# तेलंगाना के युवा ने गधों की डेयरी से बदली तकदीर, ₹7,000 लीटर बिकने वाले दूध ने दिलाई नई पहचान

> तेलंगाना के नागरकर्नूल जिले के एक युवा ने पारंपरिक खेती से हटकर गधों का आधुनिक फार्म शुरू किया है। यहाँ गधी का दूध ₹7,000 लीटर तक बिकता है और सभी खर्च निकालने के बाद हर महीने लाखों रुपये की बचत हो रही है।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-10-16 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/telangana-ke-yuva-ne-gadhon-ki-deyari-se-badali-takadira-7000-litara-bikane-vale-dudha-ne-dilai-nai-pahachana-48113 · **Language:** Hindi
**Tags:** तेलंगाना, डेयरी फार्मिंग, गधी का दूध, स्वरोजगार, नागरकर्नूल, युवा उद्यमी, अखिलेश

पारंपरिक रोजगार और खेती की लीक से हटकर कुछ अलग करने की चाहत रखने वाले युवाओं के लिए तेलंगाना से एक दिलचस्प और अनूठी कहानी सामने आई है। नागरकर्नूल जिले में रहने वाले एक उत्साही युवक ने पारंपरिक नौकरियों की तलाश करने के बजाय अनोखे व्यवसाय का रास्ता चुना है। उन्होंने गुजरात और महाराष्ट्र से उन्नत नस्ल की गधियाँ लाकर एक आधुनिक डेयरी स्थापित की है, जो आज अच्छी खासी कमाई का जरिया बन चुकी है। समाज में आमतौर पर उपेक्षित माने जाने वाले इन मवेशियों को अब ग्रामीण आर्थिकी का एक मजबूत आधार माना जाने लगा है, जिससे इस युवा की सफलता ने सबको चौंका दिया है।

## लगभग 50 गधियों के साथ शुरू किया गया अनोखा काम
इस आधुनिक फार्म की शुरुआत अखिल नामक युवक ने की है, जिन्होंने शुरुआती तौर पर बाहर के राज्यों से करीब 50 से अधिक गधियों को अपनी यूनिट में शामिल किया। सामान्य डेयरी फार्म्स की तुलना में यह सेटअप काफी अलग है क्योंकि गाय या भैंस की तरह गधी का दूध भारी मात्रा में नहीं मिलता। एक गधी से रोजाना केवल 500 मिलीलीटर से 1 लीटर तक ही दूध मिल पाता है। यही वजह है कि सीमित उत्पादन और उच्च मांग के कारण बाजार में इस खास दूध के दाम बहुत ऊंचे हैं और यह आसानी से ₹5,000 से ₹7,000 प्रति लीटर के भाव में बिक जाता है।

## लाखों रुपये की मासिक कमाई और खर्च का गणित
नागरकर्नूल के इस फार्म से रोजाना औसतन 15 से 20 लीटर दूध का उत्पादन किया जाता है। इतने कम उत्पादन के बावजूद इसकी ऊंची कीमत के कारण कुल कारोबार हर महीने काफी बड़ा हो जाता है। फार्म को चलाने में आने वाला खर्च जैसे चारे का प्रबंध, उचित देखभाल, पशु चिकित्सा और कर्मचारियों का वेतन आदि सब घटाने के बाद भी संचालक को हर महीने ₹2 लाख से ₹3 लाख तक की शुद्ध बचत आसानी से हो जाती है। इस प्रकार सीमित संसाधनों के बावजूद यह यूनिट बेहतरीन मुनाफा कमा रही है।

## कॉस्मेटिक्स और औषधियों में क्यों है इतनी भारी मांग
गधी के दूध की कीमत इतनी अधिक होने के पीछे इसके वैज्ञानिक कारण और औषधीय उपयोगिता जुड़ी हुई है। जानकारों के अनुसार, इस दूध के पोषक तत्व मानव शिशु को मिलने वाले मातृ दुग्ध के काफी करीब माने जाते हैं। इसमें एंटी-एजिंग गुण और कई आवश्यक विटामिन्स भरपूर मात्रा में होते हैं, जिनका उपयोग देश-विदेश की बड़ी सौंदर्य प्रसाधन कंपनियां महंगे स्किनकेयर उत्पाद, साबुन और लोशन बनाने के लिए करती हैं। इसके अलावा बाल चिकित्सा, श्वसन तंत्र से जुड़ी बीमारियों के उपचार और बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी मजबूत करने वाली आयुर्वेदिक तथा एलोपैथिक दवाओं में भी इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है।

## इसका आप पर असर
इस अनोखे व्यवसाय से पारंपरिक लीक से हटकर नए स्टार्टअप शुरू करने वाले ग्रामीण युवाओं को एक नया मार्ग मिल रहा है।

- **भारत में:** पशुपालन और कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों को पारंपरिक मवेशियों के अलावा अन्य विकल्पों पर विचार करने की प्रेरणा मिलती है।
- **नागरकर्नूल में:** स्थानीय स्तर पर इस प्रकार के अनोखे फार्म स्थापित होने से ग्रामीण क्षेत्रों में नए रोजगार और वैकल्पिक आय के स्रोत विकसित हो रहे हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
गधी के दूध की यह भारी कीमत और इसकी मांग इसके दुर्लभ उत्पादन और विशिष्ट औषधीय गुणों के कारण है।

- **सीमित उत्पादन:** एक गधी से प्रतिदिन केवल 500 मिलीलीटर से 1 लीटर तक ही दूध मिल पाता है, जिससे बाजार में इसकी उपलब्धता बहुत कम होती है।
- **औषधीय महत्व:** इस दूध में एंटी-एजिंग गुण और पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में होने के कारण कॉस्मेटिक और दवा उद्योग में इसकी निरंतर मांग बनी रहती है।

## सवाल-जवाब

### 1. यह अनोखा डेयरी फार्म कहाँ स्थित है?
यह फार्म तेलंगाना के नागरकर्नूल जिले में स्थित है।

### 2. इस फार्म की शुरुआत किसने की है?
इस फार्म की शुरुआत अखिल नामक युवक ने की है।

### 3. गधी का दूध किस कीमत पर बिकता है?
बाजार में गधी का दूध ₹5,000 से लेकर ₹7,000 प्रति लीटर तक बिकता है।

### 4. फार्म में कितनी गधियों के साथ शुरुआत की गई थी?
इसकी शुरुआत गुजरात और महाराष्ट्र से लाई गई करीब 50 से अधिक गधियों के साथ की गई थी।

### 5. संचालक को हर महीने कितनी बचत हो जाती है?
सारे खर्च निकालने के बाद संचालक को हर महीने ₹2 लाख से ₹3 लाख तक का शुद्ध मुनाफा होता है।

## प्रेरणा और सबक
पारंपरिक लीक से हटकर नया व्यवसाय शुरू करने वाले युवाओं के लिए यह सफलता कई बड़े सबक देती है।

- **नवाचार अपनाएं:** पारंपरिक खेती या नौकरियों से हटकर अनूठे क्षेत्रों में हाथ आजमाने से भारी मुनाफा कमाया जा सकता है।
- **बाजार की मांग समझें:** किसी भी नए उत्पाद की कीमत उसकी उपयोगिता और दुर्लभता पर निर्भर करती है, जिसे सही समय पर पहचानना जरूरी है।

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