टाटा समूह में नेतृत्व को लेकर तकरार, एन चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल पर नोएल टाटा ने जताई आपत्ति टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने एन चंद्रशेखरन को फिर से कमान सौंपे जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं, जबकि टाटा संस कानूनी राय के आधार पर फैसले को सही ठहरा रही है। टाटा समूह के शीर्ष नेतृत्व में अधिकारों और नियुक्तियों को लेकर एक नया विवाद गहरा गया है। दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा के निधन के बाद से समूह के भीतर अलग-अलग मुद्दों पर असहमति की बातें सामने आ रही थीं, लेकिन अब यह खींचतान सार्वजनिक स्तर पर दिखने लगी है। ताजा विवाद टाटा संस के मौजूदा चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को लगातार तीसरी बार इस पद पर नियुक्त किए जाने को लेकर शुरू हुआ है। जहां मुख्य होल्डिंग कंपनी टाटा संस इस फैसले के पक्ष में मजबूती से खड़ी है, वहीं टाटा ट्रस्ट के प्रमुख नोएल टाटा ने इस पूरी चयन प्रक्रिया के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन और वोटिंग की वैधता पर सवाल रतन टाटा के जाने के बाद समूह के परोपकारी ट्रस्टों की जिम्मेदारी संभालने वाले नोएल टाटा ने एन चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को लेकर समूह के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन यानी एओए के नियमों का हवाला दिया है। उन्होंने इस नियुक्ति के लिए बोर्ड में हुई वोटिंग की कानूनी वैधता को खुली चुनौती दी है। उनका कहना है कि इस फैसले में तय नियमों और प्रक्रियाओं का सही तरीके से पालन नहीं हुआ है। ट्रस्ट के शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति की आपत्तियों को इस तरह दरकिनार किए जाने से समूह के अंदरूनी समीकरणों को लेकर कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। टाटा संस ने पूर्व जजों की कानूनी राय का दिया हवाला दूसरी तरफ टाटा संस ने नोएल टाटा के विरोध और उनकी उठाई गई सभी आपत्तियों को पूरी तरह से नकार दिया है। अपने फैसले को कानूनी तौर पर मजबूत साबित करने के लिए कंपनी ने देश के दो प्रमुख विधिक विशेषज्ञों की सलाह का सहारा लिया है। इनमें सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित और रिटायर्ड जज बीएन श्रीकृष्ण शामिल हैं। कंपनी का स्पष्ट रुख है कि 17 सितंबर को पारित किया गया बोर्ड का प्रस्ताव पूरी तरह से नियमों के दायरे में था। कानूनी विशेषज्ञों की राय के आधार पर टाटा संस का दावा है कि चंद्रशेखरन की यह नियुक्ति पूरी तरह वैध और पारदर्शी है। इसका आप पर असर यह घटनाक्रम देश के सबसे बड़े कारोबारी घरानों में से एक के संचालन और निवेशकों के भरोसे से सीधा जुड़ा हुआ है। • शेयरधारकों पर असर: समूह की सूचीबद्ध कंपनियों के निवेशकों के लिए यह प्रशासनिक स्थिरता का विषय बन सकता है। शीर्ष स्तर पर मतभेद बने रहने से कंपनियों के रणनीतिक फैसलों की गति पर असर पड़ सकता है। • कॉर्पोरेट प्रशासन: ट्रस्ट और होल्डिंग कंपनी के बीच अधिकारों की सीमा तय करने को लेकर नई बहस शुरू हो सकती है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि मुख्य नीतियों में किसकी सहमति कितनी जरूरी है। • समूह के कर्मचारियों और कारोबार: परिचालन से जुड़े कामकाज पर फिलहाल कोई सीधा असर नहीं दिखेगा। हालांकि लंबी खींचतान से दीर्घकालिक व्यावसायिक योजनाओं की मंजूरी में देरी की आशंका बनी रहती है। • विधिक और नियामकीय पहलू: यदि यह मामला आगे बढ़ता है तो कॉर्पोरेट नियमों की व्याख्या को लेकर नया उदाहरण बन सकता है। सभी पक्षों की नजर अब बोर्ड के अगले औपचारिक कदमों पर टिकी रहेगी। ऐसा क्यों हुआ यह टकराव रतन टाटा के निधन के बाद समूह की कमान के पुनर्गठन और शीर्ष पदों पर पुनर्नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर उपजा है। • मूल कारण: विवाद की मुख्य वजह एन चंद्रशेखरन को तीसरी बार चेयरमैन पद देने के लिए 17 सितंबर को लाया गया बोर्ड प्रस्ताव है। नोएल टाटा ने इस प्रस्ताव के लिए हुई वोटिंग को समूह के नियमों के विरुद्ध बताकर चुनौती दी। • नेतृत्व परिवर्तन की पृष्ठभूमि: रतन टाटा के जाने के बाद समूह के ट्रस्टों का नियंत्रण नोएल टाटा के हाथों में आने से शक्ति संतुलन बदला है। दोनों प्रमुख इकाइयों के बीच कई मुद्दों पर पिछले कुछ महीनों से लगातार असहमति देखी जा रही थी। • विधिक राय का सहारा: नियमों की वैधता को लेकर उभरे मतभेद के बाद टाटा संस ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित और रिटायर्ड जज बीएन श्रीकृष्ण से सलाह ली। इन विशेषज्ञों की अनुकूल राय मिलने के बाद ही कंपनी ने नोएल टाटा की आपत्तियों को खारिज कर नियुक्ति को वैध घोषित किया। सवाल-जवाब 1. टाटा समूह में ताजा विवाद किस मुद्दे पर शुरू हुआ है? यह विवाद टाटा संस के मौजूदा चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को तीसरी बार पद पर नियुक्त करने के फैसले को लेकर उपजा है। 2. इस नियुक्ति का विरोध किसने किया है? टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने इस नियुक्ति के लिए हुई वोटिंग की कानूनी वैधता पर सवाल उठाते हुए विरोध जताया है। 3. नोएल टाटा ने अपनी आपत्ति में क्या आधार दिया है? उन्होंने समूह के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (एओए) के तहत नियुक्ति को लेकर डाले गए वोट की वैधानिकता को चुनौती दी है। 4. टाटा संस ने नोएल टाटा के विरोध पर क्या रुख अपनाया? टाटा संस ने आपत्तियों को खारिज करते हुए 17 सितंबर के बोर्ड प्रस्ताव को पूरी तरह कानूनी और नियुक्ति को वैध बताया है। 5. टाटा संस ने अपने पक्ष में किन कानूनी विशेषज्ञों की राय का हवाला दिया? कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश यूयू ललित और सेवानिवृत्त जज बीएन श्रीकृष्ण की विधिक राय का हवाला दिया है। https://trendkia.com/business/tata-group-men-netritva-ko-lekara-takarara-n-chandrasekaran-ke-tisare-karyakala-para-noel-tata-ne-jatai-apatti-38002 TrendKia — Har trend, sabse pehle.