यूपी कैब पॉलिसी में बड़ा बदलाव, 10 मिनट लेट हुई गाड़ी तो ड्राइवर पर लगेगा 100 रुपये जुर्माना उत्तर प्रदेश सरकार ने कैब एग्रीगेटर पॉलिसी में कड़े बदलाव किए हैं। अब तय समय से 10 मिनट से ज्यादा देरी से पहुंचने पर ड्राइवर पर 100 रुपये का जुर्माना लगेगा और मनमाने किराए पर भी लगाम लगेगी। कैब बुक करने के दौरान अक्सर लोगों को इस बात की झुंझलाहट होती है कि स्क्रीन पर कुछ ही मिनटों का समय दिखने के बावजूद गाड़ी काफी देर से पहुंचती है। आम नागरिकों की इस आम परेशानी को हल करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। नई एग्रीगेटर नीति के तहत अब यदि बुक की गई कैब निर्धारित समय से 10 मिनट से अधिक की देरी से पहुंचती है, तो कैब ड्राइवर पर 100 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इस जुर्माने की राशि का सीधा लाभ यात्री को अगली कैब बुकिंग के दौरान डिस्काउंट या क्रेडिट के रूप में मिल जाएगा, जिससे यात्रियों का समय और पैसा दोनों सुरक्षित रहेंगे। राज्य के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कैब सेवाओं को और अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से एग्रीगेटर पॉलिसी में व्यापक संशोधन किए हैं। इस नई व्यवस्था के लागू होने से न केवल चालकों और कंपनियों की जवाबदेही तय होगी, बल्कि यात्रियों को भी बड़ी राहत मिलेगी। इसके साथ ही सरकार ने कैब चालकों के कल्याण का भी पूरा ध्यान रखा है और उन्हें 5 लाख रुपये तक के स्वास्थ्य बीमा का बड़ा तोहफा देने की घोषणा की है। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि अब किसी भी नई कैब सर्विस को शुरू करने या लाइसेंस प्राप्त करने के लिए केवल निर्धारित आधिकारिक पोर्टल पर ही आवेदन करना होगा। बिना उचित लाइसेंस के बाजार में कोई भी नया एग्रीगेटर सर्विस प्रोवाइडर के रूप में काम नहीं कर पाएगा। किराए में मनमानी बढ़ोतरी पर लगाम लगाने के लिए भी सरकार ने सख्त नियम बनाए हैं। नई नीति के प्रावधानों के मुताबिक कैब कंपनियां अब तय बेस फेयर से अधिकतम 50 फीसदी तक ही किराया बढ़ा सकेंगी, जिससे त्यौहारों या पीक ऑवर्स में यात्रियों पर अचानक भारी भरकम किराए का बोझ नहीं पड़ेगा। अगर कोई कंपनी या ड्राइवर इन नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो संबंधित कंपनी पर भी आर्थिक जुर्माना लगाया जाएगा। इन तमाम उपायों से कैब बाजार में उपभोक्ताओं का विश्वास मजबूत होगा और पारदर्शिता आएगी। लाइसेंस प्रक्रिया को सख्त बनाते हुए सरकार ने तय किया है कि एग्रीगेटर के लिए आवेदन शुल्क 25 हजार रुपये और लाइसेंस का शुल्क 5 लाख रुपये निर्धारित किया गया है। इसके अलावा फ्लीट के आकार के हिसाब से सिक्योरिटी मनी जमा करने का अनिवार्य प्रावधान भी किया गया है। यदि किसी ऑपरेटर के पास 100 बसें या 1,000 कारें हैं, तो उसे 10 लाख रुपये की सिक्योरिटी मनी देनी होगी। वहीं, 1,000 बसें या 10,000 कारें होने पर 25 लाख रुपये की सिक्योरिटी जमा करनी होगी। इसके अलावा 1,000 से अधिक बस और 10,000 से ज्यादा कारें संचालित करने वाली कंपनियों को 50 लाख रुपये की भारी भरकम सिक्योरिटी मनी जमा करनी होगी। यात्रियों, विशेषकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नई नीति में कई कड़े निर्देश दिए गए हैं। अब हर कैब में लाइव ट्रैकिंग की व्यवस्था होना अनिवार्य कर दिया गया है ताकि सफर के दौरान लोकेशन पर लगातार नजर रखी जा सके। साथ ही हर ड्राइवर का पुलिस वेरिफिकेशन और कैरेक्टर वैलिडेशन कराना भी कंपनियों के लिए जरूरी होगा। कंपनियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वे हर ड्राइवर का मनोवैज्ञानिक परीक्षण कराएं और उन्हें बेहतर सेवा के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण यानी ट्रेनिंग भी दें। यात्रियों की शिकायतों के त्वरित और प्रभावी समाधान के लिए सभी एग्रीगेटर कंपनियों को एक ग्रीवांस रीड्रेसल ऑफिसर नियुक्त करना होगा, जिससे किसी भी विवाद की स्थिति में तुरंत सुनवाई हो सके। सुरक्षा के मोर्चे पर हर यात्री को कैब बुक करते समय ही बीमा कवर प्रदान किया जाएगा। इसके विपरीत कैब चालकों के हितों की रक्षा करते हुए उन्हें 5 लाख रुपये का हेल्थ इंश्योरेंस और 10 लाख रुपये का टर्म बीमा उपलब्ध कराना भी कंपनियों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। इसका आप पर असर भारत में: कैब एग्रीगेटर्स के लिए सख्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय नियमों से देशभर में यात्रियों को बेहतर समय की पाबंदी और पारदर्शी किराए का लाभ मिल सकता है। उत्तर प्रदेश में: यूपी में यात्रा करने वाले नागरिकों को अब लेट होने पर 100 रुपये का फायदा मिलेगा, किराए में भारी बढ़ोतरी नहीं होगी और महिलाओं के लिए लाइव ट्रैकिंग जैसी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी। सवाल-जवाब 1. यूपी की नई कैब पॉलिसी के तहत देर से आने पर कितना जुर्माना लगेगा? यदि बुक की गई कैब 10 मिनट से अधिक की देरी से पहुंचती है, तो ड्राइवर पर 100 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। 2. जुर्माने की इस राशि का फायदा किसे और कैसे मिलेगा? जुर्माने के इन पैसों का फायदा यात्री को अगली कैब बुकिंग पर डिस्काउंट के रूप में मिलेगा। 3. कैब किराए में अधिकतम कितनी बढ़ोतरी की जा सकती है? नई नीति के तहत तय बेस फेयर से अधिकतम 50 फीसदी तक ही किराया बढ़ाया जा सकेगा। 4. कैब चालकों के लिए सरकार ने क्या बीमा योजना बनाई है? कैब चालकों के लिए 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा और 10 लाख रुपये का टर्म बीमा होना अनिवार्य किया गया है। 5. लाइसेंस और आवेदन के लिए क्या शुल्क तय किया गया है? एग्रीगेटर के लिए आवेदन की फीस 25 हजार रुपये और लाइसेंस की फीस 5 लाख रुपये निर्धारित की गई है। https://trendkia.com/business/up-cab-policy-overhaul-100-rupee-penalty-on-late-drivers-and-capped-fares-20412 TrendKia — Har trend, sabse pehle.