यूपीआई पर शुल्क को लेकर दो कारोबारी आमने-सामने, फोनपे के समीर निगम ने किया नई व्यवस्था का बचाव दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर एमडीआर लागू करने के फैसले पर उद्योग जगत बंट गया है, जहां फोनपे के समीर निगम ने इसे जरूरी बताया वहीं अश्नीर ग्रोवर ने विरोध दर्ज कराया है। डिजिटल भुगतान व्यवस्था में दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर लागू करने के सरकारी निर्णय के बाद फिनटेक जगत में तीखी बहस छिड़ गई है। उद्योग से जुड़े प्रमुख चेहरे इस नीतिगत बदलाव को लेकर अलग-अलग राय व्यक्त कर रहे हैं। भारतपे के को-फाउंडर अश्नीर ग्रोवर ने इस कदम का कड़ा विरोध करते हुए चिंता जताई थी, जिसके बाद फोनपे के सीईओ समीर निगम ने खुलकर प्रस्तावित ढांचे का पक्ष लिया है। निगम ने विरोध के सुरों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि वह ग्रोवर की टिप्पणियों को अधिक गंभीरता से नहीं लेते हैं। प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था पर उद्योग के दिग्गजों में तकरार समीर निगम ने चुनिंदा यूपीआई लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट तय करने के प्रस्ताव का समर्थन किया है। उनका मानना है कि पारंपरिक कार्ड पेमेंट नेटवर्क के मुकाबले यह नया ढांचा काफी किफायती साबित होगा और इसमें विभिन्न कारोबारी क्षेत्रों के लिए पहले से स्पष्ट सीमाएं तय की गई हैं। इससे पहले अश्नीर ग्रोवर ने नए शुल्क प्रस्ताव पर सीधे सवाल उठाए थे। ग्रोवर का कहना था कि जब मौजूदा भुगतान तंत्र इतने व्यापक स्तर पर बिना किसी बाधा के सफलतापूर्वक काम कर रहा है, तो ऐसी स्थिति में उसमें फेरबदल करने की आवश्यकता क्यों महसूस की जा रही है। डिजिटल लेन-देन की रफ्तार पर असर की आशंका ग्रोवर ने आशंका व्यक्त की थी कि यदि यूपीआई भुगतान पर अतिरिक्त लागत जोड़ी जाती है, तो व्यापारी और आम उपयोगकर्ता दोनों ही इस माध्यम से दूरी बना सकते हैं। उन्होंने दो हजार रुपये से ऊपर के लेन-देन पर शुल्क वसूली को अनुचित बताते हुए कहा था कि इस प्रकार का कदम देश भर में डिजिटल भुगतान की दिशा में बढ़ रही रफ्तार को धीमा कर सकता है। इन दावों का जवाब देते हुए समीर निगम ने कहा कि नियमों के मुताबिक मर्चेंट को यह छूट कतई नहीं है कि वह यूपीआई एमडीआर का आर्थिक भार सीधे ग्राहकों की जेब पर डाल दे। उन्होंने विभिन्न श्रेणियों के लिए तय की गई सीमाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि ईंधन, बीमा और बिल भुगतान जैसे जरूरी क्षेत्रों में अधिकतम शुल्क की सीमा 5 रुपये तय की गई है। इसके अलावा कैपिटल मार्केट से जुड़े लेन-देन के लिए 0.02 प्रतिशत एमडीआर तय हुआ है, जिसमें अधिकतम ऊपरी सीमा 300 रुपये रखी गई है। सरकारी सब्सिडी और टिकाऊ कारोबारी मॉडल की जरूरत भुगतान उद्योग के भविष्य पर बात रखते हुए निगम ने स्पष्ट किया कि पूरा सेक्टर अनिश्चितकाल तक सरकारी सब्सिडी के सहारे कामकाज नहीं चला सकता। लेन-देन की बढ़ती संख्या के बीच यूपीआई के लिए एक आत्मनिर्भर और टिकाऊ कॉमर्शियल मॉडल तैयार करना अनिवार्य हो गया है। ग्रोवर की टिप्पणियों पर उन्होंने दो टूक कहा कि वह उनके बयानों को गंभीरता से नहीं लेते। इस बीच भारतपे ने भी स्थिति साफ करते हुए कहा है कि साल 2024 से ग्रोवर का कंपनी के साथ किसी तरह का नाता नहीं है और कंपनी उनके निजी विचारों से कोई सहमति नहीं रखती है। 15 अक्टूबर से लागू होंगे नए नियम डिजिटल लेन-देन के बुनियादी ढांचे को अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से यह नीतिगत कदम उठाया गया है। 15 अक्टूबर से प्रभावी होने वाली व्यवस्था के तहत 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेन-देन पर 0.04 प्रतिशत का शुल्क तय किया गया है, जिसका मुख्य प्रभाव बड़े मूल्य वाले भुगतानों पर दिखाई देगा। राहत की बात यह है कि पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन के लिए किए जाने वाले यूपीआई भुगतान पर एमडीआर की राशि को स्थिर कर दिया गया है। ग्राहक चाहे जितने भी मूल्य का ईंधन भरवाकर यूपीआई से भुगतान करे, उस लेन-देन पर एकमुश्त केवल 5 रुपये का ही शुल्क लागू होगा। इसका आप पर असर दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई लेन-देन पर एमडीआर लागू होने से व्यापारियों और डिजिटल भुगतान करने वालों की लागत संरचना में बदलाव आएगा। • आम उपभोक्ताओं पर: मर्चेंट पर कानूनी रूप से यह पाबंदी लगाई गई है कि वह यूपीआई एमडीआर का वित्तीय भार सीधे ग्राहक से न वसूले। इसके चलते आम उपयोगकर्ता बिना किसी प्रत्यक्ष अतिरिक्त शुल्क के अपनी सामान्य खरीदारी जारी रख सकेंगे। • व्यापारियों के लिए: 15 अक्टूबर से व्यापारियों को 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान स्वीकार करने पर 0.04 प्रतिशत तक एमडीआर का वहन करना होगा। बड़े लेन-देन करने वाले स्टोर संचालकों को अपने संचालन खर्च की योजना नए नियमों के आधार पर बनानी होगी। • पेट्रोल पंप और बिल भुगतान: पेट्रोल और डीजल की खरीद पर लेन-देन राशि चाहे जितनी भी हो, अधिकतम एमडीआर शुल्क केवल 5 रुपये तय किया गया है। इसी तरह बीमा और सामान्य उपयोगिता बिलों के भुगतान पर भी अधिकतम 5 रुपये की निश्चित सीमा का लाभ मिलेगा। • शेयर बाजार और निवेश: कैपिटल मार्केट लेन-देन में यूपीआई इस्तेमाल करने पर 0.02 प्रतिशत की दर से एमडीआर लागू होगा। बड़े वित्तीय सौदों के बावजूद इस श्रेणी में अधिकतम सीमा 300 रुपये निर्धारित रहने से अत्यधिक लागत से सुरक्षा मिलेगी। ऐसा क्यों हुआ सरकार ने डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और फिनटेक क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने के लिए 2,000 रुपये से अधिक के लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट तय करने का निर्णय लिया है। इस कदम से व्यवस्था में लंबे समय से चली आ रही सब्सिडी निर्भरता को समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। • इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास की जरूरत: लगातार बढ़ते लेन-देन को संभालने के लिए सर्वर और तकनीकी बुनियादी ढांचे पर भारी पूंजीगत व्यय की आवश्यकता होती है। यह शुल्क ढांचा डिजिटल नेटवर्क को आधुनिक और विश्वसनीय बनाए रखने के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने हेतु लाया गया है। • सब्सिडी पर निर्भरता घटाना: भुगतान सेवा प्रदाता कंपनियां लंबे समय से सरकारी आर्थिक मदद पर निर्भर होकर काम कर रही थीं। समीर निगम के अनुसार यूपीआई को आर्थिक रूप से व्यावहारिक बनाए रखने के लिए एक स्वतंत्र वाणिज्यिक मॉडल की तत्काल दरकार थी। • हितधारकों में अलग राय: अश्नीर ग्रोवर जैसे आलोचकों का मानना है कि शुल्क लगाने से छोटे व्यापारी डिजिटल माध्यम छोड़ सकते हैं। वहीं समर्थकों का तर्क है कि श्रेणीवार सीमाएं तय होने और कार्ड नेटवर्क की तुलना में सस्ता होने के कारण यह व्यवस्था पूरी तरह संतुलित है। सवाल-जवाब 1. यूपीआई पर नया एमडीआर शुल्क कब से लागू होगा? 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा यूपीआई लेन-देन पर नया एमडीआर 15 अक्टूबर से लागू किया जाएगा। 2. 2,000 रुपये से अधिक के लेन-देन पर कितना शुल्क तय किया गया है? 2,000 रुपये से ऊपर के यूपीआई भुगतान पर 0.04 प्रतिशत का एमडीआर शुल्क निर्धारित किया गया है। 3. क्या पेट्रोल-डीजल के भुगतान पर भी पूरा प्रतिशत शुल्क लगेगा? नहीं, ईंधन के लिए किए जाने वाले यूपीआई भुगतान पर एमडीआर को एकमुश्त 5 रुपये पर फिक्स कर दिया गया है। 4. क्या मर्चेंट यूपीआई एमडीआर का खर्च ग्राहकों से वसूल सकते हैं? कानूनी नियमों के अनुसार मर्चेंट को यूपीआई एमडीआर का वित्तीय बोझ सीधे ग्राहकों पर डालने से रोका गया है। 5. कैपिटल मार्केट लेन-देन के लिए क्या दर तय की गई है? कैपिटल मार्केट से जुड़े भुगतानों पर 0.02 प्रतिशत एमडीआर लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये तय है। 6. अश्नीर ग्रोवर के बयानों पर भारतपे का क्या रुख है? भारतपे ने स्पष्ट किया है कि साल 2024 से ग्रोवर का कंपनी से कोई नाता नहीं है और वह उनके विचारों से मेल नहीं रखती। https://trendkia.com/business/upi-para-shulka-ko-lekara-do-karobari-amane-samane-phonepe-ke-sameer-nigam-ne-kiya-nai-vyavastha-ka-bachava-33484 TrendKia — Har trend, sabse pehle.