# अमेरिका पर 40 ट्रिलियन डॉलर का कर्ज, क्या दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहा है दिवालिया होने का खतरा

> अमेरिकी इतिहास में पहली बार राष्ट्रीय कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है, जो देश की जीडीपी से भी ज्यादा है।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-08-24 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/us-national-debt-surpasses-40-trillion-dollars-is-the-world-s-largest-economy-headed-toward-bankruptcy-21149 · **Language:** Hindi
**Tags:** अमेरिकी कर्ज, अर्थव्यवस्था, जीडीपी, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, ईरान युद्ध

क्या अमेरिका एक बर्बादी की कगार पर खड़ा सुपर पॉवर बनता जा रहा है या ईरान से तनातनी उसे भारी पड़ रही है? क्या दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था दिवालिया होने की तरफ तेजी से कदम बढ़ा रही है? अमेरिकी इतिहास में पहली बार देश का कुल राष्ट्रीय कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है। भारतीय रुपये के हिसाब से यह रकम 3800 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक बैठती है। हालिया रिपोर्टों में इस बात का खुलासा हुआ है कि अमेरिकी सरकार पर लदा यह कर्ज पहली यानी करीब 40 लाख करोड़ डॉलर के पार पहुंच गया है। लेकिन अहम सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि अमेरिका पर कितना कर्ज है, बल्कि यह है कि दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्था आखिर इतनी बड़ी देनदार कैसे बन गई।

## स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना अमेरिका के लिए गले की फांस

मध्य पूर्व का स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र अब अमेरिका के लिए बड़ी मुसीबत बन चुका है। ईरान के साथ जारी संघर्ष की वजह से अमेरिका आर्थिक मोर्चे पर बुरी तरह उलझ गया है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और महंगाई का भारी दबाव भी अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर साफ नजर आ रहा है। अमेरिकी प्रशासन इस स्थिति से निपटने में भारी दबाव महसूस कर रहा है, और इसी बीच सामने आए कर्ज के इन आंकड़ों ने पोल खोलकर रख दी है। अमेरिका के लिए 40 ट्रिलियन डॉलर का यह आंकड़ा महज एक नया रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि यह देश की कर्ज पर बढ़ती निर्भरता को भी उजागर करता है।

लगभग 2017 के आसपास अमेरिकी राष्ट्रीय कर्ज करीब 20 ट्रिलियन डॉलर के स्तर पर था। अब एक दशक से भी कम समय में यह बकाया राशि दोगुनी होकर 40 ट्रिलियन डॉलर से आगे निकल चुकी है। इसका सीधा मतलब यह है कि अमेरिकी सरकार ने जितना कर्ज इकट्ठा कर लिया है, वह देश के सालाना आर्थिक उत्पादन यानी जीडीपी के आकार से भी बड़ा हो चुका है। वर्तमान में अमेरिका की जीडीपी करीब 32 ट्रिलियन डॉलर है। ऐसे में कर्ज का 40 ट्रिलियन डॉलर के पार जाना यह दर्शाता है कि सरकारी कर्ज अब जीडीपी के मुकाबले लगभग 125 प्रतिशत तक पहुंच गया है। इसे एक आसान उदाहरण से समझें, यदि दो व्यक्तियों पर दस-दस लाख रुपये का कर्ज हो और उनमें से पहला व्यक्ति सालाना दस लाख रुपये कमाए जबकि दूसरा व्यक्ति बीस लाख रुपये सालाना कमाए, तो दूसरे के लिए उस कर्ज को संभालना अधिक सहज होगा।

## आखिर क्यों इतना कर्ज लेता है अमेरिका

अब मुख्य सवाल यह उठता है कि अमेरिका आखिरकार इतना अधिक कर्ज क्यों जमा करता चला आ रहा है। इसका जवाब किसी एक कारण में निहित नहीं है। अमेरिका कई दशकों से अपनी कुल कमाई के मुकाबले कहीं अधिक खर्च करता आया है। सरकार का कुल खर्च लगातार उसकी टैक्स से होने वाली आय से अधिक बना रहा है। इस अंतर को पाटने के लिए अमेरिकी सरकार बॉन्ड और अन्य सरकारी प्रतिभूतियां जारी कर बाजार से उधार लेती है। हालांकि सरकारी खर्च और राजस्व प्राप्ति का यह अंतर लगातार चौड़ा होता जा रहा है और अब यह अपने सर्वोच्च स्तर पर पहुंच चुका है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2026 में अमेरिकी बजट घाटा लगभग 1.9 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान है और वर्ष 2036 तक यह बढ़कर 3.1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।

## असली खतरा कर्ज नहीं बल्कि ब्याज का बोझ

इस पूरी स्थिति में गौर करने वाली बात यह है कि अमेरिका के लिए वास्तविक खतरा केवल कर्ज की मूल राशि नहीं, बल्कि उस पर चुकाया जाने वाला ब्याज है। अमेरिकी सरकार के लिए ब्याज का भुगतान अब सालाना 1 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है। जैसे-जैसे पुराने कर्जों को ऊंची ब्याज दरों पर रीफाइनेंस किया जाता है, सरकार का ब्याज का बिल लगातार भारी होता जाता है। अमेरिका के लिए चिंता की एक बड़ी वजह यह भी है कि बॉन्ड बाजार भी लगातार चेतावनी दे रहे हैं। इसका अर्थ यह है कि निवेशक अमेरिकी सरकार को लंबी अवधि के लिए धन देने के एवज में अब अधिक ब्याज की मांग कर रहे हैं। परिणामस्वरूप, अमेरिकी सरकार के लिए वैश्विक बाजारों से कर्ज जुटाना पहले के मुकाबले काफी महंगा साबित हो रहा है।

## क्या यह संकट ईरान युद्ध की वजह से पैदा हुआ है

सबसे बड़े सवालों में से एक यह है कि क्या अमेरिका का यह मौजूदा कर्ज संकट पूरी तरह ईरान युद्ध की वजह से उत्पन्न हुआ है। इस सवाल का कोई सीधा एक शब्द का उत्तर नहीं है। ऐसा कहना बिल्कुल गलत होगा कि केवल ईरान युद्ध के कारण अमेरिका कर्ज के दलदल में डूबा है। अमेरिका का कुल कर्ज इस युद्ध के शुरू होने से काफी पहले ही 30 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका था। कोविड महामारी के दौरान किया गया भारी-भरकम सरकारी खर्च, वर्तमान और पिछली सरकारों की नीतियां, करों में दी गई रियासतें जिनमें बड़े कारोबारियों को मिले टैक्स कट शामिल हैं, और रक्षा क्षेत्र पर लगातार किया जा रहा भारी खर्च, इन सभी ने मिलकर अमेरिकी कर्ज को इस ऊंचाई तक पहुंचाया है।

हालांकि, ईरान युद्ध ने पहले से ही कर्ज के बोझ तले दबे अमेरिका को और अधिक आर्थिक संकट में धकेल दिया है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने जुलाई 2026 तक ईरान युद्ध की कुल लागत लगभग 38 अरब डॉलर आंकी थी, लेकिन स्वतंत्र एजेंसियां इस खर्च को कहीं अधिक बताती हैं। ट्रंप प्रशासन ने इस स्थिति से निपटने के लिए अमेरिकी कांग्रेस के सामने करीब 90 अरब डॉलर की मांग रखी थी। लेकिन खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को ईरान द्वारा जिस तरह से निशाना बनाया गया है और वहां तैनात साजो-सामान को नष्ट किया गया है, उसे दोबारा उसी स्थिति में स्थापित करने की लागत को जोड़ लिया जाए, तो यह खर्च सैकड़ों अरब डॉलर तक पहुंच जाता है.

## आईएमएफ ने दी चेतावनी और तेल संकट का असर

युद्ध का सीधा मतलब अधिक सैन्य तैनाती, भारी मात्रा में गोला-बारूद, युद्धक सामग्री, मिसाइलें, एयर डिफेंस सिस्टम, नौसेना का संचालन और खाड़ी क्षेत्र में सैन्य अभियान चलाना होता है। यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है, तो रक्षा खर्च खतरनाक स्तर तक बढ़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF ने भी इस संबंध में चेतावनी जारी की है कि यदि युद्ध और अधिक बढ़ता है, तो रक्षा खर्च पहले से ही कमजोर पड़े सरकारी खजाने पर और गहरा दबाव डालेगा। आईएमएफ के अनुसार, वैश्विक कर्ज और राजकोषीय दबाव पहले से ही उच्च स्तर पर हैं और मध्य पूर्व का तनाव इन हालात को और अधिक बिगाड़ रहा है।

इस जंग का एक अन्य गंभीर पहलू कच्चे तेल की सप्लाई से जुड़ा हुआ है। पूरी दुनिया को इस समय तेल आपूर्ति का झटका लगा है। यदि मध्य पूर्व से तेल की आपूर्ति बाधित होती है और क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ती हैं, तो पेट्रोल और डीजल महंगे हो जाएंगे, परिवहन लागत बढ़ेगी और उत्पादन खर्च में भी उछाल आएगा। इससे महंगाई के और अधिक भड़कने का खतरा लगातार सिर पर मंडरा रहा है। यदि महंगाई बढ़ती है, तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों को बड़ा झटका लगेगा। ऊंची ब्याज दरों का मतलब होगा कि अमेरिकी सरकार के लिए कर्ज लेना और अधिक महंगा हो जाएगा। इस प्रकार ईरान युद्ध अमेरिका को कई मोर्चों पर भारी पड़ रहा है।

## क्या अमेरिका दिवालिया होने की राह पर है

अब सबसे बड़ा और अंतिम सवाल यह है कि क्या वाकई अमेरिका दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गया है। फिलहाल ऐसा दावा करना जल्दबाजी होगी। अमेरिका के पास दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक का दर्जा है। अमेरिका अपनी ही मुद्रा यानी डॉलर में कर्ज लेता है और आज भी वैश्विक व्यापार बड़े पैमाने पर डॉलर में ही संचालित होता है। इसका मतलब यह है कि दुनिया भर के बाजारों का अमेरिकी डॉलर पर भरोसा अभी भी बना हुआ है। हालांकि, देश की राजकोषीय स्थिति गहरी चिंता जरूर पैदा कर रही है। यदि घाटा और कर्ज इसी रफ्तार से बढ़ते रहे, तो आने वाले वर्षों में यह समस्या बेहद विकराल रूप ले सकती है। इसका अर्थ यह है कि यदि खर्च के मुकाबले आमदनी नहीं बढ़ी, तो किसी भी बड़े देश का खजाना खाली हो सकता है और अमेरिका जैसा शक्तिशाली राष्ट्र भी वित्तीय संकट में आ सकता है।

गौरतलब है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के नियंत्रण को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। दोनों देश इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर अपना वर्चस्व कायम करना चाहते हैं। हालांकि ईरान ने इस समुद्री रास्ते को बंद कर रखा है, लेकिन रिपोर्ट्स बताती हैं कि अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते से कच्चे तेल की काफी मात्रा चुपचाप निकालने में लगा हुआ है।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने और वैश्विक महंगाई बढ़ने से भारत में पेट्रोल-डीजल और आयातित वस्तुओं के दाम प्रभावित हो सकते हैं।
- **वैश्विक स्तर पर:** अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर बढ़ते कर्ज और ब्याज के बोझ से वैश्विक वित्तीय बाजारों और निवेशकों की धारणा पर असर पड़ सकता है।

## सवाल-जवाब

### 1. अमेरिका का कुल राष्ट्रीय कर्ज कितना हो गया है?
अमेरिका का कुल राष्ट्रीय कर्ज इतिहास में पहली बार 40 ट्रिलियन डॉलर को पार कर गया है।

### 2. अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मुकाबले यह कर्ज कितना बड़ा है?
अमेरिका का सरकारी कर्ज देश की करीब 32 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के मुकाबले लगभग 125 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

### 3. अमेरिकी सरकार के लिए सबसे बड़ा खतरा क्या माना जा रहा है?
विशेषज्ञों के अनुसार असली खतरा मूल कर्ज से ज्यादा उस पर चुकाए जाने वाला सालाना 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का ब्याज है।

### 4. आईएमएफ ने इस स्थिति को लेकर क्या चेतावनी दी है?
आईएमएफ ने चेतावनी दी है कि यदि मध्य पूर्व का युद्ध और बढ़ता है, तो रक्षा खर्च पहले से कमजोर अमेरिकी खजाने पर और दबाव डालेगा।

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