वैश्विक सुस्ती के बीच दुनिया में सबसे तेज दौड़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था, प्रमुख अर्थशास्त्रियों का भरोसा बढ़ा वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के ताजा सर्वेक्षण में भारत को दुनिया की सबसे तेज बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बताया गया है। 74 फीसदी अर्थशास्त्रियों ने देश में मजबूत विकास दर रहने का भरोसा जताया है। वैश्विक स्तर पर कई बड़ी ताकतों के सामने आर्थिक चुनौतियां खड़ी हैं, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच से बेहद सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के नए सर्वेक्षण में यह बात स्पष्ट हुई है कि आने वाले 12 महीनों के दौरान भारत की आर्थिक वृद्धि दर दुनिया के सभी प्रमुख देशों को पीछे छोड़ देगी। इस आकलन के अनुसार विकास की रफ्तार के मामले में अमेरिका, चीन, जापान और यूरोप जैसे बड़े आर्थिक क्षेत्र भी भारत से काफी पीछे छूटते नजर आ रहे हैं। रेटिंग एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की हालिया समीक्षाएं भी भारत के इसी दबदबे की तस्दीक कर रही हैं। अर्थशास्त्रियों के भरोसे में बड़ा उछाल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक रुझानों पर नजर रखने वाले मुख्य अर्थशास्त्रियों के बीच भारत को लेकर सकारात्मक रुख लगातार गहरा हो रहा है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के सर्वेक्षण में भाग लेने वाले 98 फीसदी अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगले एक साल में भारत की विकास दर मध्यम या उससे भी बेहतर स्तर पर बनी रहेगी। इसके अलावा 74 फीसदी अर्थशास्त्रियों ने देश की वृद्धि दर के मजबूत या बेहद मजबूत रहने की संभावना व्यक्त की है। मई के दौरान कराए गए पिछले आकलन में यह आंकड़ा 52 फीसदी पर था, जिससे पता चलता है कि कुछ ही महीनों के अंतराल में वैश्विक विशेषज्ञों का भरोसा भारत की स्थिरता और विस्तार पर तेजी से बढ़ा है। प्रमुख वैश्विक प्रतिस्पर्धियों से आगे भारत वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.7 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है, जो इसे सबसे तेज दौड़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करता है। जहां पश्चिमी देश महंगाई और धीमी रफ्तार से जूझ रहे हैं, वहीं भारत अपनी मजबूत घरेलू खपत और नीतिगत स्थिरता के दम पर अपनी बढ़त बनाए हुए है। वैश्विक आर्थिक मंच पर चर्चा के दौरान यह बात भी सामने आ चुकी है कि भारत इस साल वैश्विक आर्थिक वृद्धि में करीब 20 प्रतिशत तक का योगदान दे सकता है, जो दुनिया के कुल विकास में इसकी निर्णायक भूमिका को रेखांकित करता है। इसका आप पर असर यह आर्थिक मजबूती घरेलू बाजार में निवेश, रोजगार के नए मौकों और कारोबारी स्थिरता को बढ़ावा देगी। • भारत में: देश में मजबूत विकास दर से नई नौकरियों और वेतन वृद्धि की संभावनाओं को सहारा मिलता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की रफ्तार बेहतर रहती है, तो विदेशी पूंजी और उद्योग लगाने की प्रक्रिया तेज होती है। • घरेलू उपभोक्ताओं के लिए: मजबूत आर्थिक आधार से आवश्यक बुनियादी ढांचे और सेवाओं में विस्तार होता है। घरेलू मांग बनी रहने से स्थानीय विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में लगे छोटे कारोबारियों को लगातार काम मिलता रहता है। • वैश्विक निवेशकों के लिए: पश्चिमी बाजारों में मंदी की आशंका के बीच भारत सबसे सुरक्षित निवेश गंतव्यों में गिना जा रहा है। इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजारों और औद्योगिक पूंजी प्रवाह पर अनुकूल पड़ता है। • युवाओं और पेशेवरों के लिए: जब उत्पादन और सेवा क्षेत्र मजबूत रहते हैं, तो नए क्षेत्रों में रोजगार के बेहतर अवसर पैदा होते हैं। पेशेवर अपनी कुशलता बढ़ाकर विस्तार कर रहे क्षेत्रों में आसानी से अवसर पा सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ यह सकारात्मक रुख भारत की लगातार बनी हुई घरेलू मांग, नीतिगत सुधारों और वैश्विक स्तर पर तुलनात्मक रूप से सुरक्षित बाजार की छवि के कारण संभव हुआ है। • सीधा कारण: वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के ताजा सर्वेक्षण में 74 फीसदी अर्थशास्त्रियों ने भारत में मजबूत वृद्धि की पुष्टि की है, जो मई के 52 फीसदी से काफी ज्यादा है। विश्लेषकों ने पाया कि वैश्विक उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत की बुनियादी आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं। • घरेलू मांग का सहारा: जहां अमेरिका, यूरोप और चीन जैसे देश धीमी वृद्धि और मुद्रास्फीति से जूझ रहे हैं, वहीं भारत की स्थानीय खपत दर मजबूत बनी हुई है। इसी मजबूत आंतरिक बाजार के चलते अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने भारत को अन्य देशों से कहीं आगे रखा है। • नीतिगत निरंतरता: सरकारी नीतियों और बुनियादी ढांचे में हो रहे लगातार खर्च ने निवेशकों और उद्योगों को स्थिरता का भरोसा दिया है। इस निरंतरता से उत्पादन और सेवा क्षेत्र में दीर्घकालिक योजनाओं को गति मिल रही है। सवाल-जवाब 1. वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के सर्वेक्षण में भारत के बारे में क्या कहा गया है? सर्वेक्षण के अनुसार भारत की आर्थिक वृद्धि दर अगले 12 महीनों में अमेरिका, चीन, जापान और यूरोप जैसे सभी प्रमुख देशों से आगे रहने का अनुमान है। 2. कितने अर्थशास्त्रियों ने भारत की विकास दर के मजबूत रहने की संभावना जताई है? सर्वे में शामिल 74 फीसदी अर्थशास्त्रियों ने भारत की विकास दर को मजबूत या बहुत मजबूत बताया है, जो मई में 52 फीसदी था। 3. मध्यम या उससे बेहतर विकास दर की उम्मीद कितने अर्थशास्त्रियों को है? सर्वेक्षण में शामिल 98 फीसदी अर्थशास्त्रियों ने माना है कि आने वाले एक साल में भारत की वृद्धि दर मध्यम या उससे बेहतर स्तर पर रहेगी। 4. वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की विकास दर का क्या अनुमान बताया गया है? वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिससे यह सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बनी रहेगी। https://trendkia.com/business/vaishvika-susti-ke-bicha-duniya-men-sabase-teja-dauregi-indian-economy-pramukha-arthashastriyon-ka-bharosa-barha-36847 TrendKia — Har trend, sabse pehle.