टेक कंपनी में खो गया था आत्मविश्वास, पूर्व कर्मचारी ने साझा किया शुरुआती नौकरी का अनुभव सॉफ्टवेयर कंपनी जोहो में तीन साल बिताने वाले एक इंजीनियर ने कार्यस्थल पर तनाव, चिंता और घटते आत्मविश्वास के अपने दौर को याद करते हुए एक अहम सबक साझा किया है। शुरुआती करियर में मिलने वाला पहला अवसर हर युवा के लिए किसी सपने के सच होने जैसा होता है, लेकिन कभी-कभार सही माहौल न मिलने पर वही उत्साह गंभीर मानसिक दबाव में तब्दील हो जाता है। बैंगलुरु के एक युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म लिंक्डइन पर अपने करियर के शुरुआती दौर को याद करते हुए एक विस्तृत अनुभव साझा किया है। वर्तमान में फ्लिपकार्ट में बतौर सीनियर प्रोडक्ट मैनेजर कार्यरत केवल अग्रवाल ने बताया कि कैसे अपनी पहली नौकरी के दौरान वह लगातार चिंता और तनाव में घिर गए थे, जिससे उनका आत्मविश्वास पूरी तरह डगमगा गया था। सपनों की शुरुआत और शुरुआती चुनौतियां केवल अग्रवाल ने साल 2015 में एक तकनीकी स्टाफ सदस्य के रूप में भारतीय सॉफ्टवेयर फर्म जोहो में अपने पेशेवर सफर की शुरुआत की थी। वह साल 2018 तक इस कंपनी का हिस्सा रहे। नौकरी मिलने पर वह बेहद उत्साहित थे और उन्हें लगा कि उनका सपना साकार हो चुका है। हालांकि, काम शुरू होने के कुछ ही समय बाद जमीनी हकीकत उम्मीदों से एकदम उलट साबित होने लगी। काम के लगातार दबाव और व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन न बन पाने के कारण उनका अनुभव धीरे-धीरे बेहद असहज और तनावपूर्ण होता चला गया। आत्मविश्वास का नुकसान और काम से अलगाव अग्रवाल ने साझा किया कि उस संस्थान में बिताए गए तीन वर्षों के दौरान वह लगातार गंभीर तनाव और मानसिक चिंता की चपेट में रहने लगे थे। स्थिति इस कदर बिगड़ गई कि उनका खुद पर से भरोसा उठ गया और जिस कोडिंग से उन्हें लगाव था, उसी से नफरत महसूस होने लगी। एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने यह उम्मीद ही छोड़ दी थी कि वह भविष्य में जीवन या करियर के किसी भी मोड़ पर कुछ बेहतर हासिल कर पाएंगे। पेशेवर जिंदगी और निजी दिनचर्या के बीच तालमेल पूरी तरह टूट चुका था। संस्थान या नेतृत्व को दोष दिए बिना साझा किया सच खास बात यह रही कि अग्रवाल ने अपनी इस कठिन स्थिति के लिए न तो कंपनी के मैनेजमेंट को जिम्मेदार ठहराया और न ही संस्थान पर कोई कड़वाहट भरा आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कंपनी के फाउंडर श्रीधर वेम्बू उन चुनिंदा हस्तियों में शामिल हैं, जिनका वह दिल से बेहद सम्मान करते हैं और उन्हें अपना आदर्श मानते हैं। अग्रवाल का कहना था कि वह इस स्थिति के लिए खुद को भी दोषी नहीं मानते। उन्होंने जोर देकर कहा कि कई बार कार्यस्थल उत्कृष्ट हो सकता है, लेकिन वह किसी खास व्यक्ति की कार्यशैली या व्यक्तिगत परिस्थितियों के अनुकूल नहीं बैठता। बिना किसी की गलती के भी चीजें बेमेल हो सकती हैं। नई शुरुआत और खोए आत्मविश्वास की वापसी जब तनाव की वजह से करियर को स्थायी नुकसान पहुंचने का जोखिम दिखने लगा, तब उन्होंने उस संस्थान से अलग होकर एक नया रास्ता चुनने का फैसला किया। साल 2018 में उन्होंने जोहो छोड़कर उससे भी छोटी कंपनी मिशीपे में जाने का निर्णय लिया। यह कदम उनके पेशेवर जीवन के लिए निर्णायक साबित हुआ। अपेक्षाकृत छोटे संस्थान में कदम रखने के महज एक साल के भीतर ही उनका पुराना उत्साह, ऊर्जा और खोया हुआ आत्मविश्वास पूरी तरह लौट आया। इससे यह साबित हुआ कि कभी-कभार सिर्फ काम करने का परिवेश बदल लेना ही करियर को पटरी पर लाने के लिए पर्याप्त होता है। आईटी उद्योग में बढ़ता दबाव और कर्मचारियों की स्थिति अग्रवाल का यह व्यक्तिगत अनुभव ऐसे दौर में सामने आया है जब समूचे भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग में पेशेवर लगातार दबाव का सामना कर रहे हैं। देश भर के 2,178 आईटी प्रोफेशनल्स के बीच कराए गए एक अध्ययन के आंकड़े बताते हैं कि 35 फीसदी कर्मचारियों को हालिया अप्रेजल चक्र के दौरान या तो सैलरी बढ़ोतरी नहीं मिली या फिर उनके वेतन में कटौती दर्ज की गई। इसके अलावा, सर्वे में शामिल 10 में से 6 कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें केवल 5 फीसदी या उससे भी कम की वेतन वृद्धि मिली है। ऐसे जटिल माहौल में अपनी कमजोरी को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने और बिना किसी दोषारोपण के सही समाधान तलाशने की अग्रवाल की सोच की सोशल मीडिया यूजर्स ने काफी सराहना की है। इसका आप पर असर यह घटनाक्रम आईटी और कॉर्पोरेट जगत में काम कर रहे युवाओं के लिए कार्यस्थल के चयन और करियर निर्णयों से जुड़े महत्वपूर्ण सबक सामने लाता है। • करियर मूल्यांकन: यदि किसी संस्थान में आपका आत्मविश्वास कमजोर हो रहा है तो संस्थान या खुद को दोष देने के बजाय माहौल बदलने पर विचार करना चाहिए। सही टीम और उपयुक्त कंपनी का चुनाव करियर में खोए हुए उत्साह को दोबारा लौटा सकता है। • वेतन वृद्धि और बाजार की स्थिति: सर्वेक्षण के अनुसार 35 फीसदी कर्मचारियों को इस बार कोई बढ़ोतरी नहीं मिली है या कटौती देखनी पड़ी है। इसलिए कर्मचारियों को अपने वित्तीय बजट और खर्चों की योजना मौजूदा बाजार की धीमी गति को ध्यान में रखकर बनानी चाहिए। • कार्य और जीवन का संतुलन: पेशेवर जिम्मेदारियों के बीच व्यक्तिगत प्राथमिकताओं की उपेक्षा गंभीर मानसिक तनाव दे सकती है। कार्य और निजी जीवन के बीच स्पष्ट सीमाएं तय करना लंबे करियर के लिए बेहद आवश्यक है। • कंपनी का आकार बनाम सीखने का अवसर: बड़ी और प्रसिद्ध कंपनियों की तुलना में छोटी फर्मों में काम करना कई बार अधिक व्यक्तिगत विकास और बेहतर कार्य अनुभव प्रदान करता है। करियर की शुरुआत में पदनाम से ज्यादा सीखने के माहौल को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। ऐसा क्यों हुआ यह स्थिति किसी दुर्भावनापूर्ण इरादे के कारण नहीं, बल्कि कर्मचारी के कार्य व्यवहार और संस्थान के काम करने के तौर-तरीकों के बीच तालमेल न बैठ पाने की वजह से पैदा हुई थी। • काम और जीवन में असंतुलन: कर्मचारी की अपनी स्वीकारोक्ति के अनुसार वह संस्थान में काम के दौरान व्यक्तिगत और पेशेवर दिनचर्या के बीच उचित संतुलन नहीं साध पा रहे थे। इस निरंतर असंतुलन ने लंबे समय तक चलने वाले तनाव को जन्म दिया। • वातावरण का व्यक्तिगत प्रभाव: संस्थान स्वयं में प्रतिष्ठित और सफल था, लेकिन उसकी आंतरिक गतिशीलता हर व्यक्ति के स्वभाव से मेल नहीं खाती। जब व्यक्ति और माहौल की कार्यशैली आपस में नहीं मिलती, तो उत्पादकता और आत्मबल दोनों प्रभावित होते हैं। • व्यापक उद्योग का दबाव: वर्तमान में समूचा आईटी क्षेत्र धीमी विकास दर और तंग अप्रेजल बजट से गुजर रहा है। 2,178 पेशेवरों के सर्वेक्षण से स्पष्ट है कि अधिकांश कर्मचारी वित्तीय और कार्यस्थल दबावों से जूझ रहे हैं। सवाल-जवाब 1. केवल अग्रवाल ने जोहो में किस पद पर और कब काम किया था? केवल अग्रवाल साल 2015 से 2018 तक जोहो में तकनीकी स्टाफ सदस्य के रूप में कार्यरत रहे थे। 2. वर्तमान में केवल अग्रवाल किस कंपनी में काम कर रहे हैं? वह वर्तमान में फ्लिपकार्ट में सीनियर प्रोडक्ट मैनेजर के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। 3. जोहो छोड़ने के बाद उन्होंने किस संस्थान का रुख किया? जोहो छोड़ने के बाद उन्होंने मिशीपे नामक एक अपेक्षाकृत छोटी कंपनी में काम करना शुरू किया था। 4. आईटी पेशेवरों के सर्वेक्षण में वेतन वृद्धि को लेकर क्या तथ्य सामने आए? सर्वेक्षण में शामिल 35 फीसदी कर्मियों ने वेतन न बढ़ने या कटौती की बात कही, जबकि 10 में से 6 कर्मचारियों को 5 फीसदी या उससे कम हाइक मिली। https://trendkia.com/business/tech-professional-opens-up-on-early-career-struggles-and-rebuilding-self-belief-56262 TrendKia — Har trend, sabse pehle.