# वैश्विक रक्षा बाजार में छाया भारत, वित्त वर्ष 2025-26 में स्वदेशी रक्षा उत्पादन और निर्यात ने बनाया नया ऐतिहासिक रिकॉर्ड

> वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के रक्षा क्षेत्र ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं, जहां घरेलू रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया और रक्षा निर्यात 38,424 करोड़ रुपये रहा।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-09-13 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/vaishvika-raksha-bajara-men-chhaya-india-vitta-varsha-2025-26-men-svadeshi-raksha-utpadana-aura-niryata-ne-banaya-naya-aitihasika--31898 · **Language:** Hindi
**Tags:** रक्षा निर्यात, स्वदेशी रक्षा उत्पादन, मेक इन इंडिया, रक्षा मंत्रालय, रक्षा विनिर्माण, रक्षा बजट

भारत का रक्षा क्षेत्र आज एक ऐतिहासिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। जिस देश को कभी रक्षा उपकरणों के सबसे बड़े खरीदारों में गिना जाता था, आज वही देश दुनिया के रक्षा बाजार में एक मजबूत निर्यातक के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने अपने घरेलू रक्षा उत्पादन और निर्यात, दोनों ही क्षेत्रों में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। भारतीय रक्षा तकनीकों, सैन्य उपकरणों और हथियारों की मांग अब वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ रही है। अपनी इस बढ़ती आत्मनिर्भरता के दम पर भारत अब वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में एक अत्यंत विश्वसनीय और महत्वपूर्ण भागीदार बनकर उभरा है। यह बदलाव न केवल देश की औद्योगिक क्षमता को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते प्रभाव को भी रेखांकित करता है।

## घरेलू रक्षा उत्पादन में 1.78 लाख करोड़ रुपये का नया रिकॉर्ड
भारत ने स्वदेशी रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश का कुल घरेलू रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि अब देश की थलसेना, नौसेना और वायुसेना के लिए आवश्यक अत्याधुनिक लड़ाकू विमान, मिसाइलें, युद्धपोत और अन्य सैन्य उपकरण बाहरी देशों पर निर्भर रहने के बजाय पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक के आधार पर देश के भीतर ही तैयार किए जा रहे हैं। पहले जहां भारत को बुनियादी और उन्नत सैन्य प्रणालियों के लिए दूसरे देशों की तरफ देखना पड़ता था, वहीं अब भारत का अपना रक्षा विनिर्माण ढांचा देश की सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करने में पूरी तरह सक्षम हो चुका है। इससे देश के आयात बिलों में भारी कमी आई है और संकट के समय विदेशी आपूर्ति पर निर्भर रहने का रणनीतिक जोखिम भी हमेशा के लिए समाप्त हो गया है।

## 80 से अधिक देशों में पहुंचा स्वदेशी सैन्य सामान
भारत केवल अपनी आंतरिक आवश्यकताओं को ही पूरा नहीं कर रहा है, बल्कि वह विश्व स्तर पर सैन्य उपकरणों के एक बड़े निर्यातक के रूप में भी सामने आया है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात अब तक के सबसे ऊंचे स्तर 38,424 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारतीय तकनीक और स्वदेशी सैन्य उपकरणों की पहुंच अब दुनिया के 80 से अधिक देशों में हो चुकी है। भारतीय विनिर्माताओं द्वारा बनाए गए इन रक्षा उपकरणों की गुणवत्ता और विश्वसनीयता के कारण वैश्विक स्तर पर भारत की साख बेहद मजबूत हुई है। कई मित्र देश अपने रक्षा बेड़े को आधुनिक बनाने के लिए भारतीय तकनीकों पर गहरा भरोसा जता रहे हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर भारत का कूटनीतिक प्रभाव भी तेजी से मजबूत हो रहा है।

## निजी क्षेत्र, MSME और स्टार्टअप्स की अहम भूमिका
इस रक्षा विनिर्माण क्रांति को सफल बनाने में देश के सरकारी उपक्रमों के साथ-साथ निजी क्षेत्र, MSME और युवा स्टार्टअप्स ने भी असाधारण भूमिका निभाई है। ये नए उद्यम विशेष रूप से ड्रोन तकनीक, AI संचालित हथियार प्रणालियों और उन्नत अनुसंधान के क्षेत्र में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। हाल ही में संपन्न हुए ऑपरेशन सिंदूर ने यह पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया कि भारत के पास जमीन पर वास्तविक परिस्थितियों में काम करने वाली ऐसी मजबूत स्वदेशी क्षमताएं हैं जो किसी भी सुरक्षा चुनौती से निपटने में पूरी तरह सक्षम हैं। इन निजी और छोटे उद्योगों की बढ़ती भागीदारी ने देश की सैन्य अनुसंधान क्षमता को एक नई गति और दिशा प्रदान की है, जिससे नई प्रणालियों का तेजी से विकास और सेना में उनका एकीकरण संभव हो सका है।

## आर्थिक विकास का नया इंजन और DEFCON 2026 समिट
देश का रक्षा क्षेत्र अब केवल सीमाओं की रखवाली तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की अर्थव्यवस्था को गति देने वाला एक प्रमुख ग्रोथ इंजन भी बन चुका है। इसके विस्तार से देश में उच्च तकनीक वाली नौकरियों के हजारों नए अवसर पैदा हो रहे हैं और भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक मजबूत और भरोसेमंद हिस्सेदार बनता जा रहा है। इसी विकास यात्रा और भारत की अंतरराष्ट्रीय रणनीतियों पर चर्चा करने के लिए आगामी 24 अगस्त 2026 को DEFCON 2026 समिट का आयोजन किया जा रहा है। द चाणक्य डायलॉग्स के सहयोग से आयोजित होने वाले इस महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन का उद्घाटन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे, जहां भारत के रक्षा भविष्य और उद्योग से जुड़े कई बड़े नीतिगत फैसलों पर गंभीर विचार-विमर्श किया जाएगा।

## इसका आप पर असर
भारत के रक्षा क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि से देश भर में घरेलू रोजगार को बढ़ावा मिलेगा और राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी।

- **उच्च तकनीक वाले रोजगार के अवसर:** घरेलू रक्षा उत्पादन में तेजी से होने वाले विस्तार से इंजीनियरिंग और विनिर्माण के क्षेत्र में हजारों विशिष्ट नौकरियां पैदा होंगी। इसका मतलब है कि भारत के युवा स्नातकों और कुशल पेशेवरों को विदेशों में अवसर तलाशने के बजाय देश के भीतर ही बेहतरीन करियर विकल्प मिलेंगे।
- **मजबूत राष्ट्रीय सुरक्षा:** सैन्य उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने से यह सुनिश्चित होता है कि भारत के सशस्त्र बल हमेशा नवीनतम तकनीक से लैस रहें। यह गारंटी देता है कि आपातकाल के दौरान विदेशी आपूर्ति पर निर्भर रहे बिना देश अपनी सीमाओं की प्रभावी ढंग से रक्षा कर सकता है।
- **MSME और स्टार्टअप्स को बढ़ावा:** स्वदेशी विकास पर सरकार के ध्यान केंद्रित करने से स्थानीय व्यवसायों और तकनीकी स्टार्टअप्स में भारी निवेश आएगा। रक्षा और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के उद्यमियों को बड़े सरकारी अनुबंध मिल सकेंगे, जिससे उनके व्यवसाय का तेजी से विकास होगा।
- **आर्थिक स्थिरता और विकास:** बढ़ते रक्षा निर्यात से देश में भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा आएगी और आयात बिलों में कमी होगी। यह वित्तीय मजबूती अर्थव्यवस्था को स्थिर करने में मदद करेगी, जिससे मुद्रास्फीति में कमी आ सकती है और बुनियादी ढांचे पर सार्वजनिक खर्च बढ़ सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
भारत के रक्षा क्षेत्र में यह ऐतिहासिक मील का पत्थर व्यवस्थित नीतिगत सुधारों और घरेलू विनिर्माण को दिए गए आक्रामक बढ़ावा का परिणाम है। यह बदलाव तेजी से बदलते वैश्विक भू-राजनीतिक माहौल में आयात निर्भरता को कम करने की रणनीतिक आवश्यकता को दर्शाता है।

- **आत्मनिर्भरता पर ध्यान:** सरकार ने मेक इन इंडिया पहल को प्राथमिकता दी है, जिससे घरेलू हथियार उत्पादन के लिए एक अनुकूल माहौल तैयार हुआ है। इस नीतिगत बदलाव के तहत कई सैन्य उपकरणों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया गया, जिससे उनके स्थानीय विकास को बढ़ावा मिला।
- **निजी भागीदारी के लिए प्रोत्साहन:** सक्रिय नीतिगत सुधारों ने निजी उद्योगों, MSME और स्टार्टअप्स को रक्षा परियोजनाओं पर सहयोग करने की अनुमति दी है। इससे पारंपरिक तरीकों की तुलना में ड्रोन और AI जैसी आधुनिक तकनीक को सैन्य आपूर्ति श्रृंखला में तेजी से शामिल किया गया है।
- **भू-राजनीतिक आवश्यकताएं:** हाल के वैश्विक संघर्षों ने दिखाया है कि संकट के समय विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रहना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। भारत ने रणनीतिक स्वायत्तता और सैन्य उपकरणों की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अपने घरेलू रक्षा कार्यक्रमों को तेजी से आगे बढ़ाया है।

## सवाल-जवाब

### 1. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल घरेलू रक्षा उत्पादन कितना रहा?
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन 1.78 लाख करोड़ रुपये के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है।

### 2. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने कितने रुपये का रक्षा निर्यात किया?
इस वर्ष भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचते हुए 38,424 करोड़ रुपये रहा।

### 3. भारतीय निर्मित सैन्य उपकरण वर्तमान में कितने देशों को निर्यात किए जा रहे हैं?
भारतीय तकनीक और स्वदेशी सैन्य उपकरण वर्तमान में दुनिया के 80 से अधिक देशों को निर्यात किए जा रहे हैं।

### 4. DEFCON 2026 समिट कब आयोजित होगी और इसका उद्घाटन कौन करेगा?
DEFCON 2026 समिट का आयोजन 24 अगस्त 2026 को किया जाएगा और इसका उद्घाटन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे।

### 5. DEFCON 2026 समिट का आयोजन किसके सहयोग से किया जा रहा है?
इस समिट का आयोजन 'द चाणक्य डायलॉग्स' के सहयोग से किया जा रहा है।

### 6. ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की रक्षा क्षमताओं को किस प्रकार प्रदर्शित किया?
ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित किया कि भारत के पास जमीन पर काम करने वाली ऐसी मजबूत स्वदेशी क्षमताएं हैं जो किसी भी सुरक्षा चुनौती का सामना कर सकती हैं।

## प्रेरणा और सबक
एक प्रमुख सैन्य आयातक से एक बड़े वैश्विक निर्यातक बनने तक का भारत का सफर दृढ़ता और रणनीतिक क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण सबक प्रदान करता है।

- **रणनीतिक आत्मनिर्भरता:** वास्तविक स्वतंत्रता बाहरी स्रोतों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी खुद की क्षमताएं बनाने से आती है। घरेलू अनुसंधान और विनिर्माण पर ध्यान केंद्रित करके, भारत ने अपने दीर्घकालिक रणनीतिक भविष्य को सुरक्षित किया है।
- **सहयोग से सफलता:** सरकारी क्षेत्र की ताकत को निजी स्टार्टअप्स और MSME की चपलता के साथ मिलाने से असाधारण परिणाम मिल सकते हैं। यह सहयोगात्मक मॉडल दिखाता है कि कैसे विविध क्षेत्र एक साझा राष्ट्रीय लक्ष्य की ओर मिलकर काम कर सकते हैं।
- **गुणवत्ता से वैश्विक स्वीकार्यता:** 80 से अधिक देशों में निर्यात बाजार हासिल करना यह साबित करता है कि अंतरराष्ट्रीय सफलता के लिए उच्च गुणवत्ता और उन्नत तकनीक पर ध्यान देना आवश्यक है। वैश्विक मानकों को पूरा करके ही स्थानीय उत्पाद विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।

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