# उत्तर प्रदेश में मीठे पानी की सीपों से मोती की खेती पर 40% सब्सिडी, तीन श्रेणियों में तय हुए सरकारी प्रोजेक्ट

> उत्तर प्रदेश सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में मोती संवर्धन योजना शुरू की है, जिसमें किसानों को मीठे पानी की सीपों में मोती तैयार करने पर 40 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-09-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/uttar-pradesh-men-mithe-pani-ki-sipon-se-moti-ki-kheti-para-40-sabsidi-tina-shreniyon-men-taya-hue-sarakari-projekta-38283 · **Language:** Hindi
**Tags:** मोती पालन, उत्तर प्रदेश, कृषि सब्सिडी, मत्स्य पालन विभाग, खेत तालाब योजना, किसान योजना

पारंपरिक खेती से इतर आय बढ़ाने के इच्छुक किसानों के लिए मीठे पानी में मोती तैयार करने का विकल्प एक नए अवसर के रूप में सामने आया है। इस तकनीक के तहत प्राकृतिक तालाबों अथवा कृत्रिम पानी के टैंकों में विशेष मीठे पानी की सीपों का पालन किया जाता है। एक निर्धारित वैज्ञानिक प्रक्रिया के माध्यम से इन सीपों के भीतर उच्च गुणवत्ता के मोती विकसित किए जाते हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से जुड़े संस्थान भी इस पूरे तरीके पर किसानों को व्यवस्थित तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराते हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में इसका दायरा बढ़ रहा है।

## चालू वित्तीय वर्ष में शुरू हुए तीन स्तरीय प्रोजेक्ट
मोती पालन विशेषज्ञ डॉ. अयूब हुसैन के अनुसार उत्तर प्रदेश सरकार ने इसी चालू वित्तीय वर्ष के दौरान मोती संवर्धन योजना की शुरुआत की है। इस सरकारी योजना के तहत किसानों की जोत और जल संसाधनों के आकार को देखते हुए तीन अलग-अलग श्रेणियों में प्रोजेक्ट तय किए गए हैं। पहला मॉडल उन छोटे किसानों के लिए तैयार किया गया है जिनके पास उत्तर प्रदेश खेत तालाब योजना के तहत बने तालाब उपलब्ध हैं। ऐसे जलस्रोतों में 2000 सीपों के साथ मोती पालन की शुरुआत की जा सकती है।

दूसरी श्रेणी उन किसानों को ध्यान में रखकर बनाई गई है जिनके पास एक एकड़ से कम रकबे वाले जलस्रोत हैं। इस श्रेणी के किसान 5000 सीपों का सेटअप लगाकर उत्पादन कर सकते हैं। वहीं तीसरी श्रेणी बड़े किसानों अथवा पहले से मछली पालन कर रहे पशुपालकों के लिए निर्धारित की गई है। जिन किसानों के पास बड़े या खाली पड़े तालाब मौजूद हैं, वे 15000 सीपों की क्षमता वाला बड़ा प्रोजेक्ट स्थापित कर सकते हैं। पूरे उत्तर प्रदेश में इस वित्तीय बजट के तहत कुल 175 ऐसे प्रोजेक्ट लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

## डेढ़ बीघा जमीन पर भी संभव, 40 फीसदी अनुदान का प्रावधान
इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि जिन काश्तकारों के पास मात्र डेढ़ बीघा जमीन है, वे भी अपने खेतों में छोटा तालाब या टैंक बनाकर मोती उत्पादन की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। राज्य सरकार इस पूरे उपक्रम को बढ़ावा देने के लिए निर्धारित लागत पर 40 प्रतिशत तक का वित्तीय अनुदान दे रही है। इससे किसानों पर शुरुआती पूंजीगत खर्च का बोझ काफी कम हो जाता है और सीमित जमीन से भी नियमित तथा बेहतर मुनाफा कमाना मुमकिन होता है।

## आवेदन और तकनीकी मार्गदर्शन की प्रक्रिया
जो भी किसान इस सरकारी सहायता का लाभ उठाकर मोती उत्पादन शुरू करना चाहते हैं, वे अपने जिले के विकास भवन स्थित मत्स्य पालन विभाग कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। विभाग में तैनात मत्स्य अधिकारी योजना के पात्रता नियमों, आवेदन प्रक्रिया, तकनीकी शर्तों और सीपों के रखरखाव से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध कराते हैं। इस व्यवस्था के माध्यम से स्थानीय स्तर पर ही किसानों को आवश्यक प्रशासनिक और व्यावहारिक मार्गदर्शन मिल जाता है।

## इसका आप पर असर
उत्तर प्रदेश के किसान अब सीमित जमीन और पानी के टैंक के जरिए मोती पालन शुरू कर अपनी पारंपरिक खेती की आय में इजाफा कर सकते हैं।

- **उत्तर प्रदेश में:** राज्य सरकार मोती संवर्धन प्रोजेक्ट की लागत पर 40 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है। जिन किसानों के पास डेढ़ बीघा जमीन या खेत तालाब योजना का छोटा तालाब है, वे भी इस वित्तीय सहायता के लिए पात्र हैं।
- **भारत में:** देश भर के किसानों के लिए मीठे पानी में मोती संवर्धन एक व्यावहारिक विकल्प के रूप में उभर रहा है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रों पर जाकर कोई भी व्यक्ति इस वैज्ञानिक प्रक्रिया का पेशेवर प्रशिक्षण ले सकता है।
- **छोटे काश्तकारों के लिए:** छोटे जलस्रोतों में 2000 से लेकर 5000 सीपों के साथ न्यूनतम पूंजी लगाकर काम शुरू किया जा सकता है। इससे बड़े रकबे के बिना भी ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और अतिरिक्त आय पैदा होगी।
- **आवेदन की सुविधा:** इच्छुक काश्तकारों को अपने जिले के विकास भवन में मत्स्य पालन विभाग कार्यालय जाना होगा। वहां तैनात अधिकारी प्रोजेक्ट की लागत, अनुदान के कागजात और सीपों के प्रबंधन की औपचारिक प्रक्रिया पूरी कराएंगे।

## ऐसा क्यों हुआ
पारंपरिक फसलों पर निर्भरता घटाने और छोटे तालाबों के व्यावसायिक इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में मोती संवर्धन योजना शुरू की है। राज्य में कई किसानों के पास पहले से खेत तालाब योजना के तहत जलस्रोत उपलब्ध हैं, जिन्हें नई आय के साधनों से जोड़ना जरूरी समझा गया।

- **सीमित जमीन में अधिक आमदनी का लक्ष्य:** छोटे और सीमांत किसानों के पास बड़े खेत नहीं होते, इसलिए कम जगह में उच्च मूल्य वाली जलीय उपज तैयार करना आवश्यक था। मोती उत्पादन मात्र डेढ़ बीघा भूमि पर बने तालाब या कृत्रिम टैंक में भी सफलतापूर्वक किया जा सकता है।
- **उपलब्ध जलस्रोतों का पूर्ण उपयोग:** राज्य में खेत तालाब योजना के अंतर्गत हजारों तालाब बनाए गए हैं, जबकि कई किसानों के पास खाली जलाशय पड़े हैं। इन मौजूदा जलस्रोतों में 2000 से 15000 सीपों के तीन स्पष्ट प्रोजेक्ट स्तर तैयार कर उनका बेहतर आर्थिक इस्तेमाल सुनिश्चित किया गया।
- **पूंजीगत लागत घटाने की पहल:** सीप पालन और तकनीकी प्रक्रिया में शुरुआती निवेश की आवश्यकता होती है, जिससे छोटे किसान हिचकिचाते हैं। सरकार ने 40 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान इसीलिए किया ताकि किसान बिना भारी वित्तीय जोखिम के इस तकनीक को अपना सकें।

## सवाल-जवाब

### 1. उत्तर प्रदेश सरकार मोती पालन पर कितना अनुदान दे रही है?
राज्य सरकार मोती संवर्धन योजना के तहत प्रोजेक्ट पर 40 प्रतिशत तक का वित्तीय अनुदान दे रही है।

### 2. इस योजना के तहत कितने प्रोजेक्ट लगाने का लक्ष्य रखा गया है?
चालू वित्तीय वर्ष के दौरान पूरे उत्तर प्रदेश में कुल 175 प्रोजेक्ट स्थापित करने का लक्ष्य तय किया गया है।

### 3. छोटे किसान कितनी सीपों के साथ मोती पालन शुरू कर सकते हैं?
खेत तालाब योजना वाले छोटे किसान 2000 सीपों से और एक एकड़ से कम जमीन वाले किसान 5000 सीपों के साथ शुरुआत कर सकते हैं।

### 4. मोती संवर्धन की तकनीक सीखने के लिए प्रशिक्षण कहां मिलता है?
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के संस्थानों में मीठे पानी के मोती संवर्धन की तकनीक पर किसानों को व्यवस्थित प्रशिक्षण दिया जाता है।

### 5. इस योजना के लिए आवेदन करने हेतु किसानों को कहां संपर्क करना होगा?
इच्छुक किसान अपने जिले के विकास भवन में स्थित मत्स्य पालन विभाग कार्यालय में जाकर मत्स्य अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।

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