# वैश्विक यूनिकॉर्न कारोबार में भारतीय उद्यमियों का परचम, संस्थापक हिस्सेदारी 909 अरब डॉलर पर पहुंची

> दुनिया भर की यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स में भारतीय मूल के संस्थापकों की हिस्सेदारी का मूल्यांकन 909 अरब डॉलर आंका गया है। इनमें विदेश और घरेलू दोनों बाजारों में खड़े किए गए बड़े टेक उपक्रम शामिल हैं।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-09-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/vaishvika-unicorn-karobara-men-indian-udyamiyon-ka-parachama-snsthapaka-hissedari-909-araba-dolara-para-pahunchi-36113 · **Language:** Hindi
**Tags:** यूनिकॉर्न, स्टार्टअप, भारतीय उद्यमी, फ्लिपकार्ट, जोमैटो, अमेरिका टेक, प्रोसस

दुनिया भर के टेक स्टार्टअप परिदृश्य में भारतीय उद्यमियों की पकड़ निरंतर मजबूत हो रही है। वैश्विक स्तर पर एक अरब डॉलर से अधिक मूल्यांकन पाने वाली यूनिकॉर्न कंपनियों में भारत में जन्मे अथवा पले-बढ़े संस्थापकों की हिस्सेदारी का समग्र मूल्य लगभग 909 अरब डॉलर के स्तर को छू चुका है। यह विशाल आंकड़ा दर्शाता है कि दुनिया की सबसे मूल्यवान तकनीकी कंपनियों की रीढ़ तैयार करने में भारतीय प्रतिभा की भूमिका कितनी निर्णायक रही है। वैश्विक विश्लेषण के अंतर्गत भारत के घरेलू बाजार के साथ-साथ विदेशों में कार्यरत बड़े उद्यमों को भी गहराई से परखा गया है।

## प्रवासी उद्यमों में 560 अरब डॉलर की मिल्कियत
अध्ययन के अनुसार विदेशी धरती पर संचालित यूनिकॉर्न कंपनियों में भारतीय संस्थापकों की शेयरधारिता का मूल्य 560 अरब डॉलर के करीब है। ऐसे 205 अंतरराष्ट्रीय उद्यमों की पहचान की गई है, जिनके नेतृत्व में कम से कम एक ऐसा संस्थापक शामिल रहा है जिसका बचपन या परवरिश भारत में हुई। इनमें से 70 यूनिकॉर्न ऐसे हैं जिनकी स्थापना की पूरी जिम्मेदारी केवल भारतीय संस्थापकों के कंधों पर रही है, जिनका कुल मूल्यांकन 243 अरब डॉलर दर्ज किया गया है।

इन पूर्णतः भारतीय नेतृत्व वाले मंचों में प्रमुख रूप से जय चौधरी द्वारा स्थापित जेडस्केलर शामिल है। वहीं डेटा सुरक्षा क्षेत्र में कार्यरत रुब्रिक को अरविंद जैन, अरविंद निथ्रकश्यप, बिपुल सिन्हा और सोहम मजूमदार ने मिलकर खड़ा किया। क्लाउड अवसंरचना क्षेत्र की अग्रणी कंपनी न्यूटैनिक्स की नींव अजीत सिंह, धीरज पांडेय और मोहित एरन ने रखी थी, जबकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित रोबोटिक्स कंपनी स्किल्ड की कमान दीपक पाठक और अभिनव गुप्ता के हाथों में है।

## सह-संस्थापक टीमों में मजबूत उपस्थिति
इसके अतिरिक्त 135 ऐसी यूनिकॉर्न कंपनियां मौजूद हैं जहां भारतीय मूल के पेशेवर प्रमुख नेतृत्व अथवा संस्थापक दल के अभिन्न अंग हैं। इस श्रेणी में पालो ऑल्टो नेटवर्क्स, स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र की ब्लूम एनर्जी, सेमीकंडक्टर कनेक्टिविटी निर्माता एस्टेरा लैब्स और आधुनिक सर्च इंजन पर्प्लेक्सिटी जैसी दिग्गज संस्थाएं शुमार हैं। इन कंपनियों में संस्थापकों के हिस्से की कुल परिसंपत्ति का आकार लगभग 317 अरब डॉलर बताया गया है। भौगोलिक वितरण पर नजर डालें तो भारतीय प्रवासी संस्थापकों द्वारा संचालित या समर्थित 91 प्रतिशत यूनिकॉर्न उपक्रम अकेले अमेरिका में केंद्रित हैं।

## घरेलू बाजार में 349 अरब डॉलर का इकोसिस्टम
स्वयं भारत की सीमाओं के भीतर फल-फूल रहे स्टार्टअप तंत्र का प्रदर्शन भी असाधारण रहा है। देश में मौजूद 102 यूनिकॉर्न कंपनियों के भीतर संस्थापकों की हिस्सेदारी का कुल मूल्य लगभग 349 अरब डॉलर है। घरेलू स्तर पर उपभोक्ता और वित्तीय तकनीक को गति देने वाले कई नाम इस सूची में सबसे आगे हैं।

इनमें ई-कॉमर्स की दिग्गज कंपनी फ्लिपकार्ट 36 अरब डॉलर के मूल्यांकन के साथ शीर्ष पर है। ऑनलाइन खाद्य वितरण मंच जोमैटो का मूल्यांकन 30 अरब डॉलर और निवेश प्लेटफॉर्म ग्रो का मूल्य 16 अरब डॉलर दर्ज किया गया है। प्रोसस इंडिया के प्रमुख निवेशक सौरव जैन का कहना है कि भारतीय उद्यमियों में जटिल तकनीकी कौशल और क्षेत्रीय बारीकियों को ऐसे समाधानों में बदलने की अद्भुत क्षमता है, जो आम लोगों के जीवन और कार्यशैली को बड़े पैमाने पर सकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं।

## अमेरिकी टेक हब में भारतीय नवाचार की मौजूदगी
संस्थापकों के जन्मस्थान के आधार पर किए गए एक अन्य व्यापक विश्लेषण में कुल 323 कंपनियों की जांच की गई, जिसमें से 62 प्रतिशत कंपनियां अमेरिका की धरती पर संचालित पाई गईं। इस समूह की 178 कंपनियों का जन्म सीधे तौर पर अमेरिकी बाजार में हुआ, जबकि 22 उद्यमों ने अपने शुरुआती सफर के बाद अपने मुख्यालय अथवा मुख्य परिचालन को अमेरिका स्थानांतरित कर दिया। इस विस्तृत अध्ययन में उन लोगों को भी शामिल किया गया है जो बाल्यकाल में विदेश चले गए थे, साथ ही भारतीय भूमि पर स्थापित उद्यमों का भी इसमें पूरा लेखा-जोखा रखा गया है।

## इसका आप पर असर
वैश्विक स्तर पर भारतीय तकनीकी प्रतिभा की बढ़ती हिस्सेदारी घरेलू उद्यमों के लिए पूंजी और अंतरराष्ट्रीय विस्तार के नए रास्ते खोलती है।

- **भारत में:** घरेलू तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र में वैश्विक निवेशकों का भरोसा और मजबूत होगा। इससे भविष्य में उभरते स्टार्टअप संस्थापकों के लिए फंडिंग और वेंचर कैपिटल जुटाना काफी आसान हो जाएगा।
- **करियर और रोजगार:** टेक और सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय उद्यमों में नेतृत्व के अवसर बढ़ेंगे। यह आंकड़ा दिखाता है कि भारतीय पृष्ठभूमि वाले उत्पाद विश्व स्तर पर अरबों डॉलर का कारोबार खड़ा कर सकते हैं।
- **वैश्विक पहचान:** प्रवासी भारतीय संस्थापकों की सफलता से भारत में बने सॉफ्टवेयर उत्पादों को वैश्विक स्वीकृति मिलेगी। पश्चिमी बाजारों में सॉफ्टवेयर और तकनीकी सेवाओं के निर्यात को व्यापक प्रोत्साहन मिलेगा।
- **उद्यमियों के लिए प्रेरणा:** नए संस्थापकों को जटिल तकनीकों जैसे क्लाउड, एआई और रोबोटिक्स में अपनी कंपनियां शुरू करने का आत्मविश्वास मिलेगा। वे पारंपरिक आउटसोर्सिंग के बजाय उच्च मूल्य वाले पेटेंट और आईपी आधारित उत्पादों पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।

## ऐसा क्यों हुआ
भारतीय पृष्ठभूमि वाले तकनीकी संस्थापकों की वैश्विक सफलता मजबूत तकनीकी कौशल, व्यापक बाजार की समझ और उद्यमशील मानसिकता का परिणाम है।

- **तकनीकी शिक्षा और बुनियादी ढांचा:** भारत में मजबूत इंजीनियरिंग प्रशिक्षण ने संस्थापकों को जटिल सॉफ्टवेयर और बुनियादी ढांचे की समस्याओं को हल करने में सक्षम बनाया। इस पृष्ठभूमि ने उन्हें वैश्विक स्तर पर तकनीकी उत्पाद तैयार करने की नींव दी।
- **वैश्विक बाजारों में अनुकूलन:** अमेरिकी और पश्चिमी बाजारों में विस्तार कर संस्थापकों ने बड़ी उद्यम पूंजी और परिपक्व उपभोक्ता आधार का भरपूर लाभ उठाया। 91 प्रतिशत प्रवासी यूनिकॉर्न का अमेरिका में होना इसी पहुंच को रेखांकित करता है।
- **व्यावसायिक दृष्टिकोण का विस्तार:** भारतीय उद्यमियों ने सिर्फ स्थानीय जरूरतों तक सीमित रहने के बजाय वैश्विक क्लाउड सुरक्षा, रोबोटिक्स और डेटा प्रबंधन जैसी समस्याओं को अपनी रणनीति का केंद्र बनाया। इसी दृष्टिकोण ने जेडस्केलर, रुब्रिक और न्यूटैनिक्स जैसी कंपनियों को जन्म दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. यूनिकॉर्न कंपनियों में भारतीय संस्थापकों की कुल हिस्सेदारी का मूल्य कितना है?
रिपोर्ट के अनुसार भारतीय मूल और भारत में पले-बढ़े संस्थापकों की हिस्सेदारी का कुल अनुमानित मूल्य 909 अरब डॉलर है।

### 2. भारत के बाहर स्थित यूनिकॉर्न में संस्थापकों की हिस्सेदारी कितनी आंकी गई है?
विदेशों में स्थित 205 यूनिकॉर्न कंपनियों में भारतीय संस्थापकों के पास लगभग 560 अरब डॉलर की इक्विटी मूल्य मौजूद है।

### 3. भारत के घरेलू बाजार में कितने यूनिकॉर्न मौजूद हैं और उनका मूल्य क्या है?
भारत के भीतर 102 यूनिकॉर्न कंपनियां स्थित हैं, जिनमें संस्थापकों की हिस्सेदारी का अनुमानित मूल्य लगभग 349 अरब डॉलर है।

### 4. घरेलू यूनिकॉर्न कंपनियों में सबसे अधिक मूल्यांकन किनका है?
घरेलू बाजार में फ्लिपकार्ट 36 अरब डॉलर, जोमैटो 30 अरब डॉलर और ग्रो 16 अरब डॉलर के मूल्यांकन के साथ प्रमुख हैं।

### 5. प्रवासी भारतीय संस्थापकों वाली कितनी कंपनियां अमेरिका में स्थित हैं?
भारतीय प्रवासी संस्थापकों वाली लगभग 91 प्रतिशत यूनिकॉर्न कंपनियां अमेरिका में अपने संचालन केंद्र स्थापित किए हुए हैं।

## प्रेरणा और सबक
भारत में पले-बढ़े उद्यमियों का यह वैश्विक दबदबा साबित करता है कि बुनियादी तकनीकी ज्ञान और दूरदृष्टि से विश्वस्तरीय उद्यम खड़े किए जा सकते हैं।

- **वैश्विक दृष्टिकोण अपनाएं:** किसी भी विचार को सिर्फ स्थानीय बाजार तक सीमित रखने के बजाय शुरुआत से ही वैश्विक स्तर पर उपयोगी बनाएं। जेडस्केलर और न्यूटैनिक्स ने दुनिया भर की समस्याओं को हल कर यह मुकाम हासिल किया।
- **जटिल समस्याओं का समाधान खोजें:** वास्तविक और टिकाऊ मूल्य निर्माण हमेशा कठिन तकनीकी चुनौतियों को हल करने से आता है। रोबोटिक्स, सुरक्षा और डेटा अवसंरचना में नवाचार सबसे अधिक पूंजी और सम्मान आकर्षित करता है।
- **साझेदारी और टीम निर्माण पर भरोसा करें:** एक मजबूत और विविध पृष्ठभूमि वाली टीम के साथ मिलकर काम करने से बड़े लक्ष्य प्राप्त किए जा सकते हैं। रुब्रिक और स्किल्ड जैसी कंपनियों की सफलता बहु-संस्थापक सहयोग का बेहतरीन उदाहरण है।

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