{
  "type": "article",
  "title": "उत्तर प्रदेश में कृषि उपकरणों पर भारी आर्थिक मदद की घोषणा, 20 अक्टूबर तक करें आवेदन",
  "summary": "उत्तर प्रदेश सरकार ने हजारों कृषि यंत्रों, कस्टम हायरिंग सेंटरों और फार्म मशीनरी बैंकों पर सब्सिडी देने की घोषणा की है, जिसके लिए ऑनलाइन आवेदन 7 से 20 अक्टूबर तक स्वीकार किए जाएंगे।",
  "content": "उत्तर प्रदेश के काश्तकारों के लिए दशहरा पर्व नई सौगात लेकर आया है, जहाँ राज्य सरकार ने आधुनिक कृषि यंत्रों की खरीद पर व्यापक सब्सिडी देने की घोषणा की है। इस सरकारी पहल का मुख्य उद्देश्य खेती से जुड़ी लागत को घटाना और उत्पादन की आधुनिक तकनीकों को आम किसानों तक पहुंचाना है। योजना के अंतर्गत विभिन्न विकास कार्यक्रमों के माध्यम से हजारों आधुनिक उपकरणों पर वित्तीय अनुदान दिया जा रहा है। पात्र काश्तकार 7 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक आधिकारिक व्यवस्था के जरिए पंजीकरण कराकर इस मदद का लाभ ले सकते हैं।\n\nविभिन्न योजनाओं के तहत हजारों मशीनों पर वित्तीय मदद\nखेती के आधुनिकीकरण के लक्ष्य को साधने के लिए कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक (कृषि अभियंत्रण) बलराम वर्मा ने बताया कि सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन कार्यक्रम के अंतर्गत 2,166 कृषि उपकरणों पर वित्तीय छूट स्वीकृत की गई है। इसके साथ ही खेतों में पराली और अवशेषों के निस्तारण को बढ़ावा देने वाली फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत 1,755 कृषि यंत्रों पर आर्थिक मदद मुहैया कराई जाएगी। इन दोनों योजनाओं के समन्वय से किसानों को जुताई, बुवाई और कटाई जैसे कार्यों में मशीनों का प्रयोग बढ़ाने में सीधी मदद मिलेगी, जिससे समय और मेहनत दोनों की बचत होगी।\n\nकस्टम हायरिंग सेंटर और फार्म मशीनरी बैंक के लिए बड़ा प्रावधान\nयह अनुदान योजना केवल एकल किसानों तक सीमित नहीं रखी गई है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर साझा कृषि संसाधन खड़े करने पर भी जोर दिया गया है। इसके अंतर्गत कस्टम हायरिंग सेंटर तथा फार्म मशीनरी बैंक की स्थापना करने के इच्छुक समूहों व उद्यमियों को 10-10 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद दी जाएगी। साथ ही उन्नत निगरानी व छिड़काव के लिए किसान ड्रोन और अन्य संबंधित आधुनिक यंत्रों को भी सब्सिडी के दायरे में शामिल किया गया है। फसल अवशेष प्रबंधन व्यवस्था के तहत व्यक्तिगत कृषि उपकरणों के अलावा कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करने के लिए अधिकतम 30 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता का प्रावधान रखा गया है, ताकि किसान सामूहिक रूप से बड़े यंत्रों का उपयोग कर सकें।\n\nमक्का विकास और कीट नियंत्रण के लिए विशेष उपकरण\nराज्य के कृषि क्षेत्र में विविधता लाने के लिए त्वरित मक्का विकास कार्यक्रम को भी इस पहल से जोड़ा गया है, जिसके माध्यम से मक्का शेलर और मिलेट पार्लर की स्थापना के लिए आवेदन मांगे गए हैं। इसके अतिरिक्त फसलों को बीमारियों से सुरक्षित रखने के मकसद से कीट एवं रोग नियंत्रण योजना के अंतर्गत किसानों को पौध संरक्षण उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिन पर सरकार रियायती दर तय कर रही है। इससे किसान अपने स्तर पर फसलों को कीटों के प्रकोप से बचा सकेंगे।\n\nआधिकारिक पोर्टल पर 20 अक्टूबर तक पंजीकरण की सुविधा\nइस पूरी अनुदान प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था लागू की गई है। 7 अक्टूबर से शुरू हुई यह आवेदन खिड़की 20 अक्टूबर तक खुली रहेगी। इच्छुक किसान कृषि विभाग के आधिकारिक पोर्टल www.agriculture.up.gov.in पर जाकर अपनी बुकिंग दर्ज कर सकते हैं। पोर्टल के मुख्य पृष्ठ पर उपलब्ध किसान कॉर्नर अनुभाग में जाकर यंत्र बुकिंग प्रारंभ विकल्प का चयन करके सीधे आवेदन भरा जा सकता है। इसी डिजिटल माध्यम पर मशीनों के तकनीकी विवरण, अनुदान की पात्रता और आवेदन से जुड़ी शर्तें भी स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराई गई हैं।\n\nइसका आप पर असर\nउत्तर प्रदेश के किसानों को आधुनिक मशीनरी खरीदने और फसल लागत घटाने के लिए सीधी आर्थिक सहायता मिलेगी।\n\n• उत्तर प्रदेश में: राज्य के किसान 7 से 20 अक्टूबर के बीच आधिकारिक पोर्टल के जरिए सब्सिडी पर मशीनों के लिए बुकिंग कर सकते हैं। समय रहते आवेदन करने पर महंगे कृषि यंत्रों और कस्टम हायरिंग सेंटरों की स्थापना पर 10 लाख से 30 लाख रुपये तक की सहायता का लाभ उठाया जा सकता है।\n• कृषि लागत पर प्रभाव: मशीनों पर अनुदान मिलने से जुताई, बुवाई और कटाई में लगने वाला खर्च सीधे तौर पर कम होगा। इसके चलते छोटे काश्तकार भी आधुनिक उपकरणों की मदद से समय पर कृषि कार्य निपटा सकेंगे।\n• सामूहिक उपयोग की सुविधा: कस्टम हायरिंग सेंटर और फार्म मशीनरी बैंक बनने से उन किसानों को भी आधुनिक यंत्र किराए पर मिल सकेंगे जो खुद मशीन नहीं खरीद सकते। इससे ग्रामीण इलाकों में मशीनों की उपलब्धता बढ़ेगी और फसल अवशेष प्रबंधन आसान होगा।\n• फसल सुरक्षा में मदद: मक्का शेलर, मिलेट पार्लर और पौध संरक्षण उपकरणों पर छूट मिलने से पैदावार की गुणवत्ता सुरक्षित रहेगी। किसान कीटों व रोगों की रोकथाम के लिए आवश्यक यंत्र रियायती दरों पर प्राप्त कर सकेंगे।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह पहल खेती में लगने वाली भारी लागत को कम करने, फसल अवशेषों के प्रबंधन को प्रोत्साहित करने और किसानों को आधुनिक तकनीक से लैस करने के उद्देश्य से शुरू की गई है।\n\n• आधुनिक तकनीक से जोड़ने का लक्ष्य: पारंपरिक कृषि पद्धतियों में समय और श्रम अधिक लगने के कारण राज्य सरकार किसानों को आधुनिक मशीनीकरण की ओर ले जाना चाहती है। इसलिए सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन के तहत 2,166 उपकरणों पर सब्सिडी स्वीकृत की गई है।\n• पराली और अवशेष प्रबंधन की जरूरत: फसल अवशेषों के उचित निस्तारण के लिए किसानों को विशेष यंत्रों की आवश्यकता होती है। इसी क्रम में फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत 1,755 मशीनों और कस्टम हायरिंग सेंटरों पर 30 लाख रुपये तक का प्रावधान किया गया है।\n• प्रसंस्करण और फसल सुरक्षा में सुधार: मक्का और मोटे अनाजों के प्रसंस्करण को आसान बनाने और कीट रोगों से फसलों को बचाने के लिए विशेष योजनाओं को एक साथ जोड़कर वित्तीय सहायता दी जा रही है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. उत्तर प्रदेश में कृषि यंत्रों पर सब्सिडी के लिए आवेदन की तिथियां क्या हैं?\nकिसान 7 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक कृषि यंत्रों की बुकिंग और सब्सिडी के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।\n\n2. सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन के तहत कितने उपकरणों पर सब्सिडी दी जाएगी?\nइस योजना के अंतर्गत कुल 2,166 कृषि मशीनों पर आर्थिक सहायता देने की मंजूरी दी गई है।\n\n3. कस्टम हायरिंग सेंटर और फार्म मशीनरी बैंक स्थापित करने पर कितनी मदद मिलेगी?\nकस्टम हायरिंग सेंटर और फार्म मशीनरी बैंक की स्थापना के लिए 10-10 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता का प्रावधान है।\n\n4. फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत कुल कितनी मशीनें शामिल हैं?\nफसल अवशेष प्रबंधन योजना के अंतर्गत 1,755 कृषि यंत्रों पर वित्तीय मदद का प्रावधान किया गया है।\n\n5. किसान सब्सिडी के लिए किस पोर्टल पर जाकर आवेदन कर सकते हैं?\nकिसान कृषि विभाग के पोर्टल www.agriculture.up.gov.in पर जाकर किसान कॉर्नर के तहत यंत्र बुकिंग प्रारंभ विकल्प से आवेदन कर सकते हैं।",
  "url": "https://trendkia.com/business/uttar-pradesh-men-krishi-upakaranon-para-bhari-arthika-madada-ki-ghoshana-20-aktubara-taka-karen-avedana-44243",
  "category": "व्यापार",
  "publishedAt": "2026-10-07",
  "tags": [
    "कृषि सब्सिडी",
    "उत्तर प्रदेश",
    "कृषि यंत्र",
    "किसान योजना",
    "कस्टम हायरिंग सेंटर",
    "फसल अवशेष प्रबंधन",
    "बलराम वर्मा"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}