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  "type": "article",
  "title": "भारतीय दवाओं को वॉशिंगटन से बड़ी राहत, बीस मुल्कों के चुनिंदा मेडिकल उत्पादों पर सीमा शुल्क शून्य",
  "summary": "अमेरिका ने दुर्लभ बीमारियों और जटिल उपचारों में काम आने वाली दवाओं पर मूल्य आधारित शुल्क माफ कर दिया है, जिससे भारत सहित 20 मुल्कों के दवा निर्यातकों को सीधा सहारा मिलेगा।",
  "content": "अंतरराष्ट्रीय दवा बाजार में एक अहम व्यापारिक बदलाव करते हुए वॉशिंगटन प्रशासन ने भारत समेत बीस मुल्कों से आने वाली विशेष श्रेणी की दवाओं तथा उनके निर्माण में काम आने वाले आवश्यक घटकों को मूल्य आधारित प्रतिशत आयात शुल्क से मुक्त कर दिया है। यह कदम तब सामने आया है जब अमेरिकी प्रशासन कुछ खास पेटेंटयुक्त दवाओं और फार्मास्युटिकल सामग्री पर सौ प्रतिशत तक भारी प्रशुल्क थोपने का पूरा खाका तैयार कर चुका है।\n\nफेडरल रजिस्टर में बीस व्यापारिक साझेदारों की सूची प्रकाशित\nअमेरिकी वाणिज्य विभाग की तरफ से आधिकारिक फेडरल रजिस्टर में जारी नए ब्योरे के मुताबिक शून्य प्रतिशत आयात शुल्क व्यवस्था का लाभ उन चुनिंदा मुल्कों को दिया गया है जो अमेरिका के साथ रणनीतिक व व्यापारिक समझ रखते हैं। इस रियायती सूची में भारत के अतिरिक्त अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, इक्वाडोर, यूरोपीय संघ, इंडोनेशिया, जापान, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड, ब्रिटेन और वियतनाम सहित कुल 20 देश दर्ज किए गए हैं। अमेरिकी प्रशासन द्वारा 29 सितंबर से कुछ विशिष्ट पेटेंट दवाओं व उनसे जुड़े घटकों पर 100% आयात कर प्रभावी करने की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी थी, जिसके ठीक पहले इस तरह की छूट आना निर्यातकों के लिए अत्यंत सुकूनदेह माना जा रहा है।\n\nशून्य सीमा शुल्क के दायरे में आने वाले प्रमुख उत्पाद\nअमेरिकी दिशा-निर्देशों के अनुसार दुर्लभ बीमारियों अथवा रेयर डिजीज के निदान में प्रयुक्त हर दवा, बांझपन से जुड़े उपचार की दवाएं, सेल थेरेपी, जीन थेरेपी और एंटीबॉडी-ड्रग कंजुगेट्स (ADCs) को सीधे शून्य शुल्क की सूची में रखा गया है। यह व्यवस्था सिर्फ तैयार दवाइयों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उनके फॉर्मूलेशन में लगने वाले सक्रिय अवयवों पर भी यही 0% प्रशुल्क लागू होगा। इसके साथ ही मवेशियों व पालतू जानवरों के उपचार में काम आने वाली चुनिंदा पशु चिकित्सा दवाओं को भी इस राहत में सम्मिलित किया गया है, जिसका सीधा अर्थ है कि इन खास दवाओं को अमेरिकी बंदरगाहों पर भेजने वाले सप्लायर्स पर किसी नए वित्तीय दंड या प्रशुल्क की मार नहीं पड़ेगी।\n\nघरेलू दवा उद्योग और धारा 232 के प्रभाव\nदुनिया भर में किफायती जेनेरिक दवाओं के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ताओं में शुमार भारत के लिए अमेरिकी बाजार हमेशा से प्राथमिक व्यावसायिक केंद्र रहा है। इस संबंध में अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने साफ किया है कि आम जेनेरिक दवाओं और उनकी आधारभूत सामग्रियों पर धारा 232 के तहत प्रस्तावित नए फार्मा टैरिफ का असर नहीं होगा। यह राहत खास तौर पर उन मुल्कों से आने वाले माल को सुरक्षित करती है जिनके साथ अमेरिका के वर्तमान या प्रस्तावित व्यापार एवं सुरक्षा समझौते सक्रिय हैं। दरअसल यह पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया 2 अप्रैल को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित उस उद्घोषणा की कड़ी है, जिसका प्राथमिक मकसद पेटेंट वाली दवाओं तथा उससे जुड़ी जरूरी सामग्रियों के घरेलू विनिर्माण को रफ्तार देना था।\n\nइसका आप पर असर\nअमेरिकी सीमा शुल्क में मिली इस छूट से जीवनरक्षक और दुर्लभ बीमारियों की दवाओं का निर्यात बिना किसी नए टैक्स के जारी रहेगा।\n\n• भारतीय दवा कंपनियों के लिए: विशेष उपचार और दुर्लभ बीमारियों के फॉर्मूलेशन बनाने वाली देसी कंपनियों पर अमेरिकी आयात कर का अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। इससे भारतीय फार्मा निर्यातकों का अमेरिकी बाजार में मार्जिन सुरक्षित रहेगा और आपूर्ति श्रृंखला बिना रुकावट चलेगी।\n• मरीजों और वैश्विक स्वास्थ्य के लिए: सेल थेरेपी, जीन थेरेपी और दुर्लभ बीमारियों की दवाओं पर 100% टैक्स न लगने से इलाज का खर्च अचानक बेतहाशा नहीं बढ़ेगा। अमेरिकी तथा सहयोगी मुल्कों के अस्पतालों को जरूरी दवाएं पुरानी लागत संरचना पर ही मिलती रहेंगी।\n• जेनेरिक दवा निर्माताओं के लिए: धारा 232 के तहत जेनेरिक दवाओं को इस दायरे से बाहर रखने की स्पष्टता मिलने से भारतीय जेनेरिक निर्यातकों की चिंताएं पूरी तरह दूर हो गई हैं। कंपनियां अपने नियमित अमेरिकी शिपमेंट्स को बिना किसी कानूनी या वित्तीय संशय के आगे बढ़ा सकती हैं।\n• द्विपक्षीय व्यापार संबंधों पर: भारत को बीस मुल्कों की सुरक्षित सूची में स्थान मिलने से दोनों देशों के बीच फार्मास्युटिकल सप्लाई चेन की रणनीतिक अहमियत दोबारा पुख्ता हुई है। इससे भविष्य के कारोबारी समझौतों में दवा क्षेत्र को स्थायित्व मिलने का रास्ता साफ होगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nवॉशिंगटन प्रशासन ने घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए पेटेंट दवाओं पर भारी शुल्क लगाने का निर्णय लिया था, लेकिन जटिल जीवनरक्षक दवाओं की कमी रोकने के लिए यह छूट दी गई।\n\n• मूल कारण: अमेरिकी प्रशासन ने 2 अप्रैल को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जारी घोषणा के आधार पर पेटेंट दवाओं के स्थानीय उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए 100% आयात शुल्क का ढांचा तैयार किया था।\n• सप्लाई चेन की आवश्यकता: दुर्लभ बीमारियों, जीन थेरेपी और सेल थेरेपी जैसे जटिल उपचारों का घरेलू उत्पादन तुरंत संभव नहीं था, जिससे अमेरिका में इन दवाओं की भारी किल्लत होने का जोखिम बन गया था।\n• सुरक्षा और व्यापार साझेदारी: अमेरिकी वाणिज्य विभाग ने धारा 232 के तहत उन बीस देशों को छूट दी जिनके साथ मौजूदा या प्रस्तावित सुरक्षा और व्यापार समझौते हैं, ताकि जेनेरिक व जरूरी मेडिकल आपूर्ति सुरक्षित रहे।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अमेरिका ने किन देशों की दवाओं को जीरो टैरिफ की सुविधा दी है?\nअमेरिका ने भारत, बांग्लादेश, अर्जेंटीना, कंबोडिया, इक्वाडोर, यूरोपीय संघ, इंडोनेशिया, जापान, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड, ब्रिटेन और वियतनाम समेत 20 देशों को यह छूट दी है।\n\n2. किन विशेष श्रेणियों की दवाओं पर 0% आयात शुल्क लागू होगा?\nदुर्लभ बीमारियों की दवाएं, बांझपन के इलाज की दवाएं, सेल थेरेपी, जीन थेरेपी, एंटीबॉडी-ड्रग कंजुगेट्स और उनके आवश्यक घटकों समेत चुनिंदा पशु चिकित्सा दवाओं पर 0% शुल्क लगेगा।\n\n3. क्या सामान्य जेनेरिक दवाओं पर 100% अमेरिकी टैरिफ लगेगा?\nअमेरिकी वाणिज्य विभाग के स्पष्टीकरण के अनुसार आम जेनेरिक दवाओं और उनके जरूरी अवयवों पर धारा 232 के तहत यह टैरिफ लागू नहीं होगा।\n\n4. अमेरिका में 100% फार्मास्युटिकल टैरिफ किस तारीख से लागू होना था?\nअमेरिका ने कुछ पेटेंट वाली फार्मास्युटिकल दवाओं और उनसे जुड़ी सामग्रियों पर 29 सितंबर से 100% टैरिफ लागू करने की तैयारी की थी।\n\n5. इस टैरिफ नीति का मुख्य उद्देश्य क्या बताया गया है?\nयह कदम 2 अप्रैल को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जारी घोषणा के तहत पेटेंट वाली दवाओं और फार्मास्युटिकल सामग्री के अमेरिकी घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए उठाया गया था।",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-09-29",
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    "फार्मा सेक्टर",
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    "जीरो टैरिफ"
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