# उत्तर प्रदेश के किसानों की बढ़ेगी आय, मिर्जापुर में मखाना उगाने पर मिल रही ₹50,000 की सरकारी मदद

> उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में पहली बार 55 हेक्टेयर लक्ष्य के साथ मखाने की खेती शुरू की जा रही है, जहां उद्यान विभाग किसानों को 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान और नि:शुल्क बीज दे रहा है।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-08-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/uttar-pradesh-ke-kisanon-ki-barhegi-aya-mirzapur-men-makhana-ugane-para-mila-rahi-50-000-ki-sarakari-madada-19231 · **Language:** Hindi
**Tags:** मिर्जापुर, मखाना की खेती, उद्यान विभाग, किसान अनुदान, उत्तर प्रदेश कृषि, कृषि योजना

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के किसानों के लिए कृषि क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू हो रहा है। जिला उद्यान विभाग ने स्थानीय स्तर पर पारंपरिक फसलों से हटकर आधुनिक और अधिक मुनाफा देने वाली खेती को बढ़ावा देने का फैसला किया है। इसी पहल के तहत मिर्जापुर में पहली बार मखाने की खेती की शुरुआत की जा रही है। राज्य सरकार किसानों को इस नई फसल को अपनाने के लिए आर्थिक मदद भी उपलब्ध करा रही है। प्रशासन ने जनपद में कुल 55 हेक्टेयर भूमि पर मखाना उगाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है, जिससे स्थानीय कृषकों की आय में बढ़ोतरी हो सके।

 

## किसानों को मिलेगी 50 हजार रुपये की वित्तीय सहायता

इस नई योजना के तहत मखाना उगाने वाले इच्छुक किसानों को सरकारी स्तर पर भरपूर मदद दी जाएगी। प्रति हेक्टेयर की दर से लगभग 50 हजार रुपये का अनुदान दिया जा रहा है। इस अनुदान राशि के साथ ही किसानों को मखाने के गुणवत्तापूर्ण बीज भी नि:शुल्क दिए जाएंगे। खेती की तकनीक से अनजान किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि उद्यान विभाग फसल बोने से पहले उन्हें विस्तृत प्रशिक्षण भी प्रदान करेगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ही सब्सिडी की राशि और बीज वितरित किए जाएंगे ताकि किसान बिना किसी असुविधा के इस नवाचार विधि का लाभ उठा सकें और अपनी कृषि उपज को बेहतर बना सकें।

 

## मखाना उत्पादन की दो प्रमुख विधियां और जल प्रबंधन

मिर्जापुर में मखाने की खेती को लेकर तकनीकी बारीकियों की जानकारी देते हुए सहायक उद्यान रक्षक अरविंद कुमार सिंह ने महत्वपूर्ण तथ्य साझा किए हैं। अरविंद कुमार सिंह के अनुसार, मखाने की पैदावार मुख्य रूप से दो अलग विधियों के जरिए की जा सकती है। इनमें से पहली विधि पारंपरिक तालाब विधि है, जबकि दूसरी खेत विधि कहलाती है। खेत विधि में उस जमीन का चयन किया जाता है जहां पानी रुकता है। इसमें भूमि की विशेष खुदाई करके जल संचय की व्यवस्था की जाती है।

सहायक उद्यान रक्षक अरविंद कुमार सिंह ने बताया, "उद्यान विभाग लगातार किसानों की आमदनी बढ़ाने और उन्हें नवाचार खेती के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास कर रहा है।"

खेत विधि के लिए खेत में लगातार चार से पांच फीट तक पानी भरा रहना बेहद आवश्यक होता है। जिन इलाकों में जल निकासी की समस्या है, जलाशय हैं या फिर नहरों के किनारे जलभराव रहता है, वहां यह तकनीक बेहद कारगर साबित होती है। आमतौर पर धान की फसल में अधिक पानी की जरूरत मानी जाती है, लेकिन मखाने की खेती में धान से भी ज्यादा जल की आवश्यकता पड़ती है। इसलिए ऐसी नीची भूमि जहां अत्यधिक पानी भरने के कारण धान, गेहूं या अन्य फसलें बर्बाद हो जाती हैं या बोई नहीं जा पातीं, वहां मखाने की खेती करके किसान अपनी बंजर या बेकार पड़ी जमीन से बेहतरीन मुनाफा हासिल कर सकते हैं।

 

## आवेदन की प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेज

मखाना खेती योजना का लाभ उठाने के इच्छुक किसानों को विभाग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। किसान अपनी सुविधानुसार उद्यान विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन माध्यम से आवेदन जमा कर सकते हैं। जो किसान ऑनलाइन प्रक्रिया में सहज नहीं हैं, वे जिला उद्यान विभाग के कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना फॉर्म भर सकते हैं।

आवेदन करते समय किसानों को कुछ जरूरी दस्तावेज संलग्न करने होंगे। इनमें किसान का आधार कार्ड, जमीन की खतौनी (भू-अभिलेख), बैंक पासबुक की छायाप्रति और पासपोर्ट साइज फोटो शामिल हैं। आवेदन प्राप्त होने के बाद उद्यान विभाग के अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और भूमि का स्थलीय भौतिक सत्यापन किया जाएगा। जांच प्रक्रिया में सब कुछ सही पाए जाने के पश्चात ही पात्र किसानों को योजना का लाभ और 50 हजार रुपये का अनुदान स्वीकृत किया जाएगा।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** यह पहल पारंपरिक धान-गेहूं चक्र से हटकर उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देगी और देश में मखाना आपूर्ति को मजबूत करेगी।
- **मिर्जापुर में:** जलभराव और अनुपयोगी पड़ी नीची जमीनों पर मखाना उगाकर स्थानीय किसान 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर के सरकारी अनुदान और मुफ्त बीज की मदद से अपनी कमाई बढ़ा सकेंगे।

## सवाल-जवाब

### 1. मिर्जापुर में मखाना खेती के लिए कितनी जमीन का लक्ष्य तय किया गया है?
जिला उद्यान विभाग ने मिर्जापुर में पहली बार मखाने की खेती के लिए कुल 55 हेक्टेयर भूमि का लक्ष्य निर्धारित किया है।

### 2. मखाने की खेती करने वाले किसानों को सरकार कितना अनुदान दे रही है?
किसानों को प्रति हेक्टेयर की दर से लगभग 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है, जिसमें मुफ्त बीज भी शामिल हैं।

### 3. खेत विधि से मखाना उगाने के लिए कितने पानी की आवश्यकता होती है?
खेत विधि से मखाना खेती के लिए खेत में लगातार 4 से 5 फीट तक पानी जमा रहना जरूरी होता है, जो जलभराव वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है।

### 4. योजना का लाभ लेने के लिए किन-किन दस्तावेजों की जरूरत होगी?
किसानों को आवेदन के समय आधार कार्ड, जमीन की खतौनी, बैंक पासबुक की प्रति और पासपोर्ट साइज फोटो जमा करने होंगे।

### 5. किसान मखाना खेती योजना के लिए कहां आवेदन कर सकते हैं?
पात्र किसान उद्यान विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन या जिला उद्यान विभाग कार्यालय में जाकर ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं।

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