उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में कैसे तैयार होती हैं कांच की रंग-बिरंगी चूड़ियां, जानिए पूरा प्रोसेस फिरोजाबाद में कांच की चूड़ियों को सजाने और तैयार करने का काम घरों और कारखानों में बड़े पैमाने पर होता है। सादी चूड़ियों को बेलन पर चढ़ाने से लेकर कैमिकल लगाने, डिजाइन करने और पैकिंग तक की पूरी प्रक्रिया बेहद दिलचस्प होती है। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में कांच की चूड़ियों का निर्माण और उनकी सजावट सिर्फ बड़े कारखानों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह घरों में भी बड़े पैमाने पर किया जाता है। सादी चूड़ियों को कारखानों से लाकर उन्हें सुंदर और आकर्षक रूप देने का काम इस शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक फैला हुआ है। महिलाएं घरों पर रहकर ही इन कांच की चूड़ियों को सजाने का काम करती हैं, जिससे उन्हें घर बैठे ही नियमित तौर पर आमदनी हो जाती है। यह पूरा उद्योग स्थानीय आजीविका का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। साइज की छंटाई और बेलन पर चढ़ाने की प्रक्रिया कांच की इन चूड़ियों को अलग-अलग और आकर्षक डिजाइन में ढालने की शुरुआत सादी चूड़ियों के आकार को आपस में मिलाने और छांटने से होती है। सही साइज मिलने के बाद लगभग 25 से 30 चूड़ियों को एक लकड़ी के बेलन में एक साथ पिरोया जाता है, जिसके बाद इन्हें काम के अगले चरण के लिए आगे बढ़ा दिया जाता है। यह शुरुआती चरण चूड़ियों को व्यवस्थित करने के लिए सबसे अहम माना जाता है ताकि आगे की कारीगरी में कोई दिक्कत न आए। खतरनाक कैमिकल का इस्तेमाल और जरूरी सावधानी बेलन में चूड़ियों को पिरोने के बाद अगले चरण में कारीगर एक विशेष शीशी की मदद से इन सभी चूड़ियों पर कैमिकल लगाते हैं। बताया जाता है कि यह कैमिकल काफी खतरनाक होता है और काम करते समय हाथों पर चिपक जाता है। इसे छुड़ाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है, इसलिए इस प्रक्रिया के दौरान कारीगरों को खासी सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है ताकि त्वचा को नुकसान न पहुंचे। महिलाओं द्वारा घरों में चूड़ियों की सजावट बेलन पर चढ़ी चूड़ियों पर कैमिकल लगाने के बाद उन्हें महिलाओं के पास सुखाने और सजाने के लिए भेज दिया जाता है। महिलाएं अपने घरों में या चूड़ियों की शिट के पास बैठकर आराम से इन पर कलाकारी करती हैं। वे हाथों की कुशलता से इन चूड़ियों पर विभिन्न प्रकार के नग और सुंदर आकृतियां या फिगर जड़ती हैं, जिससे साधारण कांच की चूड़ियां बेहद आकर्षक और भव्य रूप ले लेती हैं। बेलन घुमाने की तकनीक और सूखने की प्रक्रिया चूड़ियों को तैयार करते समय लकड़ी के बेलन को लगातार घुमाया जाता है ताकि कैमिकल एक ही जगह पर इकट्ठा न हो सके और हवा लगने से आसानी से सूख जाए। एक बेलन का काम पूरा होने के बाद महिलाएं दूसरे बेलन पर कैमिकल लगाकर इसी तरह अपना कार्य जारी रखती हैं और पूरा दिन घर बैठे ही चूड़ियों को सजाने के काम में जुटी रहती हैं। लकड़ी के स्टैंड पर रखरेख और सूखने का इंतजार महिलाओं द्वारा कैमिकल और डिजाइनिंग का काम पूरा होने के बाद इन बेलनों को एक बड़े लकड़ी के स्टैंड पर सुरक्षित रख दिया जाता है। इस दौरान एक कारीगर लगातार इन बेलनों को घुमाता रहता है ताकि जब तक कैमिकल पूरी तरह सूख न जाए, तब तक इनकी विशेष देखभाल की जा सके। बेलनों के पूरी तरह सूख जाने तक इनका विशेष रख रखाव करना बहुत जरूरी होता है। सफाई और पहनने लायक बनाने की प्रक्रिया बेलन सूख जाने के बाद कांच की चूड़ियों को सावधानी से उतारकर अलग किया जाता है। इसके बाद इन चूड़ियों के किनारों पर जमे सूखे कैमिकल को खुरच कर साफ किया जाता है ताकि जब कोई महिला इन्हें पहने, तो किनारों पर मौजूद कैमिकल या खुरदुरापन उसकी कलाई में चुभे नहीं। इस तरह बेलन से बाहर निकालने के बाद हर चूड़ी की बारीकी से साफ-सफाई की जाती है। पैकिंग और दुकानदारों तक भेजने का सफर चूड़ियों की फिनिशिंग और साफ-सफाई का काम पूरा होने के बाद इन्हें बाजार के दुकानदारों के पास भेजने के लिए अंतिम रूप से पैक किया जाता है। कारीगर इन चूड़ियों को एक मजबूत गुच्छे के रूप में आपस में बांधकर सुरक्षित रखते हैं और फिर बिक्री के लिए दुकानदारों के पास रवाना कर देते हैं। इस लंबी और मेहनत भरी प्रक्रिया के बाद ही बाजारों की शोभा बढ़ाने वाली वे खूबसूरत और रंग-बिरंगी चूड़ियां ग्राहकों के लिए उपलब्ध हो पाती हैं जिन्हें देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है। इसका आप पर असर • भारत में: कांच की चूड़ियों के इस पारंपरिक कुटीर उद्योग से जुड़े स्थानीय कारीगरों और परिवारों को रोजगार और आय का निरंतर साधन मिलता है। • फिरोजाबाद में: स्थानीय महिलाओं और कामगारों के लिए घर बैठे चूड़ियां सजाने का यह कार्य आजीविका का एक प्रमुख और सुलभ जरिया बना हुआ है। सवाल-जवाब 1. फिरोजाबाद में कांच की चूड़ियां कहां तैयार की जाती हैं? फिरोजाबाद में कांच की चूड़ियों का निर्माण और सजावट का काम कारखानों के साथ-साथ घरों के अंदर भी बड़े पैमाने पर किया जाता है। 2. एक बार में एक लकड़ी के बेलन में कितनी चूड़ियां डाली जाती हैं? साइज की छंटाई के बाद एक लकड़ी के बेलन में लगभग 25 से 30 चूड़ियों को पिरोया जाता है। 3. चूड़ियों पर कैमिकल लगाने के बाद उन्हें कैसे सुखाया जाता है? बेलन पर कैमिकल लगाने के बाद उन्हें घुमाया जाता है और फिर बड़े लकड़ी के स्टैंड पर रखकर कारीगर द्वारा लगातार घुमाते हुए सुखाया जाता है। 4. चूड़ियों की सफाई क्यों जरूरी होती है? बेलन से निकालने के बाद चूड़ियों के किनारों पर लगे सूखे कैमिकल को हटाया जाता है ताकि पहनने वाले को चूड़ियां चुभे नहीं। 5. तैयार होने के बाद चूड़ियों को दुकानदारों तक कैसे भेजा जाता है? साफ-सफाई और पैकिंग के बाद कारीगर इन चूड़ियों को गुच्छे की तरह बांधकर बिक्री के लिए दुकानदारों के पास भेज देते हैं। https://trendkia.com/business/uttar-pradesh-ke-firozabad-mein-kaise-tayar-hoti-hain-kaanch-ki-chudiyan-13457 TrendKia — Har trend, sabse pehle.