भारतीय रियल एस्टेट में बंपर निवेश, SEBI के आंकड़ों ने चौंकाया; जानिए क्या है वजह वैश्विक बाजार में मंदी और उथल-पुथल के बीच भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में बंपर तेजी आई है। SEBI के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वैकल्पिक निवेश फंड के जरिए प्रॉपर्टी मार्केट में निवेश एक साल में 84 प्रतिशत बढ़कर 1,28,937 करोड़ रुपये पहुंच गया है। पिछले कुछ महीनों से वैश्विक बाजार में काफी उठापटक का दौर चल रहा है और इस अनिश्चितता का असर दुनिया भर के तमाम सेक्टरों पर पड़ रहा है। आमतौर पर ऐसी मंदी के माहौल में यह माना जाता है कि लोग घर और संपत्ति खरीदने से दूरी बना रहे हैं, लेकिन भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर ने इन तमाम अनुमानों को झुठलाते हुए एक अलग ही ऊंचाई को छू लिया है। पिछले एक साल के भीतर देश के प्रॉपर्टी बाजार में निवेश का आंकड़ा इतनी तेज रफ्तार से बढ़ा है कि हर कोई हैरान है। हाल ही में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी SEBI के सामने आए ताजा आंकड़े इस बदलते हुए परिदृश्य की पूरी तस्वीर को साफ करते हैं। अल्ट्रा हाई नेटवर्थ निवेशकों का रिकॉर्ड पैसा SEBI की इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के प्रॉपर्टी मार्केट में अल्ट्रा हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल्स यानी UHNI ने वर्ष 2025-26 के दौरान अब तक का सबसे रिकॉर्ड निवेश किया है। यह भारी-भरकम पूंजी निवेश इस पूरे सेक्टर की लंबी अवधि वाली मजबूती और निवेशकों को मिलने वाले बेहतर रिटर्न की संभावनाओं को और अधिक पुख्ता कर रहा है। वैश्विक स्तर पर भले ही अनिश्चितताओं का दौर हो, लेकिन भारत के भीतर संपत्ति बाजार निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है। एक साल में 84 प्रतिशत की ऐतिहासिक छलांग SEBI के साझा किए गए आंकड़ों पर गौर करें तो वैकल्पिक निवेश फंड यानी Alternative Investment Funds-AIF के माध्यम से रियल एस्टेट सेक्टर में होने वाला कुल निवेश महज एक वर्ष के भीतर लगभग 84 प्रतिशत तक बढ़ गया है। अगर इसके पिछले वित्तीय वर्ष यानी 2024-25 के आंकड़ों को देखा जाए, तो इस सेक्टर में कुल निवेश 69,896 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था, जो बढ़कर वर्ष 2025-26 में सीधे 1,28,937 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इसका सीधा मतलब यह है कि सिर्फ एक साल के अंतराल में करीब 60,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश रियल एस्टेट की दुनिया में आया है, जो अपने आप में एक बहुत बड़ा और नया रिकॉर्ड है। शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से बदला रुख विशेषज्ञों का मानना है कि इस भारी बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएं और घरेलू शेयर बाजार में लगातार बनी अस्थिरता है। वर्ष 2025-26 के दौरान निवेशकों ने देखा कि इक्विटी बाजारों में भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिकी टैरिफ से जुड़ी आशंकाएं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदलती आर्थिक परिस्थितियों का बुरा असर पड़ रहा है। ऐसे माहौल से बचने के लिए निवेशकों ने अपनी पूंजी को उन सुरक्षित जगहों पर लगाना बेहतर समझा जहां संपत्ति का वास्तविक मूल्य यानी Real Asset Value लंबे समय तक बिना घटे सुरक्षित रहे और साथ ही साथ नियमित आमदनी की गुंजाइश भी बनी रहे। चूँकि रियल एस्टेट इन दोनों पैमानों पर पूरी तरह खरा उतरता है, इसलिए देश के बड़े निवेशकों ने अपने निवेश पोर्टफोलियो में इस सेक्टर की हिस्सेदारी को लगातार बढ़ाना शुरू कर दिया। सिर्फ आवासीय मकानों तक सीमित नहीं है निवेश यह बात भी गौर करने वाली है कि यह सारा का सारा निवेश केवल आम घरों या आवासीय परियोजनाओं तक ही सीमित नहीं है। देश के प्रमुख महानगरों में ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस की मांग में लगातार तेजी आ रही है, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर यानी GCC का दायरा बढ़ रहा है, आईटी और वित्तीय कंपनियों द्वारा नई लीजिंग की जा रही है, इसके अलावा वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स पार्क और डेटा सेंटर जैसी आधुनिक परिसंपत्तियों में भी जमकर पैसा लगाया गया है। दूसरी ओर, प्रीमियम और लग्जरी हाउसिंग की तरफ लोगों का मजबूत रुझान देखने को मिला है जिसने आवासीय बाजार को भी एक नई रफ्तार दे दी है। तेजी से उभरते इंफ्रास्ट्रक्चर का फायदा दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में जिस तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास हो रहा है, उसने सोने पर सुहागा का काम किया है। नए एक्सप्रेसवे, आधुनिक मेट्रो नेटवर्क, नए एयरपोर्ट, औद्योगिक कॉरिडोर और स्मार्ट सिटी जैसी योजनाएं रियल एस्टेट संपत्तियों के लंबे समय के मूल्य को लगातार मजबूत कर रही हैं। खासतौर पर नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद और यमुना एक्सप्रेसवे का पूरा क्षेत्र निवेशकों के लिए नए ग्रोथ इंजन के रूप में उभरकर सामने आया है। नियामकीय सुधारों और पारदर्शिता से बढ़ा भरोसा रियल एस्टेट क्षेत्र के जानकारों का यह भी कहना है कि RERA कानून के आने, प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण, बेहतर नियम-कानून और संगठित डेवलपर्स की बढ़ती संख्या ने इस पूरे सेक्टर में पारदर्शिता और विश्वसनीयता को एक नए पायदान पर पहुंचा दिया है। एक वह वक्त था जब निवेशकों के मन में प्रोजेक्ट्स के समय पर पूरा न होने और पारदर्शिता को लेकर तमाम तरह की आशंकाएं बनी रहती थीं, लेकिन अब सरकार के नियामकीय सुधारों की वजह से निवेश से जुड़ा जोखिम बहुत हद तक कम हो चुका है। यही वजह है कि आम घरेलू निवेशकों के साथ-साथ बड़े संस्थागत निवेशकों का भरोसा भी दिन-प्रतिदिन मजबूत होता जा रहा है। दिग्गज उद्योगपतियों की राय निम्बस ग्रुप के सीईओ साहिल अग्रवाल का कहना है कि देश के सबसे बड़े निवेशकों का रियल एस्टेट की तरफ रुख करना इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि यह सेक्टर अब केवल पूंजी बढ़ाने का साधन नहीं रहा, बल्कि नियमित कमाई और दीर्घकालिक स्थिरता का मजबूत जरिया बन चुका है। लग्जरी और प्रीमियम हाउसिंग के साथ-साथ हाई क्वालिटी वाले कमर्शियल एसेट्स ने निवेशकों का विश्वास दोगुना कर दिया है। काउंटी ग्रुप के डायरेक्टर अमित मोदी का मानना है कि भारतीय रियल एस्टेट बाजार अब एक बेहद परिपक्व निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित हो चुका है। SEBI के आंकड़े गवाही देते हैं कि वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद हाई नेटवर्थ निवेशकों ने रियल एस्टेट को सबसे सुरक्षित और स्थिर रिटर्न देने वाला माध्यम माना है। मिगसन ग्रुप के एमडी यश मिगलानी का कहना है कि भारत का यह सेक्टर अब पारंपरिक एसेट क्लास से आगे बढ़कर लंबे समय की संपत्ति बनाने का सबसे भरोसेमंद जरिया बन गया है। एक साल में अल्ट्रा हाई नेटवर्थ निवेशकों द्वारा 84 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है कि संस्थागत निवेशकों का विश्वास अटूट है। अंसल हाउसिंग के डायरेक्टर कुशाग्र अंसल का यह भी कहना है कि निवेशक अब छोटे समय के बाजार उतार-चढ़ाव से दूर हटकर असली परिसंपत्तियों में पैसा लगाने को प्राथमिकता दे रहे हैं। सरकार की तरफ से बुनियादी ढांचे पर रिकॉर्ड खर्च और RERA जैसे सुधारों ने इस सेक्टर की नींव को और अधिक मजबूत कर दिया है। इसका आप पर असर भारत में: रियल एस्टेट सेक्टर में संस्थागत और बड़े निवेशकों का यह भारी निवेश देश भर में निर्माण गतिविधियों, बुनियादी ढांचे के विकास और रोजगार के नए अवसर पैदा कर रहा है। घर खरीदारों के लिए: संगठित डेवलपर्स और नियामकीय सुधारों के मजबूत होने से घर खरीदारों के लिए पारदर्शिता बढ़ी है और समय पर प्रोजेक्ट पूरा होने का जोखिम कम हुआ है। सवाल-जवाब 1. वर्ष 2025-26 में भारतीय रियल एस्टेट में कुल कितना निवेश हुआ है? SEBI के आंकड़ों के अनुसार, वैकल्पिक निवेश फंड के माध्यम से वर्ष 2025-26 में रियल एस्टेट में कुल 1,28,937 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है। 2. पिछले साल के मुकाबले इस बार निवेश में कितने प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है? पिछले वर्ष 2024-25 के मुकाबले इस बार रियल एस्टेट निवेश में लगभग 84 प्रतिशत की ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 3. वर्ष 2024-25 में रियल एस्टेट में कुल कितना निवेश किया गया था? वर्ष 2024-25 के दौरान वैकल्पिक निवेश फंड के जरिए प्रॉपर्टी सेक्टर में कुल 69,896 करोड़ रुपये का निवेश आया था। 4. शेयर बाजार में अस्थिरता का रियल एस्टेट पर क्या प्रभाव पड़ा? शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव के कारण निवेशकों ने अपनी पूंजी को अधिक स्थिर संपत्तियों की ओर मोड़ा, जिससे रियल एस्टेट सेक्टर को सबसे अधिक फायदा मिला। 5. कौन से शहर निवेशकों के लिए नए ग्रोथ इंजन के रूप में उभर रहे हैं? नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र निवेशकों के लिए प्रमुख ग्रोथ इंजन के रूप में उभर रहे हैं। https://trendkia.com/business/surge-in-indian-real-estate-investments-defies-global-market-volatility-10837 TrendKia — Har trend, sabse pehle.