# यूपीआई लेन-देन पर मर्चेंट चार्ज टलने की चर्चा से फिनटेक शेयरों में भारी गिरावट, पेटीएम का भाव 10 फीसदी गिरा

> डिजिटल भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट को जनवरी 2026 तक खिसकाने के कयासों से फिनटेक कंपनियों में भारी बिकवाली देखी गई। पेटीएम और मोबिक्विक समेत कई प्रमुख डिजिटल पेमेंट कंपनियों के शेयरों में गुरुवार को तेज गिरावट दर्ज हुई।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-10-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/upi-lena-dena-para-marchenta-charja-talane-ki-charcha-se-phinateka-sheyaron-men-bhari-giravata-paytm-ka-bhava-10-phisadi-gira-45237 · **Language:** Hindi
**Tags:** यूपीआई, पेटीएम, मोबिक्विक, पाइन लैब्स, मर्चेंट डिस्काउंट रेट, शेयर बाजार, फिनटेक

घरेलू शेयर बाजारों में गुरुवार को वित्तीय प्रौद्योगिकी से जुड़ी कंपनियों के काउंटरों पर अचानक बिकवाली का दबाव बढ़ गया। कारोबारियों और निवेशकों के बीच यह चर्चा तेजी से फैली कि डिजिटल भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट व्यवस्था को तय समय पर शुरू करने के बजाय आगे खिसकाया जा सकता है। पहले इस नई शुल्क व्यवस्था को 15 अक्टूबर से प्रभावी करने की योजना थी, परंतु अब इसे 1 जनवरी 2026 तक टालने के विकल्प पर विचार चल रहा है। यद्यपि इस मामले में सरकारी स्तर से कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई है, फिर भी संभावित देरी की खबर मात्र से निवेशकों का उत्साह ठंडा पड़ गया और भुगतान कंपनियों के शेयर गोता लगाने लगे।

## पेटीएम और मोबिक्विक समेत अन्य कंपनियों पर टूटा बिकवाली का कहर
प्रस्तावित व्यवस्था से डिजिटल पेमेंट सेवा प्रदाताओं को भारी आमदनी की उम्मीद बंधी थी, जिस पर अनिश्चितता के बादल छाते ही बाजार में तेज प्रतिक्रिया हुई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर पेटीएम की पैरेंट कंपनी के शेयर 10 प्रतिशत के लोअर सर्किट जैसी गिरावट झेलते हुए ₹1,560.60 पर बंद हुए। इसी तरह मोबिक्विक के शेयरों में 8.43 प्रतिशत का भारी नुकसान देखा गया और यह फिसलकर ₹234.40 के स्तर पर आ गया।

नुकसान केवल इन्हीं दो दिग्गजों तक सीमित नहीं रहा। पाइन लैब्स के शेयर में 4.95 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई और इसका मूल्य घटकर ₹168.75 रह गया। इसके साथ ही नेटवर्क पीपल सर्विसेज टेक्नोलॉजीज के शेयर भी 4.39 प्रतिशत के नुकसान के साथ ₹1,772.60 पर पहुंच गए। वित्तीय बाजार में इन कंपनियों के मूल्यांकन पर इस संभावित फेरबदल का सीधा असर देखने को मिला।

## प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था का स्वरूप और राजस्व का गणित
हालिया नीतिगत निर्णय के अनुसार, ₹2,000 से अधिक राशि वाले डिजिटल लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत की दर से मर्चेंट डिस्काउंट रेट लगाने की अनुमति दी गई थी। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य पेमेंट गेटवे और डिजिटल मंचों को उनके तकनीकी ढांचे के एवज में उचित आय उपलब्ध कराना था। जब पिछले महीने इस शुल्क ढांचे की घोषणा हुई थी, तब फिनटेक क्षेत्र के शेयरों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली थी क्योंकि इससे कंपनियों के मुनाफे में ठोस बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया था। यह शुल्क सीधे व्यापारियों से वसूला जाना तय किया गया था।

## तारीख आगे बढ़ाने के पीछे व्यापारियों की मांग
लागू होने की समयसीमा खिसकने के पीछे मुख्य वजह यह सामने आ रही है कि व्यापारिक संगठनों और दुकानदारों ने नई व्यवस्था को तकनीकी रूप से अपनाने के लिए अतिरिक्त मोहलत मांगी है। इसी पृष्ठभूमि में संबंधित नियामक निकाय और प्रशासनिक महकमे 15 अक्टूबर की जगह नई तिथि 1 जनवरी तय करने के प्रस्ताव पर मंथन कर रहे हैं। आने वाले कुछ दिनों में इस विषय पर औपचारिक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद जताई जा रही है।

## इसका आप पर असर
व्यापारियों और फिनटेक निवेशकों के लिए यह घटनाक्रम वित्तीय और तकनीकी दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण बदलाव लाता है।

- **दुकानदारों के लिए:** ₹2,000 से ऊपर के भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क का बोझ फिलहाल टलने की राहत मिल सकती है। कारोबारियों को अपनी बिलिंग प्रणाली तैयार करने के लिए 1 जनवरी 2026 तक का अतिरिक्त समय मिल सकता है।
- **फिनटेक निवेशकों के लिए:** कंपनियों के मुनाफे में होने वाली त्वरित वृद्धि अब कुछ महीनों के लिए टल सकती है। शेयरों में आई भारी गिरावट से निवेशकों के पोर्टफोलियो पर तत्काल नकारात्मक असर पड़ा है।
- **आम उपभोक्ताओं के लिए:** सामान्य ग्राहकों के दैनिक डिजिटल भुगतान पर इसका कोई अतिरिक्त वित्तीय असर नहीं पड़ेगा। लेन-देन पहले की तरह ही बिना किसी अतिरिक्त चार्ज के सुचारू रूप से जारी रहेगा।
- **पेमेंट कंपनियों के लिए:** गेटवे और फिनटेक मंचों को अपेक्षित नए राजस्व स्रोत के लिए नए साल तक प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है। कंपनियों को अपने सिस्टम को पूरी तरह लागू करने से पहले अंतिम सरकारी निर्देश का इंतजार करना होगा।

## ऐसा क्यों हुआ
व्यापारिक संगठनों की तरफ से अतिरिक्त समय मांगे जाने और तकनीकी तैयारी की जरूरतों के कारण इस नियम की तारीख आगे बढ़ाने पर विचार हो रहा है।

- **व्यापारियों का अनुरोध:** खुदरा कारोबारियों और मर्चेंट्स ने शुल्क व्यवस्था को सुचारू रूप से अपनाने के लिए अतिरिक्त समयावधि की मांग की थी। इसी मांग के चलते प्रशासनिक स्तर पर 15 अक्टूबर की डेडलाइन को 1 जनवरी 2026 तक टालने का विकल्प खुला।
- **कमाई की उम्मीद टूटना:** फिनटेक शेयरों में गिरावट की मुख्य वजह यह रही कि निवेशक अक्टूबर से ही कंपनियों की बैलेंस शीट में नई आय जुड़ने की उम्मीद कर रहे थे। तारीख टलने के संकेत मिलते ही घबराए निवेशकों ने भारी बिकवाली शुरू कर दी।
- **अंतिम अधिसूचना की प्रतीक्षा:** सरकार ने अभी तक इस प्रस्ताव पर आधिकारिक मुहर नहीं लगाई है। आगामी कुछ दिनों में संबंधित एजेंसियों की ओर से औपचारिक निर्देश जारी होने के बाद ही अंतिम स्थिति साफ होगी।

## सवाल-जवाब

### 1. यूपीआई लेन-देन पर कितना शुल्क लगाने का प्रस्ताव था?
₹2,000 से अधिक के डिजिटल लेन-देन पर व्यापारियों से 0.4 प्रतिशत का मर्चेंट डिस्काउंट रेट लेने का प्रस्ताव रखा गया था।

### 2. प्रस्तावित नियम लागू करने की तारीख कब तक बढ़ाई जा सकती है?
15 अक्टूबर से लागू होने वाले इस नियम को 1 जनवरी 2026 तक स्थगित करने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है।

### 3. इस खबर के बाद पेटीएम के शेयर में कितनी गिरावट दर्ज की गई?
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर पेटीएम की मूल कंपनी का शेयर 10 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ ₹1,560.60 पर बंद हुआ।

### 4. मोबिक्विक और अन्य फिनटेक कंपनियों के शेयरों पर क्या असर पड़ा?
मोबिक्विक का शेयर 8.43 प्रतिशत गिरकर ₹234.40 पर आ गया, जबकि पाइन लैब्स 4.95 प्रतिशत और एनपीएसटी 4.39 प्रतिशत टूटा।

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