# उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों को नहीं मिला समय पर पैसा, गांगनौली बजाज और गागलहेड़ी मिल पर अटका 100 करोड़ से ज्यादा का भुगतान

> उत्तर प्रदेश सरकार के 15 दिनों में भुगतान और देरी पर ब्याज देने के वादों के बावजूद सहारनपुर मंडल की चीनी मिलों पर किसानों का 100 करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया है, जिसमें अकेले गांगनौली बजाज शुगर मिल पर 98.45 करोड़ रुपये बाकी हैं।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-08-26 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/uttar-pradesh-ke-ganna-kisanon-ko-nahin-mila-samaya-para-paisa-ganganouli-bajaj-aura-gagalhedi-mila-para-ataka-100-karora-se-jyada-22255 · **Language:** Hindi
**Tags:** सहारनपुर, उत्तर प्रदेश, गन्ना किसान, चीनी मिल बकाया, गांगनौली बजाज शुगर मिल, गागलहेड़ी शुगर मिल, कृषि समाचार

उत्तर प्रदेश सरकार राज्य में गन्ना किसानों को उनकी फसल डिलीवरी के 15 दिनों के भीतर भुगतान दिलाने और तय समयसीमा बीतने के बाद बकाये पर ब्याज देने की बात कहती है। हालांकि, सहारनपुर जिले में स्थित कई चीनी मिलें इन सरकारी नियमों और दावों पर खरी नहीं उतर पा रही हैं। स्थानीय गन्ने के काश्तकारों को न तो 15 दिनों के भीतर उनकी उपज का पैसा मिल पा रहा है और न ही देरी से मिलने वाली राशि पर कोई ब्याज दिया जा रहा है। इसके विपरीत, किसानों को अपनी मेहनत की कमाई पाने के लिए महीनों तक लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

## 100 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया और चीनी मिलों का हिसाब
सहारनपुर मंडल और जिले में गन्ने की आपूर्ति करने वाले किसानों का चीनी मिलों पर भारी-भरकम भुगतान अटका हुआ है। आंकड़े बताते हैं कि क्षेत्र की चीनी मिलों पर किसानों के 1 अरब रुपये यानी 100 करोड़ रुपये से अधिक बकाया हैं। इनमें सबसे बड़ी बकायेदार सहारनपुर की गांगनौली बजाज शुगर मिल है, जिस पर 98 करोड़ 45 लाख रुपये की देनदारी बाकी है। इसके अलावा, गागलहेड़ी शुगर मिल पर भी किसानों के 2 करोड़ 54 लाख रुपये अटकाए गए हैं। सहारनपुर मंडल की एक अन्य चीनी मिल भी इस बकाये की सूची में शामिल है, जिस पर करोड़ों रुपये की देनदारी है। यह बकाया राशि हाल-फिलहाल की नहीं है, बल्कि वर्ष 2025 और 2026 से ही रुकी हुई है।

## 15 दिन के नियम और ब्याज के वादों की जमीनी हकीकत
चीनी मिलों द्वारा किए जा रहे विलंब के खिलाफ क्षेत्र के किसान लगातार प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात कर रहे हैं और धरना प्रदर्शन आयोजित कर रहे हैं। इन विरोध-प्रदर्शनों के बावजूद किसानों को केवल आधिकारिक आश्वासन ही हासिल होते हैं, जबकि मिलें अपनी सहूलियत और मनमानी के हिसाब से ही भुगतान जारी करती हैं। नियमानुसार 15 दिनों के बाद देरी से किए जाने वाले भुगतान पर ब्याज देने का प्रावधान बनाया गया था, लेकिन धरातल पर यह नियम पूरी तरह बेअसर साबित हुआ है और ब्याज की बात केवल कागजी दावों तक सीमित रह गई है।

## किसानों के लिए एफडी की तरह है गन्ने की फसल
क्षेत्रीय कृषि तंत्र में गन्ने की फसल किसानों के लिए एक फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी के समान मानी जाती है। अन्य नकदी फसलों में जहां बाजार के रुख के हिसाब से कीमतें रोजाना बदलती हैं और कोई निश्चित दर तय नहीं होती, वहीं गन्ने में किसानों को पहले से निर्धारित और फिक्स्ड प्राइस मिलता है। इसी मूल्य स्थिरता के कारण सहारनपुर मंडल के किसानों ने गन्ने का रकबा बढ़ाया है। हाल के वर्षों में विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों और हाईवे निर्माण के कारण कृषि योग्य भूमि में जो कमी आई थी, किसानों ने अन्य क्षेत्रों में गन्ने की बुवाई बढ़ाकर उस रकबे की भरपाई कर ली है।

## खेती में तकनीक का इस्तेमाल और बकाया चुकाने के दावे
गन्ना प्रशासन का कहना है कि सहारनपुर मंडल में गन्ने का कुल रकबा पिछले वर्षों के लगभग बराबर बना हुआ है और इस बार प्रति हेक्टेयर उत्पादकता में बढ़ोतरी की उम्मीद है। विभाग द्वारा फसल की सुरक्षा और पोषण के लिए 36 ड्रोन की मदद से सहारनपुर मंडल के गन्ने के खेतों में फर्टिलाइजर और पेस्टिसाइड का छिड़काव कराया जा रहा है। अधिकारियों द्वारा किसानों से सीधा फीडबैक भी लिया जा रहा है ताकि इस सत्र में कुल उत्पादन को बढ़ाया जा सके। उप गन्ना आयुक्त ओम प्रकाश सिंह ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2025 और 2026 से जुड़े इस बकाये को जल्द से जल्द किसानों को दिलवाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** गन्ने के निश्चित मूल्य के कारण किसान इसकी खेती को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन मिलों द्वारा भुगतान रोकने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की नकदी स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

**सहारनपुर और उत्तर प्रदेश में:** गांगनौली बजाज और गागलहेड़ी जैसी चीनी मिलों पर अटके 100 करोड़ रुपये से अधिक के बकाये के कारण स्थानीय किसानों को आर्थिक तंगी और अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. सहारनपुर में चीनी मिलों पर किसानों का कितना बकाया है?
सहारनपुर मंडल की चीनी मिलों पर किसानों का 100 करोड़ रुपये से अधिक (1 अरब रुपये) बकाया है।

### 2. किन चीनी मिलों पर सबसे ज्यादा बकाये की राशि है?
सहारनपुर जिले की गांगनौली बजाज शुगर मिल पर 98 करोड़ 45 लाख रुपये और गागलहेड़ी शुगर मिल पर 2 करोड़ 54 लाख रुपये बकाया हैं।

### 3. गन्ना भुगतान को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार का क्या नियम है?
सरकारी नियमों के अनुसार फसल डिलीवरी के 15 दिनों के भीतर किसानों को भुगतान किया जाना चाहिए, और देरी होने पर ब्याज देने का प्रावधान है।

### 4. सहारनपुर मंडल में कुल कितनी चीनी मिलें संचालित हैं?
पूरे सहारनपुर मंडल में कुल 18 चीनी मिलें हैं, जिनमें से 8 चीनी मिलें सहारनपुर जिले में स्थित हैं।

### 5. सहारनपुर में गन्ने की खेती में ड्रोन का उपयोग किस काम के लिए किया जा रहा है?
उप गन्ना आयुक्त ओम प्रकाश सिंह के अनुसार सहारनपुर मंडल के खेतों में फर्टिलाइजर और पेस्टिसाइड के छिड़काव के लिए 36 ड्रोन तैनात किए गए हैं।

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