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  "type": "article",
  "title": "उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में ड्रैगन फ्रूट की बंपर पैदावार, 360 एकड़ में फैली फसल से खाड़ी देशों तक बढ़ी मिठास",
  "summary": "मिर्जापुर में 365 से अधिक किसान 360 एकड़ जमीन पर ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं। सरकार से प्रति हेक्टेयर 2.70 लाख रुपये का अनुदान मिलने और खाड़ी देशों तक फल निर्यात होने से किसानों की आमदनी दोगुनी हो गई है।",
  "content": "उत्तर प्रदेश का मिर्जापुर जिला अब नकदी फसलों और बागवानी में एक नया कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। कभी पारंपरिक खेती तक सीमित रहने वाला यह इलाका आज देश भर में ड्रैगन फ्रूट की खेती के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर चुका है। जिले में करीब 365 से ज्यादा किसान लगभग 360 एकड़ क्षेत्रफल में इस विदेशी फल की व्यावसायिक खेती कर रहे हैं। बेहतर पैदावार और तगड़े बाजार भाव की वजह से किसानों की आय में जबर्दस्त इजाफा दर्ज किया गया है, जिससे कई परिवारों की कमाई दोगुनी तक पहुंच गई है।\n\nशुरुआती प्रयास से लेकर बड़े हब बनने तक का सफर\nमिर्जापुर में ड्रैगन फ्रूट उत्पादन की नींव वर्ष 2017 में रखी गई थी। उस दौरान जिला उद्यान विभाग की पहल पर महज एक या दो किसानों ने प्रायोगिक तौर पर इसकी बुवाई शुरू की थी। शुरुआती दौर में जिले के केवल पांच से दस एकड़ इलाके में ही यह फसल लगाई गई थी। समय के साथ जब शुरुआती उत्पादकों को शानदार मुनाफा मिलने लगा, तो दूसरे काश्तकारों ने भी लीक से हटकर इस नवाचार को अपनाया। पिछले नौ वर्षों के भीतर ड्रैगन फ्रूट का रकबा तेजी से बढ़कर 360 एकड़ तक पहुंच गया है।\n\nवर्तमान में मिर्जापुर पूरे देश में ड्रैगन फ्रूट के सबसे बड़े उत्पादक क्षेत्रों में शुमार हो चुका है। खेतों में आधुनिक तरीके से की जा रही इस खेती से प्रति एकड़ लगभग 45 से 50 क्विंटल तक की बंपर पैदावार हासिल हो रही है। इस शानदार उत्पादन ने किसानों को पारंपरिक अनाजों की जगह उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों की ओर आकर्षित किया है।\n\nसरकारी अनुदान और बुवाई की सही समय सारिणी\nराज्य सरकार और उद्यान विभाग की तरफ से ड्रैगन फ्रूट की खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा दिया जा रहा है। किसानों की आर्थिक मदद के लिए सरकार की ओर से प्रति हेक्टेयर 2 लाख 70 हजार रुपये का अनुदान मुहैया कराया जा रहा है। इस वित्तीय सहयोग से किसानों के लिए शुरुआती बुनियादी ढांचे और खंभे लगाने की लागत काफी कम हो जाती है।\n\nकृषि विशेषज्ञों और उद्यान विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगाने का सबसे उपयुक्त समय जुलाई से लेकर सितंबर माह के बीच माना जाता है। रोपाई के लगभग दो वर्ष बाद पौधों से व्यावसायिक फल मिलना शुरू हो जाता है। एक बार फल लगना शुरू होने के बाद हर साल जून से दिसंबर तक नियमित तुड़ाई चलती है, जिस दौरान घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसकी मांग चरम पर रहती है।\n\nमहिला किसानों की भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंच\nमिर्जापुर की इस कृषि क्रांति में आधी आबादी भी बढ़-चढ़कर योगदान दे रही है। जिले में 30 से अधिक महिला किसान सीधे तौर पर ड्रैगन फ्रूट की बागवानी संभाल रही हैं और शानदार मुनाफा कमाकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। स्थानीय स्तर पर उत्पादित फलों को केवल उत्तर प्रदेश के बड़े शहरों जैसे वाराणसी, प्रयागराज और लखनऊ तक ही नहीं भेजा जा रहा, बल्कि गुणवत्ता बेहतर होने के कारण इसे खाड़ी देशों तक निर्यात भी किया जा रहा है।\n\nबाजार में मांग के आधार पर ड्रैगन फ्रूट सामान्य दिनों में 300 से 400 रुपये प्रति किलोग्राम के थोक और खुदरा भाव पर बिकता है। वहीं गर्मियों के मौसम में जब पोषक तत्वों से भरपूर फलों की मांग बढ़ जाती है, तब यह दर 500 से 600 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच जाती है।\n\nनए उत्पादकों के लिए विभाग की मदद\nजिला उद्यान अधिकारी मेवा राम ने स्पष्ट किया कि नवाचार अपनाने वाले काश्तकारों को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। जिले को ड्रैगन फ्रूट का मजबूत केंद्र बनाए रखने के लिए इच्छुक नए किसानों को अनुदान के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता वाले पौधे भी विभाग की ओर से सुलभ कराए जा रहे हैं, ताकि शुरुआती रोपाई के दौरान किसानों को किसी भी तकनीकी या आर्थिक बाधा का सामना न करना पड़े।\n\nइसका आप पर असर\nमिर्जापुर में ड्रैगन फ्रूट की सफल बागवानी से किसानों की आय में भारी वृद्धि हुई है और नए उत्पादकों के लिए सरकारी अनुदान के रास्ते खुले हैं।\n\n• भारत में: देश भर के किसान पारंपरिक अनाज की तुलना में उच्च मूल्य वाली नकदी फसलों को अपनाकर प्रति एकड़ 45 से 50 क्विंटल तक की उपज ले सकते हैं। बागवानी आधारित इस मॉडल से घरेलू आपूर्ति मजबूत होने के साथ विदेशी मुद्रा कमाने के निर्यात अवसर भी बढ़ रहे हैं।\n• मिर्जापुर और उत्तर प्रदेश में: इच्छुक काश्तकार जुलाई से सितंबर के दौरान जिला उद्यान विभाग से 2.70 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान और पौधे प्राप्त कर सकते हैं। स्थानीय मंडियों के अलावा खाड़ी देशों तक माल बिकने से किसानों को 300 से 600 रुपये प्रति किलो तक का बेहतरीन दाम मिल रहा है।\n• महिला किसानों के लिए: जिले की 30 से अधिक महिलाएं स्वयं की जमीन पर खेती कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। कृषि नवाचार से ग्रामीण क्षेत्रों में महिला उद्यमिता और स्वतंत्र आय को सीधा बढ़ावा मिला है।\n• उपभोक्ताओं और खरीदारों के लिए: स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर उत्पादन होने से ताजे ड्रैगन फ्रूट की नियमित उपलब्धता बनी रहती है। गर्मियों के दौरान पोषक तत्वों से भरपूर इस फल की मांग जून से दिसंबर तक आसानी से पूरी हो रही है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nमिर्जापुर में ड्रैगन फ्रूट की खेती का इतना बड़ा केंद्र बनना सरकारी मदद, अनुकूल जलवायु और किसानों द्वारा नवाचार अपनाने का सीधा परिणाम है।\n\n• प्रशासनिक पहल और वित्तीय सहायता: वर्ष 2017 में जिला उद्यान विभाग ने इस विदेशी फल के प्रयोग की शुरुआत की और किसानों को प्रति हेक्टेयर 2.70 लाख रुपये का सीधा अनुदान उपलब्ध कराया। इस सब्सिडी ने किसानों पर खंभे लगाने और शुरुआती पौध रोपने के आर्थिक बोझ को बेहद कम कर दिया।\n• ऊंची पैदावार और आकर्षक मुनाफा: पारंपरिक फसलों की तुलना में ड्रैगन फ्रूट से एक एकड़ में 45 से 50 क्विंटल की भारी उपज मिल रही है। बाजार में 300 से 600 रुपये प्रति किलो का भाव मिलने के कारण किसानों की आमदनी दोगुनी हो गई, जिसने अन्य किसानों को भी आकर्षित किया।\n• निर्यात और बड़े शहरों का बाजार: मिर्जापुर की भौगोलिक स्थिति के चलते वाराणसी, लखनऊ और प्रयागराज की मंडियों तक फल पहुंचाना आसान रहा। गुणवत्ता बेहतर होने की वजह से खाड़ी देशों में मांग पैदा हुई, जिससे बिक्री का एक मजबूत चक्र तैयार हो गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मिर्जापुर में ड्रैगन फ्रूट की खेती कब और कैसे शुरू हुई थी?\nमिर्जापुर में ड्रैगन फ्रूट की खेती 2017 में जिला उद्यान अधिकारी की पहल पर शुरू हुई थी, जिसमें शुरुआत में एक से दो किसान पांच से दस एकड़ में जुड़े थे।\n\n2. वर्तमान में मिर्जापुर में कितने एकड़ में ड्रैगन फ्रूट की खेती हो रही है?\nवर्तमान समय में मिर्जापुर जिले में 365 से अधिक किसान करीब 360 एकड़ जमीन पर ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं।\n\n3. ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए सरकार कितना अनुदान देती है?\nसरकार की ओर से ड्रैगन फ्रूट की खेती करने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर 2 लाख 70 हजार रुपये का अनुदान दिया जा रहा है।\n\n4. ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगाने का सही समय क्या है?\nड्रैगन फ्रूट की बुवाई या रोपाई शुरू करने का सबसे अच्छा समय जुलाई माह के बाद से सितंबर माह तक होता है।\n\n5. पौधे लगाने के कितने समय बाद पैदावार शुरू होती है?\nड्रैगन फ्रूट की रोपाई के लगभग दो वर्ष बाद पैदावार शुरू हो जाती है और हर साल जून से दिसंबर तक फल आते हैं।\n\n6. मिर्जापुर में पैदा होने वाले ड्रैगन फ्रूट का बाजार भाव क्या रहता है?\nड्रैगन फ्रूट आमतौर पर 300 से 400 रुपये प्रति किलो और गर्मियों के सीजन में मांग बढ़ने पर 500 से 600 रुपये प्रति किलो तक बिकता है।\n\n7. मिर्जापुर का ड्रैगन फ्रूट किन बाजारों और देशों में भेजा जाता है?\nयह फल लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी की मंडियों में भेजा जाता है और गुणवत्ता के आधार पर खाड़ी देशों (गल्फ कंट्रीज) में भी निर्यात किया जाता है।\n\nप्रेरणा और सबक\nमिर्जापुर के किसानों ने पारंपरिक खेती की सीमाओं को तोड़कर नवाचार और सरकारी योजनाओं के सही इस्तेमाल से आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है।\n\n• नवाचार अपनाने का साहस: केवल एक या दो किसानों द्वारा 2017 में शुरू किया गया छोटा सा प्रयोग आज 365 से अधिक किसानों का मुख्य आजीविका साधन बन गया है। नए प्रयोगों से डरने के बजाय सही जानकारी के साथ जोखिम उठाना सफलता दिलाता है।\n• महिला सशक्तिकरण का प्रत्यक्ष प्रमाण: 30 से ज्यादा महिला किसानों ने खेती का प्रबंधन अपने हाथ में लेकर यह साबित किया कि आधुनिक बागवानी में महिलाएं भी अग्रणी उद्यमी बन सकती हैं।\n• सरकारी योजनाओं का सही लाभ: 2.70 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर के अनुदान का उपयोग करके किसानों ने लागत कम की और अपनी उपज को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया। उपलब्ध संसाधनों का योजनाबद्ध उपयोग खेती को लाभदायक व्यवसाय बना सकता है।",
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  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-09-26",
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    "ड्रैगन फ्रूट",
    "कृषि समाचार",
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