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  "type": "article",
  "title": "टेक इंडस्ट्री में महिलाओं की स्थिति पर बड़ा खुलासा, 634 महिला कर्मचारियों ने बयां किया कॉर्पोरेट दफ्तरों का कड़वा सच",
  "summary": "टेक जगत में काम करने वाली 634 महिलाओं के बीच हुए एक व्यापक अध्ययन में कार्यस्थल पर भेदभाव, अनुचित व्यवहार और नई तकनीक के दौर में बढ़ते दबाव की चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है।",
  "content": "प्रौद्योगिकी क्षेत्र के भीतर कार्यस्थलों की कार्यसंस्कृति को लेकर लंबे समय से कई तरह के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर काम करने वाली महिलाओं का अनुभव कुछ और ही सच्चाई बयां करता है। एक विस्तृत सर्वेक्षण में तकनीकी कंपनियों में काम करने वाली 634 महिलाओं ने अपने करियर, रोज़मर्रा के दफ़्तरी माहौल और उद्योग की मौजूदा स्थिति पर खुलकर अपनी बात रखी है। इन महिला कर्मचारियों के अनुभवों से यह स्पष्ट होता है कि तकनीकी उद्योग के बड़े कॉर्पोरेट दफ़्तरों में आक्रामकता और पुरुष प्रधान सोच अब भी बेहद गहरे स्तर पर मौजूद है। कंपनियों में विविधता और समावेशिता से जुड़े प्रयासों के पीछे हटने के बीच यह अध्ययन उद्योग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।\n\n इस अध्ययन में विभिन्न पदों, कई तरह के अनुभवों और छोटी-बड़ी कंपनियों से जुड़ी महिला पेशेवरों ने अपनी राय साझा की। क्षेत्र में तीन दशकों का लंबा अनुभव रखने वाली एक वरिष्ठ महिला पेशेवर ने साझा किया कि दफ़्तर में सहयोगी अक्सर उनके साथ ऐसा व्यवहार करते हैं जैसे उन्हें काम की बुनियादी समझ भी न हो। एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पुरुष ग्राहक अक्सर उन्हें मुख्य कार्यकारी अधिकारी मानने के बजाय केवल सचिव या संदेशवाहक समझ लेते हैं और जब उन्हें असल पद की जानकारी मिलती है तो वे उपेक्षा भरा रवैया अपनाते हैं। कई अन्य कर्मचारियों ने यह भी बताया कि महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियाँ पाने के लिए उन पर अनुचित आरोप लगाए गए, जबकि कुछ का कहना था कि पुरुष सहकर्मियों से कहीं बेहतर प्रदर्शन करने के बावजूद उनकी क्षमताओं पर बेवजह संदेह किया जाता रहा।\n\n \n\nकार्यस्थल पर अनुचित व्यवहार और सीमाओं के उल्लंघन के मामले\n\nसर्वेक्षण में शामिल 634 महिलाओं ने दफ़्तरों में होने वाले अशोभनीय व्यवहार के ऐसे कई मामले साझा किए जो नेतृत्व की जवाबदेही पर बड़े सवाल उठाते हैं। एक महिला कर्मचारी ने बताया कि उनके संस्थान के एक वरिष्ठ अधिकारी छुट्टियों के सालाना जश्न के दौरान सांता क्लॉज़ की पोशाक पहनकर आते थे और युवा महिला कर्मचारियों को अपनी गोद में बैठने के लिए विवश करते थे। एक अन्य कर्मचारी ने खुलासा किया कि उनके पूर्व प्रबंधक जानबूझकर उन्हें अपने आगे चलने को कहते थे ताकि वे अनुचित नज़र रख सकें। इसके अलावा आंतरिक संचार माध्यम स्लैक पर पुरुष कर्मचारियों द्वारा महिला सहकर्मियों के शरीर के अंगों को क्रमबद्ध करने और रेटिंग देने जैसी अशोभनीय गतिविधियों की जानकारी भी सामने आई।\n\n ये सभी वास्तविक अनुभव उस औपचारिक छवि से पूरी तरह उलट हैं जो बड़े सम्मेलनों, बैठकों और मंचों पर पेश की जाती है। उद्योग से जुड़े कई मंच अक्सर महिलाओं को सशक्त बनाने और प्रेरित करने के बड़े-बड़े दावे करते हैं, जबकि कई शीर्ष अधिकारी यह मानकर बैठ जाते हैं कि लैंगिक असमानता की समस्या अब पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। दशकों से किए गए शोधों में महिला पेशेवरों के सामने आने वाली बाधाओं को गिनाया गया और उन्हें मेंटर खोजने, अपने काम की प्रशंसा खुद करने या वेतन वृद्धि से पहले बात करने का अभ्यास करने जैसे व्यक्तिगत सुझाव दिए गए। लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त यह है कि वर्ष 2020 के दौर में कार्यस्थल पर व्यवस्थागत सुधार की जो बातें होती थीं, वे वर्ष 2026 तक आते-आते चुपचाप काम करने और वेतन लेकर शांत रहने की मजबूरी में बदलती दिख रही हैं।\n\n \n\nभेदभाव, पदोन्नति में रुकावट और कम वेतन का सामना\n\nअध्ययन में शामिल एक तिहाई से अधिक महिलाओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने अपने काम के दौरान लैंगिक आधार पर उत्पीड़न या पक्षपात का प्रत्यक्ष सामना किया है। हालांकि कई महिलाओं ने अपने करियर को लेकर संतोष भी ज़ाहिर किया, लेकिन बड़ी संख्या में पेशेवरों ने अपनी आपबीती साझा की। इनमें वरिष्ठ पुरुष अधिकारियों द्वारा अशोभनीय आचरण, समान भूमिका के लिए पुरुष सहकर्मियों की तुलना में कम वेतन मिलना, पदोन्नति से वंचित रखा जाना और महत्वपूर्ण बैठकों में उनकी बात को बीच में ही काट दिया जाना शामिल है।\n\n कई महिला कर्मियों को यह कहकर बड़े अवसरों से दूर रखा गया कि पुरुष दबाव को बेहतर ढंग से संभाल सकते हैं। बैठकों में यह रवैया भी आम देखा गया जहां किसी महिला द्वारा दिए गए विचार को तब तक अनदेखा किया गया जब तक कि उसी बात को किसी पुरुष सहकर्मी ने दोबारा नहीं दोहराया। एक प्रतिभागी ने दर्ज किया कि उनके पसंदीदा सहकर्मी पुरुष हैं, लेकिन उनमें से कई हमेशा यह मान लेते हैं कि किसी महिला की राय स्वतः ही कम मूल्यवान है, और यह मानसिकता पिछले 10 से 15 वर्षों में बिल्कुल नहीं सुधरी है।\n\n \n\nविविधता के आंकड़ों का इतिहास और मौजूदा गिरावट\n\nउद्योग में विविधता को लेकर एक दशक पहले एक सकारात्मक आंदोलन की शुरुआत हुई थी। वर्ष 2013 में पिनट्रेस्ट की एक इंजीनियर ट्रेसी चाउ ने तकनीकी भूमिकाओं में महिलाओं के आंकड़ों की कमी पर एक लेख लिखा था। उन्होंने गिटहब पर एक सार्वजनिक स्प्रेडशीट बनाई जिसमें विभिन्न कंपनियों के कर्मचारियों ने अपने संस्थानों के वास्तविक आंकड़े दर्ज करने शुरू किए। इसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता जेसी जैक्सन ने इस मुद्दे को शेयरधारकों की वार्षिक बैठकों में उठाया और कंपनियों पर अपने कर्मचारियों की जनसांख्यिकी सार्वजनिक करने का दबाव बनाया।\n\n इस दबाव का असर दिखा और वर्ष 2014 में गूगल ने अपनी पहली आधिकारिक विविधता रिपोर्ट जारी की। इसके तुरंत बाद फेसबुक और माइक्रोसॉफ्ट जैसी तकनीकी दिग्गज कंपनियों ने भी अपनी रिपोर्टें साझा करनी शुरू कीं, जिससे धीरे-धीरे इन आंकड़ों में कुछ मामूली सुधार देखा गया था। लेकिन हाल के वर्षों में यह रुझान पूरी तरह उलट गया है। डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन द्वारा विविधता, समानता और समावेशन नीतियों के खिलाफ उठाए गए कदमों के बाद कई बड़ी कंपनियों ने अपने विविधता के आंकड़े सार्वजनिक करना बंद कर दिया। प्रशासन ने कार्यस्थल पर पक्षपात की जांच करने वाली संघीय एजेंसी के कर्मचारियों की संख्या को 480 से घटाकर मात्र 75 कर दिया।\n\n इस बीच कुछ गिनी-चुनी कंपनियां अब भी अपने कार्यबल का विवरण जारी कर रही हैं। एनवीडिया ने जून 2026 में अपने आंकड़े सार्वजनिक किए, जिनके अनुसार कंपनी की तकनीकी भूमिकाओं में महिलाओं की हिस्सेदारी मात्र 17.4 प्रतिशत है। प्रबंधकीय और नेतृत्व स्तर पर भी महिलाओं की संख्या इसी सीमित दायरे में बनी हुई है, हालांकि कंपनी के पांच शीर्ष अधिकारियों में से दो महिलाएं हैं। सिलिकॉन वैली के नेतृत्व को लेकर कर्मचारियों में मोहभंग बढ़ रहा है। कर्मचारियों ने ऑल्टमैन, मस्क और बेजोस जैसे शीर्ष नामों का हवाला देते हुए कहा कि जो लोग कभी मानवता की समस्याओं को हल करने वाली तकनीक बनाने का सपना लेकर आए थे, वे अब अपने नेतृत्व की दिशा से निराश हैं।\n\n \n\nकृत्रिम बुद्धिमत्ता की होड़ और कार्यस्थल पर नया तनाव\n\nकृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI तकनीक के विस्तार ने तकनीकी कर्मियों के लिए दबाव और अलगाव को और गहरा कर दिया है। कोड लिखने और डिजाइन तैयार करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे ऑटोमेटेड टूल्स की गुणवत्ता पर सवाल उठाने वाली महिलाओं को अक्सर किनारे कर दिया जाता है। एक प्रतिभागी ने साझा किया कि कम गुणवत्ता वाले डिजाइनों की कमियों को उजागर करने के बावजूद उन पर लगातार ऑटोमेटेड टूल्स का उपयोग करने का भारी दबाव बनाया जाता है, जिसके चलते उनका बहुत सारा समय एआई जनित गड़बड़ियों को ठीक करने में ही बीत जाता है।\n\n अध्ययन में यह बात भी रेखांकित की गई कि नई तकनीक ने कार्यस्थल पर मौजूदा पूर्वाग्रहों को और तीखा कर दिया है। एक महिला कर्मचारी ने बताया कि जब कोई पुरुष सहकर्मी क्लॉड टूल की मदद से जल्दबाजी में अधूरा काम पेश करता है तो उसकी सराहना की जाती है, जबकि अगर टीम की कोई महिला ऐसा सतही काम पेश करे तो उसे नौकरी से निकाले जाने का जोखिम पैदा हो जाता है। इसके अलावा कई कर्मचारियों ने नई तकनीकों से जुड़े पर्यावरणीय नुकसान, नौकरियों में कटौती, बौद्धिक संपदा की चोरी और संपत्ति की बढ़ती असमानता को लेकर भी अपनी चिंताएं जताई हैं। नौकरी के कमजोर बाज़ार में लोग अपनी आवाज़ उठाने से डर रहे हैं, जिससे तकनीकी दफ्तरों में एक नए तरह का मानसिक तनाव और असहायता की स्थिति जन्म ले रही है।\n\nइसका आप पर असर\nयह रिपोर्ट कॉर्पोरेट और तकनीकी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के करियर, कार्यस्थल सुरक्षा और अधिकारों पर सीधा असर डालती है।\n\n• पेशेवर सुरक्षा और अधिकार: कंपनियों में औपचारिक विविधता और शिकायत निवारण तंत्र कमजोर होने से कर्मचारियों के लिए दफ्तर में होने वाले अनुचित व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाना कठिन हो सकता है। किसी भी शिकायत के लिए आंतरिक संचार और औपचारिक प्रक्रियाओं का लिखित रिकॉर्ड संभालकर रखना बहुत जरूरी है।\n• वेतन और पदोन्नति पर असर: तकनीकी भूमिकाओं में महिलाओं की सीमित हिस्सेदारी और असमान मूल्यांकन के कारण करियर में आगे बढ़ने की गति प्रभावित हो सकती है। अपने काम का ठोस डेटा और उपलब्धियों का स्वतंत्र दस्तावेज तैयार रखना वेतन वृद्धि और प्रमोशन की चर्चा में मददगार साबित होगा।\n• नई तकनीक का उपयोग: दफ्तरों में स्वचालित कोडिंग और टूल्स का दबाव बढ़ने से कर्मचारियों पर काम सुधारने का अतिरिक्त बोझ आ रहा है। कर्मचारियों को केवल टूल्स पर निर्भर रहने के बजाय अपनी बुनियादी तकनीकी और समीक्षा क्षमताओं को मजबूत बनाए रखना चाहिए।\n• नौकरी के अवसरों का चुनाव: कई कंपनियों द्वारा विविधता के आंकड़े सार्वजनिक न करने से नई नौकरियों के चयन में कंपनी की वास्तविक संस्कृति को समझना मुश्किल हो गया है। उम्मीदवारों को किसी कंपनी से जुड़ने से पहले वहां के पूर्व कर्मचारियों और अंदरूनी माहौल की स्वतंत्र पड़ताल करनी चाहिए।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह स्थिति पिछले कुछ वर्षों में राजनीतिक प्राथमिकताओं में आए बदलाव, बड़ी कंपनियों द्वारा आंतरिक नीतियों में की गई कटौती और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की नई होड़ के संयुक्त प्रभाव से पैदा हुई है।\n\n• नीतिगत बदलाव और विनियामक ढिलाई: अमेरिकी प्रशासन द्वारा विविधता, समानता और समावेशन नीतियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने और कार्यस्थल भेदभाव की जांच करने वाली एजेंसी के 480 कर्मचारियों को घटाकर 75 करने से कंपनियों पर नियम लागू करने का दबाव लगभग खत्म हो गया। इसके चलते बड़ी तकनीकी कंपनियों ने अपनी वार्षिक विविधता रिपोर्ट सार्वजनिक करना बंद कर दिया और आंतरिक पहलों को समाप्त कर दिया।\n• उद्योग नेतृत्व की प्राथमिकताओं में बदलाव: सिलिकॉन वैली के शीर्ष नेतृत्व द्वारा आक्रामक और पुरुष प्रधान कॉर्पोरेट शैली को फिर से बढ़ावा देने के बयानों ने दफ्तरों में असमानता को सामान्य बना दिया। इसके चलते पहले से मौजूद पूर्वाग्रहों पर लगाम लगाने के बजाय उन्हें अनदेखा किया जाने लगा।\n• कृत्रिम बुद्धिमत्ता की अनियंत्रित होड़: नई तकनीकों को तेजी से लागू करने के दबाव ने कार्यस्थल पर पहले से मौजूद मूल्यांकन के दोहरे मानकों को और गहरा कर दिया। कमजोर जॉब मार्केट के कारण कर्मचारियों में नौकरी खोने का डर बढ़ा, जिससे वे अनुचित व्यवहार या दोषपूर्ण कार्यप्रणाली के खिलाफ खुलकर बोलने से कतराने लगे।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. इस सर्वेक्षण में कितनी महिलाओं ने भाग लिया?\nइस सर्वेक्षण में विभिन्न तकनीकी कंपनियों और अनुभवों से जुड़ी कुल 634 महिला पेशेवरों ने भाग लिया।\n\n2. कितनी महिलाओं ने कार्यस्थल पर उत्पीड़न या पक्षपात का सामना करने की बात कही?\nसर्वेक्षण में शामिल एक तिहाई से अधिक महिलाओं ने बताया कि उन्होंने अपने करियर में लैंगिक आधार पर पक्षपात या अनुचित व्यवहार का सामना किया है।\n\n3. एनवीडिया में तकनीकी भूमिकाओं में महिलाओं की हिस्सेदारी कितनी है?\nजून 2026 में जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार एनवीडिया में तकनीकी पदों पर महिलाओं का प्रतिनिधित्व 17.4 प्रतिशत है।\n\n4. तकनीकी कंपनियों में विविधता के आंकड़े सार्वजनिक करने की शुरुआत कैसे हुई थी?\nवर्ष 2013 में पिनट्रेस्ट की इंजीनियर ट्रेसी चाउ और सामाजिक कार्यकर्ता जेसी जैक्सन की पहलों के बाद गूगल ने 2014 में अपनी पहली रिपोर्ट जारी की थी।\n\n5. कार्यस्थल भेदभाव की जांच करने वाली एजेंसी पर क्या असर पड़ा?\nप्रशासनिक कटौती के तहत इस एजेंसी के कर्मचारियों की संख्या 480 से घटाकर केवल 75 कर दी गई।\n\n6. कृत्रिम बुद्धिमत्ता टूल्स के इस्तेमाल को लेकर महिला कर्मचारियों ने क्या चिंता जताई?\nकर्मचारियों ने बताया कि खराब गुणवत्ता वाले ऑटोमेटेड कोड को ठीक करने में उनका समय बर्बाद होता है और पुरुषों द्वारा अधूरे काम पर भी प्रशंसा पाने का दोहरा रवैया दिखता है।",
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  "publishedAt": "2026-09-21",
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    "टेक उद्योग",
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