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  "title": "वैश्विक व्यापार में भारत की ऐतिहासिक छलांग, 85 लाख करोड़ डॉलर के अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मिलेगी सीधी तरजीह",
  "summary": "केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार विभिन्न व्यापार समझौतों की बदौलत भारतीय उत्पादों को 85 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्थाओं तक तरजीही पहुंच मिलेगी, जो दुनिया की कुल जीडीपी का लगभग 76 प्रतिशत हिस्सा है।",
  "content": "अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंच पर अपनी पैठ मजबूत करते हुए भारत अब दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के दरवाजे भारतीय कंपनियों के लिए खोलने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ चुका है। विभिन्न रणनीतिक व्यापारिक करारों के जरिए देश के उत्पादों और सेवाओं को बहुत जल्द 85 लाख करोड़ डॉलर मूल्य के विशाल वैश्विक बाजारों में विशेष तरजीही पहुंच मिलने वाली है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने घरेलू विनिर्माताओं से केवल स्थानीय बाजार की सीमाओं में सिमटे रहने के बजाय वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान स्थापित करने का आह्वान किया है। यदि एक दशक पहले की स्थिति से तुलना की जाए, तो उस दौर में भारत के व्यापारिक समझौतों का दायरा सिर्फ 10 लाख करोड़ डॉलर की कुल अर्थव्यवस्था तक ही सीमित था।\n\nबीते साढ़े चार वर्षों में तैयार हुआ रणनीतिक ढांचा\nभारत की वैश्विक व्यापार रणनीति में पिछले कुछ सालों के दौरान बड़ा बुनियादी बदलाव आया है। वर्ष 2014 से पूर्व देश जिन मुक्त व्यापार समझौतों पर अमल कर रहा था, उनके दायरे में आने वाले सभी मुल्कों का सम्मिलित सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) लगभग 10 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर था। इसके विपरीत, हाल के साढ़े चार वर्षों के दौरान सरकार ने 9 नए व्यापारिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इन समझौतों में 38 विकसित अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं, जिनकी संयुक्त आर्थिक शक्ति 60 लाख करोड़ डॉलर के बराबर है। इसके अतिरिक्त सात से आठ अन्य करारों पर वार्ताएं सक्रिय चरण में हैं, जो प्रभावी होने के बाद भारत को 15 लाख करोड़ डॉलर की अतिरिक्त बाजार क्षमता तक सीधी पहुंच उपलब्ध कराएंगे।\n\nदुनिया की 76 फीसदी अर्थव्यवस्था तक भारतीय उत्पादों की पहुंच\nजब ये सभी प्रस्तावित समझौते पूरी तरह धरातल पर उतर जाएंगे, तब भारतीय वस्तुओं और सेवाओं की पहुंच दुनिया की कुल जीडीपी के लगभग 76 प्रतिशत हिस्से तक हो जाएगी। संपूर्ण विश्व की अर्थव्यवस्था का आकार वर्तमान में 115 लाख करोड़ डॉलर आंका गया है, जिसमें से 85 लाख करोड़ डॉलर के बाजार भारत के साथ तरजीही व्यापार व्यवस्था से सीधे जुड़ जाएंगे। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को साधने के लिए सरकार इस समय कनाडा, इजराइल, मेक्सिको, चिली, खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) और दक्षिण अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ (एसएसीयू) के साथ विस्तृत व्यापार वार्ताओं को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है।\n\nघरेलू दायरे से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रांडिंग की चुनौती\nव्यापार समझौतों के माध्यम से मिलने वाले इस विशाल अवसर को वास्तविक लाभ में बदलने के लिए विनिर्माण क्षेत्र को अपनी कार्यशैली बदलनी होगी। पीयूष गोयल ने जोर देकर कहा, \n \"अब समय आ गया है कि हम ग्लोबल ब्रांड तैयार करें।\"\n वाणिज्य मंत्री के मुताबिक देश की बड़ी आबादी और विशाल घरेलू बाजार कई बार कंपनियों को एक सुरक्षित दायरा प्रदान करते हैं, लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में उतरने की आवश्यकता है। इसके लिए उद्योगों को अपनी पैकेजिंग के स्तर को सुधारना होगा, डिजाइनिंग को अंतरराष्ट्रीय पैमानों पर ढालना होगा और उत्पाद की गुणवत्ता को विश्वस्तरीय बनाना होगा, ताकि भारतीय ब्रांड वैश्विक फलक पर अपनी अमिट छाप छोड़ सकें।\n\nइसका आप पर असर\nअंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों के इस विस्तार से भारतीय उद्योगों और निर्यातकों के लिए दुनिया के 76 प्रतिशत बाजार में शुल्क और नियमों की बाधाएं काफी कम हो जाएंगी।\n\n• भारत में: विनिर्माण और सेवा क्षेत्र की कंपनियों के लिए विदेश में माल बेचना आसान और सस्ता होगा। इससे देश के भीतर उत्पादन क्षमता बढ़ने से नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।\n• निर्यातकों के लिए: 85 लाख करोड़ डॉलर के बाजारों में तरजीही शुल्क मिलने से भारतीय उत्पाद चीनी और यूरोपीय उत्पादों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी बनेंगे। छोटे और मंझोले कारोबारियों को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जुड़ने का मौका मिलेगा।\n• उपभोक्ताओं के लिए: वैश्विक समझौतों के तहत उन्नत विदेशी तकनीक और कच्चे माल की आसान उपलब्धता सुनिश्चित होगी। इससे घरेलू उत्पादों की गुणवत्ता और डिजाइन में स्पष्ट सुधार देखने को मिलेगा।\n• घरेलू उद्योगों के लिए: अंतरराष्ट्रीय मानकों से मुकाबला करने के लिए पैकेजिंग और गुणवत्ता नियंत्रण पर अधिक पूंजी निवेश करना होगा। कंपनियों को घरेलू सुरक्षा के दायरे से निकलकर निर्यात केंद्रित रणनीति बनानी होगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nभारत द्वारा आक्रामक व्यापार कूटनीति अपनाने का मुख्य कारण वैश्विक मूल्य श्रृंखला में देश की हिस्सेदारी बढ़ाना और विकसित देशों के साथ आर्थिक निर्भरता मजबूत करना है।\n\n• व्यापार नीति में रणनीतिक बदलाव: 2014 से पहले के समझौतों का दायरा काफी सीमित था और वे केवल 10 लाख करोड़ डॉलर के बाजारों तक ही पहुंच दे पा रहे थे। सरकार ने पिछले साढ़े चार वर्षों में 38 विकसित देशों के साथ 9 नए समझौते करके इस सीमा को 60 लाख करोड़ डॉलर तक पहुंचाया है।\n• आगामी समझौतों की सक्रिय रूपरेखा: वर्तमान में 7 से 8 नए समझौतों पर बातचीत चल रही है, जो 15 लाख करोड़ डॉलर के अतिरिक्त बाजार जोड़ेंगे। इनमें कनाडा, मेक्सिको, इजराइल, चिली, खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) और दक्षिण अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ (एसएसीयू) शामिल हैं।\n• वैश्विक आर्थिक हिस्सेदारी का विस्तार: दुनिया की कुल 115 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था में भारत अपनी पहुंच 85 लाख करोड़ डॉलर तक सुनिश्चित करना चाहता है। यह पहल भारतीय अर्थव्यवस्था को केवल घरेलू मांग के चक्र पर निर्भर रहने के जोखिम से सुरक्षित करती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. भारत के व्यापार समझौतों से कुल कितने मूल्य के बाजार तक पहुंच बनेगी?\nसभी मौजूदा और प्रस्तावित व्यापार समझौतों के लागू होने के बाद भारतीय उत्पादों की पहुंच 85 लाख करोड़ डॉलर की कुल जीडीपी वाले बाजारों तक हो जाएगी।\n\n2. वर्तमान में पूरी दुनिया की कुल जीडीपी कितनी है और उसमें इन करारों की क्या हिस्सेदारी है?\nदुनिया की कुल जीडीपी 115 लाख करोड़ डॉलर है, और भारत के व्यापार समझौतों के दायरे में आने वाले बाजारों की हिस्सेदारी करीब 76 प्रतिशत होगी।\n\n3. साल 2014 से पहले भारत के व्यापार समझौतों का दायरा कितना था?\nसाल 2014 से पूर्व भारत ने जिन देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते लागू किए थे, उनकी सम्मिलित अर्थव्यवस्था सिर्फ 10 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर थी।\n\n4. पिछले साढ़े चार साल में भारत ने कितने देशों के साथ व्यापार समझौते किए हैं?\nपिछले साढ़े चार वर्षों में सरकार ने 9 व्यापार समझौते किए हैं, जिनमें 60 लाख करोड़ डॉलर की संयुक्त जीडीपी वाले 38 विकसित देश शामिल हैं।\n\n5. भारत अभी किन प्रमुख देशों और समूहों के साथ नए व्यापार समझौतों पर बातचीत कर रहा है?\nभारत फिलहाल कनाडा, इजराइल, मेक्सिको, चिली, खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) और दक्षिण अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ (एसएसीयू) के साथ वार्ता कर रहा है।\n\n6. केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय विनिर्माताओं को क्या सलाह दी है?\nउन्होंने उद्योग जगत को केवल घरेलू बाजार पर निर्भर रहने के बजाय विश्वस्तरीय गुणवत्ता, बेहतरीन पैकेजिंग और डिजाइन के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ग्लोबल ब्रांड तैयार करने की सलाह दी है।",
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