोड़ सकते हैं, लेनदेन कर सकते हैं और अपनी विदेशी परिसंपत्तियों का प्रबंधन कर सकते हैं।

स्टॉकल भारत के पूंजी बाजार नियामक सेबी के साथ पंजीकृत इकाई है। हालांकि, अमेरिकी शेयर बाजार में वास्तविक ऑर्डर पूरा करने, सौदों का निपटान करने और ग्राहकों के शेयरों को सुरक्षित रखने यानी कस्टडी का जिम्मा अमेरिकी क्लियरिंग ब्रोकर ड्राइववेल्थ एलएलसी संभालता है। जब कोई भारतीय ग्राहक ऐप पर शेयर खरीदता है, तो घरेलू फिनटेक प्लेटफॉर्म केवल एक मध्यस्थ इंटरफेस की तरह काम करता है, जबकि शेयरों का वास्तविक लेनदेन और संरक्षण अमेरिकी नियामक दायरे में आने वाले ब्रोकर के पास होता है। यही बहुस्तरीय ढांचा अब जांच के केंद्र में है कि सुरक्षा में सेंध किस स्तर पर लगी।

 

## मिनटों में बिके शेयर और चीनी फर्म में संदिग्ध खरीदारी

खाताधारकों द्वारा साझा किए गए लेनदेन के ब्योरे से इस वित्तीय गड़बड़ी की भयावहता सामने आई है। एक पीड़ित निवेशक के खाते में एप्पल, टेस्ला, अमेज़न, अल्फाबेट, एनवीडिया और एएमडी समेत कुल 10 प्रमुख अमेरिकी निगमों के शेयर मौजूद थे। इन सभी ब्लू-चिप शेयरों को अचानक बेच दिया गया, जिससे लगभग 3,35,768 डॉलर की नकदी बनी। इसके तत्काल बाद पूरी राशि से झिबाओ टेक्नोलॉजी के 3 लाख शेयर 1.05 डॉलर प्रति शेयर के औसत भाव पर खरीद लिए गए। किसी भी सामान्य निवेशक द्वारा दुनिया की सबसे मूल्यवान और तरल कंपनियों को बेचकर एक अल्प-ज्ञात फर्म में एकाएक पूंजी लगाना बुनियादी निवेश तर्क के विपरीत है।

एक अन्य बड़े निवेशक के खाते में भी इसी तरह का चौंकाने वाला पैटर्न दिखा। वहां से लगभग 31 लाख डॉलर यानी करीब 29 करोड़ रुपये के शेयर मिनटों में बेचे गए। इसके बाद उस खाते से झिबाओ टेक्नोलॉजी के 30.5 लाख शेयर खरीद लिए गए। खाताधारक के अनुसार, पूरे पोर्टफोलियो को साफ करने में केवल दो मिनट लगे, जबकि नई चीनी कंपनी के शेयरों की खरीद प्रक्रिया को लगभग 15 मिनट में पूरा कर लिया गया।

 

## कम तरलता वाले शेयरों में भारी गिरावट

झिबाओ टेक्नोलॉजी अमेरिकी शेयर बाजार में बहुत कम कारोबार वाली कंपनी है, जिसे वित्तीय जगत में थिनली ट्रेडेड स्टॉक कहा जाता है। ऐसे शेयरों में दैनिक खरीदारों और विक्रेताओं की संख्या बेहद सीमित होती है। इसका सीधा परिणाम यह होता है कि जब कोई अचानक बड़ी मात्रा में शेयर खरीदने उतरता है तो कीमतें कृत्रिम रूप से चढ़ सकती हैं, और बाद में बिकवाली के समय खरीदार न मिलने पर भारी गिरावट आती है।

संदिग्ध लेनदेन के तुरंत बाद यही परिदृश्य देखने को मिला। 23 अक्टूबर तक झिबाओ टेक्नोलॉजी के शेयर का भाव 60 प्रतिशत तक टूटकर 0.42 डॉलर पर आ गया। जिन खातों में 1.05 डॉलर या उससे अधिक के औसत मूल्य पर खरीदारी कराई गई थी, वहां पूंजी का बड़ा हिस्सा कुछ ही दिनों में साफ हो गया। लिक्विडिटी की कमी के कारण निवेशकों के पास इन शेयरों को बेचकर बाहर निकलने का कोई व्यावहारिक रास्ता भी नहीं बचा।

 

## अलर्ट में देरी और संचार पर खड़े होते सवाल

इस पूरे मामले में प्रभावित निवेशकों की एक प्रमुख आपत्ति सुरक्षा अलर्ट और सूचना प्रणाली में हुई कथित विफलता को लेकर है। सामान्य दिनों में जब कोई ग्राहक अपने खाते से कोई छोटा सौदा भी करता था, तो उसे ईमेल के जरिए प्रत्येक खरीद और बिक्री की तत्काल पुष्टि प्राप्त होती थी। लेकिन 15 अक्टूबर को जब करोड़ों रुपये के पोर्टफोलियो बेचे गए और संदिग्ध चीनी शेयर खरीदे गए, तब ग्राहकों को उस तरह के अलग-अलग रियल-टाइम ट्रेड अलर्ट या सुरक्षा चेतावनियां नहीं मिलीं।

एक निवेशक के अनुसार, घटना के तीन दिन बाद यानी 18 अक्टूबर को स्टॉकल की मूल कंपनी बॉर्डरलेस ने उनसे संपर्क साधा। कंपनी ने स्वीकार किया कि 15 अक्टूबर को खाते में असामान्य और संदिग्ध गतिविधियां दर्ज की गई थीं और इसी कारण ड्राइववेल्थ ने खाते के संचालन को सीमित कर दिया था। निवेशकों का सवाल है कि यदि असामान्य ट्रेडिंग गतिविधि 15 अक्टूबर को ही पकड़ ली गई थी, तो खाताधारकों को सूचित करने और स्थिति स्पष्ट करने में 72 घंटे का समय क्यों लग गया।

 

## कंपनी का रुख और प्रारंभिक जांच

मामले के सार्वजनिक होने के बाद स्टॉकल ने स्पष्ट किया है कि संपूर्ण प्रकरण की गहन तकनीकी और कानूनी जांच की जा रही है। कंपनी के अनुसार, शुरुआती विश्लेषण से संकेत मिलता है कि प्रभावित ग्राहकों के ईमेल खातों और उनसे जुड़े लॉगिन क्रेडेंशियल्स से समझौता हुआ हो सकता है, जिसके जरिए अनधिकृत पहुंच बनाई गई। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।

## इसका आप पर असर
अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों में निवेश करने वाले भारतीय रिटेल निवेशकों के लिए यह घटना डिजिटल सुरक्षा और ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म के चुनाव को लेकर सीधा चेतावनी संकेत है।

- **पोर्टफोलियो सुरक्षा:** अपने विदेशी निवेश और ब्रोकरेज खातों के पासवर्ड तुरंत बदलें और टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन को अनिवार्य करें। इससे बिना अनुमति किसी अन्य डिवाइस से लॉगिन या अनधिकृत ट्रेडिंग की संभावना को रोका जा सकता है।
- **ट्रेड अलर्ट की निगरानी:** अपने पंजीकृत ईमेल और एसएमएस पर आने वाले कॉन्ट्रैक्ट नोट और ब्रोकर अलर्ट की नियमित जांच करें। किसी भी अज्ञात या संदिग्ध लेनदेन की सूचना तुरंत संबंधित प्लेटफॉर्म और क्लियरिंग ब्रोकर को दें।
- **प्लेटफॉर्म का चयन:** विदेशी शेयरों में निवेश की सुविधा देने वाले ऐप के साझेदार ब्रोकर और उनके कस्टोडियन नियमों को समझें। सेबी पंजीकृत होने के साथ-साथ अमेरिकी नियामक एसआईपीसी कवरेज की शर्तों की भी जानकारी रखें।
- **लिक्विडिटी जोखिम:** अनपेक्षित या कम कारोबार वाले शेयरों में पूंजी फंसने पर तत्काल निकास कठिन हो जाता है। ऐसे जोखिमों से बचने के लिए पोर्टफोलियो में केवल विश्वसनीय और अत्यधिक तरल संपत्तियों पर नजर रखें।

## ऐसा क्यों हुआ
यह घटनाक्रम खाता सुरक्षा में संभावित सेंध, विदेशी ट्रेडिंग के बहुस्तरीय ढांचे और कम लिक्विडिटी वाले शेयरों के हेरफेर से जुड़े जोखिमों के कारण सामने आया है।

- **क्रेडेंशियल में संभावित सेंध:** कंपनी की प्राथमिक जांच के अनुसार प्रभावित ग्राहकों के ईमेल और लॉगिन विवरणों के साथ अनधिकृत छेड़छाड़ हुई हो सकती है। इसी सुरक्षा चूक का फायदा उठाकर अनधिकृत पक्षों ने खातों में लॉगिन कर पुराने शेयर बेचने के ऑर्डर डाले।
- **आर्टिफिशियल वॉल्यूम और पंपिंग:** बड़ी मात्रा में स्थिर तकनीकी शेयरों को बेचकर झिबाओ टेक्नोलॉजी जैसी कम कारोबार वाली चीनी कंपनी के शेयर ऊंचे भाव पर खरीदे गए। ऐसे थिनली ट्रेडेड शेयरों में अचानक कृत्रिम खरीदारी कराकर कीमतों को प्रभावित करना आसान होता है।
- **अलर्ट और संचार में विफलता:** प्रभावित खाताधारकों को सामान्य सौदों की तरह तुरंत ट्रेड कन्फर्मेशन नहीं मिले और कंपनी की ओर से चेतावनी मिलने में तीन दिन का विलंब हुआ। इस तकनीकी व प्रक्रियागत देरी के चलते निवेशकों को समय रहते सौदे रोकने का अवसर नहीं मिल सका।
- **जांच प्रक्रिया जारी:** पूरे मामले में सुरक्षा सेंध घरेलू फिनटेक इंटरफेस पर हुई या अमेरिकी क्लियरिंग ब्रोकर के स्तर पर, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी जांच के अधीन है। फोरेंसिक ऑडिट पूरा होने के बाद ही अंतिम तकनीकी कारण सार्वजनिक हो सकेंगे।

## सवाल-जवाब

### 1. स्टॉकल प्लेटफॉर्म पर निवेशकों के साथ क्या हुआ?
करीब 30 निवेशकों के खातों से एप्पल, एनवीडिया और अमेज़न जैसे प्रमुख अमेरिकी शेयर बिना अनुमति बेच दिए गए और उस रकम से झिबाओ टेक्नोलॉजी के शेयर खरीद लिए गए।

### 2. इस अनधिकृत ट्रेडिंग से निवेशकों को कितना नुकसान होने का दावा है?
प्रभावित निवेशकों का दावा है कि इस पूरी गड़बड़ी और शेयरों के भाव गिरने से उनका कुल नुकसान 100 करोड़ रुपये से ज्यादा हो चुका है।

### 3. स्टॉकल और ड्राइववेल्थ के बीच क्या संबंध है?
स्टॉकल भारत में सेबी पंजीकृत फिनटेक प्लेटफॉर्म है जो निवेशकों को जोड़ता है, जबकि ड्राइववेल्थ अमेरिकी क्लियरिंग ब्रोकर के तौर पर ट्रेड निपटान और कस्टडी की सेवाएं देता है।

### 4. झिबाओ टेक्नोलॉजी के शेयरों का भाव कितना गिरा?
अनधिकृत खरीदारी के बाद 23 अक्टूबर तक इस कंपनी का शेयर करीब 60 प्रतिशत गिरकर 0.42 डॉलर पर बंद हुआ।

### 5. कंपनी ने इस पूरे मामले पर क्या स्पष्टीकरण दिया है?
स्टॉकल ने बताया कि मामला जांच के अधीन है और प्रारंभिक जानकारी के अनुसार ग्राहक के ईमेल और लॉगिन क्रेडेंशियल्स में सेंध लगने का अंदेशा है।

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